प्रमोशन की मज़बूरी में लंड की गुलामी

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रोशन है और एक बार मुझे काम के सिलसिले में लखनऊ जाना पड़ा, वहाँ मुझे 3 महीने का काम था. मेरे दफ़्तर में मेरी सहकर्मी जो कि सीनियर क्लर्क है, जिसका नाम रुबीना है, जिनकी उम्र 32 साल की है, उनकी शादी 12 साल पहले हुई थी और उनके पति दुबई में 2 साल से सर्विस कर रहे थे, रुबीना का फिगर 38-34-40 साँवली, लेकिन मोटी थी.
में तो उसके चूतड़ पर बहुत फिदा था, वो अपनी गांड मटका-मटकाकर चलती थी, वो एक महीने में ही काम के दरमियाँ काफ़ी घुल मिल गयी थी. एक बार तो बातों-बातों में उसने मुझसे रिक्वेस्ट की सर आप चाहे तो मेरा प्रमोशन हो सकता है इसलिए आप हेड ऑफीस में मेरी सिफारिश करेंगे तो मेरा प्रमोशन हो जाएगा और वो इसके लिए कुछ दे भी सकती है, तो तब मैंने कहा कि आप क्या दे सकती हो? तो वो कुटिल मुस्कान भरते हुए खुमारी के साथ बोली कि चाय पानी, तो में भी हंसकर रह गया.
फिर उसके बाद से तो मैंने महसूस किया कि वो मुझे अजीब निगाहों से देखती थी और उसकी नज़रों में काम वासना की ललक नज़र आती थी, तो में समझ नहीं सका कि वो ऐसे क्यों देखती है? तो तब मुझे लगा कि या तो वो प्रमोशन के लिए ऐसा कर रही है या फिर 2 साल से प्यासी होगी. फिर में भी अक्सर रुबीना को देखकर अपना लंड सहलाता था, तो वो मुझे देखकर केवल मुस्कुरा जाती थी. फिर एक दिन उसने मुझे डिनर के लिए इन्वाइट किया.
उस दिन शुक्रवार था तो में ऑफीस से उसके घर उसके साथ चला गया तो उसने मेरे लिए रास्ते से बियर की बोतल खरीद ली और होटल में डिनर का ऑर्डर दे दिया. फिर उसने घर पहुँचकर पहले अपने कपड़े चेंज किए और फिर वो मेरे लिए बियर लेकर आ गयी. अब में बियर पी रहा था और बातें कर रहा था, अब वो बार-बार मुझे अजीब निगाहों से देख रही थी और बातों-बातों में कभी-कभी आँख भी मार देती थी और अपने होंठों को अपने दातों से दबा लेती थी. अब में समझ गया था कि वो आज गर्म हो चुकी है और अब वो मेरे सामने कुर्सी पर बैठी थी.
फिर मैंने रुबीना का हाथ पकड़कर उनको अपनी तरफ खींच लिया तो उसने कोई प्रतिरोध नहीं किया. फिर मैंने रुबीना को दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और रुबीना के होठों को चूमने लगा और उसके लिप्स को चूसने लगा. अब रुबीना एकदम पागल सी हो रही थी, जैसे उसे जन्नत का मज़ा आ रहा हो. अब में रुबीना की जीभ को चूसे जा रहा था और अब मेरे हाथ रुबीना की पीठ पर चल रहे थे. फिर मेरा बायाँ हाथ रुबीना की कमर पर जाकर रुक गया और फिर उसकी बाई चूची को दबाने लगा तो अब रुबीना बेताब होने लगी थी.
फिर मैंने रुबीना के कान में कहा कि रुबीना मेरी जान तू बहुत भूखी है, तो रुबीना सिर्फ़ अपना सिर हिलाकर हाँ कह सकी. फिर मेरा हाथ धीरे-धीरे रुबीना के सलवार के नाडे पर आ गया और रुबीना को किस करते हुए एक झटके में ही उसके सलवार के नाड़े को खोल दिया. अब रुबीना की लाल सलवार सरक कर नीचे ज़मीन पर गिर गयी थी और अब वो नीचे से नंगी थी, उसकी मोटी गोरी चूत पर छोटी-छोटी झांटे थी, उसकी चूत गीली थी.
फिर रुबीना ने मेरी पेंट से मेरा लंड बाहर निकाल लिया और सहलाते हुए बोली कि हाइईईई सर आपका यह तो काफ़ी मोटा और लंबा है. फिर में रुबीना की कमीज़ को ऊपर की तरफ करने लगा, तो रुबीना और जोश में आ गयी और रुबीना ने अपनी सहूलियत के लिए अपने हाथ ऊपर की तरफ कर दिए.
मैंने उसकी कमीज़ उतार दी और उसकी कमीज़ उतारने के बाद पीछे से रुबीना की ब्रा का हुक खोल दिया और एक झटके से रुबीना की ब्रा को उतारकर फेंक दिया. फिर मैंने उसको दीवार की तरफ मुँह करके खड़ा किया और पीछे से उसकी चूचीयों को अपने दोनों हाथों में पकड़ लिया और मसलने लगा. फिर मैंने उसके निप्पल को मसलना शुरू किया तो रुबीना सिसकारियाँ भरने लगी तो मैंने उसको दीवार के सहारे और दबा दिया.
अब रुबीना की गांड पर मेरा लंड सटा हुआ था और रुबीना के दोनों बूब्स मेरी मुट्ठी में थे, अब में मेरी उंगली और अंगूठे से रुबीना के निप्पल को बेदर्दी से मसलने लगा था. अब रुबीना तो जैसे जोश में एकदम पागल सी हो रही थी. फिर 10 मिनट के बाद में रुबीना को पकड़कर टेबल के पास ले गया और टेबल पर बैठने को कहा तो रुबीना टेबल पर बैठ गयी.
अब मेरा मोटा और लंबा तना हुआ लंड रुबीना के सामने था तो उसने तुरंत ही मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ा और सहलाने लगी. फिर मैंने बोला कि रानी इसको अपने मुँह में लेकर चूसो, तो रुबीना मेरे लंड को पकड़कर अपनी जीभ से चाटने लगी. फिर थोड़ी ही देर के बाद रुबीना ने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और मेरे लंड के सुपाड़े को चूसने लगी थी.
अब रुबीना भी जोश से अपने आपको काबू में नहीं रख पा रही थी और बोली कि सर प्लीज जल्दी कुछ कीजिए ना, नहीं तो में पागल हो जाउंगी. फिर मैंने रुबीना की गांड को टेबल के किनारे पर रख दिया और उसकी टागों के बीच में आकर खड़ा हो गया. रुबीना की टागें बहुत मोटी और टाईट थी और अब रुबीना टेबल पर आधी लेटी हुई थी.
फिर मैंने रुबीना के पैरो को अपने हाथों से पकड़कर फैला दिया और अपने लंड के सुपाड़े को उसकी चूत के बीच में रख दिया और एक झटका दिया तो मेरा आधा लंड उसकी चूत को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया. अब रुबीना दर्द से चिल्ला उठी और कहराने लगी कि उईईईई माँ में मर जाउंगी, आहह सर रुक जाइए प्लीज, तो में रुक गया और अपने लंड को रुबीना की चूत में से बाहर निकाल लिया. फिर मैंने एक तकिया उठाकर रुबीना की गांड को उठाकर उसकी गांड के नीचे रख दिया तो अब रुबीना की चूत थोड़ी और ऊपर हो गयी थी.
फिर में रुबीना के ऊपर झुक गया और रुबीना के होठों को अपने मुँह में ले लिया और मेरे लंड का सुपड़ा एक बार फिर से उसकी चूत के मुहाने पर रखकर एक ज़ोरदार धक्का मारा तो रुबीना की चीख निकलते-निकलते रह गयी, क्योंकी मैंने उसके होठों को अपने होठों से दबा रखा था. अब रुबीना दर्द से कराह उठी तो में रुक गया. रुबीना के पति का लंड छोटा था और उसकी चूत के छेद का साईज़ छोटे लंड के लिए मुनासिब था.
अब मेरा आधा लंड उसकी चूत के अंदर घुस चुका था और फिर में 2-3 मिनट तक उसके ऊपर बिना हिले लेटा रहा. फिर मैंने धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया तो रुबीना अभी भी दर्द से कराह रही थी. फिर अचानक से मैंने एक जोरदार धक्का दिया तो मेरा लंड सनसनाता हुआ रुबीना की चूत में और ज़्यादा अंदर तक घुस गया और रुबीना चिल्लाने लगी और मुझे रुक जाने को कहा, लेकिन में नहीं रुका और रुबीना को तेज़ी से चोदने लगा. अब मेरा लंड बिजली की तरह रुबीना की चूत में अंदर बाहर होने लगा था.
अब जैसे ही रुबीना की चीख कुछ कम होती तो में एक धक्का ज़ोर से लगा देता था और रुबीना फिर चीख पड़ती थी. फिर कुछ देर तक में इसी तरह उसको चोदता रहा और अब धीरे-धीरे मेरा पूरा लंड रुबीना की चूत की गहराई तक जगह बना चुका था और तेज़ी के साथ अंदर बाहर हो रहा था. अब रुबीना दर्द से तड़प रही थी.
फिर 8-10 मिनट के बाद रुबीना को भी मज़ा आने लगा तो उसने अपने हाथ मेरी कमर पर कैंची की तरह कस दिए और अपनी गांड उठा-उठाकर मेरा साथ देने लगी, तो में बोला कि शाबाश मेरी रानी अब तो तुझे चोदने में मज़ा आ गया.
फिर में उसको लगभग 15-20 मिनट तक चोदता रहा और इस दौरान रुबीना 3-4 बार झड़ चुकी थी, लेकिन मेरा लंड था कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था. फिर में रुबीना के ऊपर से हट गया और उसको घोड़ी की तरह बन जाने को कहा.
फिर रुबीना उठकर ज़मीन पर आ गयी और घोड़ी की तरह हो गयी. फिर मैंने उसकी कमर पकड़कर अपना लंड पीछे से रुबीना की चूत में डाल दिया. अब 32 साल की रुबीना फिर से दर्द से कहराने लगी थी, लेकिन कुछ ही देर में रुबीना का दर्द जैसे ही कम हो गया तो रुबीना को और मज़ा आने लगा. अब रुबीना अपनी गांड को पीछे कर-करके ताल से ताल मिलाने लगी थी.
फिर 10-15 मिनट के बाद में रुबीना की चूत में ही झड़ गया और अपना लंड रुबीना की चूत में से बाहर निकालकर रुबीना के मुँह में दे दिया तो रुबीना ने मेरे लंड को चाट-चाटकर साफ किया और फिर हम दोनों साथ ही साथ ज़मीन पर ही लेट गये. फिर हम लोगों ने नंगे ही खाना खाया और खाना खाने के बाद मैंने रुबीना से कहा कि रुबीना और मज़ा दोगी? तो रुबीना ने अपना सिर हाँ में हिला दिया, तो तब मैंने अपना लंड जो कि फिर से खड़ा हो गया था, फिर से अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी.
फिर थोड़ी देर के बाद मैंने अपनी बीच की मोटी उंगली रुबीना की चूत में घुसा दी तो रुबीना तड़प उठी. अब मेरी उंगली रुबीना की चूत में अंदर बाहर होने लगी थी और अब रुबीना को भी मज़ा आने लगा था और वो आहें भरने लगी थी. फिर अचानक से में उठा और रुबीना के पैरों के बीच में आ गया और उसके दोनों पैरो को ऊपर उठाया और अपने कंधो पर रख लिया. अब मेरा तना हुआ लंड रुबीना की चूत से बस केवल 1 इंच की ही दूरी पर था.
फिर मैंने उसकी आँखो में देखा और बोला कि चोदू मेरी रानी, तो रुबीना ने अपना सिर हाँ में हिला दिया और अपनी चूत को मेरे लंड से सटा दिया और बोली कि धीरे-धीरे चोदना प्लीज़, बहुत दर्द होता है. फिर मैंने उसकी चूची को पकड़ा और निप्पल को मसलते हुए अपने लंड को उसकी चूत में घुसाने लगा. अभी तक मैंने हल्का सा धक्का मारा था, लेकिन मेरा आधा लंड रुबीना की चूत में घुस चुका था.
फिर में रुबीना की चूची को दबाते हुए और उसके दोनों निपल्स को खींचते हुए बोला कि एक बार में पूरा अंदर लोगी? तो अब रुबीना तो एकदम जोश में थी और रुबीना ने दर्द की परवाह ना करते हुए कहा कि हाँ सर और फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया, अब इसके पहले कि रुबीना कुछ समझ पाती मैंने एक ही धक्के में अपना पूरा लंड वापस से रुबीना की चूत की गहराई तक घुसा दिया. अब रुबीना अपनी चीख बड़ी मुश्किल से रोक पा रही थी.
फिर थोड़ी देर के बाद मैंने रुबीना को तेज़ी से चोदना शुरू कर दिया. अब रुबीना के पैरों की पायल मेरे हर धक्के के साथ बजने लगी थी और उसकी पायल की आवाज़ से मुझको और जोश आने लगा था और में रुबीना को तेज़ी के साथ चोदने लगा था. अब मेरे हाथ अभी भी रुबीना की चूची के निपल्स को मसल रहे थे और रुबीना को दर्द हो रहा था, लेकिन वो चुप थी क्योंकि आज 12 साल के बाद कोई मोटा, तगड़ा लंड उसकी चूत की प्यास को बुझा रहा था.
फिर थोड़ी देर के बाद मैंने रुबीना के पैरो को ऊपर उठाया और रुबीना के कंधों की तरफ़ झुका दिया. तो रुबीना एकदम दोहरी हो गयी और रुबीना की चूत और ऊपर उठ आई और फिर मैंने उसके पैरों को पकड़कर बहुत ही तेज़ी के साथ रुबीना की चुदाई करनी शुरू कर दी. अब मुझे मेरे लंड के सुपाड़े पर उसकी बच्चेदानी का मुँह महसूस होने लगा था. अब रुबीना और भी जोश में आ गयी थी और उसने अपनी आँखें बंद कर ली थी.
अब रुबीना के मुँह से केवल यही आवाज़ें निकल रही थी सर ऐसे ही और कस-कसकर, ज़ोर से चोदीए और ज़ोर से चोदीए, फाड़ दीजिए मेरी चूत को. अब मेरे चेहरे का पसीना रुबीना के चेहरे पर गिर रहा था, लेकिन मेरा लंड राज रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था. अब तक रुबीना 2-3 बार झड़ चुकी थी.
फिर कुछ ही देर में मेरे लंड ने उसकी चूत में अपना पानी छोड़ दिया तो फ़िर हम दोनों थोड़ी देर तक एक दूसरे के ऐसे ही ऊपर पड़े रहे और रुबीना मुझे किस करती रही. फिर में रुबीना के ऊपर से हट गया और रुबीना के बगल में लेट गया. फिर थोड़ी देर के बाद रुबीना ने मेरे मुरझाए हुए लंड को अपने हाथों में लिया तो मैंने रूबीना की आँखों में देखा तो जैसे वो एक बार फिर से चोदने की इज़ाज़त माँग रही हो.
फिर रुबीना ने अपने होठों को दाँत से काटते हुए कहा कि अगर आप बुरा ना मानो तो में आपके लंड को फिर से चूसना चाहती हूँ प्लीज, तो में बोला कि इसमें इज़ाज़त की क्या बात है? ये लंड तो अब सिर्फ़ तुम्हारा ही है. तो रुबीना मेरे पैरों के बीच में आकर बैठ गयी और अपने दोनों हाथों से मेरे लंड को पकड़ा और मेरे लंड के सुपाड़े पर धीरे से किस किया और मेरी तरफ देखकर आँख मारी और वापस से अपने होठों को मेरे लंड पर रख दिया. अब रुबीना मेरे लंड को पकड़कर अपने मुँह को ऊपर नीचे करने लगी थी और मेरा लंड बिल्कुल तन गया था.
फिर रुबीना उठकर मेरे ऊपर आ गयी और अपने हाथ से मेरे लंड को पोज़िशन में करके अपनी चूत के बीच में रख दिया और ऊपर से दबाने लगी, लेकिन मेरा सिर्फ़ सुपाड़ा ही रुबीना की चूत में अंदर घुस पाया और उसने तरसती निगाहों से मेरी तरफ देखा, तो में उसका इशारा समझ गया.
फिर मैंने उसकी कमर को पकड़कर कसकर नीचे किया तो एक ही झटके में मेरा आधे से ज़्यादा लंड रुबीना की चूत में अंदर घुस गया. अब रुबीना धीरे-धीरे ऊपर नीचे होने लगी थी और में रुबीना की कमर को पकड़े हुए था. फिर रुबीना ने अपनी आँखें बंद कर ली और चुदाई का मज़ा लेने लगी. अब रुबीना की रफ़्तार बढ़ने लगी थी और वो इतनी तेज हो गयी की पता ही नहीं लगा कि कब हम दोनों झड़ गये? फिर हम दोनों एक दूसरे की बाहों में ही लिपटकर लेट गये. फिर लगभग 1 घंटे के बाद मैंने अपना लंड रुबीना के हाथों में दे दिया और अब वो फिर से तन गया था.
फिर में बोला कि रुबीना अब तुम घोड़ी बन जाओ, तो रुबीना ज़मीन पर आकर घोड़ी बन गयी. फिर तब मैंने बोला कि रुबीना अब में तुम्हारी गांड मारूँगा, तो रुबीना डर गयी क्योंकि उसको ऐसा लग रहा था कि मुझको गांड बहुत पसंद है और वो डरते हुए बोली कि बहुत दर्द होगा, प्लीज ऐसा मत करो, तो मैंने बोला कि तुम घबराओं मत में आराम से करूँगा. फिर रुबीना भी मस्त हो गयी और बोली कि ओके आप तो मेरे बॉस है, मेरा सब कुछ आपका ही तो है, आप जो चाहे वो करे, आज आपकी रुबीना आपके लंड की गुलाम है. सर मेरी गांड को फाड़ दीजिए, में कितना भी चिल्लाऊं लेकिन आप रुकना मत, अपनी रुबीना को बेदर्दी से चोदना.
फिर में उसके पीछे आ गया और अपने लंड और रुबीना की गांड पर ढेर सारा वैसलीन लगा दिया. फिर मैंने रुबीना की गांड के छेद पर अपने लंड की टोपी को रखा और रुबीना की कमर को पकड़ लिया और धीरे-धीरे अपने लंड को रुबीना की गांड में घुसाने लगा तो रुबीना चिल्लाने लगी. अभी तक मेरे लंड की सिर्फ़ टोपी ही घुस पाई थी.
फिर मैंने रुबीना की गांड के छेद को अपने हाथों से फैलाया और फिर से रुबीना की कमर को पकड़कर एक धक्का दिया, तो रुबीना दर्द से अपना सिर कुतिया की तरह इधर उधर करने लगी. फिर मैंने थोड़ा ज़ोर और लगाया, तो रुबीना चिल्लाने लगी, तो मैंने बोला कि रुबीना मेरी जान अगर तुम चिल्लाओगी तो कैसे काम बनेगा? अभी तो ये 3 इंच ही अंदर घुसा है. फिर रुबीना ने कहा कि मेरे चिल्लाने की आप परवाह मत कीजिए, घुसा दीजिए अपने पूरे लंड को मेरी गांड में, फाड़ डालिए इसे.
फिर मैंने रुबीना के मुँह पर अपना एक हाथ रख दिया और उसकी कमर को पकड़कर धक्के पर धक्का लगाते हुए अपने लंड को रुबीना की गांड में घुसाने लगा. अब रुबीना की गांड में जैसे बहुत दर्द होने लगा था और मेरा लंड रुबीना की गांड में और गहराई तक घुसने लगा था. फिर मैंने बोला कि शाबाश रुबीना मेरा लंड अब तुम्हारी गांड में 6 इंच तक अंदर घुस चुका है.
अब दर्द से रुबीना की हालत खराब होने लगी थी और में तेज़ी से रुबीना की गांड को मारने लगा था और रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था. फिर रुबीना की गांड चौड़ी होती गयी और उसका दर्द बढ़ता गया और उसकी गांड में दर्द की वजह से रुबीना सिसकियाँ लेती रही. अब रुबीना की आँखों से आँसू भी निकल आए थे, लेकिन रुबीना ने हिम्मत नहीं हारी. फिर जब मेरा लंड पूरा उसकी गांड में अंदर घुस गया तो में रुक गया. फिर थोड़ी देर में रुबीना का दर्द धीरे-धीरे कम हो गया तो मैंने फिर से धीरे-धीरे अपना लंड पेलना शुरू कर दिया.
अब में अपना आधा लंड बाहर निकालता और वापस से एक ही धक्के में अपना पूरा लंड उसकी गांड के अंदर तक डाल देता था. अब रुबीना भी अपनी गांड मेरे हर धक्के के साथ-साथ हिलाने लगी थी, हालांकि अभी उसका दर्द ख़त्म नहीं हुआ था. अब में अपनी फुल स्पीड से रुबीना को चोदने लगा था और अब में अपना पूरा लंड बाहर निकालता और वापस से तेज़ी के साथ अंदर घुसा देता था. अब रुबीना को विश्वास नहीं हो रहा था कि इतना लंबा और मोटा लंड रुबीना कभी अपनी गांड में भी ले पाएगी. अब में बहुत मज़े ले-लेकर रुबीना की गांड को मारने में लगा हुआ था.
अब रुबीना और ज़्यादा मस्त हो गयी थी और अपनी गांड पीछे करते हुए बोली कि सर पेलिए मुझे, मेरी गांड फाड़ दीजिए, अपनी रुबीना की गांड चौड़ी कर डालिए, मुझे बेदर्दी से पेलिए सर और फिर मैंने रुबीना की गांड पकड़कर अपना लंड और गहराई तक अंदर घुसा दिया. फिर थोड़ी देर के बाद में रुबीना की गांड में ही झड़ गया और फिर हम दोनों बिस्तर पर ही लेट गये. अब हम दोनों की साँसें फूली हुई थी और फिर 20-25 मिनट तक ऐसे ही पड़े रहने के बाद रुबीना बाथरूम में चली गयी. अब रुबीना वापस आने पर बहुत खुश थी और में भी बहुत खुश था और फिर मैंने एक हफ्ते के अंदर उसका प्रमोशन करा दिया और जब तक वहाँ रहा हर रात रुबीना की चुदाई में बिताई.
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ससुर जी की असली रखैल बन गई

हैल्लो दोस्तों, में एक बार फिर से अपनी एक और नई कहानी को लेकर आप सभी के सामने हाजिर हूँ. दोस्तों मेरा नाम सपना है और में जदोहपुर में रहती हूँ मेरे पति बाहर नौकरी करते है इसलिए वो साल में एक दो बार ही हमारे घर पर आ पाते है और बाहर नौकरी करने की वजह से उनके पास मुझे देने के लिए बिल्कुल भी समय नहीं होता है जिसकी वजह से में हमेशा प्यासी तड़पती रहती हूँ और वो है जिनको मेरी बिल्कुल भी परवाह नहीं थी.
उनके बाहर रहने की वजह से मेरे घर पर में मेरे भाई और मेरी ननद के साथ रहती हूँ और उन दिनों गरमी की छुट्टियाँ थी जिसकी वजह से मेरा भाई और ननद कहीं बाहर घूमने गये हुए थे और में अपने घर में एकदम अकेली थी और घर में अकेली होने की वजह से में बहुत मॉर्डन और खुली खुली रहती थी इसलिए में कभी सलवार, कुर्ता तो कभी जींस, टॉप तो कभी स्कर्ट, टी-शर्ट तो कभी गाउन पहना करती थी और हमारा घर बहुत बड़ा है और उसमे बहुत सारे कमरे है.
एक दिन मेरे ससुर जी आ गए और वो करीब 10-15 दिनों के लिए आए थे और उस समय घर पर कोई भी नहीं था और सभी लोग बाहर गए थे. तभी मेरे ससुर जी आ गए और मैंने मन ही मन सोच लिया कि चलो अच्छा हुआ घर में कोई तो आ गया वरना इतने बड़े घर पर में बिल्कुल अकेली थी. दोस्तों मेरे ससुर जी दिखने में बहुत ही अच्छे है वो 50 की उम्र में भी एकदम जवान लगते है और उनको देखकर एक बार तो मेरा भी मन हुआ कि कुछ मज़े मस्ती हो जाए, लेकिन वो मेरे ससुर है यह बात सोचकर में रुक गई.
फिर मेरे ससुर थोड़े दिन तक तो ठीक रहे और उनका मेरे साथ व्यहवार अच्छा रहा, लेकिन उसके बाद मैंने महसूस किया कि वो अब मुझे कुछ अलग नज़र से देख रहे है, वो मुझे हमेशा बहुत गौर से देखते थे. जब कभी भी में आती जाती तो वो मेरे बूब्स को और मेरे पैर को बहुत ध्यान गौर से देखते. दोस्तों में तुरंत समझ गई कि वो मुझसे अब क्या चाहते है, लेकिन वो कभी भी मुझसे यह सब बातें बोल नहीं सकते थे, क्योंकि वो रिश्ते में मेरे ससुर जी थे.
फिर मैंने धीरे धीरे महसूस किया कि मेरे ससुर जी अब मुझे नहाते हुए और ज्यादा से ज्यादा बिना कपड़ो के देखने की हमेशा कोशिश किया करते थे और में यह बात जान गई थी और उनकी नियत को पहचान गई थी इसलिए में अब उनको अपनी तरफ से ज्यादा से ज्यादा मौके देती थी जिससे वो मुझे देख ले और में यह बात सोचकर तो कई बार बहुत गरम हो जाती थी.
एक दिन मेरी यह इच्छा भी पूरी हो गई और उस दिन ससुर जी ने मुझसे बोला कि बेटी यह पानी है इसको पीने से सब रोग दूर हो जाते है और इसको पीने से कभी कोई बीमारी भी नहीं होती है, तो मैंने उनसे वो पानी ले लिया और रख दिया.
फिर रात को मैंने देखा कि मेरे ससुर जी रसोई में जाकर मेरे लिए जो दूध ला रहे है उन्होंने उसमे कुछ मिला दिया है मैंने उनको यह काम करते हुए देख लिया था, लेकिन वो मुझे ना देख सके में चुपचाप वापस अपने कमर में आ गई और में बैठ गई तभी थोड़े देर के बाद मेरे ससुरजी भी आ गए और वो मुझसे कहने लगे कि बेटी तुम यह दूध पी लो और उसके बाद में सो जाओ इतना कहकर वो उनके कमरे में चले गए और मैंने उनके चले जाने के बाद वो दूध जानबूझ कर चोरी छिपे नीचे गिरा दिया और में सो गई.
अब में सोने का नाटक करके चुपचाप लेटी रही करीब दो घंटे के बाद मेरे ससुरजी दोबारा मेरे कमरे में आ गए उन्होंने मुझे आवाज़ दी, लेकिन में एकदम चुपचाप लेटी रही वो मेरी तरफ से कोई भी हरकत ना होते देख तुरंत समझ गए कि में अब तक गहरी नींद में सो चुकी हूँ इसलिए वो भी चुपचाप मेरे पास में आकर लेट गए और थोड़ी देर के बाद उन्होंने मेरे गाउन को धीरे से थोड़ा सा ऊपर उठा दिया. पहले उन्होंने कम उठाया था और फिर घुटनों तक और उसके बाद उन्होंने अपना एक हाथ मेरे बूब्स पर रख दिया और वो मेरे बूब्स को हल्के हल्के दबाने लगे.
तो कुछ देर बाद मेरी जवानी अंदर ही अंदर सुलगने लगी और में एकदम से उठ गई मुझे अचानक से अपने सामने ऐसे देखकर बाबूजी (मेरे ससुर) बहुत ज्यादा डर गए और वो मुझसे कहने लगे कि बेटी मुझसे ग़लती हो गई है तुम यह बात किसी से मत कहना अब में कभी भी ऐसा दोबारा नहीं करूंगा, में क्या करूं बहु तुम बहुत ही सेक्सी हो इसलिए मेरा मन तुम्हे देखकर डोल गया था, कोई बात नहीं बेटी में अब यहाँ से चला जाता हूँ, लेकिन तभी मैंने उनको यह सब करने से साफ मना कर दिया और मैंने उनसे बोला कि कोई बात नहीं आप एक बार कर लो में भी अंदर ही अंदर इस आग में आपकी तरह बहुत जल रही हूँ बाबूजी. तो मेरे मुहं से यह बात सुनकर वो बहुत खुश हो गए और उन्होंने जल्दी से मेरा गाउन पूरा उतार दिया और वो खुद भी तुरंत नंगे हो गए.
दोस्तों अब में उनके लंड को अपने सामने नंगा देखकर बहुत खुश हो गई क्योंकि वो बहुत लंबा था, लेकिन वो थोड़ा सा नीचे की तरफ झुका हुआ था और में झट से समझ गई कि वो डर की वजह से ऐसा हुआ होगा. अब उन्होंने सबसे पहले मुझे पूरा नंगा किया और फिर उन्होंने मुझे खड़ा किया और बहुत ध्यान से उन्होंने मेरे पूरे शरीर को देखा और उसके बाद बिस्तर पर मुझे लेटाकर वो मुझे पागलों की तरह चूमने लगे और वो मेरे बूब्स को दबाते हुए बार बार उसको चूस भी रहे थे. फिर कुछ देर के बाद वो आचनक से नीचे आकर मेरी कामुक चूत पर किस करने लगे और उसको चाटने भी लगे. दोस्तों में किसी भी शब्दों में लिखकर नहीं बता सकती मुझे कैसा लग रहा था और कितना मज़ा आ रहा था?
में तो जैसे उस समय जन्नत में हूँ मुझे ऐसा महसूस हो रहा था, लेकिन अब मुझसे बिल्कुल भी सहन नहीं हो रहा था और इसलिए में बोल पड़ी कि बाबूजी बस अब प्लीज आप जल्दी से मेरी प्यास को बुझा दो मुझे और ज्यादा मत तरसाओ. मेरे मुहं से यह शब्द सुनकर वो तुरंत मेरे ऊपर आ गये और उन्होंने मेरे दोनों घुटनों को मोड़ दिया था. अब उन्होंने अपने लंड को मेरी चूत के मुहं पर रखकर एक ज़ोर का धक्का मार दिया, जिसकी वजह से एक ही बार में उनका पूरा लंड मेरी चूत की गहराईयों में चला गया और अब मेरे मुहं से एक बहुत ज़ोर की चीख निकल गई आईईईईईइई रे में मर गइईईईईईई प्लीज थोड़ा धीरे करो बाबूजी.
फिर बाबूजी ने धीरे धीरे धक्के देकर मेरी चुदाई करना शुरू कर दिया और उसके बाद जो मुझे और बाबूजी हम दोनों को मज़ा आने लगा. मुझे बहुत अच्छा लगने लगा और में बता नहीं सकती. फिर कुछ समय बाद मुझे लगा कि में अब झड़ने वाली हूँ तो में बोल पड़ी बाबूजी प्लीज अब जल्दी से करो में अब झड़ने वाली हूँ और में अब ज्यादा देर नहीं रुक सकती प्लीज. फिर मेरे मुहं से यह बात सुनकर बाबूजी अब और भी तेज़ धक्के देने लगे थे और मेरे मुहं से एक तेज़ आवाज़ निकली आईईईईईईई में तो गइईईईई सम्भालो मुझे ऊईईईई बाबूजी में तो मर गईईईईई और फिर में इतना कहकर झड़ गई और बाबूजी भी ऊऊईईईईई रे ऊह्ह्ह्ह बेटे बोलते हुए वो झड़ गए.
उन्होंने अपना पूरा वीर्य मेरी चूत में डालकर अपने लंड को अंदर बाहर करके एक दूसरे में मिला दिया और अब उनका वीर्य मेरी चूत रस के साथ बहकर बाहर आने लगा वो गरम गरम माल बहकर मेरी गोरी जांघो तक पहुंच गया.
फिर उसके बाद हम दोनों उठकर सीधे बाथरूम में नहाने के लिए चले गए और नहाने के बाद लाइट चली गई तो मैंने बाबूजी से बोला कि बाबूजी अब क्या करें? लाइट चली गई आप कपड़े पहनकर बाहर आ जाओ, तो बाबूजी ने बोला कि अरे में क्या पहनूं मेरे कपड़े गीले हो गए है और मुझे अँधेरे में दिखाई भी नहीं देगा, तो मैंने उनसे बोला कि आप एक काम करो, आप मेरे कपड़े पहन लो. फिर बाबूजी बोले कि में तुम्हारे कपड़े कैसे पहन सकता हूँ?
मैंने उनसे बोला कि नहीं तो आपको लाईट आने तक नंगे ही रहना होगा, तो वो बोले कि हाँ ठीक है उसके बाद उन्होंने मेरी स्कर्ट और टॉपर पहन लिया और वो बाहर आ गए और उसके बाद हम दोनों मेरे बेडरूम के अंदर चले गये और थोड़ी देर बाद लाइट आई तब मैंने देखा कि बेड की चादर के ऊपर बहुत सारा वीर्य लगा हुआ था इसलिए मैंने वो चादर हटाकर में अलमारी से दूसरी चादर लेने के लिए गई और में चादर निकालने लगी. फिर तभी उस चादर के साथ कुछ कपड़े भी नीच गिरे और मैंने देखा तो वो मेरी शादी का लाल जोड़ा था.
तब मुझसे मेरे ससुर जी ने पूछा कि बेटा क्या गिरा? तो मैंने उनसे बोला कि बाबूजी वो तो मेरी शादी का जोड़ा गिर गया है यह बात सुनकर ससुर जी ने मुझसे बोला कि तुम उसको बाहर ही रहने दो और फिर वो मुझसे बोले कि बहु एक बार में चाहता हूँ कि तुम इन कपड़ो को मेरे लिए पहनो और एक बार फिर से नई दुल्हन की तरह सजकर मेरे सामने शरमाकर बैठो और उसके बाद हम दोनों सुहागरात मनाए और फिर हम दोनों शादी भी करेंगे और फिर में तुमको मेरी दुल्हन बनाकर तुम्हारी बहुत जमकर चुदाई करूंगा.
फिर मैंने उनसे बोला कि आज नहीं हम आगे का काम कल दोबारा से करेंगे तो हमे बड़ा मज़ा आएगा. मेरी बात को सुनकर वो बोले कि हाँ ठीक है.
दोस्तों उसके बाद हम दोनों ने एक बार फिर से चुदाई के मज़े लिए और उसके बाद हम दोनों नंगे ही थककर सो गए उसके बाद हम दोनों दूसरी सुबह 11 बजे सोकर उठे और फिर हमने चाय नाश्ता किया और दोपहर का खाना खाया और उसके बाद हम दोनों शाम की चुदाई के लिए तैयारी करने लगे और फिर शाम को मुझे वो लाल जोड़ पहनाकर मेरे ससुर जी ने मुझसे शादी करके मेरे साथ सुहागरात मनाई उन्होंने मुझे बहुत जमकर चोदा और मुझे अपनी चुदाई से पूरी तरह से खुश कर दिया और हम दोनों ने बहुत मज़े किए, वो जब तक मेरे पास रहे, तो लगातार दिन रात जब भी उन्हें मौका मिलता वो मेरी चुदाई करते रहे और इस तरह से में उनकी दूसरी बीवी और एक असली रखैल बन गई. उन्होंने मुझसे बहुत जमकर चोदा और में उनके चोदने के तरीके से बहुत खुश हो गई, हर एक नये तरीके से उन्होंने मुझे पूरी तरह से संतुष्ट किया और वो मज़ा वो सुख दिया जिसके लिए में इतने लंबे समय से तरस रही थी. में उनका साथ पाकर बहुत खुश थी.
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आंटी को चोदा नये साल की पार्टी में

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रौनक है और मेरी उम्र 23 साल है. में दिल्ली का रहने वाला हूँ और में बिज़नसमेन हूँ, मेरी इस साईट पर यह पहली स्टोरी है. ये स्टोरी 2 साल पहले की है और आज में आपको मेरी लाईफ का एक अनुभव बताने करने जा रहा हूँ.
अब में आपका ज़्यादा टाईम ना लेते हुए सीधे कहानी पर आता हूँ. ये बात 31 दिसम्बर रात की है, हम सारे फ्रेंड्स एक क्लब में न्यू ईयर पार्टी मनाने गये थे, वहाँ बहुत भीड़ थी और वहाँ बहुत सारी सुंदर आंटी और गर्ल्स भी थी. अब जब में डांस कर रहा था तो एक आंटी मुझसे से टकरा गई, वो मेरे पीछे डांस कर रही थी, उसकी उम्र लगभग 29 साल के करीब होगी और उसकी फिगर 36-30-34 के लगभग थी और वो दिखने में बहुत सेक्सी थी. फिर में डांस करता करता उससे टकरा गया और उसके साथ उसका पति भी डांस कर रहा था और वो पूरा शराबी था.
फिर वो काफ़ी देर तक डांस करती रही और उसका पति वहाँ से चला गया. फिर में उसके साथ डांस करने लगा. अब जब हम डांस कर रहे थे तो वो मुझे टच कर रही थी और मुस्कुरा रही थी. अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, जिसके कारण मेरा लंड खड़ा हो गया था. फिर जब उसने देखा तो वो मेरे नज़दीक आने लगी और हमने 30 मिनट तक डांस किया. इतने में उसका पति वापस आ गया और उसे ले जाने लगा, तो फिर आंटी ने मेरी तरफ देखकर इशारा किया और में भी उसके पीछे चल पड़ा.
फिर अंकल ने आंटी को एक खाली टेबल पर बैठा दिया और एक ड्रिंक ऑर्डर किया. फिर इतने में मैंने आंटी से अपना नंबर एक्सचेंज किया और वापस आ गया. फिर थोड़ी देर के बाद मुझे एक अंजान नंबर से मैसेज आया कि पार्किंग में आ जाओ. फिर मैंने अपने फ्रेंड्स को बोला कि मेरा डांस करने का मन नहीं है तो में वॉशरूम जाकर आया और आप डांस करो.
फिर में वहाँ से बाहर आ गया और पार्किंग में चला गया. फिर वहाँ जाकर मैंने उसी नंबर पर कॉल किया तो वो नंबर उसी आंटी का था. फिर में वहाँ आंटी के पास गाड़ी में चला गया. फिर आंटी ने मुझे बोला कि मुझे अपनी गाड़ी में ले चलो. इतने में हम मेरी गाड़ी की और चलने लगे और आंटी ने कसकर मेरा हाथ पकड़ लिया, अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. फिर हम मेरी गाड़ी में पहुँच गये और अंदर बैठ गये.
फिर मैंने आंटी के नरम-नरम होंठो से अपने होंठ जोड़ दिए, अब मेरा लंड खड़ा हो गया था तो आंटी ने उसे पकड़ लिया और मेरी पेंट के ऊपर से ही सहलाने लगी. अब हम 10 से 15 मिनट तक किस करते रहे और उसके बाद मैंने आंटी के कपड़े धीरे-धीरे उतारने शुरू किए, उसने बड़ी सेक्सी स्लेक्स और ऊपर नारंगी कलर का टॉप पहना हुआ था.
फिर मैंने धीरे-धीरे उसका टॉप खोलना शुरू किया और उसके अंदर उसने वाईट कलर की ब्रा पहनी हुई थी. जब मैंने उसको खोला तो उसमें से उसके बूब्स उछलकर मेरे सामने आ गये और अब में देखता रहा. उसके निप्पल पिंक कलर के थे और मैंने उनको चूसना शुरू किया. अब यह सिलसिला 15 मिनट तक चलता रहा और अब उसके मुँह से आह्ह्ह उहह आअहह की आवाज़ें आ रही थी.
फिर उसने मेरी पेंट खोलकर मेरे लंड को अपने हाथ मे लेकर बिना टाईम खराब किए चूसना शुरू किया. अब मेरा लंड चूसने के बाद और जोश में आ गया था. फिर मैंने उसकी नरम-नरम गुलाबी चूत में अपनी उंगली डालनी शुरू की और में काफ़ी देर तक फिंगरिंग करता रहा. उसके बाद मैंने उसकी स्लेक्स को पूरी तरह से उतार दिया. फिर में उसकी चूत को बहुत देर तक अपनी जीभ से चाटता रहा और अपनी जीभ को उसकी चूत में अंदर तक डाल दिया.
फिर उसके बाद उसने मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत के नज़दीक कर दिया और अब वो मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर डालने के लिए बेकरार थी. फिर जब उसने मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत के ऊपर रखा तो मुझे और जोश आया और मैंने एकदम से अपने लंड को अंदर कर दिया.
फिर वो बोली कि रौनक धीरे-धीरे करो, बहुत दर्द हो रहा है, सॉरी में आपको तो बताना ही भूल गया कि मेरा लंड 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है, लेकिन अब में आउट ऑफ कंट्रोल था और बहुत तेज़ी से अपने लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा था. फिर मैंने उसको पलटने को कहा. फिर मैंने उसकी गोल और सॉफ्ट गांड के ऊपर अपना हाथ घुमाया. फिर मैंने उसको डोगी स्टाईल में चोदना शुरू किया और इस तरह में धीरे- धीरे आधे घंटे तक उसे चोदता रहा.
अब उसके मुँह से आहह उहह की आवाज़ें आ रही थी. फिर वो मुझे और तेज होने के लिए बोलने लगी. अब मुझे लगा कि वो झड़ने वाली है, तब में उसे और तेज़ी से चोदने लगा. फिर 10-15 मिनट तक तेज-तेज धक्के देने के बाद में भी झड़ने लगा था, तो मैंने उसके बूब्स के ऊपर अपना पानी छोड़ दिया. फिर बाद में हम दोनों ने अपने-अपने कपड़े ठीक किए और गाड़ी से बाहर निकल आए. तभी आंटी ने मुझे एक लंबा किस दिया. फिर मैंने भी उनके बूब्स दबा दिए. फिर आंटी ने बोला कि में तुमसे दुबारा मिलना चाहूँगी, तभी अंकल का फोन आया और वो वहाँ से चली गई.
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भाभी की मतवाली गांड की सैर

हैल्लो दोस्तों, आप सभी बहुत अच्छी तरह से जानते और समझते भी है कि एक जवान औरत के साथ सेक्स करना उस औरत को चोदकर अपना बनाना और उसकी चुदाई के मज़े लेने हर एक जवान लड़के का सपना होता है और यही सपना मेरा भी था कि किसी मस्त, जवान औरत की गांड को मारी जाए और उसकी चूत में अपनी जीभ को डालकर उसका रस चखा जाए, उसके मज़े लिए जाए और अपने लंड की ताकत से उसकी चूत को चुदाई के असली मज़े दूँ.
दोस्तों मुझे उस हर एक औरत की भरी-भरी कसी हुई उठान लिए ब्लाउज में दूध से भरे बूब्स हमेशा हिलते हुए मुझे अपनी तरफ आकर्षित करते और में उनको दबाने के सपनो में खो जाता कि कब में उसके ब्लाउज के बटन खोलकर उन बूब्स को आज़ाद करूँगा, ब्लाउज के हुक को खोलकर ब्रा को हटाकर में उन दोनों बूब्स को आजाद करके अपने हाथों में लेकर दबाऊंगा और कब उस औरत के नरम मुलायम बूब्स मेरे हाथों में आएँगे? और कब में भी उनके निप्पल को अपने मुहं में लेकर उनके रस का मज़ा लूँगा?
दोस्तों में अपने मोहल्ले की हर जवान, गोरी, सुंदर और प्यारी भाभी के बारे में बस यही बातें सोचता था कि रात को यह कितना मज़ा देती होगी और लंड की सवारी करके हर रोज़ जन्नत घूमने जाती होगी. दोस्तों वैसे हर एक भाभी भी मुझसे बहुत घुलीमिली थी, कभी भी उनको कोई काम होता तो उनका यह देवर हमेशा उनके किसी भी काम को करने के लिए तैयार रहता था.
दोस्तों में आज आप सभी चाहने वालों को अपनी एक ऐसी अनोखी रोचक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ, जिसको पढ़कर आप लोगों को जरुर मज़ा आएगा, जिसमें मेरे सभी देखे हुए सपने मेरी भाभी ने पूरे किए और उन्होंने मेरा पूरा पूरा साथ दिया और हमने मज़े किए.
अब आगे पूरे विस्तार से सुनिए हमने ऐसा क्या क्या किया और कैसे मैंने अपनी भाभी के मज़े लिए? में उम्मीद करता हूँ कि यह आप लोगों को जरुर पसंद आएगी.
दोस्तों एक बार मेरे एक दूर के भैया हमारे यहाँ पर अपनी बहुत सुंदर सेक्सी बीवी के साथ कुछ दिनों के लिए रहने आए, जब मैंने अपनी भाभी को पहली बार देखा तो में उन पर लट्टू हो गया, क्योंकि वो तो बला की सेक्सी गोरी थी, मेरी नजर हर बार घूम फिरकर उनकी तरफ जाती और में उनके उभरे हुए बूब्स को देखकर अपनी आखें सेकने लगा. दोस्तों सच कहूँ तो मेरा उन पर दिल आ गया था, वो मेरे मन को भा गई थी. अब आगे सुनिए कि मेरे साथ क्या हुआ?
यह बात उस रात की है और मुझे ज्यादा गरमी होने की वजह से नींद नहीं आ रही थी, हम ऐसे ही बाहर आँगन में निकलकर आ गये, सामने बेडरूम की खिड़की से हल्की ट्यूब लाईट की रोशनी बाहर आ रही थी, क्योंकि खिड़की के काँच पर कपड़ा पड़ा था, परंतु खिड़की का एक दरवाज़ा हल्का टेढ़ा खुला था ताकि साफ हवा कमरे में आ जा सके. तभी मैंने सोचा कि यह भैया क्या पढ़ रहे हैं? मैंने बस हल्के से दबे पैर पास जाकर खिड़की के नीचे से अंदर की तरफ देखा और वो सब कुछ देखकर तो मेरी सांस जैसे रुक ही गई.
फिर मैंने देखा कि उस समय भाभी पूरी नंगी होकर पेट के बल लेटी हुई थी और उनकी मस्त सेक्सी गांड ऊपर की तरफ उठी हुई थी और भैया उनकी पीठ पर सरसों के तेल से मसाज कर रहे थे और वो साथ साथ उनके कूल्हों को भी मसाज कर रहे थे, जिसकी वजह से भाभी अपने मुहं से हल्के हल्के अहहह्ह् सस्स्सस्स अईईईईइ कर रही थी और जब भैया तेल लगाकर अपनी उंगली को भाभी के कूल्हे फैलाकर गांड में अंदर डालते तो भाभी कह उठती, अह्ह्ह्हह प्लीज ऊईईईईइ धीरे धीरे डालो बाबा मुझे बहुत दर्द होता है.
फिर भैया अपनी लूँगी को पहने अपने दोनों हाथों से उनके ऊपर जाँघो पर बैठकर दोनों कूल्हों की मसाज कर रहे थे और मुझे गांड की मालिश से भाभी बहुत खुश नज़र आ रही थी. अब मैंने देखा कि भाभी के उल्टा होकर लेटने से भैया भी धीरे से उनके पास में लेटकर पीछे से उनकी गांड में अपनी जीभ को भी लगा रहे थे, जिससे भाभी आहह ऊह्ह्ह्हह्ह करती जाती. फिर पीछे से ही भैया ने भाभी के कूल्हों को फैला दिया, जिससे उनकी चूत भी दो फांको में बट गई और अब वो चूत के गुलाबी छेद में अपनी उंगली को डालकर धीरे से अंदर बाहर करने लगे, जिसकी वजह से भाभी को एक अजीब सा नशा चढ़ने लगा और वो अब धीरे धीरे मदहोश होने लगी थ.
भैया धीरे से भाभी के कूल्हों के नीचे आ गये और उन्होंने अपनी जीभ से भाभी की चूत को लप लप करके चाटना शुरू किया, इससे भाभी की सिसकियाँ और साँसे और गरम और तेज़ हो गई थी. अब भाभी अपनी पीठ के बल लेट गई और भैया ने उनके आगे वाले हिस्से की मालिश करना शुरू कर दिया और भाभी के दोनों पैरों को फैलाकर वो उनकी गोरी चिकनी जांघो को रगड़ रगड़कर मालिश करने लगे और अपने अंगूठों से उनकी चूत के पास वाले दोनों हिस्सों की भी मसाज करने लगे.
उसके बाद बहुत सारा थूक डालकर उनकी चूत पर लेप लगा दिया और फिर अपनी जीभ से चूत को अच्छी तरह से रगड़ रगड़कर लाल करके उसके गुलाबी छेद में अपनी जीभ को अंदर बाहर करके उंगली को बड़ी तेज़ी से अंदर बाहर करके चूत को पूरा गीला करके चुदाई का विचार बनाया. अब भैया बार बार भाभी की चूत के ठीक बीच में ऊपर उगी हुई हल्की काली घुंघराली झांटो को भी अपने मुहं से होंठो में दबाकर नोचते जिससे भाभी को जोश का एक बहुत अजीब सा नशा छा जाता.
दोस्तों उनकी झांटो के नीचे चूत की सुंदरता देखते ही बनती थी और वो बड़ा ही रोमांचक सुहावना द्रश्य था, जिसको देखकर मेरा लंड तनकर कुतुब मीनार सा टाईट खड़ा हो गया और अंडरवियर में मेरे लंड ने अपना पानी भी छोड़ दिया था.
अब मेरा लंड भी खड़ा होकर मेरे मन में भी अब भाभी को चोदने का विचार बन गया. फिर मैंने देखा कि भैया भाभी के सर की तरफ अपने दोनों पैरों को करके लेट गये हैं और भाभी की चूत में अपनी जीभ को डालकर वो खेल रहे हैं और भाभी भैया का 6 इंच लंबा और दो इंच मोटे लंड को पकड़कर अपनी जीभ से भैया के लंड का गुलाबी टोपा बड़े मज़े लेकर चाट रही थी और थोड़ी देर में भाभी ने भैया का लंड अपने मुहं में ले लिया और बड़ी मस्ती के साथ अंदर बाहर करने का मज़ा लेकर वो ऊह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह करके अपने एक हाथ से मज़बूती से लंड को पकड़कर पूरा खड़ा कर दिया और बहुत प्यार से अपनी व्याकुल नजरों से लंड को देखने लगी.
अब भैया ने अपने लंड को भाभी की चूत को फैलाकर हल्का सा एक झटका देकर अंदर डाल दिया और लंड खप की आवाज़ के साथ नरम रेशम सी चिकनी चूत की मखमली गहराई में समा गया और वो पूरा अंदर चला. अब भैया ने भाभी को लगातार धक्के देकर जन्नत की सैर करवानी शुरू की और उनके हर एक धक्के पर भाभी पूरी तरह से हिल जाती और कुछ देर धक्कों का मज़े लेने के बाद भाभी ने उनको बोली कि अब तुम मेरी गांड भी तो मारो.
फिर इतना सुनते ही भैया ने भाभी की चूत से अपने लंड को तुरंत बाहर निकालकर उनको घोड़ी बनाकर गांड के छेद पर अपने लंड का टोपा लगाकर एक ज़ोर का धक्का देकर अपना लंड अंदर डाल दिया, लेकिन गांड की धुनाई करके भैया करीब तीन चार मिनट में ही झड़ गये और उनके लंड से निकलता गरम वीर्य का फव्वारा देखकर मेरा भी लंड अब भीग आया, लेकिन में क्या करता दबे पैर मुझे वापस अपने कमरे में आकर सोना पड़ा. दोस्तों वो रात मेरी बड़ी मुश्किल से कटी. अब मैंने भी भाभी की गांड मारने की सोची और मुझे कुछ दिन बाद वो मौका मिल ही गया.
एक दिन में अचानक किसी काम से भाभी के बेडरूम में जा घुसा और तभी उस समय भाभी बाथरूम से नहाकर अपने भरे हुए गदराए बदन पर टावल लपेटकर बाहर निकली और में उनके नंगे गोरे पानी में भीगे हुए चिकने बदन को घूर घूरकर देखने लगा और वो मुझको देखकर तुरंत समझ तो गई कि इस लड़के को मेरी चूत चाहिए, लेकिन अब वो मुझसे मुस्कराकर बोली आज घर में कोई भी नहीं है, सभी लोग शादी में गए है कल तक हम दोनों इस पूरे घर में अकेले है और वो मुस्कुरा रही थी. उनकी शरारती हंसी को देखकर मेरी हिम्मत बढ़ गई और अब मैंने उनसे कहा कि हाँ में सब कुछ पहले से ही जानता और अच्छे से समझता भी हूँ, लेकिन कुछ भी कहो भाभी आप बहुत सुंदर हो.
फिर उन्होंने थोड़ा सा शरमाकर पूछा क्यों आज मेरी इतनी तारीफ क्यों हो रही है तुम्हारे इरादे तो नेक है ना? भाभी ने मुस्कराकर कहा. अब मैंने कहा कि वो भाभी आज आप मेरे दिल की तमन्ना पूरी कर दो. तभी उन्होंने मुझसे अपने नखराले सेक्सी अंदाज में पूछा क्यों क्या है तुम्हारी तमन्ना? उस समय भाभी के चेहरे पर एक कातिल हसीना वाली मुस्कुराहट थी.
फिर मैंने बिना किसी संकोच के कह दिया कि मुझे आपकी गांड मारनी है, सच भाभी इतनी सुंदर, जवान, मदमस्त, भरी, फूली हुई साँचे में ढली गांड मैंने आज तक नहीं देखी, तुम्हारी गांड इतनी गठीली है कि में क्या कहूँ प्लीज आप मुझे गोरी गोरी गांड के दर्शन करवा दो, भाभी तुम्हारी सुंदरता की कसम में ज़िंदगी भर तुम्हारा गुलाम रहूँगा और यह बात कहकर में उनके टावल से लिपट गया और उनको अपनी बाहों में उठा लिया और भाभी को अपनी बाहों में भरकर गोद में उठाने से उनका टावल निकलकर ज़मीन पर आ गिरा और अब वो अपनी ब्रा और पेंटी मे आ गई थी. हल्की गुलाबी कलर की ब्रा और पेंटी में वो बहुत ही मादक लग रही थी.
अब वो मुस्करा उठी और मैंने भी जल्दी से उनके गुलाबी होंठो को अपने होंठो में क़ैद कर लिया और करीब तीन चार मिनट तक मैंने उनके होंठो को अपने होंठो में दबाए रखा. अब हमारी जीभ से जीभ लड़ रही थी और हमारे थूक का आदान प्रदान हो रहा था. में उनके होंठो को चूसता तो वो मेरे होंठो को सच पूछो तो उनके होंठ बहुत मीठे थे, बहुत गुलाबी रसभरे मुलायम और गुलाब की पंखुड़ी की तरह नाजुक थे. अब में उनको अपनी गोद में ऊपर उठाए हुआ था, जिसकी वजह से उनकी दोनों गोरी जांघे मेरी कमर के इधर उधर थी.
अब मैंने उनको बिस्तर पर लाकर लेटा दिया और उनके पूरे गरम गोरे बदन की मसाज करने लगा. कुछ देर बाद भाभी की ब्रा को खोलकर उनके दोनों बड़े आकार के बूब्स को चूसने उनका रस निचोड़ने लगा और अपना पूरा दम लगाकर बूब्स को दबाने लगा और उनके निप्पल तो बहुत ही मीठे थे. में अब अपने अंगूठे की चुटकी बनाकर निप्पल की मालिश करने लगा और फिर सक करता रहा और दोनों बूब्स की बहुत अच्छी तरह से मसाज की, जिसकी वजह से उनके निप्पल टाईट होकर फूलकर आकार में बड़े हो गए और फिर उनकी गर्दन को अपनी जीभ से चाटा और उनकी एकदम गोल गहरी नाभि महककर बता रही थी कि वो कस्तूरी हिरण के समान थी.
अब भाभी बोली कि प्लीज अब थोड़ा जल्दी से मेरी पेंटी को उतारो और मेरी चूत को चाटकर चूत की खुजली को मिटा दो, मेरी आग को बुझा दो, में अंदर ही अंदर जल रही हूँ. फिर मैंने भी उनकी आज्ञा का पालन एक होनहार देवर की तरह किया और बिना समय गंवाये मैंने उनकी जलती हुई चूत को अपनी जीभ से सेवा देना शुरू कर दिया और वो अब सिसकियाँ लेने लगी, हाएए उफ्फ्फ्फ़ यार तुम कितना मज़ा देते हो आईईईईई आअह्ह्ह्ह ऊफ्फफ्फ्फ्.
दोस्तों उनको अपनी चूत की खुजली और जलन को मेरी जीभ से शांत करवाने में बड़ा मज़ा मिल रहा था. मेरी जीभ भाभी की चूत में अंदर बाहर सांप की तरह आ जा रही थी और लप लपकर में उनकी चूत को गीला करके पूरी रफ़्तार से चूत को चाटने लगा.
फिर थोड़ी देर बाद मैंने उनके कूल्हों को ऊपर किया और गांड के नीचे एक तकिया रख दिया, जिससे मैंने उनकी गांड के ऊपर भी अपने प्यार का लेप लगाया. अब में चूत को अपने होंठो में दबाता और उसके बाद जीभ को बाहर करके गांड के काले छेद पर भी थूक लगाकर हल्के से जीभ से गांड को सहला देता, जिससे उनकी जवानी को एक करंट का झटका लगता. अब में अपने लंड को उनकी चुदाई करने के लिए पूरी तरह से तैयार कर चुका था.
मैंने भाभी से कहा कि आप अपने दोनों पैरों को फैला लो, ताकि लंड को आपकी गांड में लंड डालने में आसानी रहे. उन्होंने ठीक वैसा ही किया और मैंने ज़ोर लगाकर एक धक्का दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड उनकी गांड के अंदर दाखिल हो गया और मैंने बड़ा मज़ा लेकर गांड मारी. फिर में नीचे सीधा लेट गया और भाभी सामने की तरफ मुहं करके मेरे लंड पर अपनी गांड को टिकाकर बैठ गई. मैंने उनकी गांड को एक बार फिर से चीरना शुरू किया और पीछे से हाथ बढ़ाकर दोनों बूब्स को दबाने भी लगा. में अब नीचे से गांड की धुनाई करता जाता और पीछे से दोनों बूब्स की मालिश करता, जिसकी वजह से उनको बड़ा आराम मिलता.
फिर कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि गांड के अंदर बाहर करने से मेरे लंड को एक अलग ही सुख मिल रहा था और वो मज़ा सबसे अजीब था, जिसको में किसी भी शब्दों में नहीं लिख सकता और साथ ही मैंने कुछ देर बाद बूब्स को छोड़कर अपने एक हाथ की दो उंगलियों को सामने से चूत के गुलाबी छेद में अंदर डालकर चूत की चुदाई भी की, जिससे भाभी को दुगना मज़ा मिल सके और वो जन्नत की सैर का भरपूर आनंद ले सके. में लगातार अपने लंड को गांड में अंदर बाहर करता ठीक वैसे ही में अपनी ऊँगली को भी चूत में वैसे ही डालता और फिर थोड़ी ही देर बाद मैंने अपने लंड को उनकी गांड से बाहर खींच लिया और अपने हाथ में पकड़कर हिलाते हुए मैंने भाभी के बूब्स पर अपना ढेर सारा वीर्य निकाल दिया और उनके दोनों बूब्स पर मेरे लंड की मलाई फेल गई, वो अपने उस रूप में बहुत सेक्सी लग रही थी.
अब में भाभी की गांड की सैर करके उनका गुलाम बन गया था और उन्होंने उठकर मेरे मुहं को अपने मुहं में लेकर उसको बहुत मेहनत करके दोबारा चमका दिया. उनको देखकर लगता था कि वो इस काम में बहुत अनुभवी है, शायद यह सब भैया के सिखाने का नतीजा था और उनको सभी काम बहुत अच्छी तरह से आते थे, यह बातें मुझसे भी धीरे धीरे समझ में आने लगी और दोस्तों में आज भी उनकी गांड मारने जाता हूँ, गांड मारने के साथ साथ मैंने उनकी चूत जो अब फटकर भोसड़ा बन चुकी है और उसके भी बहुत मज़े लिए. कुछ भी हो, लेकिन हम दोनों बहुत खुश थे और उनको लंड के मज़े और मुझे उनका पूरा सेक्सी बदन मिल गया था.
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दोस्त से अपनी बीवी को चुदवाया

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम मुकेश है और मेरी उम्र 28 साल है, मेरी यह पहली और सच्ची स्टोरी है, मेरी शादी को 3 साल हो गये है. फिर एक दिन में इंटरनेट चला रहा था तो मैंने उसमें एक विज्ञापन देखा तो उस एड में एक पति को अपनी पत्नी के लिए मर्द की जरुरत थी और उस आइडिया ने मेरे दिमाग़ में एक नया विचार डाल दिया और में भी अपनी बीवी को किसी और से चुदवाने के लिए बेताब हो गया. अब उस दिन के बाद से में रोज नयी-नयी प्लानिंग करने लगा, लेकिन में सफल नहीं हो रहा था.
फिर कुछ दिन के बाद मैंने अपनी बीवी से कहा कि हम एक नया गेम खेलते है और फिर हमने रोल प्लेयिंग स्टार्ट कर दी. अब में कभी नौकर बनता, तो वो मालकिन बनती, तो कभी वो मेरी सेक्सी नौकरानी, तो में उसका मालिक बनता था.
अब इसी तरह के रोल प्ले करते-करते काफ़ी दिन बीत गये थे. अब वो भी किसी और के नाम से चुदवाते समय काफ़ी सेक्सी हो जाती थी और वो उसकी चूत को उछाल-उछाल कर चुदवाती थी, अब हम दोनों को बहुत मज़ा आता था.
फिर एक रोज मेरा एक दोस्त मुझे फोन करके बोला कि वो कुछ दिन के लिए हमारे शहर में काम से आ रहा है, तो मैंने उसे अपने घर रहने को राज़ी कर लिया. हमारा ऊपर का कमरा खाली पड़ा था तो मेरी बीवी को भी कोई परेशानी नहीं थी और उसने भी हाँ कर दी थी. फिर जब वो आ गया तो मैंने उसे उसका कमरा दिखाया और मोनिका (मेरी बीवी) ने उससे कहा कि वो खाना भी हमारे साथ ही खा लिया करे. वो एक लंबा चौड़ा नौजवान था और मोनिका भी कम खूबसूरत नहीं थी, अभी तक हमने बेबी प्लान नहीं किया था और उसका गठीला बदन ज्यों का त्यों सेक्सी था, उसकी चूचीयाँ एकदम टाईट और चूत हॉट थी.
फिर मैंने सोचा कि क्यों ना अपने दोस्त को ही शिकार बनाया जाए? और इससे अच्छा मौका मुझे नहीं मिलना था. उसका नाम राजेश था तो मैंने 2-4 दिन के बाद पूरा प्लान बना लिया. राजेश अक्सर रात को देर से आता था और मोनिका या में उसे उसके कमरे में ही खाना पहुँचा देते थे.
फिर उस दिन उसके आने से पहले ही मैंने मोनिका को पकड़कर सोफे पर गिरा लिया और उसकी चूचीयों को मसलने लगा, तो वो कुछ ना नुकर के बाद गर्म हो गयी और मेरा लंड अपने हाथ में पकड़कर सहलाने लगी. अब मैंने जानबूझ कर दरवाजा पूरा बंद नहीं किया था और थोड़ा सा खुला रखा था, ताकि अगर राजेश समय से आ गया तो वो हमारी कामलीला देख सके. अब हम दोनों पूरे जोश में थे और फिर मैंने राजेश का रोल करते हुए मोनिका की दोनों चूचीयों को खूब मसला और चूसा, तो वो आह्ह उह्ह करती रही.
फिर मैंने उसकी गुलाबी चूत को चाटना शुरू कर दिया. अब उसके बर्दाश्त से बाहर की बात हो गयी थी और वो चिल्लाने लगी अयाया ऊवू, कम ऑन राजेश, कम ऑन और अपनी चूचीयों को मसलने लगी थी. तो ठीक उसी वक़्त राजेश आ पहुँचा और हमारे दरवाजे पर आकर रुक गया, तो अब मुझे बाहर से आती रोशनी में उसकी परछाई दरवाजे के नीचे से साफ़-साफ़ दिख रही थी, शायद वो अंदर से आ रही आवाज़ों की वजह से रुक गया था.
फिर मैंने अपना लंड मोनिका की चूत पर टिकाकर एक ज़ोर से धक्का मारा और उसे ज़ोर-जोर से चोदने लगा तो वो और ज़ोर-जोर से कम ऑन राजेश, फुक मी, चोदो मुझे और ज़ोर से हाँ और तेज अया चिल्लाने लगी थी.
फिर कुछ देर के बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो वो उसे चूसने लगी. फिर मैंने अपना सारा पानी उसके मुँह में ही निकाल दिया और अब मेरा गाढ़ा सफेद पानी उसके होंठों से टपक रहा था और वो मेरे सुस्त पड़ते जा रहे लंड को तब तक चूसती रही, जब तक आख़री बूँद उसने चूस नहीं ली. फिर राजेश ने मेरी बीवी को खूब चोदा और उसका बहुत मजा लिया.
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मम्मी की मस्त चुदाई अहमदाबाद में

हैल्लो दोस्तों, आज में आपको जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ, वो मेरी और मेरी मम्मी की है. ये कहानी सुनकर आपका लंड जरुर खड़ा हो जाएगा. मेरा नाम राहुल है, में गुजरात के राजकोट शहर से हूँ, में 26 साल का हूँ और मेरी मम्मी करीब 48 साल की है, वो बहुत ही गोरी और उसका बदन भरावदार है, उसके होंठ गुलाबी और बिल्कुल क्लीन है और हाईट बहुत ज़्यादा नहीं है. ये बात आज से करीब 6 महीने पहले की है, हमारे गाँव में नज़दीक के रिश्तेदार के वहाँ किसी कि मृत्यु हो गयी थी और पापा घर पर नहीं होने के कारण मुझे मम्मी के साथ जाना था.
फिर मैंने सफ़ेद कपड़े पहन लिए और मम्मी भी कपड़े बदलने चली गयी. फिर जब वो बाहर निकली तो वो क्या लग रही थी? उसने सफ़ेद कलर का एकदम पतला ब्लाउज पहन रखा था और अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी, जिससे उसके बड़े-बड़े बूब्स और उसके अंदर की निप्पल भी साफ-साफ़ दिख रही थी और निप्पल के बगल का काला घेरा भी दिख रहा था.
अब में तो देखता ही रह गया था, अब मेरा लंड तो एकदम टाईट हो गया था. फिर जब मम्मी ने मुझे उसके बूब्स की तरफ देखते हुए देखा तो उसने अपनी साड़ी के पल्लू से अपने बूब्स छुपा लिए और में शर्मा गया. फिर मैंने जल्दी से अपनी बाइक निकाली और में जानबूझ कर ही बाइक की सीट पर थोड़ा पीछे बैठा, ताकि मम्मी मुझसे चिपककर बैठे.
फिर मम्मी मेरे पीछे मेरे कंधे पर एक अपना हाथ रखकर जैसे ही बैठी तो उसके बड़े-बड़े बूब्स मेरी पीठ से टकराए और मेरे बदन में तो जैसे करंट दौड़ गया, क्या सॉफ्ट-सॉफ्ट बूब्स थे? ऐसा लग रहा था जैसे मखमल मेरे बदन को छू रहा हो.
अब में तो स्पीड से बाइक चलाने लगा था और बारी-बारी ब्रेक मारने लगा था. अब में जैसे ही ब्रेक मारता तो उसके दोनों बूब्स मेरी पीठ पर टकराते थे. अब मेरा लंड तो खड़ा हो गया था, लेकिन थोड़ी देर में ही हम उसके घर पहुँच गये और में निराश हो गया, काश उसका घर थोड़ी दूर होता. फिर जब हमें वापस लौटना था तो तब में फिर से बारी-बारी ब्रेक मारने लगा. अब उसके बड़े-बड़े बूब्स मेरी पीठ को छू रहे थे और अब मेरा लंड तो पूरे रास्ते खड़ा ही रहा.
फिर घर पहुँचकर मेरी मम्मी ने कहा कि स्नान करके ही घर के अंदर जाना होता है, तो में घर के बाहर जहाँ मेरी मम्मी कपड़े धोती है, वहाँ सिर्फ़ पेंट पहनकर स्नान करने लगा. हमारे घर के चारो तरफ बड़ी दीवार होने के कारण कोई अंदर देख नहीं सकता था. फिर मेरी मम्मी ने भी अपनी साड़ी निकाल दी और सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में मेरे साथ स्नान करने लगी.
फिर जब उसका सफ़ेद कलर का ब्लाउज गीला हुआ, तो उसके बूब्स साफ-साफ़ दिखने लगे और उसकी निप्पल और बाजू का काला राउंड भी साफ दिखने लगा था. अब मेरा लंड तो एकदम टाईट हो गया था. फिर बाद में उसने अपने पेटीकोट पर पानी डाला, तो उसका पेटीकोट उसकी गोरी-गोरी जाँघो से चिपक गया और मुझे उसकी गोरी-गोरी जांघे दिखाई दी.
उसने पिंक कलर की पेंटी पहनी हुई थी, जो अब साफ- साफ दिख रही थी और उसके दो बड़े-बड़े कूल्हें दिखाई देने लगे थे. अब मुझे थोड़ी देर तक तो ऐसा लगा कि अभी उसकी गांड में मेरा पूरा लंड डाल दूँ. अब उसका पानी से भीगा हुआ बदन इतना कामुक लग रहा था की किसी का भी लंड खड़ा हो जाए.
फिर उसने मुझसे कहा कि अपनी पेंट उतार दो, यहाँ कौन देख रहा है? तो मैंने अपनी पेंट भी उतार दी. अब मेरे नेकर में से मेरा 8 इंच का लंड साफ-साफ़ दिखाई दे रहा था.
फिर मैंने मम्मी से कहा कि ज़रा मेरी पीठ पर साबुन लगा दो, तो वो गीले कपड़ो में ही मेरी पीठ पर साबुन लगाने लगी. अब उसका सॉफ्ट हाथ मेरे बदन को छूते ही मेरा लंड तो फंनफना उठा था. फिर मैंने कहा कि अच्छी तरह से रगड़ना, तो वो अपना हाथ रगड़ने लगी और फिर पीछे से ही मेरी छाती पर साबुन लगाने लगी.
अब उसके गीले और बड़े बूब्स मेरी गीली पीठ पर बारी-बारी छू रहे थे. अब उसका ब्लाउज इतना चिपक गया था कि मुझे उसकी निप्पल का एहसास भी हो रहा था. अब तो मुझसे रहा नहीं जा रहा था, अब मेरा लंड मेरी नेकर के ऊपर से बाहर निकल गया था और मेरी नाभि तक लंबा हो गया. फिर तभी मम्मी खड़ी हो गयी और चली गयी. फिर में भी खड़ा हो गया और अपने बेडरूम में जाकर मम्मी को सोचते हुए मुठ मार ली. अब मुझे तो पूरे दिन मम्मी के बूब्स के ही विचार आ रहे थे और सोच रहा था कि कैसे मम्मी की चुदाई करूँ? तो तभी मम्मी ने कहा कि कल हम दोनों को अहमदाबाद दूर के रिश्तेदार के वहाँ रिसेप्शन में जाना है, तो में खुश हो गया.
फिर दूसरे दिन सुबह में मुझे मालूम था कि मम्मी मुझे उठाने आएगी इसलिए मैंने बिना चड्डी पहने लूंगी पहन रखी थी और मुठ मारकर अपने लंड को पूरा टाईट कर रखा था और लूंगी भी अपने घुटनों के ऊपर कर दी थी. फिर जब मम्मी मुझे उठाने आई तो उसने मेरी लूंगी में 8 इंच का टाईट लंड देखा, तो वो देखती ही रह गयी. फिर थोड़ी देर के बाद उसने मेरी जाँघ पर अपना हाथ रखकर उठाया तो में सोता रहा. अब मुझे मम्मी का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था.
फिर में उठ गया और स्नान करके तैयार हो गया. फिर जब हम बस स्टेशन पहुँचे तो बस खड़ी ही थी, लेकिन बहुत भीड़ थी. फिर जैसे तैसे करके हम बस में चढ़ गये, अब मम्मी मेरे आगे खड़ी थी और में उसके पीछे था. अब बस में बहुत भीड़ होने के कारण मेरा लंड मम्मी की गांड को छू रहा था. फिर जैसे ही बस स्टार्ट हुई तो एक ज़ोर का धक्का लगा और मेरा लंड मम्मी के दोनों कूल्हों के बीच में छू गया और उसने वहीं अपनी जगह बना ली.
अब तो जैसे ही ब्रेक लगते तो मेरा लंड मम्मी की गांड पर रगड़ने लगता, शायद मम्मी को भी ये मालूम था अब वो भी कभी-कभी पीछे धक्का देती थी. फिर एक स्टेशन पर हमें दो की सीट पर जगह मिल गयी तो हम दोनों वहाँ बैठ गये, लेकिन अब मुझे मज़ा नहीं आ रहा था इसलिए मैंने दो की सीट पर थोड़ी जगह करके एक बुढ़िया आंटी को बैठा लिया. अब दो की सीट पर हम तीन बैठे थे इसलिए मेरा हाथ मम्मी के बूब्स को छू रहा था. अब जैसे बस चलती तो में अपना कंधा रगड़ने लगता, बहुत ही सॉफ्ट बूब्स थे उसके. अब मेरा लंड तो पूरा का पूरा टाईट हो गया था, लेकिन में पूरा बूब्स नहीं छू पा रहा था.
तभी मम्मी ने अपना एक हाथ सामने की सीट पर रख दिय तो मैंने धीरे-धीरे अपना कंधा आगे लाना शुरू किया और अब में जैसे-जैसे अपना कंधा आगे लाता, वैसे-वैसे बहुत मज़ा आ रहा था और सॉफ्ट-सॉफ्ट लग रहा था. अब तो मेरा कंधा मम्मी के पूरे बूब्स को रगड़ रहा था, अब मम्मी सो गयी थी, लेकिन मुझे लग रहा था कि वो सोने का नाटक कर रही है.
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था और फिर मैंने अपने हाथों को अदब लगा ली जिससे मेरा हाथ उसके बूब्स के पास आ गया. फिर पहले मैंने अपनी एक उंगली उसके बूब्स पर रखी और अपनी उंगली को दबाया, तो मुझे मखमल जैसा लगा और फिर अपना पूरा हाथ उसके बूब्स पर रख दिया, तो तब मुझे मालूम हुआ कि मम्मी ने अंदर ब्रा भी नहीं पहनी है. अब में अपने हाथ को उसके बूब्स के ऊपर घुमाने लगा तो मम्मी की निप्पल टाईट हो गयी और ब्लाउज के ऊपर से दिखाई देने लगी थी और मेरे हाथों को भी उसका एहसास हो रहा था, तो तभी अहमदाबाद आ गया.
फिर मैंने मम्मी के बूब्स को दबाकर ही नींद से जगाया. फिर रात के करीब 10 बजे हम रिसेप्शन ख़त्म करके मेरे पापा के दोस्त जो एक फ्लेट में रहते है, वहाँ पर गये और करीब डेढ़ घंटे तक बात करके पापा के दोस्त और उसकी बीवी छत पर सोने चले गये, लेकिन हमें सुबह 5 बजे की बस से घर आना था इसलिए हम दोनों नीचे ही सो गये. आंटी ने दो गद्दे नीचे बिछा रखे थे, जब मैंने बरमूडा और टी-शर्ट पहना हुआ था और मम्मी ने साड़ी पहनी हुई थी, फिर मैंने लाईट बंद कर दी.
फिर थोड़ी देर के बाद मम्मी खड़ी हुई और अपनी साड़ी निकालने लगी. अब में सोने का नाटक कर रहा था, फिर मैंने सोते-सोते उसके सफ़ेद कलर के पेट को देखा, क्या गोरा-गोरा पेट था? मम्मी हर रोज रात को साड़ी निकालकर ही सोती है. अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में ही थी, अब नाईट लेम्प के प्रकाश में उसके बड़े-बड़े बूब्स साफ-साफ़ दिख रहे थे.
अब में चादर के अंदर मेरा लंड निकालकर सहला रहा था, मम्मी ने चादर नहीं ओढ़ी थी. फिर थोड़ी देर के बाद मम्मी ने एक पैर ऊपर उठाकर मोड़ दिया तो मम्मी का पेटीकोट उसकी जाँघ तक आ गया, क्या सफ़ेद और मोटी जाँघ थी?
अब मेरा लंड तो पूरा का पूरा 8 इंच खड़ा हो गया था. अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो मैंने अपना एक हाथ मम्मी की जाँघ पर रख दिया, वाह क्या मुलायम और सॉफ्ट-सॉफ्ट जांघे थी?
फिर पहले में उसकी जाँघो को अपनी उंगली दबाने लगा, उसकी जांघे इतनी सॉफ्ट थी कि मेरी उंगली अंदर घुस जाती थी. अब में अपने एक हाथ से मुठ मार रहा था और दूसरे हाथ से मम्मी की जाँघो को सहला रहा था. अब मम्मी की आँखे अभी बंद थी तो मेरी हिम्मत और बढ़ गयी थी. फिर में अपना एक हाथ ऊपर की तरफ ले गया, उसकी चूत से शायद थोड़ा ही दूर हो. अब में जैसे-जैसे मेरा हाथ ऊपर लेता जाता था तो मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
फिर मैंने अपना एक हाथ मम्मी के बूब्स पर रख दिया और अपनी एक उंगली से दबाया तो मेरी पूरी उंगली बूब्स में चली गयी. उसके बूब्स बहुत ही सॉफ्ट थे. अब में उसके बूब्स अपने पूरे हाथ से दबाने लगा था, लेकिन बहुत ही हल्के से दबाता था ताकि मम्मी उठ ना जाए. फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उसके ब्लाउज का बीच का बटन खोल दिया और उसमें से अपनी उंगली डालकर दबाने लगा, वाह अब तो में सीधा बूब्स को छू रहा था, अब में तो पूरा कामुक हो गया था.
फिर मैंने उसके ब्लाउज का दूसरा बटन भी खोल दिया और अपनी पूरी उंगली डाल दी और उसके निप्पल तक पहुँचा दी. अब उसकी निप्पल टाईट हो गयी थी और अब में उस पर अपनी उंगली फैरने लगा था. तभी मम्मी के मुँह से आवाज़ निकल गयी आहहहह पूरे बटन खोल दे. अब तो में जोश में आ गया और पूरे बटन खोलकर ज़ोर-ज़ोर से बूब्स दबाने लगा. अब मम्मी के मुँह से आवाज़ आ रही थी उईईईई माँ धीरे दबा. अब में उसके बूब्स को चूसने लगा था, उसकी निप्पल बड़ी-बड़ी और काली थी, अब में उसके निप्पल पर अपनी जीभ फैरने लगा था.
फिर मम्मी ने मेरे पूरे कपड़े निकाल दिए और मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. अब मम्मी ने मेरा पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया था और सुपाड़े को चूसने लगी थी. फिर उसने खुद के भी पूरे कपड़े निकाल दिए और मेरा लंड अपने हाथ में लेकर उसकी चूत तक ले गयी. अब उसकी चूत पूरी गीली हो गयी थी और बहुत चिकनी भी. फिर मम्मी ने मेरा लंड पकड़कर उसकी चूत में डाल दिया. अब में जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और मम्मी बोल रही थी बेटा ज़ोर से धक्के लगा, आह उहह और ज़ोर से. फिर शायद आधे घंटे के बाद मैंने अपना सफेद पानी उसकी चूत में ही छोड़ दिया और मम्मी के खूब मजे लिए.
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सरसों के खेत में चूत चोदी

हैल्लो दोस्तों, में आज आप सभी सेक्सी कहानियाँ पढ़ने वालों को अपनी एक सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ, जिसमें मैंने अपनी पड़ोसन को उसके खेत में ले जाकर बहुत जमकर चोदा और सेक्स के वो मज़े लिए और उसको दिए. जिसके लिए हम दोनों बहुत तरस रहे थे और अब में सबसे पहले अपना पूरा परिचय आप सभी को देकर उस घटना को सुनाता हूँ, जिसके लिए में आज यहाँ पर आया हूँ.
मेरी उम्र 24 साल है और मेरा शरीर दिखने में बहुत अच्छा है, जिसको देखकर कोई भी लड़की मेरी तारीफ ही करेगी. मुझे पिछले कुछ सालों से सेक्सी कहानियाँ पढ़ने का शौक लगा और में कहानियाँ पढ़कर उनके मज़े लेता गया, लेकिन अब वो काम करना मेरी आदत बन चुकी है, हर दिन जब भी समय मिलता तो में कहानी जरुर पढ़ता हूँ और अपना लंड भी हिलाता हूँ.
में आज जो कहानी आपके लिए लेकर आया हूँ, वो बहुत मस्त घटना है, जिसको पढ़कर आप लोगों को जरुर मज़ा आ जाएगा. दोस्तों में एक बहुत छोटे गाँव जो हरियाणा में है, लेकिन वो दिल्ली बॉर्डर के एकदम पास है, मेरे उस छोटे से गाँव में कोई भी कॉलेज नहीं है, लेकिन वहां पर एक स्कूल जरुर है, लेकिन वो भी सिर्फ 10th क्लास, इसलिए मैंने भी अपनी 10th क्लास तक की पढ़ाई उस स्कूल में की, तब मेरे साथ उस स्कूल में एक बहुत सुंदर लड़की जिसका नाम माला, वो भी मेरी ही क्लास में मेरे पास बैठती थी.
दोस्तों वैसे उसका मकान भी मेरे घर के दो चार मकान छोड़कर पास ही था, इसलिए हम दोनों हमेशा एक साथ ही स्कूल जाया करते थे और में उसके साथ बहुत मस्तियाँ हंसी मजाक खेलना कूदना किया करता था और यही सब धीरे धीरे मेरे मन में उस लड़की के लिए प्यार बन गया, वो मुझे बहुत अच्छी लगने लगी और में उसको मन ही मन बहुत पसंद करने लगा, क्योंकि माला अब दिनों दिन जवान होने के साथ ज्यादा सुंदर होने लगी और उसकी सुन्दरता को देखकर में अब उसका दीवाना हो गया, वैसे मुझे बहुत अच्छी तरह से इस बात का भी पता था कि वो भी मुझे चाहती थी, लेकिन मुझसे अपने मन की बात कहने से डरती थी, में उसकी हरकतों को देखकर समझ चुका था.
फिर मैंने उसको खलते समय इतनी बार उसके अंगो को छुआ, लेकिन उसने मुझसे कभी कुछ नहीं कहा, वो बस मेरी तरफ हंस देती और में उसका इशारा समझ जाता और उसके ज्यादा सुंदर बड़े आकार के बूब्स, गोरा रंग, काले घने लंबे बाल, हिरनी जैसी उसकी चाल और ठीक वैसी ही उसकी आंखे देखकर हमारे गाँव के बहुत सारे लड़को की नजर उस पर थी और वो उसको अपना बनाना चाहते थे, लेकिन वो मेरे अलावा ज्यादा किसी से बात नहीं करती थी, वो हमारी पूरी क्लास में सबसे समझदार, सुंदर लड़की थी और में हमेशा माला की चुदाई के सपने देखा करता, वो मेरे मन में घर कर गई थी और मुझे कैसे भी करके उसकी एक बार चुदाई जरुर करनी थी. में हमेशा बस यही बातें सोचा करता था, वो मेरे सपनों में हमेशा आया करती थी.
दोस्तों उस समय हमारे 10th क्लास के पेपर खत्म हो चुके थे और मार्च के महीने में पेपर खत्म करके हम दोनों अपनी छुट्टियों का बहुत आनंद ले रहे थे. उन दिनों खेत पर भी वैसे ज्यादा काम रहता है, इसलिए हम दोनों सुबह ही जल्दी खेत पर चले जाते थे और दोपहर को ही वापस घर पर आते थे.
उसके बाद दोपहर में नहाकर थोड़ा आराम करते थे, वैसे माला का घर मेरे घर के पास में होने की वजह से में हर कभी दिन में वहां पर चला जाता था, वो और में उनके घर पर खेलते थे और में बस माला को देखने के लिए ही वहां जाता था, क्योंकि वो मुझे बहुत अच्छी लगती थी और में खेल खेल में हर कभी उसके शरीर को छू लेता था, ऐसा करने में मुझे बड़ा मज़ा आता था. फिर ऐसे ही दिन निकलते चले गये और में हर रोज बस यही इंतजजार करता कि कब मुझे मौका मिले और माला को देखूं और उसको छू लूँ और वो मज़ा प्राप्त करूं.
उस समय सच पूछो तो माला भी अपने पूरे योवन पर थी, वो अब पहले से भी ज्यादा सुंदर आकर्षक लगने लगी थी, इसलिए में उनकी तरफ बहुत आकर्षित था और उसके गोरे गोरे भरे हुए बदन पर उसके वो भारी बूब्स और उसकी गांड हर किसी के लंड को अपना पानी छोड़ने पर मजबूर कर दे, वो ठीक ऐसी थी कि उससे मेरा मन लग चुका था.
दोस्तों वैसे गावं में लड़कियों को ज़्यादा नहीं पढ़ने देते, इसलिए वो भी थोड़ी कम पढ़ी लिखी थी और इस वजह से अब माला की शादी की बात भी होने लगी थी और बहुत जल्दी ही उसकी सगाई एक अच्छा सुंदर लड़का देखकर उसके साथ कर भी दी. फिर सगाई के बाद में माला के घर पर चला गया और फिर मैंने माला से मजाक में कहा कि क्यों तुम अपनी सगाई की मिठाई मुझे कब खिला रही हो? तो वो बोली कि क्या मिठाई अभी कोई मेरी शादी करने की उम्र है, मुझे तो आगे और भी पढ़ाई करनी है और में आगे भी पढ़ना चाहती हूँ, लेकिन क्या करूं मेरे कुछ समझ नहीं आता?
फिर मैंने अपनी बात को बदलते हुए उससे बोला कि क्यों माला तेरा मंगेतर कैसा है? मुझे भी तो बता वो कैसा दिखता है? तभी माला थोड़ा गुस्से में आकर मुझसे बोली कि मैंने भी उसको नहीं देखा, तुम्हें में कैसे बताऊं? तो मैंने उससे कहा कि क्या तुम बिना देखे ही शादी करने जा रही हो? तो वो बोली कि में क्या करूँ? में अपने घर वालों के उस फेसले के आगे बहुत मजबूर हूँ, उन्होंने लड़का देख लिया तो मैंने भी देख लिया और हमारे यहाँ पर बस यही चलता है.
अब मैंने हल्के से माला के शरीर को छुआ और उससे मजाक में बोला कि अब तो तुम्हारी उससे शादी होनी है, तुम उससे वो सब कुछ सीख लेना, लेकिन वो बिना बोले ही अंदर चली गई और अब उसने मेरी बात का भी जवाब नहीं दिया, क्योंकि वो अब बहुत उदास हो चुकी थी और में भी वापस अपने घर पर आ गया. उसके बाद से में अब बस कोई अच्छा सा मौका देखते ही माला को छेड़ देता था, माला आजकल मुझसे कुछ नहीं बोलती थी और वो बस हंस देती थी.
एक दिन दोपहर को में माला के घर पर चला गया तो मैंने देखा कि वो उस समय अपने बाथरूम में थी और उस समय घर के सभी लोग खेत पर गये हुए थे, मेरे शैतानी दिमाग में तुरंत एक विचार आया और मैंने माला के बाथरूम के उस छोटे से छेद से उसको नहाते हुए नंगा देखा.
फिर मुझे बहुत मज़ा आने लगा और मेरा लंड भी अब ज़ोर मारने लगा था और उस दिन मैंने उसके देखने के बाद अपने घर पर आकर मुठ मारकर ही अपना गुजारा किया और अपने लंड को शांत किया और उसके बाद तो मुझे जब कभी मौका मिलता तो में माला को नहाते हुए देखने लगा और उसके गदराए सेक्सी बदन के मज़े लेने लगा था. मेरी यह हर दिन की आदत बन चुकी थी, में उसको देखता और अपने घर पहुंचकर अपना लंड हिलाता और बहुत शांति प्राप्त करता.
एक दिन जब में माला के बाथरूम में देख रहा था. तभी अचानक से उसकी नज़र मुझ पर पड़ गई और में एकदम से बहुत घबरा गया और उसी समय जल्दी वापस अपने घर पर आ गया और उसके बाद में डर जाने की वजह से कई दिन तक उसके घर पर नहीं गया, मेरे मन में उस दिन के बाद एक डर और दहशत थी और जब कभी वो मुझे दिखती तो में अपना रास्ता बदल दिया करता और उससे अपनी नजरे चुराने लगा.
एक दिन किस्मत से वो मुझसे खेत पर मिल गई. मेरे पास उसके करीब जाने के अलावा कोई और रास्ता भी नहीं था और में डरता हुआ उसकी तरफ बढ़ता रहा और वो मेरी तरफ, लेकिन तभी वो मेरे पास में आकर मुझसे मुस्कुराते हुए बोली कि तू बहुत बड़ा शरारती निकला तू तो मुझे बहुत छुप छुपकर देखा करता है, मुझे तो उस दिन पता चला, क्यों मुझमें तुझे ऐसा क्या नजर आता है, जो तू इस तरह की हरकते करता है? क्या में तुझे इतनी अच्छी लगती हूँ?
दोस्तों मुझे बिल्कुल भी पता नहीं था कि वो मुझे यह सभी बातें अपने मन के किस तरह के विचार से पूछ रही थी, लेकिन सच पूछो तो में इसी बात के इंतजार में था कि वो मुझसे खुद आगे होकर बात करे और मुझसे उसके स्वभाव का पता चल जाए. मेरी अच्छी किस्मत से उस समय हम दोनों के अलावा कोई तीसरा वहां पर नहीं था और उस वजह से मुझमें ना जाने कहाँ से हिम्मत आ गई और में बोला, लेकिन मैंने पहले महसूस किया कि वो मेरी उस हरकत से बिल्कुल भी नाराज नहीं थी, ऐसा क्यों था मुझे पता नहीं?
अब मैंने खेत में ही उसको बिना कुछ कहे पकड़ लिया और अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया और सही मौका देखकर तुरंत उसके गाल पर एक पप्पी ले ली. वो मुझसे अपने आप को छुड़वाकर अपने घर पर आ गई. मुझे उसकी तरफ से वो इशारा मिल गया था, जिसका मुझे बहुत लंबे समय से इंतजार था और उसके बाद जब भी मुझे मौका मिलता तो में उसको पकड़कर पप्पी ले लेता और अब तो मेरी हिम्मत ज्यादा बढ़ चुकी थी, इसलिए में मन ही मन माला की चुदाई का सपना अपनी आखों से देखने लगा था. एक दिन जब में अपने खेत पर जा रहा था.
तभी माला मुझे रास्ते में मिल गई और मैंने उससे बोला कि चल आजा हम खेत पर चले, वो मुझसे मुस्कुराकर पूछने लगी क्यों क्या कोई खास बात है? तो मैंने उससे बोला कि क्या तू मुझे हमेशा ऐसे ही तड़पाती रहोगी? अब मुझसे रहा नहीं जाता बता में क्या करूं? तो वो मुझसे कहने लगी कि तू एक काम कर जल्दी से अपनी शादी कर ले, तुझे ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ेगा और तेरा काम चल जाएगा.
फिर मैंने उससे बोला कि नहीं पहले तू कर ले, तो वो मुझसे बोली कि मेरी तो बहुत ही जल्दी होने वाली है तू अपनी सोच. फिर मैंने उससे कहा कि तू अपनी शादी करने से पहले मुझसे कुछ ज्ञान तो ले, कहीं उस बेचारे को पता ही ना हो क्या करना है? और वो मेरी बात को सुनकर हंसी और बोली कि क्यों तू तो सब कुछ जानता है ना? अब मैंने उससे कहा कि एक बार तू भी मुझे आजमा कर देख ले, मेरे मुहं से इतना सुनकर वो अब बिना कुछ कहे मेरी तरफ मुस्कुराकर जाने लगी.
तभी मैंने उससे कहा कि में खेत पर तेरा इंतजार करूँगा और अब में अपने खेत पर जाकर माला के बारे में सोच सोचकर मुठ मारने लगा और करीब एक घंटे के बाद मैंने देखा कि माला सामने से मटकती हुई मेरे पास चली आ रही है. अब मेरी खुशी का कोई ठिकाना ना रहा और में माला की चुदाई करने के सपने देखने लगा.
थोड़ी देर में माला अपने सरसों के खेत में थी. मेरा और उसका खेत एकदम पास पास है. अब में अपनी चादर को कंधे पर डालकर माला के खेत की तरफ चल दिया. सरसों के खेत में चारो तरफ हरयाली ही हरयाली और सरसों के पीले फूल में तो बस माला को चोदने के सपने में देखने लगा और माला भी शायद मेरी इच्छा मेरी नियत को पूरी तरह से समझ चुकी थी.
अब में खेत के बिल्कुल बीच में जाकर बैठ गया और थोड़ी देर बाद में माला भी मेरे पास आ गई और अब तो मेरी खुशी का कोई ठिकाना ही ना रहा. फिर जैसे ही माला मेरे पास आई तो मैंने उसको पकड़ लिया और उसको अपने देहाती अंदाज में छेड़ने लगा, माला भी आज पूरे मूड में थी.
फिर मैंने अपनी चादर को जो में अपने साथ लेकर आया था, उसको खेत में बिछा दिया और फिर माला को जल्दी से अपनी बाहों में भर लिया और पागलों की तरह चूमने लगा. माला ने भी मुझे चूमना शुरू किया और वो मेरा पूरा पूरा साथ देने लगी, बस फिर क्या था? आज तो मेरा सपना पूरा होने वाला था. मैंने माला से कहा कि आज तू मेरे साथ वो सारा मज़ा ले ले. फिर वो जोश में आकर मुझसे कहने लगी कि आज मुझे तू जी भरकर चोद और मुझे वो सब कुछ सिखा दे जो तुझे आता है, में तुझसे वही सब सीखने के लिए तेरे पास खुद चली आई हूँ, चल अब ज्यादा समय बर्बाद ना कर वरना हमें कोई देख लेगा.
फिर मैंने उससे बोला कि आज जो में तुझसे कहूँ तू बस वही करना तो उसने हाँ में अपना सर हिला दिया और मैंने तुरंत माला के सारे कपड़े उतार दिए और अपने भी कपड़े माला को उतारने के लिए कहा और उसने ठीक वैसा ही किया जैसा जैसा में उसको बता रहा था. अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे और वो भी उस सरसों के खेत में. अब तो मैंने माला को ऊपर से नीचे तक चूमना शुरू किया, जिसकी वजह से वो पूरी तरह से पागल हो चुकी थी और फिर माला ने मुझसे जल्दी उसकी चुदाई करने के लिए कहा.
फिर मैंने उसकी बेचेनी तड़प को समझकर अपनी एक उंगली को माला की कुँवारी चूत में डाल दिया और दूसरे हाथ से में उसके गोल गोल बूब्स को दबाने लगा, जिसकी वजह से माला ने भी जोश में आकर अपने मुहं से एक हल्की सी चीख निकली, आईईईई आह्ह्हह्ह तुम यह क्या कर रहे हो? और वो अपने एक हाथ से मेरा कड़क लंड पकड़ा और ऊपर नीचे करने लगी और माला की सिसकियों की आवाज आने लगी, आइईईई ओह्ह्ह्ह अरे मेरे जानू आजा मेरी प्यास बुझा दे.
तभी मैंने माला को घोड़ी बना दिया, जिसकी वजह से उसकी चूत मेरे लंड के सामने पूरी तरह से खुलकर मुझे चुदाई के लिए आमन्त्रित करने लगी और पीछे से अपने लंड को उसकी चूत पर सेट करके एक जोरदार झटका दे दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड अब माला की कुँवारी चूत में था और पूरा लंड अंदर जाते ही माला बहुत ज़ोर से चीख उठी, हाए में मररर्र्र्र्ररर गई, आह्ह्हह्ह थोड़ा धीरे धीरे करो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है और फिर में उसकी चूत को चोदने लगा. फिर मैंने कुछ देर उसकी ऐसे ही चुदाई के मज़े लिए.
फिर कुछ देर धक्के देने के बाद मैंने लंड को बाहर निकाला और माला के मुँह में दे दिया. माला उसे किसी आम की तरह बहुत मज़े ले लेकर चूसने लगी. उसके कुछ देर बाद मैंने माला को सीधा लेटा दिया और उसके दोनों हाथ और पैरों को सरसों के तीन चार पेड़ो से बाँध दिए और अब मैंने अपना पूरा लंड उसकी चूत में एक जोरदार धक्के देकर अंदर डाल दिया और हल्के झटके लगाने लगा.
दोस्तों में आप सभी लोगों को एक बात बता दूँ कि यदि किसी भी औरत के हाथ, पैर बाँध दिए जाए तो वो चुदाई करने वाले को अपनी बाहों में भरने के लिए ज्यादा तड़पती है, माला के साथ भी ठीक वैसा ही था. अब बस माला मुझे अपनी बाहों में भरने के लिए छटपटाने लगी और मैंने अपने झटके जारी रखे, बस माला की सिसकियों की आवाज और आँहे उसके मुहं से बाहर निकलती रही, लेकिन अब तो मेरा भी वीर्य बाहर निकलने वाला था.
मैंने कुछ देर धक्के देने के बाद महसूस किया कि अब में झड़ने वाला हूँ, इसलिए मैंने अपना लंड तुरंत उसकी चूत से बाहर निकाल दिया और माला के मुँह पर लगा दिया. उसने लंड को अपने मुहं में डाल लिया और अपने मुहं को ऊपर नीचे करने लगी. कुछ ही देर उसने ऐसा किया होगा और में झड़ गया. माला मेरे सारे माल को चूस गई और उसने मेरे लंड को चाट चाटकर साफ कर दिया. फिर कुछ देर लेटे रहने के बाद मैंने उठकर माला के हाथ पैर खोल दिए और वो तो जैसे इसी इंतजार में थी, उसने अपने हाथ खुलते ही मुझे अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया और चूमने लगी.
कुछ देर बाद हमने अपने कपड़े पहने और वहां से एक दूसरे का हाथ पकड़कर चल दिए, लेकिन दोस्तों उसके बाद भी मैंने कई बार माला को सही मौका देखकर चोदा और आज भी माला मुझे भूल नहीं पाई है, उसको मेरी वो पहली खेत वाली चुदाई बहुत अच्छी तरह से याद है, जब वो मुझसे मिलती है तो उस चुदाई को जरुर याद करती है और उसकी बातें मुझसे करती है.
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