माँ के साथ आगे की बात

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राहुल है और मेरी माँ सेक्सी माल है और में उसे पटाकर एक बार चोद चुका हूँ. अब में अपनी स्टोरी को आगे की तरफ बढ़ाता हूँ. अब में और मेरी माँ डिनर करने के बाद बेड पर चले आए और मैंने बेड पर आते ही माँ को अपनी आघोश में ले लिया.
फिर माँ मुझे किस करने लगी और बोली कि अब सो जा कल स्कूल भी जाना है. फिर मैंने कहा कि माँ एक बार और चोदने दो तो माँ बोली कि ओके बस एक बार. फिर में माँ की चूची दबाने लगा और उनको किस करने लगा. फिर कुछ देर के बाद में बेड पर बैठ गया और माँ को अपने लंड पर बैठा लिया और उनकी एक चूची पीने लगा और दूसरी चूची को दबा रहा था.
अब मैंने बारी-बारी से उनकी दोनों चूचीयों को चूसकर और दबाकर लाल कर दिया था. अब मेरा लंड हार्ड होकर माँ की गांड में जा रहा था. अब माँ मेरे लंड को सहला रही थी और बोली कि तेरा लंड तेरे पापा से बड़ा है, तेरा ज्यादा लंबा है, लेकिन तेरे पापा का थोड़ा मोटा है. फिर मैंने पूछा कि माँ आपको पापा का लंड पसंद है या मेरा लंड पसंद है, तो माँ बोली कि मुझे तुम दोनों का लंड बहुत पसंद है.
फिर मैंने माँ से पूछा कि क्या में आपको पापा के साथ चोद सकता हूँ? तो माँ बोली कि में तेरे पापा से बात कर लूँगी, वैसे भी तुम दोनों बाप-बेटे आपस में दोस्त की तरह हो. फिर मैंने पूछा कि माँ क्या पापा तैयार होगें? तो माँ बोली कि हाँ वो तैयार हो जाएगें, जब तुम्हारे मेरे पापा साथ में होते है तो तब वो रात मे सोने के वक़्त मेरा पेटीकोट अपने हाथ से ऊपर कर देते है और जब में तुमको अपनी गोद में लेकर सोती हूँ तो वो कहते है कि बेटे से क्यों शर्माती हो? तो मैंने कहा कि ओके तब तो पापा तैयार हो सकते है, तो माँ बोली कि हाँ. फिर मैंने कहा कि चलो अब मस्ती करते है और फिर मैंने म्यूज़िक सिस्टम ऑन कर दिया और माँ की चूत में उंगली करने लगा, अब माँ मेरा लंड सहलाने लगी थी.
फिर मैंने माँ की चूत पर किस कर लिया तो माँ बोली कि अब अपना लंड चूसने दो. फिर मैंने कहा कि 69 पोजिशन करते है, तुम मेरे लंड चूसो और में तुम्हारी चूत चूसता हूँ. फिर में बेड पर लेट गया और माँ मेरे ऊपर आ गई. अब माँ मेरा लंड चूसने लगी थी और में उनकी चूत और साथ में उनके गद्देदार चूतड़ मसलने लगा था.
फिर में अपने दूसरे हाथ से माँ की गांड में उंगली करने लगा तो माँ अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़ने लगी. फिर मैंने माँ से पूछा कि कभी गांड मराई है? तो माँ बोली कि नहीं. फिर मैंने माँ से पूछा कि क्या में तुम्हारी गांड मार लूँ? तो माँ बोली कि पहले मेरी चूत चोद ले, फिर मेरी गांड मारना. फिर मैंने माँ की गांड के नीचे एक तकिया लगा दिया और माँ के ऊपर आ गया.
अब में माँ की चूत में लंड डालने के बाद धीरे-धीरे चोदने लगा था और उनकी एक चूची अपने मुँह में लेकर पीने लगा था. अब माँ पूरी मस्ती में थी और बोली कि ज़ोर से चोद बेटा, मादरचोद फाड़ दे अपनी माँ की चूत. फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और बोला कि ले मेरी माल संभाल मेरे धक्को को. अब माँ भी नीचे से ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगी थी.
अब पूरे रूम में पछ-पछ की आवाजे होने लगी. अब माँ उछल-उछलकर मेरा लंड अपनी चूत में डलवा रही थी और में भी अपनी कमर हिला-हिलाकर अपना लंड माँ की चूत में डाल रहा था. अब माँ की 37 साल पुरानी चूत मेरा 18 साल का जवान लंड बड़े मजे से खा रही थी. फिर थोड़ी देर तक तो माँ ने अपनी कमर उछाल-उछालकर अपनी चूत में मेरा लंड लिया और फिर माँ की चूत से पानी निकलने लगा तो माँ ने मुझे अपने से चिपका लिया, जिस वजह से मैंने धक्का मारना बंद कर दिया और माँ से चिपक गया.
फिर कुछ देर के बाद माँ की सांसे सामान्य हुई और माँ मुझे किस करने लगी और बोली कि बेटा बहुत मज़ा आया. फिर में माँ के ऊपर से हट गया और उनकी चूत से निकले पानी को उनकी गांड में डालने लगा, जिससे माँ की गांड चिकनी हो गई. अब मेरा लंड माँ की चूत के पानी से चमक रहा था. फिर कुछ देर के बाद माँ पलट गयी और में माँ की गांड में अपना लंड डालने लगा और मेरा लंड फिट करके एक जोर का धक्का मारा तो मेरा थोड़ा सा लंड माँ की गांड में चला गया.
फिर मैंने एक और धक्का मारा तो मेरा आधा लंड माँ की गांड में चला गया. अब माँ को दर्द होने लगा था तो माँ बोली कि बेटा आराम से गांड में अपना लंड डालो, नहीं तो मेरी गांड फट जाएगी. फिर मैंने एक और ज़ोर का धक्का मारा तो मेरा पूरा लंड माँ की गांड के अंदर चला गया और माँ ज़ोर से चिल्ला पड़ी. अब माँ की आँखों में आँसू आ गये थे, फिर में उनके ऊपर लेट गया और उन्हें किस करने लगा.
फिर मैंने माँ से पूछा कि अपना लंड बाहर निकाल लूँ क्या? तो माँ बोली कि नहीं कुछ देर रूको, तुमने तो मेरी गांड की सील ही तोड़ दी है. फिर कुछ देर के बाद में माँ की गांड में धीरे-धीरे धक्के मारने लगा. अब माँ भी अपनी गांड ऊपर नीचे करने लगी थी और अब माँ को भी मज़ा आने लगा था, तो तब में माँ की दोनों चूचीयों को दबाते हुए धक्के मारने लगा.
फिर मैंने माँ से पूछा कि माँ आपने पापा से गांड क्यों नहीं मरवाई? तो माँ बोली कि तेरे पापा को पसंद नही है. फिर मैंने पूछा कि माँ आपको गांड मरवाना पसंद है? तो माँ बोली कि पसंद है इसलिए तो तुझसे गांड मरवा रही हूँ. फिर मैंने अपने धक्को की स्पीड को तेज़ कर दिया और कुछ देर के बाद मेरा पानी माँ की गांड में ही निकल गया. फिर में और माँ साथ में एक दूसरे से चिपक कर सो गये.
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बहन ने लोड़ो का स्वाद लिया

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राजेश है. जब सपना की उम्र 18 साल थी और वो 10वीं क्लास में पढ़ती थी. सपना अपने स्कूल की सबसे सुंदर लड़की थी और यही उसका सबसे बड़ा कसूर था. फिर एक दिन सपना अपने स्कूल के किसी लड़के के साथ आपतिजनक हालत में पकड़ी गयी और यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गयी.
फिर पिता जी ने तुरंत हुकम दिया कि सपना कल से स्कूल नहीं जाएगी और घर बैठकर ही तैयारी करेगी, अब सपना घर में क़ैद होकर रह गयी थी. में उस समय फाइनल ईयर कॉलेज में पढ़ता था और अब यह सोच सोचकर कि उस लड़के ने सपना के साथ क्या किया होगा? मेरी हालत खराब हो जाती थी. मेरी बुआ का लड़का अमित उस समय एम.ए.सी कर रहा था और चंडीगढ़ हॉस्टल में रहता था, उसके पेरेंट्स दिल्ली में थे. अमित अक्सर हमारे घर आता रहता था और मैंने हमेशा नोट किया था कि वो सपना में बहुत रूचि लेता था.
फिर जब उसे सपना की बात पता चली तो वो पिता जी से बोला कि में सपना को गणित पढ़ा दिया करूँगा क्योंकि सपना का गणित बहुत कमजोर था. अब मुझको दाल में कुछ काला लगा, अमित मेरे बहुत नजदीक था और अपना हर एक सीक्रेट मेरे साथ शेयर कर लेता था.
फिर मैंने अमित से पूछा कि भाई क्या मामला है? तो वो बड़े बिंदास अंदाज़ में बोला कि राजेश, सपना लंड चाहती है और में चूत चाहता हूँ तो फिर देरी किस बात की, अब सपना को में चोदकर ही रहूँगा.
फिर मैंने इस बात का विरोध किया तो वो बोला कि राजेश आज नहीं तो कल कोई ना कोई इस कली को फूल बना ही देगा, फिर यह शुभ काम हम ही क्यों ना कर दें? अब उसकी यह बात मुझे बिजली की तरह झटका दे गयी और यह सोचकर कि सपना जैसी खूबसूरत लड़की को हम चोदेगें, मेरा लंड खड़ा हो गया. अब में और अमित हमेशा सपना को चोदने की तरकीब बनाते रहते, लेकिन हमें मौका नहीं मिल रहा था.
फिर एक दिन अचानक से मेरे दादा जी की मौत हो गयी और मेरे पापा मम्मी को अचानक गाँव जाना पड़ा. अब घर पर में और सपना ही रह गये थे और में यह सोच-सोचकर पागल हो रहा था कि आज रात भंवरे सपना जैसी कली को चूस लेगें. अब मेरी अमित के साथ पूरी प्लानिंग बन चुकी थी.
फिर रात को खाना खाने के बाद में सोने का बहाना करके अपने कमरे में चला गया और टी.वी ऑन करके अमित के कमरे का लाइव सीन देखने लगा. हमने प्लानिंग के अनुसार पहले ही वेबकम अमित के कमरे में लगा दिया था. फिर कुछ देर तक सब नॉर्मल रहा, फिर अमित अपनी जगह से उठा और सपना के पीछे से आकर अपने दोनों हाथ उसकी टॉप में डाल दिए.
अब सपना इसके लिए हरगिज़ तैयार नहीं थी और आज़ाद होने की कोशिश करने लगी थी, लेकिन अमित की मज़बूत पकड़ के सामने वो कुछ ना कर सकी. अब अमित उसकी दोनों चूचीयों को मसल रहा था. अब सपना बार-बार कह रही थी कि भैया ऐसा मत करो, ऐसा मत करो.
फिर तभी अमित बोला कि मेरी बहना बाहर दोस्तों के साथ भी तो करती हो, फिर मेरे में क्या खराबी है? फिर जब सपना का कोई ज़ोर ना चला तो उसने अपने आपको हालात के हवाले कर दिया. अब उसे भी मज़ा आने लगा था और उसकी आँखें मस्ती में बंद होने लगी थी.
करीब 15-20 मिनट तक मसलने के बाद अमित उठा और उसने एक ही झटके में सपना की स्कर्ट और टॉप उतारकर फेंक दी. अब 18 साल की कुँवारी सपना एकदम नंगी थी, अब उसके दूधिया बदन और गुलाब जैसी चूत को देखकर में पागल हुआ जा रहा था. अब अमित की उंगली सपना की चूत पर घूमने लगी थी. फिर अमित ने काफ़ी सारी क्रीम सपना की चूत पर लगाई और अपनी एक उंगली डालनी शुरू कर दी. अब 20-25 मिनट की मेहनत के बाद अमित की तीन उंगलियाँ जन्नत में चली गयी थी.
अब सपना को भी मज़ा आने लगा था और वो भी अपने चूतड़ उछालने लगी थी. फिर तभी अमित ने अपने पूरे कपड़े उतार दिए, बाप रे बाप उसका लंड देखकर मेरा कलेजा मुँह में आ गया था. अब में कभी उसके विशाल लंड को देख रहा था, तो कभी सपना की कुँवारी चूत को देख रहा था. फिर जैसे ही सपना की नज़र अमित के लंड पर पड़ी तो वो चीख पड़ी.
फिर अमित एक मझे हुए खिलाड़ी की तरह सपना को समझाने लगा कि लड़की की चूत तो बड़े से बड़े लंड खा जाती है, यह तो फिर 7 इंच का ही है. अब सपना को पूरी तरह अपने जाल में फंसाने के बाद अमित ने सपना को बेड पर लेटाया और उसकी टाँगों को उठाकर अपने कंधों पर रख लिया. अब अमित अपना सुपाड़ा सपना कि चूत पर रगड़ने लगा था और ऐसा लग रहा था कि जैसे भँवरा कली का जूस पीने को बिल्कुल तैयार हो.
अब तक सपना भी पूरी गर्मी में आ चुकी थी और अमित से अंदर डालने को कहने लगी थी. फिर तभी अमित ने एक करारा शॉट मारते हुए अपना आधा लंड सपना की चूत में डाल दिया और इससे पहले की सपना संभाल पाती अमित ने एक और जबरदस्त शॉट मारा और पूरा सफ़र तय कर दिया. अब सपना दर्द से चिल्लाती रही, लेकिन अमित धक्के पर धक्का मारता रहा.
फिर 15-20 मिनट के बाद सपना का दर्द कुछ कम होने लगा था और उसे भी अच्छा लगने लगा था. अब वो भी प्यार से चुदवाने लगी थी. फिर करीब 5 मिनट के बाद उन दोनों का पानी ऐसे निकाला जैसे वो जन्मों के प्यासे हो. अब सपना की खुशी बता रही थी कि उसे भी बहुत मज़ा आया था. फिर करीब एक घंटे के बाद अमित ने फिर से सपना को पकड़ लिया और दूसरा दौर शुरू करने लगा. इस बार अमित ने सपना को डॉगी स्टाइल में आने को कहा तो सपना तुरंत तैयार हो गयी.
अब कुछ ही मिनट में सपना डॉगी स्टाइल में चुद रही थी, अमित आज उसे पूरी तरह से निचोड़ देना चाहता था. फिर 20-25 के बाद वो दोनों फिर से झड़ हो गये और एक दूसरे की बाहों में ही सो गये. फिर दूसरे दिन अमित कॉलेज चला गया और में घर में ही रह गया. अब सपना रात की चुदाई के कारण बहुत थकी हुई थी.
फिर जब मैंने उससे पूछा तो वो बोली कि भैया गणित की एक्सरसाईज़ बहुत मुश्किल थी और में रात को 2 बजे तक पढ़ती रही. तभी मैंने कहा कि हाँ सपना में जानता हूँ कि एक्सरसाईज़ बहुत मुश्किल थी, क्योंकि 4 घंटे तुम्हारी टागें अमित के कंधों पर थी.
अब सपना इस बात से बिल्कुल मुकर रही थी, लेकिन जब मैंने उसे एक-एक बात बता दी तो वो बच्चों की तरह रोने लगी और विनती करने लगी कि में किसी को कुछ ना कहूँ. फिर मैंने उसे गले से लगाया और कहा कि में यह बात किसी को नहीं कहूँगा, लेकिन तुझे मेरा एक काम करना पड़ेगा जिसके लिए वो तत्काल मान गयी. फिर मैंने उससे कहा कि आज रात उसे मुझसे भी चुदना होगा, अब वो ना नहीं कर सकती थी.
फिर रात को अमित कॉलेज से आते हुए एक ब्लू फिल्म साथ में ले आया. फिर हम खाना खाने के बाद अपने कमरे में चले गये, तो तभी अमित बोला कि आज हम पहले ब्लू फिल्म देखेंगे और फिर उसके बाद सपना ब्लू फिल्म की हिरोईन की तरह एक्टिंग करेगी.
अब सपना ब्लू फिल्म पहली बार देख रही थी और अब उसकी हालत कमज़ोर होती जा रही थी और वो हमारे दोनों के लंड अपने हाथ में पकड़कर ज़ोर- ज़ोर से हिला रही थी. फिर तभी एक झटके में वो उठी और टी.वी बंद करते हुए बोली कि अब मुझसे नहीं रहा जाता है, अब मुझे लंड चाहिए.
फिर उस रात हम दोनो ने सपना को 2-2 बार निचोड़ा और हर संभव स्टाइल में उसकी चुदाई की. फिर अगले दिन मेरे पापा मम्मी आ गये और सब नॉर्मल हो गया. अब बीच-बीच में जब भी मुझे कभी मौका मिलता है तो में सपना की चूची मसल देता था या उसकी चूत सहला देता था, लेकिन इससे ज्यादा और कुछ ना कर सका. अब सपना शादीशुदा है, लेकिन अमित के साथ आज भी उसका रिश्ता है.
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भाभी बन गई चुदक्कड़ रखैल

हैल्लो दोस्तों, में आप सभी  चाहने वालों को अपनी दूसरी सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जिसमें मैंने अपने पड़ोस में रहने वाली एक हॉट सेक्सी भाभी को बहुत जमकर चोदा, लेकिन सबसे पहले में आपको अपनी भाभी के बारे में भी बता देता हूँ. में उनका आप लोगों से परिचय करवा देता हूँ.
दोस्तों वो हमारे पड़ोस में ऋषिकेश में ही रहती है, उनका नाम सुनीता है और उनके दो बच्चे है उनकी बड़ी बेटी की उम्र करीब 8-10 साल है. वो थोड़ी साँवली है, लेकिन उसका नैन नक्श बहुत अच्छा है और वो दो बच्चो की माँ होने के बाद भी वो अपने चेहरे और गदराए बदन से अब तक कुवारी लगती है और उनको देखकर कोई भी नहीं कह सकता कि वो एक चुदी हुई चूत है.
बहुत से लोग उनकी सुन्दरता को देखकर चकित होने के साथ साथ उन पर फ़िदा भी थे. दोस्तों मेरी उन भाभी के बूब्स तो उनके सूट के बाहर से हमेशा बाहर झांकते रहते है और उनकी गांड तो मानो सलवार फाड़कर अभी बाहर आ जाएगी और इसलिए मेरी नज़र हमेशा भाभी की गांड पर ही पड़ी रहती है. में उनको लगातार घूरता रहता हूँ और में कई बार उनको सोचकर मुठ भी मार चुका हूँ.
दोस्तों यह बात यही कुछ तीन महीने पहले अक्टूबर महीने की है और उस दिन से भाभी मेरी अब पर्सनल रंडी बन गयी है. वैसे तो में भाभी से हंसी मज़ाक करता ही रहता था और उन्हे घूर घूरकर देखता रहता था, लेकिन मेरी कभी हिम्मत नहीं हुई कि में उनसे कोई ग़लत बात कर सकूं, क्योंकि मुझे मन ही मन में उनसे बात करने की इच्छा तो होती थी, लेकिन में थोड़ा सा डरता भी था कि ना जाने उनमे वो कैसा आकर्षण था जिसकी वजह से में उनका पीछा छोड़ने के लिए तैयार ही नहीं था.
में हमेशा उनके पीछे लगा रहता था. दोस्तों वो सोमवार का दिन था और उस दिन में कहीं जा रहा था कि तभी मैंने थोड़ी दूर चलने के बाद देखा कि भाभी अकेली सड़क के किनारे खड़ी हुई थी और वो ऑटो का इंतजार कर रही थी. फिर में उधर से अपनी बाईक से निकला तो मैंने भाभी को देखा में बहुत खुश था और मैंने तुरंत अपनी बाईक को उनके सामने लाकर रोक दिया और फिर मैंने उनसे कहा कि भाभी चलो में आपको जहाँ जाना है वहां पर छोड़ देता हूँ.
वैसे भी में अकेला ही हूँ तो मुझे भी आपका साथ मिल जाएगा. फिर भाभी मेरी बात सुनकर मेरी तरफ थोड़ा सा मुस्कुराकर मुझे कहने लगी कि चलो आज में तुम्हारी यह छोटी सी इच्छा भी सिर्फ तुम्हारी ख़ुशी के लिए पूरी कर देती हूँ, तुम भी क्या याद रखोगे? और वो मुझसे इतना कहकर झट से मेरे कंधे पर अपना एक गोरा, नरम, मुलायम हाथ रखकर मेरे साथ बैठ गई. दोस्तों आज भाभी पहली बार मेरी बाईक पर मेरे पीछे वाली सीट पर बैठी थी. उस बात की मुझे मन ही मन बहुत ख़ुशी थी और वो दिन मेरा सबसे अच्छा दिन था.
दोस्तों वैसे में बाईक को थोड़ा तेज चलाता हूँ तो भाभी अब मुझे पीछे से कसकर पकड़कर बैठी हुई थी और हम हंसी मजाक करते आगे बढ़े चले जा रहे थे कि तभी अचानक से एक स्पीड ब्रेकर आ गया और मैंने जानबूझ कर उस स्पीड ब्रेकर पर ज़ोर के ब्रेक मारे जिसकी वजह से भाभी अब पूरी मेरे ऊपर आ गई माँ कसम उस पल भाभी के दोनों बड़े आकार के लटकते हुए बूब्स मुझे मेरी पीठ पर महसूस हुए जिसकी वजह से मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया. फिर भाभी ने मुझसे कहा कि अभी थोड़ा ध्यान से चलाओ.
फिर में भाभी को लेकर गंगा जी आ गया और उन्होंने वहां पर दर्शन किए और फिर मैंने भाभी से पूछा कि क्यों एक कप कॉफी हो जाए और उन्होंने मुझे तुरंत हाँ कह दिया. फिर में भाभी को लेकर एक कॉफी की दुकान पर ले गया और अब हम दोनों एक दूसरे के सामने बैठ गए, लेकिन मेरी नज़र अब भी भाभी के बूब्स पर ही टिकी हुई थी, शायद भाभी ने भी लगातार मेरी नजर को अपने बूब्स पर पड़ते हुए देखकर वो सब कुछ समझ गई थी, लेकिन उन्होंने मुझसे ऐसा कुछ भी नहीं कहा. फिर कुछ देर बाद भाभी मुझसे पूछने लगी कि क्यों तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या? तो मैंने मुस्कुराते हुए उनसे कहा कि भाभी मुझे अब तक आपके जैसी कोई मिलती ही नहीं.
फिर वो मेरी यह बात सुनकर हंस पड़ी और उन्होंने मेरे गाल पर एक बहुत प्यार से थप्पड़ मार दिया और फिर कुछ देर बातें करते हुए कॉफी के साथ साथ उनके बूब्स का मज़ा लेने के बाद हमने कॉफी को खत्म किया. फिर मैंने कॉफी के पैसे दे दिए और तब काउंटर से भाभी के लिए एक चोकलेट भी ले ली और वो मैंने उन्हे दे दी. भाभी ने बड़े प्यार से मेरी तरफ मुस्कुराते हुए वो चोकलेट मुझसे ले ली और अब मैंने महसूस किया कि भाभी मेरे पीछे कुछ ज़्यादा ही खुलकर मुझसे चिपककर बैठ गई.
में अब उनके बूब्स को बहुत अच्छी तरह से महसूस कर पा रहा था और कुछ देर बाद मैंने भाभी को उनके घर पर लाकर छोड़ दिया और अगले दिन सुबह 11 बजे भाभी मेरे घर पर मेरी मम्मी के पास आई और कुछ काम से वो दोनों दूसरे रूम में बैठकर बातें कर रहे थे. में भी कुछ देर बाद वहीं पर चला गया और उन दोनों के साथ गप्पे मारने लगा.
फिर मम्मी ने कहा कि तुम दोनों बैठो में तुम्हारे लिए चाय बनाकर लाती हूँ में भाभी के पास वाले सोफे पर ही बैठा हुआ था और मैंने बड़ी हिम्मत करके अपना हाथ धीरे से भाभी के कंधे पर रख दिया तभी भाभी ने गुस्से में मेरी आँखो में देखा और तुरंत उन्होंने मेरा हाथ अपने कंधे से हटा दिया और तभी मम्मी भी आ गई और हमने अब साथ बैठकर चाय पी.
दोस्तों सच बताऊँ मेरी तो अब गांड फट रही थी कि कहीं भाभी मेरी मम्मी को मेरी वो हरकत के बारे में ना बता दे जो मैंने अभी कुछ देर पहले भाभी के साथ अकेले में की थी, लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा और अब भाभी ने चाय पी और फिर वो चुपचाप अपने घर पर चली गई, क्योंकि अब भैया के दिन में घर पर आकर खाना खाने का समय हो गया था.
दोस्तों भाभी उस समय तो मेरे घर से चली गई, लेकिन अब भी मेरी गांड बहुत फट रही थी कि कहीं वो मेरी माँ या अपने पति को ऐसा कुछ भी ना बता दे, जिसकी वजह से मुझे कुछ खतरा हो जाए. फिर करीब 02:40 पर मेरे फोन की घंटी बजी, वो भाभी का फोन था और भाभी ने मुझे फोन करके अपने घर पर बुलाया, जिसकी वजह से मेरी गांड अब बहुत ज्यादा फटी, लेकिन में फिर भी डरता हुआ उनके घर पर पहुंच गया. मैंने वहां पर पहुंचकर देखा कि भाभी उस समय घर पर बिल्कुल अकेली थी और उनके दोनों बच्चे भी उस समय स्कूल गए हुए थे और तब तक भैया भी खाना खाकर चले गये थे.
फिर जैसे ही में उनके घर में अंदर घुसा में आप लोगों को किसी भी शब्दों में नहीं बता सकता कि वो ओह्ह्ह वाह क्या नज़ारा था? भाभी उस समय नीले रंग की मेक्सी पहने हुई थी और वो उनके घुटनों तक उठी हुई थी. कसम से में तो बस उन्हें देखता ही रह गया. फिर मैंने देखा कि भाभी के चेहरे पर अब एक कामिनी वाली स्माइल थी और वो एकदम मस्त सेक्सी लग रही थी. फिर मेरे अंदर जाते ही भाभी ने मुझे तुरंत पकड़कर हग किया और उन्होंने मुझे एक बहुत जबरदस्त स्मूच दे दी जिसकी वजह से मेरे तो होश ही अब अपने ठिकाने पर नहीं रहे. में तो मानो उस समय सातवें आसमान पर था.
अब भाभी मुझसे बोली कि तूने मेरे पास आने में इतनी देर क्यों लगा दी, में तो तेरी राह पिछले पांच सालो से देख रही थी. मैंने तुझे बहुत बार अपनी तरफ आकर्षित किया, जिसकी वजह से तूने मुझे बहुत बार देखा, लेकिन उसके आगे तूने कुछ भी नहीं किया. मुझे कब से इस दिन का इंतजार था, आ जा मेरी जान बना ले आज तू मुझे अपना. दोस्तों और फिर क्या था? मैंने भाभी के मुहं से यह बात सुनकर जोश में आकर तुरंत उनको बेड पर धक्का दे दिया और फिर मैंने उनको बहुत जबरदस्त तरीके से स्मूच करना शुरू कर दिया, वो सारा कमरा पुछ पुछ की आवाजो से गूंजने लगा था और भाभी ने भी मेरा पूरा पूरा साथ दिया.
फिर कुछ देर बाद भाभी ने जल्दी से मेरी शर्ट को खोल दिया तो मैंने जोश में आकर भाभी की मेक्सी को फाड़ दिया और अब में उनके दोनों बड़े बड़े बूब्स को एक एक करके मुहं में लेकर चूसने निचोड़ने लगा था जिसकी वजह से भाभी स्सईईइ आह्ह्ह्ह ऑउच उईईईईई उफ्फ्फ्फ़ की ज़ोर से आवाज़े निकालने लगी थी मैंने अब सही मौका देखकर भाभी की पेंटी को भी उतार दिया जिसकी वजह से उनकी प्यासी, तड़पती हुई चूत अब मेरे सामने थी और मैंने तुरंत अपनी जीभ को उनकी चूत में घुसा दिया और बहुत जबरदस्त तरीके से चाटने लगा.
दोस्तों अब भाभी मानों सातवे आसमान पर थी वो सिसकियाँ लेते हुए बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी. ऑश आह्ह्ह उहहउम्म डार्लिंग चोदो मुझे आह्ह्ह्ह चोद दो मुझे ऊईईईईइ अब जल्दी से चोद दो मुझे मैंने इस दिन का बहुत इंतजार किया. मुझसे यह बात बोल बोलकर वो मुझे और भी गरम करने लगी थी.
तो मैंने जल्दी से अपनी पेंट उतारी और अपना लंड भाभी के मुहं में दे दिया. दोस्तों तब मैंने महसूस किया कि भाभी बहुत कमाल का लंड चूसती है और वो मेरे लंड को बड़े मज़े लेकर चूस रही थी. दोस्तों उसने करीब दो मिनट में ही साली रंडी ने मुझे अपने मुहं में झाड़ दिया और फिर से लगातार मेरा लंड चूस चूसकर उसने दोबारा खड़ा कर दिया.
दोस्तों मैंने महसूस किया कि अब तक भाभी बहुत गरम हो चुकी थी और वो मुझसे बोली कि प्लीज अब एक मिनट की भी देर मत करो, में अब ज्यादा इंतजार नहीं कर सकती, प्लीज थोड़ा जल्दी करो और अब मैंने अपना 6 इंच का लंड अपनी भाभी की चूत के मुहं पर रखकर एक जबरदस्त धक्का मार दिया, जिसकी वजह से भाभी बहुत ज़ोर से चिल्ला उठी उफ्फ्फ्फ़ मादरचोद, भोसड़ी के थोड़ा धीरे से चोद, में क्या कहीं भागकर जा रही हूँ? में तो अब तेरे ही पास हूँ और तुझसे हमेशा ऐसे ही अपनी चुदाई करवाती रहूंगी उफ्फ्फ्फ़ प्लीज आह्ह्ह्हह्ह धीरे कर आह्ह्ह्ह मर गई, प्लीज आराम आराम से धक्के दे.
अब में उनकी बिना कुछ बात सुने और ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा था, जिसकी वजह से पूरे कमरे में भाभी की सिसकियों की आवाज गूँज रही थी वो कह रही थी आअहह चोदो मुझे और ज़ोर से आह्ह्ह बेबी उम्म्म्म आहआआ उम्म्म आऊच करीब दस मिनट के बाद में और भाभी दोनों एक एक करके झड़ गये और अब हम दोनों ऐसे नंगे ही एक दूसरे से चिपककर रज़ाई में लेट गये और 1/2 घंटे बाद मेरी आँख खुली और एक बार फिर से हमने बहुत जमकर चुदाई के मज़े लिए.
मैंने उनको इस बार बहुत देर तक चोदा और उन्होंने भी मेरी इस चुदाई में पूरा पूरा साथ दिया और हम दोनों अपने काम में लगातार लगे रहे. उसके बाद मैंने अपना पूरा वीर्य उसकी चूत की गहराईयों में डाल दिया और कुछ देर बाद उन्होंने मेरा लंड अपने मुहं में लेकर चूसना शुरू किया और लंड को बहुत अच्छी तरह से चाटकर साफ कर दिया. दोस्तों उस दिन की चुदाई के बाद अब भाभी मुझे अपने पति से ज़्यादा मानती है और वो मुझसे सच्चा प्यार भी करती है और वो अब मेरे लिए महंगे महंगे गिफ्ट्स भी लाती है और जब भी हमें मौका लगता है तो हम बहुत जमकर चुदाई करते है.
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बहन को उसके ससुर के साथ मिलकर चोदा

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राहुल हैं और में मुंबई का रहने वाला हूँ. यह मेरे साथ अभी कुछ समय पहले घटित हुई, पहले मुझे इतनी हिम्मत नहीं हुई, लेकिन फिर बाद में मैंने सोचा कि में इसको लिखकर आप सभी तक पहुंचा देता हूँ और मैंने बहुत मेहनत करके इसको आप लोगों के लिए तैयार किया है और इसमें मुझसे कोई भी गलती हो जाए तो प्लीज आप लोग मुझे माफ़ जरुर करें.
दोस्तों मेरे परिवार में मेरी दो बहने है और में सबसे छोटा हूँ, बड़ी बहन 35 साल की है और उसकी शादी गुजरात में हो गई और वो हमारे गाँव के पास के गाँव में ही रहती है और मेरी दूसरी बहन जो 32 साल की है, उसकी भी शादी हो चुकी थी, लेकिन शादी के कुछ सालों बाद एक कार दुर्घटना में मेरे जीजा की म्रत्यु हो गई और में गुजरात से बाहर रहता हूँ.
अब में शादी के बाद गुजरात से बाहर अपने काम की वजह से चला गया और मेरे जीजाजी का म्रत्यु हो जाने के बाद में हमेशा मेरी बहन जो दो बहनो में छोटी है और मुझसे उम्र में बड़ी है, उनका ख्याल रखता था और जब में गुजरात जाता तो ज़रूर उनको मिलता और उनकी मदद भी करता था. अभी कुछ साल पहले उसकी सासूजी भी इस दुनिया से चल बसी और अब वो और उनकी एक पांच साल की बेटी और उनके ससुर जी के साथ रहती है.
दोस्तों में पिछली बार जून के महीने में जब में गुजरात गया तो मैंने सोचा कि दो दिन में अपनी बहन के घर पर भी रुक जाऊँ तो उनको भी मेरा रुकना अच्छा लगेगा और फिर जब में उनके घर पर गया तो वो उस समय रसोईघर में खाना बना रही थी, वो मुझे देखकर बहुत खुश होकर बोली कि भैया आप कब आए? और आप कैसे हो? और फिर थोड़ी देर हमारी इधर उधर की बातें हुई और उनके ससुरजी घर के पास ही उनके एक पड़ोसी के पास बैठे हुए थे.
कुछ देर बाद वो भी आ गये और फिर हम लोगों ने रात को खाना साथ में खाया. दोस्तों उनके घर में एक रसोईघर और एक छोटा सा कमरा था और माल सामान रखने के लिए और एक बड़ा कमरा था, उसमें वो लोग हमेशा सोते थे. घर में बेड नहीं रखा था, क्योंकि उस घर में मेरी बहन और उनकी बेटी और उनके ससुरजी रहते थे तो उनको अच्छा नहीं लगता था.
फिर खाना खाने के बाद हम लोगों ने थोड़ी देर बातें हंसी मजाक किया और फिर रात के 11 बज गये तो मेरी बहन ने कहा कि अब हम सो जाते है, में तुम्हारे लिए बिस्तर लगा देती हूँ और उन्होंने बड़े कमरे में एक तरफ जमीन पर मेरा बिस्तर लगा दिया और बीच में उनके ससुर जी का और एक साईड में उनका और उनकी बेटी का बिस्तर लगाकर उसके साथ में सो गई.
अब रात को करीब 1:30 बजे मैंने एक आवाज़ सुनी तो मेरी नींद खुल गई. उस समय मैंने एक पतली सी चादर ओढ़ रखी थी. मैंने उसमें से देखा तो मेरी बहन नाईट गाउन में उनके ससुरजी के बिस्तर पर सोई हुई थी. हो सकता है वो दोनों मेरी नींद खुलने के डर से चुपचाप ऐसी ही पड़े रहे हो, लेकिन मेरे दिमाग़ में आया कि में उनके ससुर जी को मार दूँ, लेकिन फिर मुझे ख्याल आया कि हो सकता है कि मेरी बहन को ही यह सब पसंद हो और आख़िर में उनके पति की म्रत्यु के बाद उनको इन सभी कामो की ज़रूरत भी होती होगी. अब में भी वैसे ही चुपचाप पड़ा रहा और जैसे में वापस सो गया.
कुछ 20 से 25 मिनट के बाद मेरी बहन बैठ गई और अब मेरी बहन ने उनके ससुरजी जो नाईट ड्रेस पहने हुए थे, उसको उतार दिया और फिर वो उनके एकदम मुलायम लंड को चूसने लगी. तभी उनके ससुर ने कहा कि आज रहने दे, वो जाग जाएगा तो समस्या हो जाएगी, लेकिन मेरी बहन ने कहा कि मुझे यह चाहिए और वो इतना कहकर लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी. अब उनके ससुर जी उसके बूब्स को दबाने लगे और थोड़ी देर में ही उनके ससुर जी का लंड तनकर टाईट हो गया, जिसको देखकर मेरी बहन बहुत खुश होने लगी. उसके चेहरे पर एक अजीब सी शरारती मुस्कान थी और अब जल्दी से मेरी बहन ने तकिए के नीचे से कंडोम निकाला और अपने ससुर के लंड को बहुत प्यार से सहलाते हुए उस पर कंडोम चड़ा दिया. उसके बाद लंड को दोबारा से चूम लिया और उसके बाद वो तुरंत नीचे लेट गई और अब इनके ससुर जी मेरी बहन के ऊपर चड़ गए.
अब उन्होंने मेरी बहन को पैर ऊपर उठाने के लिए कहा और मेरी बहन ने अपने दोनों पैर ऊपर उठा लिए, जिसकी वजह से चूत अब पूरी खुलकर ससुरजी के सामने आ चुकी थी और उन्होंने ज्यादा देर ना करते हुए लंड को चूत के मुहं पर रखकर वैसा ही एक ज़ोर का धक्का देकर उन्होंने अपना पूरा लंड उनकी चूत के अंदर डाल दिया, तो अचानक से हुए उस तेज प्रहार और उसके दर्द की वजह से मेरी बहन के मुहं से आहहह्ह्ह ऑश उफ्फ्फ्फ़ माँ मर गई, आईईईईई की आवाज़ निकल गई, वो दर्द से मचलने तड़पने लगी, लेकिन फिर भी वो अपने लंड को लगातार अंदर बाहर कर रहा था और मेरी बहन आह्ह्ह्हह ऑश उफफ्फ्फ्फ़ प्लीज थोड़ा धीरे करो, में मर जाउंगी तुम्हारा यह बहुत मोटा है, मुझे बहुत दर्द हो रहा है कर रही थी.
तभी थोड़ी देर के बाद उनके ससुरजी ने एकदम से अपने धक्के देने बंद कर दिए और मुझे लगा कि शायद उनका जूस बाहर आने वाला था, इसलिए वो रुक गये, क्योंकि वो रुकता तो उसका जूस भी रुक जाता. उसके बाद उन्हें मज़े करने के लिए ज्यादा समय मिलता और फिर वो मेरी बहन के बूब्स को दबाने लगे और कुछ देर बाद वापस से अपनी तरफ से उन्होंने धक्के मारने शुरू कर दिए.
फिर कुछ मिनट धक्के देने के बाद वो दोनों एकदम शांत हो गये और अब भी वो मेरी बहन की निप्पल को अपनी दो उँगलियों से दबाकर उसका रस निचोड़ रहे थे और कुछ देर बाद उन्होंने अपने मुरझाये हुए लंड को मेरी बहन की फटी हुई चूत से बाहर निकालकर मेरी बहन की चूत को किस किया और वो बोला ले अब इसको निकाल. फिर मेरी बहन ने हंसकर बहुत खुश होकर उनके लंड पर चड़े और कंडोम को उतार दिया और फिर लंड को बहुत धीरे हल्के से अपने रुमाल से उसका पूरा वीर्य साफ कर दिया और लंड को चमका दिया और कुछ देर बाद वो दोनों अपनी अपनी जगह पर सो गये और मुझे भी ना जाने कब नींद आ गई.
फिर दूसरे दिन में सोकर उठा तो मैंने देखा कि सब कुछ एकदम ठीक था. में रात वाली घटना के बारे में सोचने लगा और फिर में नहाने चला गया. बाथरूम से बाहर आकर मैंने दोबारा उसी बात को सोचा, लेकिन मेरी बहन ने मुझे नाश्ता लाकर दे दिया.
मैंने देखा कि वो बहुत खुश थी और उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक मुझे महसूस हो रही थी, शायद वो सब रात की चुदाई की वजह से था. में अब सब कुछ अच्छी तरह से समझ चुका था और फिर जब उनके ससुरजी कुछ घंटो बाद बाजार में सब्जी लेने गये, तो मैंने ऐसे ही बातों बातों में अपनी बहन से वो बात करना चाहा, लेकिन उतनी मुझमें हिम्मत ना हुई और कुछ देर बाद मैंने हिम्मत करके उससे बातें करते करते अपनी बहन से कहा कि बहन क्या में एक बात कहूँ?
उन्होंने कहा कि हाँ पूछो ना भैया? तो मैंने कहा कि बहन 6 साल हो गए है जीजा जी के देहांत को तो क्या इसके बाद आपको सेक्स करने की याद नहीं आती? तो उसने कहा कि धत ऐसी बात नहीं करते तो मैंने कहा कि बहन में भी एक शादीशुदा आदमी हूँ तो में सबकी मन की इच्छाओं को समझ सकता हूँ और वो अब कुछ नहीं बोली और अपना सर झुकाकर बैठ गई.
फिर मैंने कहा कि बहन तुम कोई भी टेंशन ना लेना, लेकिन पिछली रात को जो कुछ भी हुआ था, मैंने वो सब कुछ अपनी आखों से देखा है, पहले मुझे अपनी आँखो पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हुआ था. फिर वो अब मेरी बात को सुनकर बिल्कुल हैरान हो गई और अपनी चकित नजरों से मुझे देखने लगी और फिर वो मुझसे पूछने लगी तू यह सब क्या बक रहा है? तो मैंने उससे पूछा कि यह सब तुम तुम्हारी मर्ज़ी से उनके साथ करती हो या वो तुमसे यह सब ज़ोर जबरदस्ती से करते है?
तब वो बोली कि एक दिन बस एक बार रविवार के दिन उन्होंने मुझे हग कर दिया, लेकिन बहुत सालों के बाद कोई मर्द का शरीर मुझसे छुआ, जिसकी वजह से मेरे अंदर की प्यासी औरत दोबारा जोश में आ गई और फिर मैंने भी उनको हग किया और फिर हम दोनों गरम हो गये और उसके बाद से यह सब हो गया और मुझे भी वो सब चाहिए था तो इसलिए में बाहर जाऊं और कोई मुझे बाहर देखे तो सभी को खराब लगे. इससे अच्छा है कि घर की बात घर में ही रह जाए और हमारी इज्जत भी बची रह जाएगी और किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा. अब प्लीज तुम यह बात किसी को मत बताना.
अब मैंने उनसे कहा कि में अभी बात कर रहा हूँ तो में समझ सकता हूँ, लेकिन तुम बुरा नहीं मानो तो में यह सब देखकर इतना गरम हो गया हूँ कि मुझसे भी अब रहा नहीं जाता. फिर मेरी बहन ने मुझसे कहा कि ठीक है, लेकिन पहले तुम मुझसे वादा करो कि मेरा और मेरे ससुरजी के बारे में तुम किसी को कुछ भी नहीं बताओगे तो में भैया आपको भी मौका दे दूँगी, लेकिन जब मेरे ससुरजी घर पर नहीं होगे तब.
फिर मैंने कहा कि नहीं आज रात को हम साथ में करेंगे और ससुरजी के सामने करेंगे तो बहन ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता है. फिर मैंने कहा कि तुम एक काम करना पिछली रात की तरह तुम लोग दोबारा वो सब करोगे तो में अचानक से जाग जाऊंगा और फिर में तुमसे कहूँगा कि तुम यह क्या कर रहे हो? तो तुम्हारा ससुर मेरी यह बात सुनकर बिल्कुल शर्मिंदा हो जाएगा और फिर में बोलूँगा तो वो तैयार भी हो जाएगा और हम तीनों को बड़ा मज़ा आएगा.
अब हमारे प्लान के हिसाब से रात के वक़्त हम सभी खाना खाने के बाद कुछ देर हंसी मजाक करने के बाद सो गये और जैसे ही मेरी बहन के ससुरजी को लगा कि अब में गहरी नींद में सो चुका हूँ और डरने की कोई बात नहीं तो वो दोनों नंगे हो गए और फिर उनके ससुरजी ने मेरी बहन के बूब्स को दबाना शुरू किया और वो दोनों कुछ देर बाद पूरे जोश में आ गये और मज़े करने लगे.
फिर मैंने भी सही मौका देखकर उठकर कर उन दोनों के पास पहुंच गया. तभी वो मुझे अपने पास देखकर हक्के बक्के रह गये. फिर मैंने उनसे पूछा क्यों तुम यह क्या कर रहे हो? अब उनका ससुर अपनी गर्दन को नीचे करके चुपचाप बैठ गया. फिर मैंने उनसे कहा कि देखो इसमे आपका कोई कसूर नहीं है आप बेफ़िक्र रहिए, लेकिन आज में भी तुम्हारे साथ इस काम में शामिल होना चाहता हूँ.
फिर उनके ससुर ने कहा कि हाँ ठीक है. फिर मैंने उनके ससुर से बोला कि आज में मेरी बहन को चोदूंगा और इस चुदाई के काम में तुम भी मेरी मदद करना. उसके बाद मेरी बहन ने मेरे कपड़े उतार दिए और मैंने उसको नीचे लेटने के लिए कहा और में उसके ऊपर बैठ गया.
मैंने उनसे कहा कि में बिना कंडोम के ही चुदाई करूंगा, क्योंकि लंड पर कंडोम लगाना मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता और फिर मैंने अपनी बहन से कहा कि आज जितना दिल चाहे उतना मेरा लंड चूस और जब में बहुत ही गरम हो गया तो मैंने मेरी बहन के ससुर से कहा कि अब आप मेरी बहन के दोनों पैरों को ऊपर उठा लो. आज मुझे बहुत जमकर चुदाई करनी है और उन्होंने वैसा ही किया.
उसके बाद मैंने मेरी बहन की गांड के नीचे एक तकिया रख दिया और जैसा ही ऊपर आया तो मैंने अपनी बहन की चूत में जोरदार धक्का देकर अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया और फिर मेरी बहन उसकी वजह से होने वाले दर्द से तड़पने लगी, लेकिन कुछ देर बाद उसको अपनी चुदाई के मज़े आने लगा और वो अब पूरी तरह से जोश में आकर कहने लगी भायाआ आअहह ओहहह भैया तुम्हारा तो बहुत बड़ा है प्लीज और ज़ोर से करो, वाह मज़ा आ गया हाँ पूरा अंदर डाल दो उफ्फ्फफ्फ्फ़ तुम कितने अच्छे हो आईईईइ मज़ा आ गया, ऐसा मज़ा मुझे आज पहली बार मिला है और अब में उसके ऊपर पूरा चढ़कर अपने लंड को अंदर बाहर करता रहा और वो आहहहह स्सीईईईईई ऑश वाह मज़ा आ गया, हाँ आज तुम मुझे पूरी तरह से जमकर चोद दो, करती रही.
फिर थोड़ी देर की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद मैंने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया और वो मुझे मेरी चुदाई की वजह से बहुत खुश नजर आई तो मैंने उससे पूछा क्यों मज़ा आया ना? अब मेरी बहन मुस्कुराती हुई बोली कि हाँ बहुत मज़ा आया और यह चुदाई बहुत लाजवाब रही.
फिर मैंने उनके ससुर से कहा कि अब तुम तुम्हारी बारी है, तुम अब अपनी चुदाई चालू करो, में अब बहुत थक चुका हूँ और में सोने जा रहा हूँ. फिर उसके ससुर ने मेरी बहन को चोदना शुरू किया और वापस सुबह उठकर मैंने अपनी बहन को चोदा और आने वाली रात को मैंने और उनके ससुर ने उसको बहुत बार चोदा और फिर में वापस अपने घर पर आ गया तो मुझे थोड़ी सी टेंशन होने लगी कि मेरी बहन मेरी चुदाई की वजह से गर्भवती ना हो जाए, लेकिन उस ऊपर वाले का बहुत बहुत धन्यवाद हमने दो महीने तक राह देख ली, लेकिन उनको ऐसा कुछ ना हुआ था और में आज भी जब गुजरात जाता हूँ तो एक बार अपनी बहन की चुदाई ज़रूर करता हूँ.
मैंने उसको अब तक बहुत बार चोदा और एक बार तो मैंने उसके ससुरजी के साथ मिलकर उसके दोनों छेद में एक साथ लंड डालकर उसको चोदा और उस दिन उसकी गांड में लंड डालने का वो पहला दिन था, जिसकी वजह से उसको बहुत दर्द हुआ और वो करीब दो दिनों तक उठने, बैठने, चलने, फिरने से परेशान हो गई थी और उसके बाद भी मैंने अपनी बहन की गांड मारी और उसके भी मज़े लिए.
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कोचिंग स्टूडेंट की मम्मी को चोदा

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम साहिल है और में लखनऊ का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 26 साल की है और ये बात आज से 1 साल पहले की है. उस समय हम लोग अपने नये घर में शिफ्ट हुए थे, वो नवम्बर-दिसम्बर का महीना था. हमारा घर जिस इलाके में था, वो इलाका कुछ ज्यादा अच्छा नहीं था, इसलिए में वहाँ के लोगों से ज्यादा बातचीत नहीं करता था.
अब वहीं मेरे घर से एक मकान छोड़कर दूसरे मकान में एक फेमिली रहती थी, पति पत्नी और उनका एक बेटा. उनका बेटा 7 या 8 साल का था, पति की एक बुक शॉप थी और में उन्हें भैया कहकर बुलाता था. उनकी वाईफ का नाम गायत्री था और उनकी उम्र कोई 32 साल होगी, वो दिखने में बहुत खूबसूरत थी और उनकी बॉडी भी स्लिम थी, उनका हमारे घर पर आना जाना था इसलिए में उनसे अक्सर बातें करता रहता था.
फिर एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि साहिल आप मेरे बेटे पीयूष को कोचिंग पढ़ा दोगे? उसके एग्जॉम आने वाले है. अगर तुम उसे एक महीने पहले से ही पढ़ा दो तो वो अच्छे नम्बरों से पास हो जाएगा. फिर मैंने कहा कि ठीक है भाभी, में पीयूष को पढ़ा दिया करूँगा, लेकिन दिन में तो में ऑफिस चला जाता हूँ तो में शाम को ही पढ़ा पाऊँगा.
फिर भाभी ने कहा कि ठीक है, सच में भाभी इतनी खूबसूरत थी कि क्या बताऊँ? लेकिन मैंने उन्हें कभी ग़लत नज़र से नहीं देखा था. फिर अगले दिन से में रात में कभी 7 बजे, तो कभी 8 बजे जाकर पीयूष को पढ़ाने लगा. अब में जब भी पीयूष को पढ़ाता तो भाभी भी वहीं पर बैठी रहती थी और मुझसे बातें करती रहती थी.
फिर एक बार उन्होंने मुझसे पूछा कि क्यों साहिल तुम्हारे कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं? तो में घबरा गया कि भाभी ये क्या पूछ रही है? क्योंकि इससे पहले मेरे और उनके बीच में कभी ऐसी कोई बात नहीं हुई थी. फिर मैंने ना में अपना सिर हिला दिया तो वो कहने लगी कि तुम तो लड़कियों की तरह शरमा रहे हो. फिर मैंने कहा कि नहीं भाभी ऐसी कोई बात नहीं है, सच में मेरे कोई गर्लफ्रेंड नहीं है. फिर उस दिन उसके बाद हमारे बीच में कोई बात नहीं हुई.
फिर एक दिन में पीयूष को पढ़ा रहा था तो भाभी ने अंदर से आवाज़ देकर मुझे अंदर आने के लिए कहा, तो में पीयूष को किताब पढ़ने के लिए देकर अंदर चला गया. फिर में अंदर गया तो भाभी ने कहा कि मुझसे गैस का रेगुलेटर नहीं बदल रहा है, तुम बदल दो ज़रा. फिर मैंने कहा कि ठीक है में बदल देता हूँ और ये कहकर में गैस का रेगुलेटर बदलने के लिए आगे बढ़ा. अब भाभी वहीं गैस सिलेंडर के बगल में खड़ी थी और रेगुलेटर को बदलने की कोशिश कर रही थी.
उस समय पता नहीं किस तरह से मेरा हाथ भाभी की गांड से टच हो गया, लेकिन भाभी ने कुछ नहीं कहा. फिर उसके बाद रेगुलेटर बदलते समय भाभी का हाथ बार-बार मेरे हाथ में आ जा रहा था. भाभी का हाथ बहुत ही सॉफ्ट था. फिर मैंने किसी तरह से रेगुलेटर बदल दिया और में फिर से पीयूष को पढ़ाने चला गया.
फिर उसके दूसरे दिन भी भाभी ने मुझे अंदर बुलाया और कहने लगी कि कल तुम्हारे भैया कुछ बुक्स लेकर आए थे, तुम्हें पढ़ना हो तो वो वहाँ रखी है, वहाँ से ले लो और ये कहते हुए उन्होंने टेबल की तरह इशारा कर दिया. फिर मैंने वो बुक ली और वहाँ से चला गया. उन बुक्स में कुछ हॉट पिक्चर और कुछ कहानियाँ थी, तो में वो सब पढ़ने लगा.
फिर किताब पूरी पढ़ने के बाद मैंने सोचा कि बुक वापस रख दूँ और यही सोचकर में उनके कमरे में चला गया. उस समय दोपहर के 2 बजे रहे थे. फिर जब में उनके कमरे के अंदर गया तो मैंने देखा कि भाभी ने केवल पेटीकोट और ब्लाउज पहन रखा है और उनके ब्लाउज के 2 बटन खुले है, जिससे उनकी चूची साफ-साफ दिख रही थी.
अब उनकी चूची को देखकर तो मेरे लंड में जैसे करंट दौड़ने लगा था. अब भाभी ने भी मुझे देख लिए था, लेकिन उसके बाद भी उन्होंने ऐसे बर्ताव किया जैसे उन्होंने मुझे नहीं देखा है. फिर उसके बाद वो अचानक से मेरी तरफ देखते हुए बोली कि अरे साहिल तुम कब आए? मैंने तो तुम्हें देखा ही नहीं, आओ अंदर आ जाओ. फिर उसके बाद में अंदर आकर बैठ गया तो वो उस तरह ही मेरे पास आई और बोली कि एक बात बताओ तुमने आज तक कभी किसी लड़की या औरत को नंगा देखा है. मैंने कहा कि नहीं भाभी, आज तक नहीं देखा है.
अब वो मेरे बगल में बैठी थी और जब वो बातें कर रही थी तो में बार-बार उनकी चूचीयों की तरफ ही देख रहा था. अब भाभी ने भी मुझे उनकी चूचीयों को देखते हुए देख लिया था. फिर वो बोली कि अगर देखना है तो मुझसे कहो, में तुम्हें ऐसे ही दिखा दूंगी. अब में घबरा गया था कि भाभी ये क्या बोल रही है? फिर उसके बाद भाभी ने मेरे चेहरे पर हाथ रखते हुए बोला कि कभी किसी के साथ कुछ किया है या नहीं, तो में चुप रहा और मैंने कुछ नहीं बोला.
फिर भाभी अपना एक हाथ मेरे चेहरे और सीने पर घुमाने लगी तो मैंने भाभी से कहा कि भाभी में आपको किस करना चाहता हूँ और कहते हुए उनके चेहरे को अपनी तरफ खींचकर उनके होंठो पर किस करने लगा. उनके होंठ बहुत ही रसीले थे. अब में उनके होंठो को चूसने लगा था और भाभी भी मेरे होंठो को चूसने लगी थी.
फिर हम दोनों करीब 2 मिनट तक ऐसे ही किस करते रहे. फिर उसके बाद भाभी बोली कि तुम तो कह रहे थे कि तुमने कभी कुछ नहीं किया है, लेकिन तुम्हें देखकर लगता नहीं है कि तुमने कभी कुछ नहीं किया है. फिर में कुछ नहीं बोला और भाभी के ब्लाउज का एक बटन खोलकर उनकी चूची को हल्का-हल्का दबाने लगा. अब उनको भी अच्छा लग रहा था इसलिए वो कुछ नहीं बोली. फिर मैंने उनके ब्लाउज को पूरा खोल दिया.
फिर भाभी कहने लगी कि तुम तो बहुत तेज हो, पहले तो तुमने किस करने को कहा और अब मेरी चूची दबाने लगे, तो मैंने कहा कि भाभी आप बहुत खूबसूरत हो और में आपको चोदना चाहता हूँ. फिर भाभी बोली कि इसलिए तो तुम्हें वो बुक्स दी थी कि उन्हें देखकर तुम कुछ समझो और में बिना कुछ कहे भाभी की एक चूची पर अपना मुँह लगाकर चूसने लगा और उनकी दूसरी चूची को अपने हाथ से दबाने लगा था.
अब भाभी भी मस्ती में आकर उूउऊहहाआआ और ज़ोर से चूसो साहिल, बहुत अच्छा लग रहा है चूसते रहो उूउऊहहाआआ मज़ा आ रहा है साहिल, ज़ोर से चूसो और ज़ोर से चूसो. अब में अपनी पूरी स्पीड से भाभी की चूची को चूसने लगा था. फिर मैंने उनकी चूची को चूसते हुए अपना एक हाथ भाभी के पेटीकोट के अंदर डालकर उनकी जांघो को सहलाने लगा. तब तक भाभी भी मस्त हो चुकी थी और अब में भाभी की जांघो को सहलाते हुए भाभी की चूत को भी हल्के-हल्के सहलाने लगा था.
अब भाभी मस्ती में आआआआआहह उूउउफफ्फ़ कर रही थी. फिर भाभी ने कहा कि साहिल तुम तो बहुत एक्सपर्ट लगते हो, तुम मुझसे पहले कितनों के साथ चुदाई कर चुके हो? तो मैंने कहा कि भाभी चुदाई तो 3-4 लोगों के साथ की है, लेकिन जैसी चूचीयां आपकी है वैसी चूची मैंने आज तक नहीं चूसी है, आपकी चूचीयां बहुत टेस्टी है.
ये कहते हुए मैंने अपनी उंगली भाभी की पेंटी के अंदर उनकी चूत में डाल दी और भाभी सस्स्स्स्ककककआआअ बहुत अच्छा लग रहा है करती रही. फिर मैंने झटके से भाभी की पेंटी भी उतार दी और कहा कि भाभी सच में आप बहुत खूबसूरत हो, तो भाभी ने मुझसे कहा कि ये क्या भाभी-भाभी लगा रखा है, तुम मुझे कुछ और कहकर बुलाया करो. तब मैंने गायत्री के सभी कपड़े उतार दिए थे, तो गायत्री भाभी ने मुझे हल्का सा धक्का देकर बेड पर लेटा दिया और वो मेरे ऊपर आकर मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर चूसने लगी.
अब वो मेरा लंड चूसते-चूसते बोल रही थी मेरे राजा तेरा लंड तो एकदम मस्त है, जब ये लंड मेरी चूत में जाएगा, तो मेरी चूत को भी बहुत मज़ा आएगा और अब वो मेरे लंड को जोर-जोर से चूसे जा रही थी. फिर जब मुझसे भी नहीं रहा गया तो में भी अपना पूरा लंड उनके मुँह में अंदर बाहर करने लगा. अब वो मेरे लंड को इस तरह से चूस रही थी कि में जल्द ही झड़ जाने की स्टेज में आ गया था. अब में जोर- ज़ोर से अपना लंड अंदर बाहर करने लगा था और फिर में उनके मुँह में ही झड़ गया.
फिर उन्होंने अपनी जीभ से ही मेरे लंड को साफ किया और कहा कि बहुत दिनों के बाद ऐसे मज़ा आया आ रहा है. फिर वो बाथरूम में चली गई और फिर करीब 10 मिनट के बाद वो बाथरूम से बाहर निकलकर आई और मेरे बगल में बैठ गई और मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़कर हिलाने लगी.
अब में उनके होंठो को चूसने लगा था. फिर थोड़ी देर तक उनके होंठो को चूसने के बाद मैंने कहा कि में आपकी चूत चूसूँगा और उनकी दोनों टांगे फैलाकर उनको बेड पर सीधा लेटा दिया. फिर में उनकी चूत को अपनी दो उंगलियों से फैलाकर उनकी रसीली चूत को अपनी जीभ से हल्के-हल्के चूसने लगा. अब वो आआआआआहह पूरा चूस लो मेरी चूत को ववववऊऊऊहह हनननननणणनह बहुत अच्छा लग रहा है बोले जा रही थी.
अब वो भी अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगी थी, तो में भी उनकी चूत में अपनी पूरी जीभ डालकर उनकी चूत को चूसने और चाटने लगा. अब वो जोर-जोर से आआअहह चूस लो, मेरी चूत का पूरा रस चूस लो आआआआअहह बोले जा रही थी. अब उनकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी और में उनकी चूत का रस बड़े मज़े से चूसता जा रहा था.
फिर उन्होंने सिसकारी लेते हुए कहा कि साहिल अब अपना लंड डाल भी दो, मेरी चूत में बर्दाश्त नहीं हो रहा है. फिर मैंने अपने लंड को गायत्री भाभी की चूत पर रखकर एक हल्का सा धक्का लगाया तो मेरा आधा से ज्यादा लंड उनकी चूत के अंदर चला गया और वो ज़ोर से सस्स्स्स्सआआआअ जल्दी से पूरा डाल दो कहने लगी. फिर मैंने एक जोर का धक्का मारा कि मेरा पूरा लंड गायत्री की चूत में घुस गया और वो हहाअ आआअहह और तेज चोदो मुझे, आज मुझे जी भरकर चोदो बोले जा रही थी. अब में भी अपनी पूरी स्पीड से उनकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा था. अब वो भी अपनी कमर उठा-उठाकर मेरा साथ दे रही थी और बोले जा रही थी कि आज मेरी चूत को फाड़ डालो, उसे खूब चोदो, चोदते रहो और फिर वो बोलते-बोलते झड़ गई, लेकिन में उसे अपनी स्पीड से चोदे जा रहा था. अब उनकी चूत में से रस बाहर निकल रहा था और फच-फच की आवाजें आने लगी थी.
फिर तब मैंने उनसे कहा कि में आपको दूसरी स्टाइल से चोदना चाहता हूँ. तो वो बोली कि अब मुझे कौन सी स्टाइल से चोदोगे? तो मैंने कहा कि आप ज़मीन पर लेट जाओ और अपने दोनों पैरो को उठाकर बेड पर रख दीजिए, तो उन्होंने ऐसा ही किया और फिर में उनके दोनों पैरो के बीच में आ गया और उनके दोनों पैरो को फैलाकर अपने दोनों कंधो पर रखकर, उनकी चूत के छेद पर अपना लंड रखकर धक्के मारने लगा. इस तरीके से उन्हें भी अच्छा लगने लगा था और वो बोली कि बहुत मज़ा आ रहा है मेरे राजा, जैसे चोदना हो चोदो मुझे.
अब मुझे उसे करीब 10 मिनट तक इस स्टाइल में चोदने के बाद लगा कि में झड़ने वाला हूँ तो मैंने उनसे कहा कि में झड़ने वाला हूँ, में अपना वीर्य कहाँ निकालूं? तो उन्होंने कहा कि मेरी चूत में ही निकाल दो. फिर मैंने अपना पूरा वीर्य उनकी चूत में ही निकाल दिया और फिर में बेड पर आकर लेट गया. तभी उनकी नज़र घड़ी पर गई तो उन्होंने देखा कि 5 बजने वाले है, तो वो बोली कि पीयूष के आने का टाईम हो गया है, तुम शाम को आना और फिर मैंने अपने कपड़े पहने और चला आया.
फिर जब में शाम को पीयूष को पढ़ाने के लिए गया तो 15-20 मिनट के बाद उन्होंने मुझे अंदर रूम में बुलाया और हम दोनों बातें करने लगे. फिर उन्होंने मुझे कल दिन में आने के लिए बोला तो मैंने कहा कि ठीक है. तो तभी उन्होंने मेरे होंठो पर ज़ोर से किस किया और कहने लगी कि जो मज़ा तुम्हारे साथ आता है वो मुझे उनके साथ नहीं आता है. दोस्तों फिर दूसरे दिन उनके घर जाकर मैंने भाभी को खूब चोदा.a
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फटी सलवार से चूत का दीदार

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम दीनू है और एक बार मेरा तबादला 1 साल के लिए हैदराबाद के एक छोटे से गाँव में हुआ था और वो मेरे मुंबई दफ़्तर का क्लर्क मिस्टर आलम का गाँव था. फिर उसने कहा कि साहब अगर आपको वहाँ कोई रहने की दिक्कत हो तो आप मेरे गाँव के मकान में रह लेना, वहाँ मेरा परिवार रहता है आपको कोई परेशानी नहीं होगी.
फिर मैंने कहा कि आलम जी यह तो बहुत अच्छा है, में ऐसा करता हूँ कि तुम्हारे घर पर ही किराएदार की तरह रह लूँगा, वैसे वहाँ कौन-कौन रहते है? तो वो बोला कि मेरी माँ और 3 बहनें और मेरी बीवी रहती है. फिर मैंने कहा कि कोई बात नहीं में जितने दिन वहाँ रहूँगा, उन लोगों का ख्याल रखूँगा, तुम कोई बात की चिंता मत करना. फिर आलम ने अपने गाँव में फोन करके मेरे आने की और रहने की सूचना अपने परिवार वालो को दे दी.
फिर जब में उसके गाँव पहुँचा तो उसके परिवार वालों ने मेरी खूब खातिरदारी की और मुझे रहने के लिए एक कमरा भी दे दिया. उनका मकान काफ़ी बड़ा था और आलम की माँ नादिया खूबसूरत 40 वर्षीय थोड़ी मोटी महिला थी, उसका पति कई सालों से दुबई में काम करता है और नादिया की 2 बेटी 21 साल की सादिया शादिशुदा महिला थी, वो कुछ दिनों के लिए अपनी माँ के पास आई थी, दूसरी लड़की 19 साल की नज़मा और आलम की बीवी 21 वर्षीय रुकसाना थी. वो सभी लोग ना ज़्यादा मोटे ना पतले शरीर वाले थे और तंदुरुस्त भी थे, आलम के एक 9 महीने का बच्चा भी था, उस परिवार के सभी लोग बहुत ही अच्छे थे.
अब में कुछ ही दिनों में उन लोगों से काफ़ी घुल-मिल गया था. अब वो लोग मुझसे घर में पर्दा नहीं करते थे और काफ़ी खुलमिल गये थे. अब में भी परिवार के एक सदस्य की तरह रहने लगा था और उन लोगों को सब्जियां या बाज़ार से सामान लाने में मदद करता था. अब सादिया मुझसे काफ़ी घुल-मिल गयी थी और वो मज़ाक भी बहुत करती थी. हम अक्सर घर में बैठ कर बातें करते रहते थे और कभी- कभी मज़ाक-मज़ाक में वो मुझसे डबल मीनिंग वाली बातें करती थी. जैसे एक दिन में कमीज़ पहनकर बटन लगा रहा था तो वो बोली कि दीनू भाईजान इतने बड़े हो गये फिर भी लगाना नहीं आता, तो में यह सुनकर बोला कि क्या मतलब?
फिर वो हँसते हुए बोली कि वास्तव में आपको सिखाना पड़ेगा की कैसे लगाया जाता है? देखो आपने शर्ट की बटन ऊपर नीचे लगाई है, वो इसी तरह की बातें करती थी. फिर एक दिन हम दोनों बातें कर रहे थे, तो वो मेरे पास आई और बोली कि दीनू भाईजान मुझे सुई में धागा पिरोकर दीजिए ना, तो में सुई पकड़कर धागा पिरोने लगा, तो वो हँसते हुए बोली कि भाईजान थूक लगाकर डालो तो आसानी से घुस जाएगा, वो इसी तरह की मौके-मौके पर डबल मीनिंग वाली बातें करती थी.
अब में मन ही मन में उसे चोदने की प्लानिंग करने लगा था, क्योंकि वो काफ़ी सेक्सी थी. उस दिन शनिवार था मेरी छुट्टी थी इसलिए में सुबह देर तक सोता था, वैसे मेरी नींद 9 बजे खुल गयी थी, लेकिन आलस के कारण में आँखे बंद करके सोया था. अब मेरे दिमाग़ में सादिया को कैसे चोदा जाए, बस यही घूम रहा था? और यह सोच-सोचकर मेरा लंड खड़ा हो गया था.
फिर मुझे ख्याल आया की सादिया मुझे जगाने ज़रूर आएगी तो मैंने जानबूझ कर अपनी लुंगी जांघो पर से हटाई और अपने खड़े लंड को अपनी अंडरवियर से बाहर निकाल लिया और आँखे बंद करके उसका इंतज़ार करने लगा. फिर करीब 10 मिनट के बाद वो आई और दरवाजा खोलकर मेरे कमरे में दाखिल हो गयी. फिर मैंने अपनी थोड़ी आँखे खोलकर देखा तो वो एकटक मेरे लंड की और देख रही थी. फिर मैंने भी करवट बदली तो मेरा खड़ा लंड लुंगी के अंदर छुप गया.
फिर वो बोली कि भाईजान आज उठना नहीं है क्या? तो मैंने सीधा होकर एक लंबी अंगड़ाई ली तो देखा कि मेरा लंड अब भी लुंगी के बाहर आकर खड़ा था. अब यह देखकर वो जाने लगी तो में भी कुछ नहीं बोला और फ्रेश होकर नाश्ता करने लगा. अब दोपहर को में सादिया और रुकसाना (उसकी भाभी, आलम की वाईफ) टी.वी पर पिक्चर देख रहे थे. अब सादिया रुकसाना के पीछे बैठी थी और में इस तरफ. फिर इतने में रुकसाना का बच्चा रोने लगा तो रुकसाना अपनी कमीज़ ऊपर करके उसे दूध पिलाने लगी.
अब वो पिक्चर में इतनी मस्त थी कि पूछो मत, अब उसे यह भी ख्याल नहीं आया कि में वहाँ बैठा हूँ. अब मेरा ध्यान पिक्चर में नहीं था, अब में बार-बार रुकसाना की चूचीयों को देख रहा था. फिर इतने में मेरी और सादिया की नज़र मिली. अब वो मुझे रुकसाना की चूचीयों को घूरते हुए देख रही थी. फिर जब हमारी नज़र आमने सामने हुई तो वो मुझे देखकर मंद-मंद मुस्कुरा रही थी, तो में शर्म के मारे उठकर जाने लगा.
फिर वो बोली कि भाईजान कहाँ जा रहे हो? (रुकसाना की चूचीयों की तरफ इशारा करके बोली) देखो कितनी अच्छी पिक्चर है? तो मैंने हँसते हुए कहा कि जरा बाथरूम जाकर आता हूँ. फिर जब में पेशाब करके वापस आया तो मैंने देखा कि सादिया और रुकसाना आपस में बातें कर रही थी, तो में एक साईड में होकर उनकी बातें सुनने लगा. अब सादिया रुकसाना से कह रही थी कि भाभी जब तुम मुन्ने को दूध पिला रही थी तो तब दीनू भाईजान आपकी चूची को घूर-घूरकर देख रहे थे.
फिर सादिया ने उसे सुबह वाला नजारा भी पेश कर दिया और कहने लगी कि सच्ची भाभी जान उसका लंड तो काफ़ी मोटा और लंबा है, मैंने आज तक इतना मोटा और लंबा लंड नहीं देखा. फिर जब में रूम के अंदर गया तो वो दोनों चुप होकर पिक्चर देखने लगी. अब में शाम को 7 बजे अपने कमरे में बैठकर विस्की पी रहा था तो सादिया मेरे कमरे में आई.
अब पहले तो वो मुझे विस्की पीते हुए देखकर चौंक गयी, लेकिन फिर मेरे सामने जमीन पर बैठ गयी, उसके चूतड़ जमीन पर थे, लेकिन वो उसके दोनों पैरो के घुटने ऊपर करके बैठी थी, जिससे मुझे उसकी सलवार का वो हिस्सा नज़र आने लगा जिसमें उसकी चूत छुपी रहती है, उसने पीले रंग का सलवार और कमीज़ पहना था. फिर जब मेरी नज़र उसकी सलवार पर पड़ी तो में एकटक वहाँ देखने लगा, मैंने देखा कि उसकी सलवार की सिलाई (जहाँ चूत होती है) उखड़ी हुई थी और उसके छोटे-छोटे झाटों के बीच में से उसकी चूत का दाना साफ़-साफ़ दिख रहा था.
फिर अचानक से उसने मुझसे कहा कि भाई जान कहाँ खो गये? अब उसके इस तरह से पूछने पर में सकपका गया और अपनी नजरे हटाकर बोला कि कुछ नहीं, कुछ नहीं और फिर हम इधर उधर की बातें करने लगे. फिर उसने अचानक से मेरे सामने अपनी सलवार के ऊपर से अपनी चूत खुजानी चाही तो उसकी उंगली फटे हुए सलवार से उसकी चूत में घुस गयी और जब उसे इस बात का एहसास हुआ तो वो बोली कि अरे बाप रे. अब वो समझ गयी थी कि मैंने उसकी फटी हुई सलवार से उसकी चूत का दीदार कर लिया है, तो वो जाने लगी.
फिर मैंने कहा कि रुक जाओ सादिया शरमाओ मत, जो हो चुका वो हो चुका है और मैंने भी घूँघट में छुपे मुखड़े को देख लिया है. फिर तब वो बोली कि भाईजान यह क्या? सिर्फ़ झलक देखते ही मुँह में पानी आ गया, रात को मेरा इंतज़ार करना में पूरा जलवा दिखा दूँगी और यह कहकर वो मेरे कमरे से निकल गयी. फिर हम सबने साथ मिलकर रात 9 बजे खाना खाया और करीब 11 बजे हम सब सोने चले गये.
फिर रात को करीब 1 बजे दरवाजा खुलने की आवाज़ से मेरी आँख खुली तो मैंने देखा कि सादिया मेरे कमरे में दाखिल होकर दरवाजा बंद कर रही थी और मेरे करीब आकर मुझसे लिपटकर चुम्मा लेने लगी. फिर में भी उसे चूमने लगा और साथ ही साथ उसकी चूचीयों को दबाने और सहलाने लगा. फिर कुछ देर के बाद में उसके और अपने सारे कपड़े उतारकर नंगे हो गये और 69 की पोज़िशन में होकर वो मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूस रही थी और में उसकी चूत के दाने को अपनी जीभ से चूस रहा था.
फिर थोड़ी देर के बाद वो अपने मुँह से मेरे लंड को बाहर निकालकर बोली कि दीनू अब रहा नहीं जाता है, डाल दो तुम्हारा मोटा लंड मेरी चूत में, लेकिन जरा आहिस्ता-आहिस्ता डालना क्योंकि तुम्हारा लंड काफ़ी मोटा और लंबा है. फिर मैंने उसके दोनों पैरों को फैलाकर उसकी गांड के नीचे 2-2 तकिये रख दिए, जिससे उसकी चूत ऊपर उठ गयी.
फिर मैंने अपने लंड के सुपाड़े से उसकी चूत के दाने को थोड़ी देर तक रगड़ा और फिर थोड़ा ज़ोर लगाकर एक धक्का मारा तो मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया. फिर वो बोली कि उूउउइईईईईई माँआआआआ में मर गयी रे, हाईईईई दीनू दर्द हो रहा है, ज़रा आहिस्ता करो. फिर मैंने कुछ देर तक बिना हीले अपना लंड उसकी चूत में डाले रखा और उसकी चूचीयों को सहलाता रहा. फिर मैंने अपनी कमर उठाकर एक जोरदार शॉट लगाया तो मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में समा गया. अब उसके मुँह से आआईईईईईई अल्लहहाआआआअ माररररर डालाआाआअ रे, हाईईईईईई उूउउफफफफफ्फ़ कितना ज़ालिम लंड है? आआईई रे, हाईईईईईईईई ऐसा लग रहा है कि जैसे मेरी चूत में कोई गर्म-गर्म रोड घुसा दी है.
फिर में करीब 10-15 मिनट तक रुक-रुककर पहले तो धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा तो उसे भी जोश आने लगा और वो भी अपने मुँह से आहें भरने लगी और कहने लगी कि दीनू डार्लिंग जरा ज़ोर-ज़ोर से कस-कसकर चोदो मुझे, बड़ा मज़ा आ रहा है, वाकई में तुम्हारा लंड जानदार है, मैंने आज तक ऐसा लंड नहीं देखा.
फिर मैंने भी अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और इस दौरान वो 2 बार झड़ चुकी थी. अब उसकी चूत 2 बार झड़ने के कारण गीली और ढीली हो गयी थी और मेरे कस-कसकर चोदने के कारण पूरे कमरे में फचा फूच फचा फूच की आवाज़े गूँजने लगी थी, वो अब तक 2 बार झड़ चुकी थी.
फिर करीब और 10-15 मिनट के बाद में भी उसकी चूत में ही झड़ गया और उसके बगल में आकर लिपटकर सो गया. फिर वो बोली कि दीनू वाकई में तुम्हारा लंड काफ़ी जानदार है, तुमने मुझे बुरी तरह से थका दिया मैंने ऐसा लंड आज तक नहीं देखा. फिर करीब 1 घंटे के बाद मैंने उसे फिर से घोड़ी बनाकर चोदा और फिर वो सुबह करीब 4 बजे अपने कमरे में चली गयी. फिर दूसरे दिन दोपहर को उसका पति उसे लेने आया और वो दोनों शाम को चले गये. अब मेरा लंड फिर से उदास होने लगा था.
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बहन की सील तोड़ी देशी घी लगाकर

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम हैरी है और मेरे दो बहनें है. एक की शादी हो चुकी है और एक अभी कुंवारी है. ये बात 1 महीने पुरानी है. में और मेरी बहन घर पर अकेले थे और में सो रहा था तो मुझे मेरी बहन की आवाज़ सुनाई दी, वो बाथरूम में नहा रही थी. अब मेरा लंड वैसे ही तना हुआ था तो मैंने सोचा कि आज अपना काम हो जाएगा और एक चूत चोदने के लिए मिल जाएगी, मम्मी भी घर पर नहीं है.
मैंने बाथरूम के दरवाजे पर अपनी आँखे लगाकर अंदर देखा तो मुझे ज्योति की चूत की झलक मिल गयी. अब मेरा लंड और तन गया था और अब मेरा मन चूत चोदने का होने लगा था. अब वो अपना शरीर पोंछ रही थी तो में झट से कमरे में अंदर आ गया और सोने का नाटक करने लगा. फिर ज्योति को लगा कि में सो गया हूँ, इसलिए वो टावल लपेटकर कमरे में आ गयी, जब उसने नीचे ब्रा और पेंटी पहन ही रखी थी, जब कमरे की लाईट भी बंद थी तो उसे भी कोई डर नहीं था, लेकिन में उसे देख रहा था.
फिर उसने पहले लाईट ऑन की और देखा कि में सो रहा हूँ या नहीं, लेकिन में तो सोने का नाटक कर हूँ इसका उसे यकीन नहीं हुआ और उसने अपने शरीर से टावल अलग कर दिया, तो में तो उसे देखता ही रह गया और उसका शरीर दूध जैसा था. अब वो अपने शरीर पर क्रीम लगा रही थी.
फिर में धीरे से उठा और उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया. अब वो अपने शरीर पर क्रीम लगा रही और अब मेरा लंड सिर्फ़ चूत चाहता था. अब जो भी हो, लेकिन अब मुझे तो सिर्फ चूत चाहिए थी तो मैंने धीरे से अपने लंड को अपनी शर्ट से बाहर निकाला और उसकी गांड पर दबाने लगा. तो वो पीछे मुड़ने की कोशिश करने लगी, तो मैंने उसे पकड़ लिया और वैसे ही खड़े रहने के लिए कहा. फिर वो बोली कि भैया नहीं ये पाप है, तो मैंने कहा कि किसी को कुछ पता नहीं चलेगा, तू सिर्फ़ चुप हो जा.
फिर में उसे उठाकर अपने बेड पर ले आया और उसको और अपने आपको एक चादर से ढक लिया. फिर मैंने पहले अपने कपड़े उतारे और फिर उसकी पेंटी और ब्रा उतारी. अब ज्योति मेरे साथ मेरे बेड पर नंगी लेटी थी और अब में उसे फ्रेंच किस कर रहा था और वो मेरा लंड सहला रही थी. फिर मैंने उससे कहा कि ज्योति देख तेरी चूत टाईट और कुंवारी है और मेरा लंड मोटा है तो तुझे दर्द होगा तो सह लेना और खून भी निकलेगा, ठीक है.
फिर उसने हाँ में अपना सिर हिला दिया, तो तब मैंने अपना लंड उसकी चूत पर लगाया और अपने लंड को उसकी चूत में डालने लगा. उसकी चूत बहुत टाईट थी. अब उसे दर्द भी हो रहा था, लेकिन अब वो भी मेरा सहयोग दे रही थी और बोली कि भैया क्रीम लगा लो या फ्रिज में देशी घी रखा है, ले आओ.
फिर मैंने फ्रिज में से देशी घी निकाला और थोड़ा अपने लंड पर और थोड़ा उसकी चूत पर लगाया और धीरे-धीरे अपना लंड उसकी चूत में घुसाने लगा.
फिर जैसे ही मेरे लंड का सुपड़ा उसकी चूत के अंदर गया, तो मुझे ऐसा लगा कि जैसे में जन्नत में पहुँच गया, लेकिन अब ज्योति को बहुत दर्द हो रहा था और उसके आँसू निकल रहे थे, तो मैंने उसके बूब्स दबाने और चूसने शुरू कर दिए. अब उसे थोड़ा-थोड़ा मज़ा आने लगा था. फिर 10 मिनट के बाद ज्योति बोली कि भैया अभी आपका आधा लंड तो बाहर ही है, तो मैंने कहा कि नहीं ज्योति तुझे दर्द हो रहा है ना, तो ज्योति बोली कि भैया मुझे तो ये दर्द होगा ही और पूरा डालने पर भी उतना ही दर्द होगा, जो अभी हो रहा है और बोली कि भैया आपको बस चूत मारनी है तो पूरा घुसाकर मारो, बस मेरा मुँह किसी चीज़े से दबा देना ताकि मेरी चीख ना निकले. फिर मैंने उस
के होंठो पर अपने होंठ रखे और एक ही झटके में अपना पूरा लंड ज्योति की चूत में घुसा दिया, तो उसकी चीख मेरे मुँह में ही दबकर रह गयी और उसकी चूत की झिल्ली फट गयी और खून बहने लगा.
फिर थोड़ी देर तक हम उसी स्टाइल में पड़े रहे. अब में धीरे-धीरे अपने लंड को आगे पीछे करने लगा था और अब हमें 20 मिनट हो चुके थे और मंजिल भी दूर थी. फिर में ज्योति के ऊपर आ गया और उसकी चुदाई शुरू की. अब पहले मुझे ज़ोर लगाना पड़ रहा था, लेकिन फिर मैंने धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढाई तो चुदाई का मज़ा शुरू हो गया.
अब सुबह के 6 बज रहे थे और हम भाई-बहन किसी मियाँ बीवी की तरह चुदाई में लगे हुए थे. अब ज्योति को भी बड़ा मज़ा आ रहा था और अब कमरे के अंदर ज्योति की आवाज़ और हमारी चुदाई की आवाज़ गूँज रही थी. अब में जन्नत में था और मुझे ज्योति की चूत मारने में बड़ा मज़ा आ रहा था. अब हमें चुदाई करते हुए 30 मिनट हो चुके थे तो तभी ज्योति बोली कि भैया मेरी चूत से कुछ निकलने वाला है. अब ज्योति की चूत से उसका पानी बूंद-बूंद करके गिरने लगा था.
अब मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में घुसा हुआ था और वो एकदम शांत हो चुकी थी. फिर तभी मुझे भी लगा कि मेरा लंड भी झड़ने वाला है तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और ज़ोर-ज़ोर से शॉट लगाने लगा, तो तभी मेरे लंड ने ज़ोरदार पिचकारी छोड़ दी और मेरा वीर्य मेरी बहन की चूत में गिरने लगा और में ज्योति से चिपक गया तो ज्योति भी एकदम टाईट होकर मुझसे चिपक गयी.
फिर हम दोनों भाई-बहन उसी तरह 30 मिनट तक सोते रहे और अब मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में था और फिर से चुदाई करने के तैयार हो रहा था और ज्योति भी चुदने के लिए तैयार थी और फिर हमने एक और बार चुदाई की और तब से अब तक मैंने ज्योति को कई बार चोदा है.
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बुआ के साथ बेड पर मस्ती

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रिंकू है और में एक गोरा अच्छा दिखने वाला 22 साल का लड़का हूँ. दोस्तों आज में आप सभी लोगों के लिए अपनी एक सच्ची चुदाई की घटना और मेरा पहला वो सच्चा सेक्स अनुभव लेकर आया हूँ जिसमे मैंने बहुत मज़े लिए और में उम्मीद करूंगा कि यह कहानी आप सभी जरुर अच्छी लगेगी, क्योंकि में सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ और यह सब मुझे बड़ा अच्छा लगता है.
दोस्तों मैंने अपने 12th के पेपर देने के बाद अपने पापा की सबसे छोटी बहन जिसका नाम सुमन है उनको चोदा, मतलब मेरी बुआ. में उस समय अपनी छुट्टियाँ होने की वजह से उनके घर पर अपनी छुट्टियाँ बिताने गया था. दोस्तों मेरी बुआ सुमन एक 35 साल की गोरी थोड़ी मोटी मॉर्डन दिखने वाली बड़ी सेक्सी थी. मेरी बुआ और फूफाजी की शादी को पूरे दस साल हो चुके थे, लेकिन उनको अब तक अपना कोई बच्चा नहीं था.
दोस्तों मेरे फूफाजी रेलवे में एक बहुत बड़े ऑफिसर थे और मेरी बुआ शादी में दुल्हन को तैयार और उसको सजाने संवारने का काम करती थी. उन दोनों की अपनी जिंदगी बहुत प्यार से बीत रही थी और वो दोनों बहुत खुश थे. दोस्तों में 14 मई को अपने स्कूल की गर्मियों की छुट्टियाँ लगने पर सूरत से पूना मेरी बुआ के घर पर पहुंच गया और जब में पहुंचा तो मैंने दरवाजे पर लगी घंटी को बजाया.
मेरी बुआ ने आकर अपने घर का दरवाजा खोलते ही बहुत खुश होकर मुझसे कहा क्यों रिंकू कैसे हो यह बात बोलते हुए उन्होंने मुझे धीरे से अपने गले लगा और लिया मुझे उनका यह व्यहवार हमेशा से ही बहुत अच्छा लगता इसलिए मेरी अपनी बुआ से बहुत अच्छी बनती है. दोस्तों में अपनी बुआ को करीब चार साल के बाद मिल रहा था, इसलिए वो मुझे देखकर चकित होने के साथ साथ बहुत खुश भी थी. उस समय बुआ ने जींस और एक बहुत टाईट टीशर्ट पहनी हुई थी उन कपड़ो में उनके शरीर के हर एक अंग की बनावट का ठीक आकार बाहर से ही नजर आ रहा था.
फिर मुझे अंदर बुलाकर उन्होंने मुझे मुहं हाथ धोने के बाद चाय और नाश्ता बनाकर दिया और उन्होंने भी मेरे साथ बैठकर बातें हंसी मजाक करके चाय का पूरा मज़ा लिया. फिर वो कुछ देर बाद मुझसे बोली कि रिंकू तुमने बहुत अच्छा किया जो तुम यहाँ पर आ गए, क्योंकि तुम्हारे फूफाजी चार दिन के लिए नासिक गए हुए है और मेरे पास फिलहाल अभी कोई भी काम नहीं है इसलिए में भी घर पर अकेली बोर हो रही हूँ. तुम्हारे आ जाने से मेरा भी तुम्हारे साथ मन लगा रहेगा और फिर बुआ ने मेरे बेग से कपड़े निकालकर उनको वो अलमारी में रखने लगी.
दोस्तों मेरी बुआ के बूब्स उनकी टी-शर्ट में बहुत आकर्षक आकार में थे और उनकी गांड तो बस आप पूछिए ही मत मोटी और पीछे से बाहर आकर थोड़ी सी ऊपर निकली हुई थी. दोस्तों मेरी बुआ का घर एक बेडरूम, हॉल और किचन का था. फिर में नहाने के लिए बाथरूम में चला गया और में बाथरूम में नहा रहा था कि तभी अचानक से मेरी नज़र मेरी बुआ की ब्रा और उनकी पेंटी पर पड़ गई और फिर मैंने जैसे ही उनकी पेंटी को अपने हाथ में लिया कि कुछ ही सेकिंड में मेरा लंड पूरा का पूरा तनकर खड़ा हो गया, क्योंकि मेरी बुआ की वो पेंटी बहुत आकर्षक थी, जिसको देखकर मेरा लंड अपने आप पर काबू नहीं कर सका और बुआ की वो पेंटी कमर से बहुत बड़े आकार की थी और अब मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं गया और में बिल्कुल पागल मदहोश होकर जाने क्या मन में सोचकर बुआ की पेंटी को अपने चेहरे से लगाकर दूसरे हाथ से अपने खड़े लंड को धीरे धीरे हिलाकर सहलाकर उनके नाम से मुठ मारने लगा.
मुझे यह सब करने में बड़ा मज़ा आ रहा था और में उस समय किसी दूसरी दुनिया में पहुंच चुका था वो सब अहसास में किसी भी शब्दों में आप लोगों को नहीं बता सकता कि मैंने उस समय क्या क्या महसूस किया? तभी कुछ देर बाद बुआ ने बाहर से आवाज़ लगाई और वो मुझसे पूछने लगी कि रिंकू तुम खाने में क्या खाओगे? तो मैंने उनसे कहा कि आप कुछ भी बना दो और बुआ की आवाज़ सुनते ही मेरे लंड से पानी निकल गया.
फिर मैंने अपने लंड को अच्छी तरह से धोकर साफ किया और में नहाकर कुछ देर बाद बाहर आ गया और उसके बाद मैंने और बुआ ने एक साथ में बैठकर दोपहर का खाना खा लिया. अब हम दोनों उसके बाद टीवी चालू करके फिल्म देखने लगे और ऐसे ही यहाँ वहां की बातें करते हुए दोपहर और उसके बाद शाम भी निकल गयी मुझे पता ही नहीं चला.
फिर रात के करीब 10.30 बज चुके थे और उस समय भी में टीवी देख रहा था और बुआ अपने हाथ में टावल लेकर बाथरूम की तरफ जाते हुए मुझसे बोली कि रिंकू तुम हॉल में मत सोना वहां पर बहुत गरमी है, में नहाने जा रही हूँ और तुम तब तक बेडरूम में जाकर ऐसी चालू करके सो जाना. फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है और फिर में बुआ के कहने पर उनके बेडरूम में ऐसी चालू करके शॉर्ट्स और टीशर्ट को पहनकर बुआ के उस बेड पर जाकर लेट गया और मेरे कुछ देर लेटे रहने के बाद बुआ भी बाथरूम से नहाकर सीधी बेडरूम में आ गई.
फिर मैंने अचानक से देखा कि बुआ गरमी ज्यादा होने की वजह से सिर्फ़ एक पतली सी टी-शर्ट जो सिर्फ़ उनकी पेंटी को ढक रही थी और बुआ की मोटी गोल गोरी जांघे पूरी तरह से मुझे साफ दिख रही थी. में वो सब कुछ देखकर बहुत चकित था और फिर बुआ अपने दोनों हाथों से अपने बालों को ठीक करते हुए मेरे पास में बेड पर मुझसे गुड नाइट बोलकर लेट गई, लेकिन अब यहाँ पर मेरी हालत बहुत खराब हो चुकी थी और मेरी शॉर्ट्स में मेरा लंड पूरी तरह से तनकर खड़ा हो चुका था और फिर में करीब आधे घंटे तक सिर्फ़ बुआ के बारे में सोच रहा था.
फिर कुछ देर बाद मैंने बुआ की तरफ देखा तो वो अपनी कमर को मेरी तरफ करके सो चुकी थी, लेकिन मुझसे अब रहा ना गया और मैंने थोड़ी हिम्मत करके अपना एक हाथ बुआ की गांड की तरफ सरकाते हुए अपनी दो उँगलियों से मैंने बुआ की टी-शर्ट को हल्के से पकड़कर एक साईड से उनकी कमर से ऊपर तक कर दिया जिसकी वजह से अब मुझे बुआ की गोरी मोटी गांड उस सफेद रंग की सिल्की पेंटी में उस हल्की लाइट की रोशनी में साफ साफ दिख रही थी.
अब मेरी हालत कुछ ऐसी हो गई थी कि उसका परिणाम चाहे कुछ भी आए और मैंने अब पूरी तरह से जोखिम लेने की बात मन ही मन सोच ली थी. मैंने अपनी पूरी हथेली धीरे से बुआ की गांड के एक तरफ से खुले हुए पूरे हिस्से पर रख दिया और तब मैंने महसूस किया कि बुआ की गांड की चमड़ी बहुत मुलायम और चिकनी थी, वो बिल्कुल अलग अहसास था जिसको में किसी भी शब्दों में नहीं लिख सकता और अब में अपनी ऊँगली से बुआ की गांड को सहलाने लगा, लेकिन बुआ अभी भी बड़ी गहरी नींद में सोई हुई थी और उनको किसी भी बात का होश नहीं था, क्योंकि वो शुरू से ही बड़ी गहरी नींद में सोती है और यह बात मुझे पहले से ही पता थी.
फिर मैंने कुछ देर बाद अपनी कमर को सरकाते हुए बुआ की गांड के पीछे हल्के से अपना तनकर खड़ा लंड चिपका दिया और तब मैंने महसूस किया कि बुआ की गांड इतनी मुलायम थी कि मेरे लंड का टोपा उनकी गांड के बीच की मुलायम दरार में फंसा हुआ था.
उनकी गांड की गरमी को पाकर मेरे अंदर एक अजीब सा जोश आ गया और मैंने जल्दी से अपना शॉर्ट्स नीचे करके अपना लंड बाहर निकाल लिया और अब मैंने अपनी ऊँगली से बुआ की गांड के ऊपर से पेंटी को थोड़ा सा साइड में कर दिया और उसके बाद मैंने अपना लंड बुआ की गांड की दरार के बीच में दबा दिया जिसकी वजह से अचानक से बुआ ने अपनी सांसे रोक ली और वो अपने मुहं से शीईईईइई करके दर्द भरी आवाज़ करने लगी. मैंने उस आवाज को सुनकर डरकर तुरंत अपने आप को वहीं उसी जगह पर रोक दिया, लेकिन मुझे बिल्कुल भी पता नहीं चला कि यह किस तरह की आवाज़ थी.
फिर एक मिनट के बाद मैंने महसूस किया कि सब कुछ वापस पहले जैसा हो गया है और अब मेरा लंड पूरी तरह से बुआ की गांड की मुलायम चमड़ी से चिपका हुआ था और कुछ देर थोड़ा सा इंतजार करने के बाद मैंने अपने एक हाथ की ऊँगली से बुआ के एक कूल्हे को ऊपर करके मैंने अपना लंड गांड के बीच में ले जाकर पेंटी को किनारे से हटाते हुए बुआ की जांघो में ज़ोर से धक्का देते हुए अपने लंड को चूत के अंदर डाल दिया जिसकी वजह से बुआ ने एक बार फिर से शीईईईई अईईईईई करके दर्द भारी आवाज़ निकाली, लेकिन अब मेरी हालत ऐसी थी कि वो अगर जाग भी रही हो या सो रही हो मुझे उस बात से कोई भी फर्क नहीं पड़ने वाला था और में अब रुकने वाला नहीं था. मुझे कैसे भी करके अब अपने खड़े लंड को शांत करना था और उनकी चूत में अपना वीर्य निकालकर अपने लंड का काम खत्म करना था.
फिर चाहे उसके लिए मुझे अब कुछ भी करना पड़े, मुझे उस बात से कोई मतलब नहीं था और में उस समय बहुत जोश में था.
दोस्तों अब मेरा मोटा, लंबा लंड पूरा का पूरा बुआ की गरम खुली हुई चूत की मुलायम चमड़ी में अपनी जगह बना था और कुछ देर बिना किसी हलचल के पड़े रहने के बाद में अब सही मौका देखकर अपनी कमर को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा. मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आ रहा था और मेरा लंड बुआ की गीली चिकनी चूत में फिसलता हुआ अंदर बाहर हो रहा था और में अपने काम में लगातार लगा रहा और अचानक से करीब दस मिनट के बाद मेरे शरीर में बड़ा अजीब सा हुआ और मेरे लंड से बहुत सारा गरम गरम वीर्य बाहर निकाला जो मेरे लंड के चूत बाहर होने की वजह से वो थोड़ा सा बुआ की चूत में जा गिरा और थोड़ा सा बुआ की पेंटी और उनकी गोरी जांघो पर गिर गया और मैंने महसूस किया कि वीर्य के बाहर निकलते ही मेरा लंड कुछ ही देर बाद मुरझाने लगा और उसका आकार अब धीरे धीरे छोटा होने लगा.
फिर मैंने बुआ की पेंटी और टी-शर्ट को पहले की तरह ठीक करने के बाद में अपने कपड़ो को भी ठीक करके बुआ से थोड़ा दूर सरकते हुए लेट गया. तभी तुरंत बुआ बेड से उठ खड़ी हुई और वो बाथरूम में होकर आई और वो दोबारा मेरे पीछे आकर सो गयी और फिर में भी गहरी नींद में चला गया.
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