कविता और सविता की लेस्बियन चुदाई

हैल्लो दोस्तों, हमारे शहर में बहुत सारी पढ़ाई के लिये कोचिंग है जहाँ पर दूर दूर से बच्चे अपनी पढ़ाई के लिए आते है, इनमें बहुत सी लड़कियाँ भी होती है और उन लोगों को रहने के लिए कमरे किराये पर लेने पड़ते है.
दोस्तों हम लोगों को भी अपने नये मकान जिसको हमने पूरा का पूरा हिस्सा उनके लिए ही बनवाया है वो किराए पर देना था तो इसलिए हमारे पास बहुत सारे बच्चे कमरे देखने आई, लेकिन कई लोगो के आने और वापस चले जाने के बाद दो लड़कियाँ हमारे घर पर आई जिनको हमने अपने रूम को किराए पर दे दिया.
इसमें मेरे घर वालों की मर्जी थी और वो भी यही चाहते थे, क्योंकि एक तो लड़कियों से घर में रौनक बनी रहती है और उनका व्यहवार सभी से ठीक रहता है, उनकी कोई गलत आदत या हरकते भी बहुत कम होती है और गुंडागर्दी का कोई लफड़ा भी नहीं होता, इसलिए यह सभी बातें सोच समझकर मैंने घरवालों ने उन दोनों लड़कियों जिनका नाम कविता और सविता था उनको किराए पर हमारे घर में रख लिया. दोस्तों मुझे बिल्कुल भी पता नहीं था कि वो चेहरे से मासूम, सीधी-साधी दिखने वाली क्या गुल खिलाने वाली है? वो सब मुझे भी कुछ दिनों के बाद में पता चला.
दोस्तों में हर रात को छुप छुपकर उनके बेडरूम के अंदर का नज़ारा देखता रहता और बहुत मौज मस्ती करता. में दिन भर उनके साथ घूमता भी और उनके काम भी करता, लेकिन असल बात तो में उनका काम करना चाह रहा था.
में चाहता था कि कब इन दोनों कुँवारी कच्ची कलियों को मसल सकूं और उनकी चूत में अपने लंड की मोहर लगाकर अपनी छाप उनके जिस्म पर छोड़ दूँ, जिसको वो पूरी जिंदगी याद रखे. दोस्तों वो दोनों ही लड़कियाँ बड़े ही गदराए बदन की थी. जैसे वो कोई संगमरमर की मूरत और उनका बदन किसी साँचे में ढला हुआ था, फूली हुई बड़ी बड़ी गोल चूचियां और कमर भी मस्त, एकदम गोल गहरी नाभि और मस्त भारी गांड जो हर आदमी को दीवाना बना दे.
उनको देखकर हर कोई उनकी तरफ आकर्षित हो जाए और उसी समय उनकी चुदाई के लिए तैयार हो जाए. एक दिन मैंने देखा कि कविता ने बाहर से एक सब्ज़ी वाले से लंबे वाले बेंगन खरीदे थे और तभी मेरा माथा ठनका और फिर में मन ही मन सोचने लगा कि अब इस बेंगन का क्या होगा? क्योंकि वो दोनों तो सुबह शाम दिन हर समय खाना हमारे साथ खाती है और उनको खाना बनाने की कोई जरूरत ही नहीं थी.
फिर यही बात सोचकर मैंने अपना पूरा दिन भर जैसे तैसे इधर उधर काट लिया, लेकिन में रात होते होते उस बेंगन का उपयोग देखना चाहता था इसलिए में बहुत उत्सुक था और इसलिए में रात को जब सविता लौटकर आए तो मैंने रूम में अपने उस गुप्त छेद से उनके कमरे के अंदर झाँककर देखा कि वहां पर अब क्या चल रहा है? दोस्तों चलिए में अब आपको भी सैर करवा लाता हूँ कि जब दो जवान लड़कियाँ रूम में रात काटती है तो उनके बीच में क्या क्या होता है? में अब आपको कमरे के अंदर की बातचीत और नज़ारा सुनाता हूँ.
फिर सविता बोली है मेरी जान ज़रा मालिश कर दे, कब से मेरा सारा बदन दुख रहा है और यह बात कहकर वो बेड पर जाकर लेट गई और कविता ने उसकी टी-शर्ट को ऊपर करके पूरा उतार दिया, जिसकी वजह से मुझे उसकी सफेद रंग की ब्रा दिखाई देने लगी और उसमे बंद उसके बड़े बड़े बूब्स मुझे हिलते हुए नज़र आए वो बहुत मस्त नजारा था, जिसको देखकर मेरी आखें फटी की फटी रह गई. अब कविता बोली की क्यों आज बहुत दर्द हो रहा है क्या?
सविता ने जवाब दिया, हाँ यार जल्दी से तेल डालकर मालिश कर दे और कविता उसके कहने पर तुरंत तेल गरम करके एक कटोरी में ले आई और अब तक सविता की सलवार को भी उसने तुरंत उतार दिया था. इस काम में उसने ज्यादा समय नहीं लगाया, उसके हाथों में बहुत तेज स्पीड थी. फिर उसके बाद मैंने देखा कि ब्रा और पेंटी में लेटी हुई सविता की वो अब तेल से मालिश करने लगी और अब कविता सविता के गोरे गोरे स्तन जो ब्रा के ऊपर से उभर रहे थे उनके ऊपर हाथ ले जाती और वो उसके ऊपर तेल का हाथ लगाती.
यह सब करने में सविता को भी बड़ा मज़ा आ रहा था. अब वो बोली कि इस ब्रा को भी तो निकाल और थोड़ा सा तेल नीचे भी लगा. यह बात सुनकर कविता ने नीचे से पेंटी को उतार दिया और अब उसने सविता की चूत को पूरा फैलाकर उस पर दो बूँद तेल टपका डाला और अब उसने अपनी उंगलियों से उभरी हुई चूत की मसाज करना शुरू कर दिया. अब कविता ने कहा कि देख सविता तेरी झांटे भी तो कितनी बढ़ आई है क्या में इनको भी साफ कर दूँ?
सविता बोली कि हाँ कर दे यार और अब मैंने देखा कि कविता शेविंग क्रीम, ब्रश और रेज़र लेकर चूत के ऊपर की झांटो को साफ करने लगी, वो उसकी जाँघो पर चढ़कर बैठ गई और फिर उसने चूत के ऊपर क्रीम लगाई और ब्रश से रगड़कर झाग बना डाले. उसके बाद उसने अपने एक हाथ से चूत को टाइट करके रेज़र से झांटो को साफ कर दिया और खर खर की हल्की आवाज़ के साथ रेज़र ने सविता की चूत के आस पास की झांटो का बड़ा जंगल साफ करके बिल्कुल चिकना मैदान बना दिया था, जिसके बीच में उसकी पतली चूत एक क्रिकेट के मैदान की तरह नज़र आ रही थी.
फिर कविता बोली कि जान स्टेडियम तैयार है और मैदान भी तैयार है, लेकिन अब मेच खेलने वाला खिलाड़ी कहाँ है? तभी उसके मज़ाक से सविता खीज उठी क्या यार तुझे तो बस हमेशा मज़ाक ही सूझता है? कविता बोली कि आज मैंने लंबे वाले बेंगन खरीदे है मेरी रानी, वो हमारी प्यास बुझाने में ठीक रहेंगे. फिर सविता बोली कि पहले यहाँ पर मेरी मसाज तो कर ले, प्यास उसके बाद में बुझा देना और अब कविता एक बार फिर से सविता की चूत को धीरे धीरे सहलाने लगी, जिससे उसको बड़ा आराम आने लगा.
फिर उसके बाद में मैंने देखा कि कविता ने ऊपर दोनों बूब्स पर अपने हाथों को कसकर गोल पकड़ बनाई और उसे दबाकर बड़ा कर डाला. फिर कविता ने सविता के निप्पल को अपने मुहं में लेकर चूसना शुरू किया और उसके बाद कविता ने सविता की दोनों जाँघो को फैलाकर अपने दोनों हाथों की उंगलियों से उसकी चूत को फैलाकर लेट गई और अब वो अपनी जीभ को चूत के अंदर डालकर सविता की चूत का रसपान करने लगी, वो अब उसके दाने को अपने मुहं में लेकर अपनी जीभ से हिलाने लगी और चूस रही थी और उसकी एक उंगली सविता की चूत के छेद में अंदर बाहर आ जा रही थी.
फिर कुछ देर में गरम होने पर सविता ने कविता को अपनी बाहों में खींच लिया और फिर वो उसके ऊपर सवार हो गई. सविता ने कविता की चिकनी चूत को उसके पज़ामे से बाहर निकाला और उस पर अपने थूक का लेप लगाकर उसकी चूत में अपनी जीभ को डालना शुरू किया. अब सविता कविता की रसमलाई जैसी चूत को अपनी जीभ से बहुत खुरदुरा करके चाट रही थी और सविता कविता की गांड में भी बार बार अपना थूक लगा रही थी और अपनी जीभ से उसकी गांड को भी चाट रही थी.
उसके बाद सविता फिर उठकर फ्रिज तक चली गई और वो पेप्सी की एक बोतल निकालकर ले आई और अब सविता ने कविता की चूत को फैलाकर उसमे पेप्सी गिराई और ठंडी पेप्सी को चूत में भरकर अपनी जीभ से चाटना शुरू किया, वो उसके निप्पल को भी पेप्सी से गीला कर चुकी थी और अब निप्पल से कोल्ड ड्रिंक को पीकर उसने बहुत मज़ा लिया. फिर कुछ देर बाद कविता को झाड़कर अंदर जाकर फ्रिज में रखी दूध पर जमी मलाई निकालकर लानी पड़ी, जिसे कविता ने सविता की चूत पर लेप समान मल दिया और फिर उस मलाई को उसने अपनी जीभ से बड़े मज़े ले लेकर खा लिया और मलाई चाटने से चूत और निखर गई थी और चूत का गुलाबी भाग बार बार दोनों लड़कियों का मुझको दिखता, जिससे मेरा लंड खड़ा होकर टाईट हो चुका था.
अब कविता सविता की चूत की दोनों फांको को चिरकर अपनी जीभ से उसमे अंदर बाहर मलाई का लेप घुमा रही थी और चूत के छोड़े हुए पानी को लप लप कर मलाई के साथ पी रही थी.
अब कविता और सविता दोनों नंगी होकर एक दूसरे के साथ लेटी हुई थी और दोनों एक दूसरे पर उल्टा होकर लेटी हुई थी और दोनों ही एक दूसरे की चूत में जीभ को डाल रही थी कविता पीठ के बल नीचे लेटी हुई थी और वो अपने दोनों पैरों को मेरे सीक्रेट छेद जिससे में उनको देख रहा था उस तरफ किये थी, जिससे उसकी चूत के दर्शन मुझे भी साफ साफ हो रहे थे, जबकि सविता मेरी तरफ अपना सर किये थी और उसके दोनों पैर कविता के सर की तरफ थे, जिससे सविता ऊपर से कविता की चूत को अपनी जीभ से ऊपर से नीचे की तरफ चाट रही थी और कविता दोनों गोरी गोरी जाँघो को दूर दोनों दिशा में किये थी, वो चूत को धर्मशाला के दरवाजे की तरह खोले हुई थी, जिसमें सविता बहुत अच्छे से अपनी जीभ को डालकर चूत को चाट रही थी और वो उसकी चूत के गुलाबी रंग के दाने को अपने होंठो में दबाकर खींच और चूस रही थी, जिसकी वजह से कविता चिल्ला उठती कुतिया साली यह क्या कर रही है, क्या मेरी चूत को कच्चा ही खा जाएगी, थोड़ा ध्यान से कर.
फिर सविता कहती की अब ज्यादा नखरा मत दिखा, यहाँ तो में हूँ जो तुझे अभी छोड़ दूंगी, लेकिन अगर तुझे कोई जानवर सा पति मिल गया तो वो तेरी कहाँ कोई बात सुनेगा, तू पड़ी चिल्लाती रहना और कोई तुझे नहीं बचाने वाला और ना तू उस ताबड़तोड़ चुदाई के बाद किसी को अपना दर्द बता सकती है. फिर कुछ देर बाद कविता ने उठकर एक बेंगन लाकर सविता को भी दे दिया, जिसको देखकर वो बहुत खुश हुई और अब वो दोनों एक साथ बेड पर सीधे लेटकर मेरी तरफ वाली दिशा में अपनी चूत को फैलाकर लंबा मोटा बेंगन अंदर डाल रही थी और पूरा अंदर जाने के बाद इधर उधर घुमाकर धीरे धीरे बाहर निकाल रही थी.
उसके बाद दोबारा एक ज़ोर के झटके के साथ पूरा अंदर डाल रही थी जिसको देखकर लगता था कि वो उस बेंगन से अपनी बच्चेदानी को छूने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उनको कोई भी दर्द नहीं था, क्योंकि बेंगन बहुत चिकने थे इसलिए वो बहुत ज्यादा फिसलकर अंदर बाहर हो रहे थे और वो उनको एक मोटे लंबे लंड की तरह मज़ा दे रहा था. दोस्तों वो उस बेंगन से अपनी अपनी चूत को चोदने के साथ साथ वो एक दूसरे के बूब्स भी दबा रही थी और निप्पल को भी पीना नहीं भूलती.
दोस्तों मुझको वो सब कुछ देखकर उन दोनों की बेबसी पर बड़ा तरस आया, लेकिन में क्या करता? यह तो उनका हर रोज़ का काम था, वो ऐसे ही किसी भी चीज से अपनी चूत को चोदकर शांत कर देती और में दूसरी तरफ खड़ा अपने तनकर खड़े लंड को हिलाता. उसके बाद में बाथरूम में जाकर उनको सोचकर मुठ मारकर अपने लंड को ठंडा करता. दोस्तों उन दोनों की भी ठीक वैसी ही हालत थी वो कैसे भी अपनी चूत का पानी बाहर निकालना चाहती थी और यह काम अब उनकी आदत बन चुका था और में उनके मज़े लेता था.
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सरिता के साथ प्रेमलीला

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राज है और में उड़ीसा से हूँ, मेरी उम्र 37 साल है और में अपनी लाईफ को इन्जॉय करता हूँ और करवाता हूँ. अब में आपका ज़्यादा समय बर्बाद नहीं करते हुए सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ.
यह घटना अभी कुछ ही दिनों पहले की है. में फ़ेसबुक पर मजे कर रहा था और तभी अपने ही घर के नज़दीक की लड़की से चैट करने लगा, तब रात के करीब 11 बज रहे थे और फिर बातों-बातों में उसने कहा कि कल वो विशाखापटनम जा रही है. फिर मैंने भी तुरंत झूठ कह दिया कि में भी कल विशाखापटनम जा रहा हूँ. फिर क्या था? फिर सरिता ने कहा कि तो मिलकर चलते है, तो मैंने भी तुरंत हाँ कर दिया.
फिर अगले दिन सुबह में अपनी कार निकालकर सरिता का इंतज़ार करने लगा और फिर वो भी सज-धज कर अपने एक बैग के साथ आई. फिर वो अपने बैग को पीछे की सीट पर रखकर मेरी पास वाली सीट पर आ गयी. फिर मैंने कार स्टार्ट की और हम दोनों विशाखापटनम की और निकल पड़े. अब हम दोनों करीब आधे घंटे तक गाने सुने जा रहे थे कि तभी सरिता पूछ बैठी, आपका क्या काम है? तो में चुप रहा और फिर बोला कि बस यूँ ही बिज़नेस का काम है.
फिर मैंने उससे पूछा कि तुम्हारा क्या काम है? तो सरिता बोली कि कुछ ज़्यादा नहीं बस मम्मी की दवा लानी है, जो सिर्फ़ विशाखापटनम में ही मिलती है. अरे में तो आपको उसके बारे में बताना ही भूल गया सरिता 30 साल की एकदम हसीन और गोरी लड़की है, उसकी ऊंचाई 5 फुट 5 इंच और फिगर साईज 36-32-38 है, सरिता एकदम गोरी है और में थोड़ा लार्ज बिल्ट, गोरा बदन और मेरा लंड 5 इंच लम्बा है.
अब में आगे की स्टोरी पर आता हूँ. फिर सफ़र में चलते-चलते सरिता ने पूछा कि आप भाभी से कब मिले थे? तो मैंने तुरंत कहा कि हमारी अरेंज मैरिज थी, लेकिन में बहुत खुश हूँ कि मुझे ऐसी बीवी मिली है. फिर सरिता बोल उठी कि आपका नसीब नहीं भाभी का नसीब अच्छा है कि आप उसे मिले. फिर मैंने उससे कहा कि में कुछ समझा नहीं, लेकिन सरिता कुछ नहीं बोली.
फिर मैंने भी उससे ज़्यादा सवाल नहीं किए. फिर एकाएक सरिता पूछ बैठी कि आपने अपनी सुहागरात कैसे मनाई थी? फिर क्या था? फिर मैंने भी कह दिया कि क्या करके बताऊँ? तो सरिता तुरंत बोल पड़ी कि हाँ. फिर मैंने ब्रेक लगाई और गाड़ी साईड में करके खड़ी कर दी और उसे देखता रहा. अब सरिता मुझसे नज़रे मिला नहीं पा रही थी. फिर मैंने भी सोचा कि मौका अच्छा है मारो चौका. फिर मैंने सरिता का हाथ पकड़ लिया और सहलाने लगा, लेकिन वो चुप रही. फिर मेरी हिम्मत और बड़ी और मैंने सरिता के होंठो को अपने होंठो से क़ैद कर लिया.
फिर कुछ पल के बाद सरिता भी मेरा साथ देने लगी और अब हम दोनों एक दूसरे की जीभ चूस रहे थे. फिर करीब 15 मिनट तक हम एक दूसरे को चाटते रहे. फिर मैंने गाड़ी आगे बढाई और कुछ ही समय में हम विशाखापटनम पहुँच गये. फिर वहाँ जाते ही हमने एक होटल में रूम बुक किया और सीधे रूम में चले गये. फिर में सरिता को रूम में बैठाकर बाहर से कंडोम का पैकेट ले आया.
फिर मैंने देर ना करते हुये वापस रूम में आया तो मैंने देखा कि सरिता नहा धोकर टावल लपेटे खड़ी हुई थी. अब उसका गोरा बदन निखर रहा था और फिर मैंने भी तुरंत शॉवर लिया और टावल लपेटकर रूम में आ गया. अब सरिता पहले से ही पलंग पर लेटी हुई थी. फिर में उसकी और झुका और उसे लिप किस किए जा रहा था. सरिता की पहले से ही सेक्स की इच्छा थी और इस कारण वो भी तुरंत मुझसे लिपट गयी और कहने लगी कि राज प्लीज़ मेरी प्यास बुझा दो, में बहुत प्यासी हूँ.
अब मुझको समझने में देर नहीं लगी कि वो पहले भी इसका मज़ा ले चुकी है, लेकिन में उससे पूछकर अपना और उसका मज़ा क्यों खराब करूँ? अब पूरा कमरा हमारी सांसो की आवाज़ से गूँज रहा था. अब हम दोनों एक दूसरे को पागलों की तरह चुम्मा चाटी कर रहे थे. फिर मैंने सरिता को टावल की क़ैद से आजाद किया और अब सरिता मेरे सामने पूरी नंगी थी. फिर मैंने तुरंत उसके बूब्स को चूसना चालू किया, क्या मज़ा आ रहा था? सरिता की चूत बालों से भरी हुई थी.
अब में उसके बूब्स को चूस रहा था और अपने दूसरे हाथ से उसकी चूत को सहला रहा था, जो हल्की सी गीली हो चुकी थी. अब उसका हाथ मेरे लंड पर घूम रहा था, तभी मैंने सरिता को मेरा लंड अपने मुँह में लेने की बात कही तो वो तुरंत मान गयी. अब वो पलटकर मेरा लंड चूस रही थी जैसे मानो लॉलीपोप है. अब हम दोनों 69 की पोज़िशन में थे और अब में उसकी चूत को चाट रहा था और बीच-बीच में अपनी जीभ को उसकी चूत में घुमा रहा था, उसकी गीली चूत से क्या मदहोशी वाली खुशबू आ रही थी?
अब में काफ़ी उत्तेजना के कारण 10 मिनट में ही सरिता के मुँह में ही झड़ गया था, लेकिन उसने चूस-चूसकर मेरा सारा माल साफ कर दिया. अब इस बीच सरिता भी अकड़ने लगी और मेरे मुँह पर ही झड़ गयी. फिर मैंने भी चाट-चाटकर उसकी चूत साफ की और अब बालों की वजह से मुझे उसकी चूत चाटने में और भी मज़ा आ रहा था. अब मेरे झड़ने के बाद हम दोनों एक दूसरे से नंगे लिपटकर लेटे हुए थे और इधर उधर की बातें किए जा रहे थे.
अब हम बातें कर रहे थे और उधर सरिता मेरे लंड को सहला रही थी और में भी उसके बूब्स को स्मूच कर रहा था. फिर थोड़ा रोमान्स करते-करते मेरा लंड फिर से तैयार हो गया और फिर हम दोनों ने फिर से किसिंग चालू कर दी. अब में फिर से तड़प उठा और हम फिर से सीधे 69 पोजिशन में आ गये, अबकी बार हमारा जोश भी दोगुना हो गया था. अब में उसकी चूत में फिंगरिंग भी किए जा रहा था और बीच-बीच में चाट भी रहा था.
फिर सरिता बोली कि अब सहा नहीं जा रहा है, प्लीज अपना जानवर दिखाओ और डाल दो. फिर मैंने भी देर नहीं की और अपने लंड पर कंडोम लगा लिया और उसकी चूत के ऊपर अपना लंड सहलाने लगा. फिर में अपना लंड धीरे-धीरे उसकी चूत में डालने लगा और उसकी चूत टाईट थी, लगता है उसने बहुत दिनों से चुदाई नहीं की थी.
फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया और धीरे-धीरे धक्के मारने लगा. अब सरिता भी उठ-उठकर मेरा साथ दे रही थी. फिर करीब 10 मिनट तक हम ऐसे ही धक्के मारते रहे. फिर हमने अपनी पोजिशन बदली और में नीचे आ गया और सरिता मेरे ऊपर उछलने लगी. अब में उसके बूब्स को स्मूच करता रहा और वो लगातार उछलती रही.
फिर करीब 5 मिनट के बाद हमने फिर से अपनी पोजिशन बदली और इस बीच उसकी चूत गीली होती गयी. फिर मैंने सरिता को पलंग पर लेटाया और में खड़े-खड़े धक्का मारता रहा. अब सरिता भी ज़ोर-ज़ोर से सांसे ले रही थी और में भी जोर-जोर से सांसे ले रहा था. फिर हम 5 मिनट के बाद इंडियन स्टाइल में आ गये और में ऊपर से सरिता को धक्के मारता रहा. फिर धीरे-धीरे मेरे धक्को की स्पीड तेज हो गयी और फिर हम दोनों शांत हो गये.
फिर में अपना कंडोम निकालकर बाथरूम की तरफ चल पड़ा और सरिता भी चल पड़ी. अब हम दोनों पसीने से पूरे गीले हो चुके थे. कमरे में ए.सी चल रहा था, लेकिन हमें बहुत गर्मी लग रही थी. फिर हम दोनों नंगे ही शॉवर लेने के लिए बाथरूम में चले गये. अब हम दोनों नंगे नहा रहे थे और रोमान्स भी कर रहे थे. अरे ये क्या हुआ? साला मेरा लंड फिर से तैयार हो गया था और फिर हम ऐसे ही गीले बदन के साथ बाहर निकल आए और फिर हमने प्रेमलीला का खेल खेलना चालू कर दिया.
अब सरिता के घरवालों को मालूम नहीं था कि वो मेरे साथ गयी है. फिर उसने अपने घर पर फोन कर दिया और कहा कि दवा नहीं मिल रही है, कल तक मिल जाएगी और वो दवा लेकर कल आ जाएगी. फिर हम दोनों पूरी रात प्रेमलीला करते रहे और अगले दिन दवा लेकर हम वापस निकल पड़े. फिर वापसी में सरिता पूछ बैठी कि आपका बिज़नेस का काम क्या है? तभी मैंने कह दिया कि हो गया ना यार मेरा काम, मेरा कोई काम नहीं था, लेकिन आपमें मुझे पहले से ही रूचि थी और अगर आप शुरू ना होती तो मेरी तरफ से शुरू हो जाता और फिर हम घर वापस आ गये.
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ऑफिस वाली को कार में चोदा

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रोहन है और में फिर से आपके लिए एक नई कहानी लेकर आया हूँ. दोस्तों में आगरा का रहने वाला हूँ, नॉर्मल बॉडी और लंड साईज 6 इंच लम्बा और अब में आपका समय ख़राब ना करते हुए सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ.
ये कहानी तब की है जब में एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करता था. वहाँ वैसे तो काफ़ी लोग थे, लेकिन एक लड़की थी शालू, जो ज़ीरो फिगर की और काफ़ी स्वीट थी. पहले तो हम सब ऐसे ही बात करते थे, लेकिन हमें महीने के आखरी पर काम की देखभाल के लिए जाना होता था तो पूरा स्टाफ दो दिन तक कार में ट्रेवल करता और शालू अक्सर मेरी कार में बैठी और लास्ट में में उसे उसके घर छोड़ देता था.
फिर एक दिन मैंने उससे ऐसे ही पूछा कि ड्राइव पर चले, तो उसने हाँ कर दी. अब में तो मन ही मन खुश हो गया और सोचने लगा कि आज प्रपोज भी कर दूँ. फिर हम ड्राइव से लौट रहे तो मैंने उससे बोला कि आई लव यू शालू, तो उसने हाँ बोला और अब में बहुत खुश था.
मैंने उससे कहा कि क्या में तुम्हें किस कर सकता हूँ? तो वो बोली कि रोड़ पर नहीं कोई देख लेगा. फिर वहाँ पर एक इंडस्ट्रियल एरिया था, तो मैंने वहाँ पर कुछ ट्राई किया तो मैंने देखा कि वहाँ एक गली काफ़ी सुनसान थी. उस दिन रविवार था तो सारी फेक्ट्रियां बंद थी और थोड़ा अँधेरा भी हो गया था, तो मैंने कार वहाँ लगाई और उसे किस करने लगा. अब पहले तो वो मेरा साथ नहीं दे रही थी कि कोई आ जाएगा और देख लेगा, लेकिन फिर वो भी शुरू हुई और मेरा सपोर्ट करने लगी. फिर हम कार की पीछे वाली सीट पर आए और एक दूसरे को किस करते रहे.
फिर मैंने उसकी टी-शर्ट के बटन खोल दिए, तो मुझे उसकी पिंक कलर की ब्रा में उसके बूब्स दिखने लगे, जो काफ़ी गोल और गोरे से दिख रहे थे. अब मुझे और जोश आ गया था और उसका फिगर साईज 32-30-34 था, जो मुझे बाद में पता चला था. फिर में उसके बूब्स पर ऊपर से ही किस करने लगा और हल्का-हल्का काट भी देता था. उसके बूब्स पर एक तिल था, जिससे वो और भी सुंदर लग रही थी. अब वो ओह आ आ कर रही थी.
फिर मैंने उसकी ब्रा खोल दी और उसके पिंक निपल को चूसने लगा था. अब में कभी सक करता तो कभी उसके निप्पल को दाँत से काटने लगता. अब वो मेरे सिर को अपने हाथ से दबा रही थी और धीरे-धीरे मौन भी कर रही थी.
फिर धीरे-धीरे उसने भी अपना हाथ मेरी जीन्स में डाल दिया और मेरे लंड को टच करने लगी. अब वो तो जैसे फुल जोश में उसका स्वागत कर रहा था. फिर मैंने भी उसकी जीन्स का बटन खोल दिया और उसने मैचिंग की पेंटी पहनी थी. फिर मैंने उसकी जीन्स और पेंटी एक साथ नीचे कर दी और अब मुझे उसकी हल्के-हल्के बालों वाली चूत दिख रही थी. फिर मैंने उसकी चूत पर किस किया और फिर उसे चूसने लगा, तो वो ज़ोर-ज़ोर से श आ ऊओह आ करने लगी.
अब वो अपने हाथ से मेरा सिर दबा रही थी और मुझे ऊपर नहीं होने दे रही थी. अब उसे काफ़ी मज़ा आ रहा था. फिर हम 69 की पोजिशन में आ गये. अब वो मेरा पूरा लंड लॉलीपोप के जैसे चूस रही थी और साथ में ऊहह अया भी कर रही थी. फिर उसने अपने पर्स से एक चोकलेट निकाली, जो काफ़ी पिघली हुई थी और मेरे लंड पर लगाकर उसे चूसने लगी.
अब मुझे भी काफ़ी मज़ा आने लगा था और में भी उसकी चूत पर चॉकलेट लगाकर अपनी जीभ से चाट रहा था तो कभी काट रहा था. जिससे वो काफ़ी मजे कर रही थी और फिर हम दोनों 15 मिनट के बाद एक साथ झड़ गये और एक दूसरे को किस करने लगे. फिर 5 मिनट के बाद मैंने उसे अपनी गोदी में बैठाया और अपना लंड उसकी चूत पर सेट करके धीरे-धीरे उसे अपने लंड पर बैठाने लगा और हल्के-हल्के झटके मारने लगा.
अब 2-3 झटको में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया था. अब वो खुद धीरे-धीरे झटके मार रही थी और अब उसे दर्द भी हो रहा था और उसकी चूत से हल्का-हल्का खून भी आ रहा था. अब वो खून देखकर मुझे मना करने लगी, लेकिन कार में इतनी जगह नहीं होती है कि वो उठ पाती.
अब में नीचे से हल्के-हल्के झटके मारता रहा और वो दर्द में ऐसे ही बैठी रही और में नीचे से झटके मारता रहा. फिर थोड़ी देर के बाद वो भी मेरा साथ देती हुई श आ ओह हाँ करती रही. अब वो कभी मेरी गर्दन पर किस करती तो कभी काट देती.
फिर 15-20 मिनट के बाद वो झड़ गयी, लेकिन में ऐसे ही झटके मारता रहा. फिर थोड़ी देर के बाद में भी उसकी चूत में ही झड़ गया और फिर हमने अपने कपड़े ठीक किए और वहाँ निकलने लगे कि हमें वहाँ एक चोकीदार ने पकड़ लिया, लेकिन उसे पता नहीं था कि वहाँ हमने सेक्स किया है. फिर मैंने उसे समझाया और थोड़े से पैसे दिए तब उसने हमें वहाँ से जाने दिया.
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अंकल ने मुझे लंड पर बैठाया

हैल्लो दोस्तों, में अंजलि एक बार फिर से हाजिर हूँ आप सभी चाहने वालों के सामने अपनी एक और सच्ची घटना को लेकर. दोस्तों आज में घर पर बिल्कुल अकेली हूँ और यह कहानी में बिल्कुल नंगी होकर लिख रही हूँ और में बीच बीच में अपनी चूत और गांड में पेन्सिल को डालकर सेक्स भी करूँगी. क्या करूँ? मेरी शादी जो अब तक नहीं हुई है, इसलिए अभी तो मुझे पेन्सिल से ही काम चलमना पड़ेगा, तो चलो अब आगे बढ़ते है.
में अपने कॉलेज प्रेसीडेंट के यहाँ से आने के बाद में आते ही सो गयी. क्या करूँ? बहुत तक जो गयी थी. में उस रात को इतनी बार जो चुदी थी कि मेरी चूत और कूल्हे दोनों में बहुत दर्द हो रहा था, वहां पर मेरी बहुत जमकर चुदाई हुई.
फिर में अगले दिन उठी और नाश्ता करने के लिए गयी. अब की बार मैंने एक छोटी सी पेंट पहन रखी थी और उसके ऊपर टाईट टॉप.
अब में अंकल को अपनी मटकती हुई गांड को दिखाती हुई बैठ गयी. में साफ देख रही थी कि अंकल का लंड मेरी गांड और एकदम गोल आकार के उभरे हुए बूब्स के देखकर ललचाने लगा था, जिसकी वजह से वो तुरंत उठकर खड़ा हो चुका था और हम लोग उस दिन सोफे पर नाश्ता कर रहे थे कि तभी नाश्ता करते समय राज ने मुझसे कहा कि वो आज अपने किसी जरूरी काम की वजह से दिल्ली से बाहर जा रहा है और वो कल तक वापस आ जाएगा और फिर वो नाश्ता करके चला गया, लेकिन अंकल अब भी वहीं पर बैठे हुए थे और वो अपनी नजर से मुझे चोरी चोरी कभी मेरी तरफ तो कभी मेरे बूब्स की तरफ देख रहे थे, जो कि मेरी उस टाईट टी-शर्ट से कुछ ज्यादा ही उभर रहे थे. अब मैंने मन ही मन सोचा कि चलो ना क्यों थोड़े से मज़े और भी ले लिए जाए.
उस वक़्त अंकल ने एक सिंपल पजामा ही पहन रखा था और मैंने चुपके से अपनी पेंट की चेन को खोल दिया और फिर धीरे धीरे मैंने अपने पैर ऊपर की तरफ करके टेबल पर इस तरह से रख लिए कि जिसकी वजह से मेरी चूत हल्की सी दिखने लगे और में कुर्सी पर अख़बार लेकर पढ़ने का नाटक करने लगी. में अब चुपके से देखने लगी कि अंकल मेरी चूत की तरफ देखकर अपना लंड मसल रहे थे. फिर थोड़ी ही देर में उनका पजामा गीला सा हो गया और लंड नीचे बैठ गया जिसको देखकर में तुरंत समझ गयी कि उनके लंड ने ज्यादा जोश में आकर अपना वीर्य छोड़ दिया है.
फिर मैंने अंकल से पूछा क्यों अंकल क्या हुआ आपका पजामा एकदम ऊपर था फिर गीला हुआ और फिर नीचे बैठ गया? तो अंकल मेरी बात को सुनकर हंसने लगे और बोले कि अरे यह सब प्राक्रतिक है और यह कहते हुए उन्होंने एकदम से ही अपने लंड को पेंट से बाहर निकाला जो वीर्य से पूरा गीला था और अब वो अपने लंड की तरफ इशारा करके कहने लगे कि यह बेवकूफ क्या करे? यह बार बार तुम्हे देखकर जोश में आकर खड़ा हो जाता है और कुछ देर बाद अपना पानी छोड़कर ठंडा होकर नीचे बैठ जाता है.
फिर मैंने बिल्कुल अंजान बनकर उनसे पूछा अब क्या होगा? तब उन्होंने कहा कि कुछ नहीं इसका इलाज़ मेरे पास है, में बहुत अच्छी तरह से जानता हूँ कि यह क्या चाहता है, लेकिन वो इलाज अभी नहीं हो सकता, इसका इलाज में आज रात को कर दूंगा और इतना कहकर वो उठ गए और मेरे कूल्हों को दबाकर अपने ऑफिस जाने के लिए चले गये.
अब में तुरंत समझ गई कि अंकल आज मेरी चुदाई करने के पूरे मूड में है और उनका लंड लेने में बहुत मज़ा आएगा और मैंने मन ही मन में सोचा कि यार तो फिर क्यों ना अभी से ही अपनी आज रात की होने वाली उस चुदाई की तैयारी कर ली जाए यह बात सोचकर में बहुत खुश होकर बाजार चली और गयी मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था और फिर में वहाँ से एक सूट लेकर आ गई उसके साथ में बिकनी और ब्रा भी थी और वो तीनों ही जालीदार थे, वो नाईट सूट मेरे घुटनों तक का था और फिर घर पर आकर मैंने उस ब्रा को कैंची से काटकर इतना छोटा कर लिया कि वो बस मेरे बूब्स को हल्का सा ही ढक सके और बिकनी को मैंने गांड की तरफ से काटकर एक धागा सा बना दिया जिसकी वजह बस मेरी गांड का छेद ही चुप जाए, लेकिन मैंने चूत की तरफ से ऐसा कुछ नहीं किया.
फिर रात को खाना खाने के समय में जब उनके सामने अपने वो कपड़े पहनकर पहुंची, जिनमें में बहुत हॉट सेक्सी दिख रही थी. फिर अंकल मुझे अपनी खा जाने वाली नजर से घूर घूरकर देखते ही रह गये और उनकी नजर मेरे गोरे जिस्म से हटने को तैयार ही नहीं थी और फिर मैंने उनसे पूछ लिया की क्यों में इस ड्रेस में कैसी लग रही हूँ?
अंकल ने कहा कि तुम बहुत ही सुंदर लग रही हो इतने कम कपड़े तुम्हारे ऊपर ठीक है, लेकिन अगर तुमने कपड़े पहन ही नहीं रखे होते तो तुम और भी ज्यादा अच्छी लगती, अंजलि तुम इतने कम कपड़े क्यों पहनती हो?
फिर मैंने कहा कि पता नहीं अंकल जब मर्द मेरी चूत को, कूल्हों को और मेरे बूब्स के घूरते है तो मुझे उनको यह सब करता हुआ देखकर बहुत मज़ा आता है और मुझे बहुत ख़ुशी मिलती है और उसके बाद हम दोनों खाना खाने लगे.
फिर अंकल बोले की अंजलि तुम्हे याद है कि जब तुम छोटी थी तब तुम कैसे मेरी गोद में बैठकर खाना खाती थी, आज भी वैसे ही खाओ ना, मैंने कहा कि अभी लो और फिर में उनकी गोद में जाकर बैठ गई, लेकिन में जानबूझ कर इस तरह से बैठी कि मेरी गांड का छेद ठीक उनके लंड के ऊपर एकदम सही निशाने पर आ जाए. में अब महसूस कर सकती थी कि मेरे उनकी गोद में बैठते ही कैसे उनके लंड का आकार बढ़ने लगा था?
फिर थोड़ी देर के बाद अंकल ने खाना खाते समय जानबूझ कर मेरे ऊपर दाल को गिरा दिया जो मेरे कपड़ो से मेरे बूब्स तक जा पहुंची और उन्होंने मुझसे कहा अरे यार प्लीज मुझे माफ़ करना लाओ में साफ कर दूँ और अब वो मेरे बूब्स के ऊपर से डाल को साफ करने के बहाने से मेरे बूब्स को दबा दबाकर मज़े लेने लगे और में बिल्कुल शांत उसको देखती रही. कुछ देर बाद उन्होंने डाल को साफ कर दिया.
अब मैंने उनसे कहा कि अरे यह तो अभी भी गंदी है, क्यों ना में इसे उतार ही देती हूँ और मेरे मुहं से यह बात सुनकर वो एकदम चकित होकर मेरी तरफ देखने लगे और इतना कहकर मैंने तुरंत अपना नाइट सूट उतार दिया और अब मेरा गोरा बदन बड़ा ही साफ सेक्सी दिखने लगा, जिसको वो अपनी चकित नजर से घूर घूरकर देख रहे थे.
तभी अंकल खड़े हुए और वो मुझसे बोले कि अंजलि तुम्हारे कंधे पर एक तिल है तो मैंने उनसे पूछा क्या आपको अभी भी याद है, अरे हाँ एक तिल तो शायद तुम्हारे बूब्स पर भी तो था, चलो देखे कितने बड़े है ज्योतिष कहते है कि जिस लड़की के बूब्स के ऊपर तिल होता है उसके बूब्स पीने चाहिए, दबाने चाहिए, चूसने चाहिए.
फिर मैंने उनसे कहा कि माफ़ करना अंकल मेरे बूब्स पर तो कोई भी तिल नहीं है. तभी उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता फिर वो मेरे पास आए और उन्होंने मेरी ब्रा को फाड़कर फैंक दिया और वो मेरे बूब्स को दबाकर देखने लगे और चुपके से उन्होंने एक पेन से एक तिल का निशान लगा दिया और बोले देखो मैंने कहा था ना है.
फिर यह बात बोलकर वो मेरे बूब्स को चूसने लगे और उन्हे दबाने लगे. फिर वो खड़े हुए और बोले वैसे जहाँ तक मुझे याद है एक तिल तुम्हारी चूत पर भी है, तो मैंने कहा कि नहीं है, उन्होंने कहाँ कि चलो दिखाओ फिर उन्होंने मुझे टेबल पर लेटा दिया और मेरे पैर नीचे कर दिए जिससे मेरी चूत ऊपर उठ गयी और उसके बाद उन्होंने मेरी पेंटी भी फाड़ कर फैंक दी और अब वो मेरी गोरी गोरी चूत को देखने लगे और बोले कि अंजलि मुझे मालूम है जिसकी चूत में तिल होता है उसे हर रोज़ चूसना चाहिए और इसके अंदर लंड डलवाना चाहिए.
उसके बाद उन्होंने पहले की तरह मेरी चूत पर चुपके से एक तिल बना दिया और बोले कि मैंने कहा था कि है. अब मैंने कहा कि अजीब बात है मैंने तो इससे पहले कभी नहीं देखा और मुझे आपकी इस बात पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा, आप यह सब क्या कह रहे है.
फिर वो जल्दी से नीचे झुककर मेरी चूत को चूसने लगे और थोड़ी देर बाद हम फिर से खाना खाने के लिए आ गये. में उस समय बिल्कुल नंगी थी और में फिर से अंकल की गोद में जाकर बैठ गयी और कुछ देर बाद मैंने उनसे पूछा कि अंकल यह क्या है जो मुझे बहुत चुभ रहा है, तो अंकल ने झट से नंगे होकर कहा कि यह लंड है मैंने पहले भी कहा था ना कि यह तुम्हारी चूत को देखकर ही खड़ा हो जाता है. अब मैंने उनसे कहा कि प्लीज़ आप अब इसका कुछ करो.
में इससे बहुत परेशान हो रही हूँ और अब अंकल उठकर कुर्सी पर बैठ गये और वो मुझसे बोले कि अच्छा दो मिनट तुम एक काम करो, तुम यहाँ पर आओ और में उनके कहने पर उनके पास चली गयी. फिर अंकल ने मेरे कूल्हों को अपने दोनों हाथों से खोल दिया और मेरे छेद को चौड़ा करके अपने लंड पर रख दिया और उसके बाद उन्होंने मुझसे कहा कि तुम एक झटके से नीचे बैठ जाओ, तो में नीचे बैठ गयी और देखते ही देखते उनका 6 इंच लंबा लंड मेरी गांड में घुस गया और में ज़ोर से चिल्ला उठी.
फिर मैंने उनसे बोला कि मुझे बहुत दर्द हो रहा है, तो अंकल ने मुझसे कहा कि चुपकर कुतिया साली छिनाल बिल्कुल चुप हो जा अभी दो मिनट बाद तुझे भी बहुत मज़ा आएगा और उसके बाद उन्होंने नीचे बैठ बैठे ही धक्के लगाने शुरू किए और में भी कुछ देर बाद अपनी गांड को उछालने लगी, क्योंकि मुझे अब बहुत मज़ा आ रहा था और फिर कुछ देर लगातार जोरदार धक्के देने के बाद उन्होंने अपना वीर्य मेरी गांड में ही छोड़ दिया और उसके बाद उन्होंने खड़े होते हुए मुझे अपनी गोद में उठाकर वो कमरे में ले गये और उन्होंने मुझसे कहा कि चल अंजलि अब तू मेरे पूरे बदन पर तेल से मालिश कर दे, चल अब तू मुझे अपने हाथों का कमाल दिखा. फिर मैंने उनसे पूछा ऐसा क्यों? मेरे यह सब करने से क्या होगा?
वो बोले कि इस तरह से तो मेरे लंड का इलाज होगा, वही इलाज जिसकी इसको बहुत जरूरत होती है और फिर मैंने उनके कहने पर तेल लेकर उनके बदन की मालिश करना शुरू कर दिया. कुछ देर बाद वो अपनी गांड को दिखाकर बोले कि यहाँ पर भी तेल लगाओ और में उनके कहने पर उनकी गांड की भी मालिश करने लगी.
फिर कुछ देर बाद उन्होंने एक दूसरा तेल निकाला और वो बोले कि इस तेल को तुम अब मेरे लंड पर मल दो और तुम अब ऐसा करो कि अपनी गांड को मेरे पास लाकर आराम से लेटकर मालिश करो, लेकिन प्लीज आराम से करना अपना ही समझना तो मैंने हंसकर कहा कि ठीक है और फिर में बैठकर उसी तरह से मालिश करने लगी और लंड को बड़ा होते हुए देखने लगी. उनका लंड देखते ही देखते कुछ ही मिनट में अपनी औकात में आ गया.
तभी अंकल मेरी गांड को दबाने लगे और मैंने उनसे पूछा आप यह क्या कर रहे हो? तो अंकल ने कहा कि में अपनी हथेलियों की मालिश कर रहा हूँ और फिर वो बोले की अरे भाई हाथ से ही मलती रहोगी क्या? अब इसे अपने मुहं में लेकर चूसो.
फिर में अब उनके लंड को चूसने लगी और वो मेरी चूत में ऊँगली डालने लगे. अब मैंने उनसे एक बार फिर से पूछा कि आप यह क्या कर रहे हो? तो वो बोले कि में अपनी ऊँगली की मालिश कर रहा हूँ और उसके बाद वो खड़े हुए और मुझे लेकर पलंग पर पटक दिया और अब उन्होंने मेरी चूत में अपना लंड दिया और मेरे बूब्स को मेरे पूरे बदन को कभी दबाते तो कभी चूसते और फिर वो धक्के लगाने लगे.
में भी अपनी गांड को उछालने लगी और फिर कुछ ही देर में हम दोनों शांत हो गये. उसके बाद अंकल ने अपना लंड मेरे मुँह में दिया और में उसे चूसने लगी और सारा का सारा वीर्य पी गयी और फिर हम दोनों वहीं एक दूसरे के ऊपर सो गये.
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सामने वाली आंटी ने चोदना सिखाया

हैल्लो दोस्तों, आप सभी को मेरा प्यार भरा नमस्कार. आज में आपको अपनी एक बहुत ही सुंदर कहानी सुनाना चाहता हूँ, इसको पढ़ने के बाद आप बहुत प्रसन्न होंगे. मेरा नाम राहुल है और मेरी उम्र 21 साल है, मेरे घर के पास एक फेमिली रहती थी, उस फेमिली में पति, पत्नी और उनके तीन बच्चे थे, उनके बच्चे छोटे ही थे. उन्होंने दो रूम सेट सेकेंड फ्लोर पर किराए पर ले रखा था, उनकी खिड़की मेरे घर के ठीक सामने ही थी.
मेरा उनके घर में आना जाना था, मुझे आंटी बहुत अच्छी लगती थी, उनके बूब्स देखकर में पागल हो जाता था और उनकी मटकती हुई गांड देखकर तो मेरा मन मूठ मारने का होता था. में जब भी उनके घर जाता था तो उस समय वो सिर्फ़ नाइटी ही पहने मिलती थी और घर का काम कर रही होती थी. वो मुझे अक्सर अकेली ही मिलती थी और में रोज उनके बूब्स देखता था और घर आकर मूठ मारता था.
फिर एक दिन रात को 10 बजे का समय था, सभी लोग सो रहे थे. फिर में अपनी छत पर गया तो मैंने देखा कि सामने वाली खिड़की खुली है और आंटी चुद रही है, अंकल उनको घोड़ी बनाकर चोद रहे है, आंटी बिल्कुल नंगी थी और अंकल भी नंगे थे. अब वो सीन देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया था. अब में आंटी के खुले हुए बूब्स और चूतड़ देखकर दंग रह गया था और उनकी चुदाई को देखता रहा और मूठ मारकर अपने आपको शांत किया.
फिर सुबह जब में आंटी के घर गया तो उस समय आंटी नहाने जा रही थी. फिर मैंने उनसे पूछा कि क्या में आपको नहाते हुए देख सकता हूँ? तो उन्होंने कहा कि क्यों नहीं? और फिर वो मेरे सामने नहाने लगी. अब वो सिर्फ ब्रा और पेटीकोट पहनकर नहा रही थी. अब पानी से भीगने के कारण उनके बूब्स साफ-साफ़ दिख रहे थे. अब मेरा लंड तंबू की तरह खड़ा था और अब मेरा मन हो रहा था कि अभी आंटी को चोद दूँ, लेकिन में ऐसा नहीं कर सका और चुपचाप उनको देखता रहा.
फिर नहाने के बाद आंटी पूजा करने बैठ गई और मैंने बाथरूम में जाकर मुठ मारा और फिर आकर बैठ गया. फिर पूजा करने के बाद आंटी चाय बनाकर लाई और बैठकर बोली क्या हो रहा है? तो मैंने कहा कि आंटी आप खिड़की खोलकर क्यों रखती है? तो उन्होंने कहा कि गर्मी ज़्यादा लगती है. फिर मैंने कहा कि कल रात को क्या हो रहा था?
आंटी ने कहा कि वही जो रोज होता है, तो मैंने कहा कि रोज होता है, तो उन्होंने कहा कि हाँ. फिर मैंने झट से कहा कि आपके बूब्स बहुत अच्छे है तो उन्होंने कहा कि पीओंगे? तो में बोला कि क्यों नहीं? और फिर में उनके बूब्स खोलकर पीने लगा.
फिर मैंने कहा कि आंटी अंकल आपके ऊपर थे और आप नीचे थे, क्या ऐसे ही चुदाई होती है? तो वो बोली कि क्या तुम चुदाई करना नहीं जानते हो? तो मैंने कहा नहीं. फिर वो बोली कि में तुमको चोदना सिखाऊँगी, लेकिन तुम्हें मुझे रोज चोदना होगा, तो मैंने कहा ठीक है.
फिर उसने अपने सारे कपड़े उतारकर मुझे भी नंगा कर दिया और बोली कि पहले मेरे बूब्स पीओ और दबाओ, तो मैंने ऐसा ही किया. फिर वो मेरा लंड अपने हाथ से पकड़कर अपने मुँह में डालकर चूसने लगी और मुझसे कहा कि अब तुम भी मेरी चूत को चूसो, तो में भी उसकी चूत को चूसने लगा. अब हम दोनों 69 की पोज़िशन में थे. फिर मेरे लंड ने मेरा साथ छोड़ दिया और में उसके मुँह में ही झड़ गया. फिर कुछ देर के बाद वो भी मेरे मुँह में ही झड़ गई.
फिर भी हम दोनों चालू रहे और कुछ ही देर में उसने मेरा लंड फिर से खड़ा कर दिया और बोली कि अब अपने लंड को मेरी चूत में डालो, तो मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया. फिर उसने एक ही झटके में मेरा पूरा लंड अपनी चूत के अंदर ले लिया और मुझसे कहा कि अब अपनी कमर को आगे पीछे करो, तो में अपनी कमर चलाने लगा. कसम से बड़ा मज़ा आ रहा था और लगभग 20 मिनट में मैंने अपना वीर्य उसकी चूत में गिरा दिया.
अब वो भी झड़ चुकी थी और फिर उसने मुझसे कहा कि अब चोदना सीख गये हो तो कल फिर से मेरी चूत मारना और फिर में अपने घर आ गया. फिर मैंने रात को फिर से देखा कि अंकल आंटी की गांड मार रहे है.
फिर दूसरे दिन जब में आंटी के घर गया तो वो मेरा ही इंतजार कर रही थी और मुझे देखकर बोली कि जल्दी आओ मुझे नहाना है. फिर मैंने कहा कि आज में आपकी गांड लूँगा, तो उन्होंने कहा कि में भी समझ गई थी कि तुम आज मेरी गांड ही लोगे क्योंकि रात को तुमने मुझे गांड मरवाते हुए देखा था. फिर हम दोनों नंगे हो गये और आंटी की गांड देखकर मेरा मन हुआ कि इसकी गांड को बस चोदता रहूँ. फिर मैंने अपना लंड उसकी गांड के अंदर डाला, तो वो गांड मरवाने की आदि थी, इसलिए मेरा लंड उसकी गांड में आसानी से चला गया.
फिर मैंने उसकी गांड का खूब मज़ा लिया और फिर उसको सीधा लेटाकर उसकी चूत में अपना वीर्य गिरा दिया. फिर में उसके बूब्स से खेलता रहा और उसके बूब्स और होंठो को चूस-चूसकर लाल कर दिया. फिर उसके बाद से लगभग 1 महीने तक मैंने उसको रोज चोदा. फिर उसके पति का ट्रान्सफर हो गया और वो चली गई. आज भी में उनके घर कभी-कभी जाता हूँ तो उनको ज़रूर चोदता हूँ.
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अंकल और आंटी दोनों की चुदाई

हैल्लो दोस्तों, आज में जो कहानी आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ वो आज से करीब 6 महीने पहले की है. में गुजरात से हूँ और मेरी उम्र 26 साल है. मेरी छाती 38 इंच, कमर 30 इंच है और मेरा लंड 6 इंच का है. आज में आपको जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ वो एक अंकल, आंटी और मेरी है.
यह एकदम सच्ची कहानी है जिसमें मैंने आंटी को चोदा उनके साथ बहुत मज़े किए और वैसे में सेक्सी कहानियाँ पिछले कुछ सालों से पढ़कर उन सभी के मज़े लेता आ रहा हूँ और ठीक वैसी ही एक सच्ची घटना जो मेरे साथ घटी उसको में आपके लिए लेकर आया हूँ. में उम्मीद करता हूँ कि यह आपको जरुर पसंद आएगी और आप इसको पढ़कर बहुत मज़े करेंगे.
दोस्तों आज से करीब 6th महीने पहले में अहमदाबाद मेरे एक काम से गया हुआ था और वहां पर में अपने एक बहुत अच्छे दोस्त के फ्लेट में रुका हुआ था. वैसे अहमदाबाद में बहुत गर्मी पड़ती है इसलिए रात को खाना खाने के बाद मैंने अपने दोस्त की बीवी से कहा कि आप मेरा बिस्तर आज छत पर लगा देना, मुझे यहाँ पर बहुत गर्मी लग रही है तो में आज छत पर ही सो जाऊंगा.
फिर भाभी ने मेरे कहने पर मेरा बिस्तर छत पर लगा दिया और तब मैंने ऊपर जाकर देखा कि छत पर पहले से ही एक अंकल जिनकी उम्र शायद 45 साल और एक आंटी जिनकी उम्र शायद 40 साल की थी वो दोनों सोए हुए थे और उनका बिस्तर मेरे पास ही था. अंकल बीच में सोए हुए थे और उनके एक तरफ आंटी और दूसरी तरफ में सोया हुआ था.
रात को करीब एक बजे अचानक से मेरी नींद खुल गई तो मैंने देखा कि अंकल मेरे पैरों पर अपना पैर रगड़ रहे थे. मैंने उस समय बरमूडा पहना हुआ था और ऊपर कुछ नहीं पहना था और उन अंकल ने लूँगी पहनी हुई थी. अब अंकल अपना पैर मेरे पैर पर मेरे घुटनों के नीचे रगड़ रहे थे. उनको शायद लग रहा था कि में अब भी सो रहा हूँ, लेकिन मेरी नींद तो उनकी उस हरकत की वजह से कब की उड़ चुकी थी. अब मुझे नींद कहाँ आनी थी में मन ही मन बहुत चकित था और अब अंकल धीरे धीरे अपना पैर ऊपर की तरफ ले जा रहे थे और वो अब तक मेरी जाँघो तक पहुंच गये थे.
मेरा लंड तो एकदम टाइट हो गया था. फिर उसने अपने हाथों से मेरी जाँघ पर हाथ फेरना शुरू किया, जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और अब वो अपने एक हाथ से उनका लंड पकड़कर मुठ मार रहे थे और दूसरे हाथ से मेरी जाँघो को सहला रहे थे. फिर कुछ देर बाद उन्होंने मेरी छाती पर हाथ रखा और मेरे बूब्स पर हाथ फेरने लगे.
उसके बाद उन्होंने मेरी निप्पल पर उंगली फेरना शुरू किया और थोड़ी देर बाद उसने मेरे बरमूडे के नीचे से अपना एक हाथ डाल दिया और वो मेरे बरमूडे के ऊपर से हाथ फेरने लगे. फिर अंकल ने मेरे बरमूडे के नीचे से मेरा 6 इंच का लंड बाहर निकाला और उसको सहलाने लगे और वो अपने दूसरे हाथ में अपना लंड पकड़कर मुठ मारने लगे. फिर तभी थोड़ी देर बाद वो नीचे आ गये और मेरा लंड अपने मुहं में डालकर चूसने लगे.
फिर उन्होंने तुरंत मेरा पूरा लंड अपने मुहं में डाल दिया और अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो में उनके मुहं में अपने लंड को धकका देने लगा. अब वो दूसरी तरफ सो गये और उन्होंने अपनी लूँगी को पूरी उठाकर उनकी गांड को मेरी तरफ कर दिया, लेकिन मुझे उसमे कोई रूचि नहीं थी और उनकी गांड बहुत गोरी और उनके बदन पर एक भी बाल नहीं था, पूरा का पूरा एकदम साफ था.
फिर मैंने उनको मना कर दिया कि मुझे उसमे कोई भी रूचि नहीं है, मुझे सिर्फ़ औरतों में रूचि है तो वो बोले में तुम्हे बहुत मज़ा करवाऊंगा, लेकिन मैंने उनकी कोई भी बात को नहीं माना. तभी मेरे दिमाग़ में एक बात आई दोस्तों उनके पास में जो आंटी सोई हुई थी वो बहुत सुंदर और गोरी भी थी, उनके बूब्स बहुत बड़े आकार के और बहुत गोल गोल थे. उनके बारे के सोचकर मैंने उनसे कहा कि अगर आंटी मुझे उनकी चुदाई करने दे तो में आपका हर एक काम करूंगा. आप मुझे जो कुछ भी कहोगे में जरुर करूंगा.
अब वो बोले कि हाँ ठीक है, लेकिन सबसे पहले तुम्हे मेरी गांड मारनी होगी तो मैंने कहा कि मुझे आपकी हर बात मंजूर है. फिर दूसरे दिन दोपहर को में खाना खाने के बाद उनके घर पर गया. मुझे तो अभी तक भी आंटी के साथ चुदाई के ही विचार मन में आ रहे थे और मैंने दरवाजे पर लगी घंटी बजाई तो आंटी ने दरवाजा खोला और वो मेरी तरफ मुस्कुराई.
में तुरंत समझ गया कि अंकल ने इनको अब तक वो सब बता दिया होगा, उस घर में आंटी और अंकल ही रहते थे. उसके दो बेटे अमेरिका में थे वो वहीं पर रहकर अपनी नौकरी कर रहे थे और साल दो साल में कुछ दिनों के लिए वो यहाँ आते थे.
अब मैंने देखा कि आंटी ने दो गद्दे नीचे जमीन पर लगाए हुए थे और थोड़ी देर बाद अंकल स्नान करके बाथरूम से बाहर आए और उन्होंने अपने बदन पर एक टावल लपेटा हुआ था. मैंने देखा कि उनके पूरे बदन पर एक भी बाल नहीं था और उनके बूब्स बिल्कुल लड़कियो जैसे हल्के हल्के उभरे हुए थे.
अब में नीचे उस गद्दे पर लेट गया, तभी मेरे पास आंटी भी तुरंत लेट गयी और अब वो धीरे धीरे मेरे बिल्कुल पास आ गयी और मुझे अपनी अजीब सी नजर से देखने लगी, तब उन्होंने मुझसे कहा कि तुम बहुत ही जवान, सुंदर हो और तुम्हारा यह बदन भी बहुत अच्छा है.
फिर आंटी ने मुझसे कहा कि तुम्हारे अंकल को तो मुझमें बिल्कुल भी रूचि ही नहीं है, उनको तो हमेशा लड़के ही पसंद है, वो पिछले कई महीनों से मेरे साथ सोए भी नहीं है इसलिए मुझे तो अब अपनी चुदाई करवाने की बहुत इच्छा होती है, लेकिन में क्या करूं? इसलिए आज तो तुम मेरे साथ जी भरकर मेरी जमकर चुदाई करना मेरे राजा और उन्होंने यह बात कहते हुए मुझे ज़ोर से किस कर दिया. फिर में भी अब उनके बूब्स को दबाने लगा और इतने में अंकल आ गये और उन्होंने अपना टावल उतार दिया था.
फिर मैंने देखा कि उनका लंड बिल्कुल छोटे आकार का था, वो करीब चार इंच का था और अब अंकल भी मुझे किस करने लगे और मेरी एक तरफ आंटी थी और दूसरी तरफ अंकल, वो दोनों बराबर मेरे बदन से खेल रहे थे. अब आंटी ने मेरे कपड़े उतार दिए और वो खुद भी तुरंत पूरी नंगी हो गई थी. मैंने देखा कि उनका पूरा बदन बहुत गोरा चिकना था और उनकी कमर थोड़ी सी मोटी थी.
अब वो दोनों मेरे लंड को मेरी अंडरवियर से बाहर निकालकर चूसने लगे, तब आंटी ने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए खुश होकर कहा कि तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा है, वाह आज तो मुझे बड़ा मज़ा आ जाएगा. फिर अंकल ने मेरे लंड पर तेल लगाया और वो मुठ मारने लगे और कुछ ही सेकिंड में उन्होंने मेरा लंड पूरा चिकना कर दिया.
उसके बाद उन्होंने अपनी गांड और लंड पर भी बहुत सारा तेल लगाया और फिर वो मेरे सामने कुत्ते की तरह अपने दोनों घुटनों पर बैठ गये और फिर उन्होंने मुझसे इशारा करते हुए अपनी शैतानी हंसी के साथ कहा कि जल्दी से अब पूरा लंड इसके अंदर डाल दे. फिर मैंने अपना लंड उनकी गांड के छेद पर रखकर अपना पूरा ज़ोर लगाकर धक्का दिया, लेकिन लंड अंदर जा ही नहीं रहा था.
मैंने महसूस किया कि उनकी गांड बहुत टाईट थी और अब मैंने उनके दोनों कूल्हों को अपने दोनों हाथों से पूरा फैला दिया और उसके बाद मैंने दोबारा अपने लंड को ज़ोर का धक्का दिया, सबसे पहले मेरा सिर्फ़ टोपा ही अंदर गया और मैंने थोड़ा ज्यादा ज़ोर से धक्का लगाया, जिसकी वजह से अब मेरा पूरा लंड अंदर चला गया और अब में लगातार धक्के लगाने लगा और आंटी अंकल के लंड को अपने एक हाथ से पकड़कर उनकी मुठ मारने लगी, जिसकी वजह से थोड़ी देर बाद अंकल के अपना सफेद रंग का गरम वीर्य उनके हाथ पर निकाल दिया.
फिर उसके बाद वो अपने लंड के साथ धीरे धीरे शांत होने लगे और मैंने उनकी गांड से अपना लंड भी बाहर निकाल लिया. अब अंकल हमारे पास से उठकर दूसरे कमरे में चले गये और फिर उनके चले जाने के बाद आंटी तो जैसे मुझ पर भूखी बिल्ली की तरह टूट ही पड़ी, क्योंकि वो कई महीने से प्यासी जो थी. फिर उन्होंने मेरे पूरे बदन पर किस किया और मेरे लंड को तो उन्होंने पूरा का पूरा अपने मुहं में डाल दिया और वो लोलीपोप की तरह मेरे लंड का टोपा चूसने लगी जिसकी वजह से में तो पूरा मदहोश हो गया था.
फिर उन्होंने अपने बूब्स मेरे पूरे बदन पर रगड़ने शुरू किए तब उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हारे बदन पर तो कितने बाल है तुम तो पूरे मर्द हो, एक मेरे पति किसी काम के भी नहीं है. फिर मैंने उनके कहा कि अभी तो असली मर्दानगी दिखानी बाकी है और तभी उन्होंने अपना एक बूब्स मेरे मुहं पर रख दिया. में उनके बूब्स की बड़ी बड़ी निप्पल को चूसने लगा और उनके बूब्स को अपने दांत से हल्के हल्के काटने लगा. उनके बूब्स बिल्कुल ढीले और लचीले थे.
फिर में उनके दोनों बूब्स को अपने दोनों हाथों में रखकर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और मैंने महसूस किया कि उनके बूब्स मेरे हाथों में भी नहीं समा रहे थे. उनका आकार बहुत बड़ा था.
फिर वो उल्टी लेट गयी और उन्होंने मुझे गांड मारने के लिए कहा तो मैंने उनके कहने पर अपने लंड को गांड के मुहं पर रखकर एक ज़ोर का धक्का देकर लंड को एक ही बार में पूरा अंदर डाल दिया और मैंने उनकी भी गांड मारी. फिर करीब 15 मिनट तक मैंने लगातार धक्के देकर उनकी गांड मारी. उनकी गांड बहुत बड़ी थी इसलिए उनको दर्द भी नहीं हो रहा था, शायद वो इससे पहले भी ना जाने कितने लंड अपनी गांड में खा चुकी थी.
फिर कुछ देर बाद वो मेरे ऊपर चढ़ गयी और अब वो मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर उनकी चूत पर रगड़ने लगी. मैंने देखा कि उनकी चूत बहुत गीली और चिकनी हो चुकी थी. फिर मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया और वो मेरा सर अपनी चूत पर दबाने लगी और सिसकियाँ लेने लगी और अब मैंने उनकी पूरी चूत को अपने मुहं में डाल लिया और ज़ोर से चूसने लगा.
फिर तभी उनके मुहं से ज़ोर से चीखने की आवाज़ निकल गई उईईईईईई माँ आईईईईई वाह कितना मज़ा आ रहा है और ज़ोर से चाटो, मेरी पूरी चूत को आज तुम फाड़ दो, तुम कितना अच्छा चूसते हो? यह सब तुम मेरे पति को भी सिखाओ, उनको ऐसा कुछ भी नहीं आता. तुम तो बहुत बड़े जादूगर निकले चलो अब जल्दी से मुझे अपना वो असली वाला जादू भी दिखा दो जिसके लिए मैंने तुम्हे यहाँ पर बुलाया है.
फिर मैंने अपनी जीभ को उनकी चूत में डाल दिया और अब में जीभ को चूत में अंदर बाहर करने लगा. फिर में कुछ देर बाद खड़ा हो गया और मैंने आंटी को टेबल पर लेटा दिया और उनके दोनों पैरों को एक दूसरे से अलग कर दिया और फिर मैंने खड़े खड़े उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया. मेरा पूरा लंड फट से पूरा अंदर चला गया क्योंकि उनकी चूत आकार में बहुत बड़ी और गीली भी बहुत थी.
उसके बाद मैंने अपना लंड धीरे धीरे धक्कों के साथ अंदर बाहर करना शुरू किया और अपने दोनों हाथों से में उनके बूब्स को दबा रहा था और ऐसा करने में हम दोनों को बड़ा मज़ा आ रहा था. कुछ देर बाद वो भी मेरे साथ धक्के देने लगी और करीब आधे घंटे की चुदाई के बाद हम दोनों एक एक करके झड़ गये.
मैंने अपना पूरा वीर्य उनकी गीली चूत में डालकर अपने लंड से धक्का देकर चूत की गहराईयों में डाल दिया और मुझे ज्यादा चिकनाई होने की वजह से लंड के अंदर बाहर आने जाने का पता ही नहीं चला, लेकिन सच पूछो तो मज़ा बहुत आया और फिर मैंने देखा कि मेरी चुदाई की वजह से उनकी संतुष्टि अब उनके चेहरे पर साफ साफ झलक रही थी, वो बहुत खुश अपनी चुदाई से बड़ी खुश नजर आ रही थी. फिर उसके बाद में कुछ देर बाद बाथरूम में गया और अपने लंड को साफ किया. फिर कपड़े ठीक करके में अपने दोस्त के घर पर वापस आ गया, लेकिन उसके बाद भी जब तक में अपने दोस्त के पास रहा मैंने उनके साथ बड़े मज़े किए और उन दोनों को बहुत खुश किया.
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बहन को वीडियो गेम खेलना सिखाया

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम प्रेम है और में गुजरात का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 26 साल है, मेरा सीना 36 इंच, हाईट 5 फुट 7 इंच है. आज में आपको जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ, वो मेरी और मेरी कज़िन की है.
आज से करीब 1 साल पहले मेरी मम्मी का एक्सिडेंट हुआ था इसलिए घर के कामकाज के लिए मेरी कज़िन को बुलाया था, वो बहुत ही सुंदर थी, उसकी उम्र करीब मेरी जितनी ही थी. उसका रंग सांवला था, लेकिन फिर भी वो बहुत सुंदर लग रही थी, उसके बूब्स गोल-गोल और बहुत बड़े-बड़े और एकदम टाईट थे.
मेरा लंड तो उसको देखकर ही खड़ा हो जाता था, वो हमेशा टाईट ड्रेस ही पहनती थी, इसलिए उसके बूब्स और उभर कर दिखते थे, उसका नाम सोनी था. में दोपहर को वीडियो गेम्स खेल रहा था, तो तब मेरी कज़िन जिसका नाम सोनी था, वो मेरे पास आई और देखने लगी.
फिर थोड़ी देर के बाद उसको भी गेम्स खेलने का मन हुआ, तो उसने कहा मुझे भी सिख़ाओ. अब वो मेरे पास ही बैठी थी, तो मैंने उसके हाथ में गेम्स का रिमोट दिया और उसको बटन के बारे में बताने लगा, तभी मेरा हाथ उसके बूब्स को छू गया और मेरे बदन में तो करंट दौड़ गया, शायद उसको भी ऐसा ही हुआ हो, उसको भी झटका लगा, क्या सॉफ्ट-सॉफ्ट बूब्स थे? फिर वो थोड़ी दूर बैठ गयी. अब में उसको सभी बटनों का उपयोग बता रहा था कि तभी दूसरी बार मेरा हाथ उसके बूब्स को छू गया. अब मुझे तो बहुत ही मज़ा आ रहा था.
अब तो में जानबूझ कर उसके बूब्स को हाथ लगा रहा था. अब उसे भी कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था, अब वो गेम्स खेलने लगी थी, लेकिन उसका हाथ नहीं बैठ रहा था. अब में उसके हाथों में रिमोट रखकर उसका हाथ मेरे हाथों में रखकर उसे सिखाने लगा था. अब तो मेरे हाथ बारी-बारी उसके बूब्स को छू रहे थे, तो तभी मेरी मम्मी उठ गयी और उसे बुला लिया.
फिर दूसरे दिन दोपहर को वो अकेली गेम्स चालू करके बैठी थी, तो तभी में वहाँ गया और उसे अभी भी गेम्स खेलने में दिक्कत हो रही थी. फिर उसने मुझसे कहा कि मेरा हाथ अभी भी रिमोट पर नहीं बैठ रहा है. फिर मैंने कहा कि ऐसा करो तुम मेरी गोदी में बैठ जाओ, तो वो मेरी गोदी में बैठ गयी, वाह क्या गांड थी उसकी? उसके कूल्हें बड़े-बड़े और मुलायम थे. अब मेरा लंड तो फट से टाईट हो गया था और उसके दो कूल्हों के बीच की दरार में बैठ गया था.
अब तो मेरे हाथों को उसके बूब्स और मेरे लंड को उसकी गांड का मज़ा मिल रहा था. अब उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था, लेकिन उसने ड्रेस पहना था इसलिए इतना मज़ा नहीं आ रहा था. अब रात को मेरे पापा ऑफीस के काम से बाहर जाने वाले थे इसलिए रात के करीब 10 बजे में मेरे पापा को बस स्टेशन छोड़कर जब घर आया तो मेरी कज़िन सोनी वीडियो गेम्स खेल रही थी, उसने ट्राउज़र और टी-शर्ट पहना था, उसका ट्राउज़र ढीला था.
अब मेरी मम्मी सो रही थी. फिर मैंने भी ट्राउज़र और टी-शर्ट पहन लिया और अंदर कुछ नहीं पहना, जिससे मेरे लंड वाला हिस्सा बाहर निकल गया था और मेरा लंड साफ-साफ़ दिख रहा था. फिर में जैसे ही सोनी के पास गया, तो वो कुर्सी पर से उठ गयी और में कुर्सी पर बैठ गया, तो सोनी मेरी गोदी में बैठ गयी. शायद अब वो भी मुझसे चुदाई करवाना चाहती थी, उसने भी नीचे पेंटी नहीं पहनी थी, जिससे मेरे लंड का सीधा संपर्क उसकी गांड से हो रहा था. अब मेरा तो लंड एकदम कड़क हो गया था, अब तो मुझसे रहा भी नहीं जा रहा था.
फिर तभी उसने कहा कि मुझे नीचे कुछ लग रहा है और वो खड़ी हो गयी और देखने लगी, तो मेरा लंड टेंट की तरह खड़ा हो गया था. फिर उसने कहा कि ये क्या है? तो मैंने कहा कि तुम ही देख लो, तो वो शर्मा गयी. फिर मैंने खुद ही मेरा लंड बाहर निकालकर दिखाया तो उसकी आँखे फटी सी रह गयी. फिर वो बोली कि ये सांप जैसा क्या है? अब वो जानबूझ कर अंजान बन रही थी.
फिर मैंने अपना लंड उसके हाथ में दिया तो वो उसे सहलाने लगी, अब उसे बहुत अच्छा लगने लगा था और फिर उसने कहा कि ये तो बहुत सॉफ्ट और टाईट है, तो मैंने कहा कि तुम्हें खेलने का मज़ा आ रहा है? तो वो बोली कि वीडियो गेम्स से तो ये गेम अच्छा है.
अब में उसके बूब्स पर अपना हाथ फैरने लगा था तो वो बोली कि ये क्या कर रहे हो? तो मैंने कहा कि तुम मेरे लंड से खेलो, में इससे खेलता हूँ, तो वो कुछ नहीं बोली. अब में सब समझ गया था और उसके बूब्स पर अपना हाथ फैरते-फैरते दबाने लगा था, तो तभी मेरी मम्मी ने उसे बुला लिया और वो चली गयी. फिर उस रात में उसको सोचते हुए मुठ मारकर सो गया.
फिर दूसरे दिन में नाहकर किचन में पानी पीने गया, तब मैंने सिर्फ़ टावल पहन रखा था, तब सोनी वहाँ ब्रेकफास्ट बना रही थी. फिर मैंने फ्रीज़ का दरवाजा खोला और पानी की बोतल निकालकर पानी पीने लगा तो तभी मेरी नज़र सोनी पर पड़ी. अब वो मेरी छाती को घूर-घूरकर देख रही थी और मुझे उसकी आँखो में नशा दिखाई दे रहा था.
फिर मैंने कहा कि सोनी क्या देख रही हो? तो उसे ना जाने क्या हुआ? वो एकदम से मेरे सीने से लग गयी और मुझे चूमने लगी. फिर उसने मेरे कंधो पर किस किया और फिर मेरी छाती पर और फिर मेरी निपल को भी चूसने लगी. अब मेरा लंड भी टाईट हो गया था तो मैंने उसे ज़ोर से अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठो को ज़ोर से चूसने लगा. उसके होंठ बहुत ही सॉफ्ट थे, अब मुझे तो किस करने में बहुत मज़ा आ रहा था इसलिए में और ज़ोर से उसके होंठो को चूसने लगा था.
फिर जब मैंने उसके होंठ मेरे मुँह से बाहर निकाले तो उसके होंठो से खून निकल रहा था, लेकिन उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ा. फिर उसने मेरा टावल निकाल दिया और मेरा 8 इंच का लंड पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी. अब मुझे भी दर्द हो रहा था और अब उसके दांत मेरे लंड पर लग रहे थे कि तभी मेरे अंकल यानि सोनी के पापा का फोन आ गया और फिर हम दोनों प्यासे रह गये.
अब में ऐसा मौका देख रहा था कि कोई परेशान ना करे, तो तभी मेरे पापा ने कहा कि कल मेरी मम्मी को डॉक्टर को दिखाने अहमदाबाद जाना था और अहमदाबाद हमारे शहर से 6 घंटे का रास्ता है इसलिए पूरा दिन लग जाता है. अब में तो बहुत खुश हो गया और पूरा दिन और पूरी रात यही सोचकर खुश होता रहा कि कल सोनी की जमकर चुदाई करूँगा, उस दिन मैंने दो बार मुठ भी मार ली थी. फिर दूसरे दिन करीब सुबह 9 बजे सोनी मुझे उठाने आई.
अब पापा और मम्मी चले गये थे, फिर जैसे ही सोनी ने मुझे उठाने के लिए अपना हाथ लगाया तो मैंने उसे खींचकर अपनी रज़ाई के अंदर ले लिया और उसको अपनी बाहों में लेकर मसलने लगा और उसको किस करने लगा. फिर करीब 5 मिनट तक मैंने उसको खूब मसला और तभी ब्रेक फास्ट जलने की बदबू आई और वो चली गयी.
फिर मैंने ब्रश किया और सोनी को आवाज़ दी कि मेरा नहाने का पानी निकाले, वो पानी लेकर बाथरूम में आई और जैसे ही उसने बाल्टी नीचे रखी तो मैंने उसे ज़ोर से पकड़ लिया और उसके बूब्स दबाने लगा और उसके होंठो पर किस करने लगा. अब वो भी कामुक हो गयी थी.
फिर मैंने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और सोनी का ड्रेस भी निकाल दिया. अब वो सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में ही थी, अब वो क्या खूबसूरत दिख रही थी? अब उसकी गहरी-गहरी नाभि, उसके बड़े-बड़े बूब्स और उसकी मांसल जांघे देखकर तो में पागल सा हो गया और उसके बदन के हर पार्ट को चूसने लगा. उसका पेट क्या कोमल था? उसकी नाभि के पास तो बहुत ही सॉफ्ट था.
फिर मैंने उसकी नाभि में अपनी जीभ डाल दी और फिर उसकी जाँघो को चूसने लगा, उसकी जांघे बड़ी और मांसल थी. फिर मैंने उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से चूसा और फिर उसके कान की बाली को अपने मुँह में ले लिया. अब तो वो बिल्कुल मदहोश हो गयी थी और अब उसके मुँह से उहह आहह की आवाजे निकल रही थी.
फिर मैंने उसकी ब्रा और पेंटी भी निकाल दी, क्या बूब्स थे उसके? उसकी निप्पल भी बड़ी काले अंगूर के दाने जैसी थी. फिर उसने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और साबुन लगाने लगी. फिर हम दोनों ने एक दूसरे को नहलाया और टावल से पोछा.
फिर में उसको अपने हाथों में उठाकर किचन में ले गया और उसके बूब्स को चूसने लगा. अब वहाँ पर टमाटर पड़े हुए थे तो वो मैंने उसके बूब्स पर फोड़ दिए और टमाटर का रस उसके बूब्स पर से चूसने लगा. अब वो तो अपनी आँखे बंद करके मज़े ले रही थी और मुँह से आवाजे निकाल रही थी. फिर मैंने उसके पेट पर टमाटर फोड़ा और वहाँ भी चूसने लगा.
अब उसकी चूत की बारी थी, फिर मैंने उसकी चूत पर भी टमाटर फोड़कर उसकी चूत पर से टमाटर का रस चूसने लगा. अब तो वो पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी और बोल रही थी कि अब इंतजार मत कराओ, डाल दो अपना लंड, अब मुझसे रहा नहीं जाता है. फिर मैंने एक टमाटर अपने लंड पर फोड़ा और उसका रस मैंने सोनी से चुसवाया.
अब वो पागलो की तरह मेरे लंड को चूस रही थी और जब टमाटर का रस ख़त्म हो गया तो फिर भी वो मेरे लंड को चूस रही थी. अब तो मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था और फिर मैंने उसकी चूत में अपना लंड डालकर धक्का दिया, लेकिन वो घुस ही नहीं पा रहा था.
फिर मैंने उसके दोनों पैर पूरे फैला दिए और ज़ोर से धक्का दिया, तो पहले मेरे लंड का सुपाड़ा घुस गया और उसकी सील टूट गई और खून निकल गया. फिर मैंने और एक धक्का दिया तो मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अंदर घुस गया और सोनी के मुँह से आवाज़ निकल गयी उईईईई माँ धीरे करो. फिर तो में ज़ोर-ज़ोर से धक्के देने लगा और फिर करीब 20 मिनट के बाद वो झड़ गयी और मुझे कसकर पकड़ लिया.
अब वो मुझे और धक्के नहीं देने दे रही थी, लेकिन मैंने उसके दोनों हाथों को पकड़ लिया और धक्के देने लगा. फिर 10 मिनट के बाद मेरा भी सफेद पानी निकल गया और हम दोनों ढीले हो पड़ गये.
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