भाभी की गांड का कीड़ा

हैल्लो दोस्तों, में दीनू सबसे पहले सभी चूत वालियों और लंड वालों को धन्यवाद देता हूँ, क्योंकि मेरी पिछली कहानियां लोगों को काफ़ी पसंद आई, जिससे आप लोगों ने मुझे और सत्य कथा लिखने का हौसला दिया, इसलिए में फिर से आप लोगों के सामने अपनी एक सच्ची कहानी पेश कर रहा हूँ. मुझे आशा है कि मेरी पिछली कहानियों की तरह यह कहानी भी आप लोगों को बहुत पसंद आएगी. जैसे कि आप सब जानते हैं कि में एक सरकारी कर्मचारी हूँ और आये दिन दफ्तर के काम से मुझे मुंबई से बाहर जाना पड़ता है.
फिर एक दिन मुझे काम के सिलसिले में कुछ महीनों के लिए उत्तरप्रदेश के एक छोटे से गाँव में जाना पड़ा. मेरा एक दोस्त उसका गाँव भी वहीं पर था तो उसने कहा कि यार दीनू तुम वहाँ जाकर मेरे घर पर रह लेना, वहाँ मेरा पूरा परिवार है तो तुम्हारा मन भी लग जाएगा, वैसे भी में करीब 2 साल से गाँव नहीं गया हूँ, सिर्फ़ फोन पर ही बातें होती है और तुम जितने दिन वहाँ रहोंगे, उन्हें संभाल भी लोगे.
फिर मैंने कहा कि ठीक है और उसने तो मेरे आने की सूचना गाँव में अपने परिवार को दे दी थी. फिर जब में वहाँ पहुँचा तो उन्होंने मेरा बहुत जोरदार स्वागत किया. उनके परिवार में दोस्त की माँ, दोस्त के बड़े भाई की बीवी और दोस्त की वाईफ थी, उनके नाम, उम्र और शरीर की खूबियाँ निम्नलिखित है.
फूलवंती = दोस्त की माँ, उम्र करीब 48 साल, मोटी, बड़े-बड़े चूतड़ और बड़े बूब्स वाली सेक्सी महिला है (विमला और बीना की सास) और इनके पति का देहांत दोस्त के पैदा होने के कुछ ही महीनों के बाद हो गया था.
विमला = दोस्त के बड़े भाई की बीवी है, वो करीब 30 साल की है, वो थोड़ी साँवली सी और भरे-भरे चूतड़ और बड़े बूब्स वाली मध्यम कद की महिला है, (बीना की जैठानी) इसका पति 3 साल के कांट्रेक्ट पर दुबई में काम कर रहा है.
बीना = दोस्त की वाईफ, उम्र करीब 24 साल, ना ज़्यादा मोटी ना ज़्यादा पतली, सुंदर नयन नक्श वाली महिला थी. (विमला की देवरानी)
राजा = यह उनके घरेलू कुत्ते का नाम है, वो भी मोटा ताज़ा कुत्ता था, यानि उस घर में दोस्त के परिवार के केवल 3 सदस्य रहते थे, देवरानी, जैठानी और सासू माँ और उनका पालतू कुत्ता.
अब कुछ ही दिनों में में इस परिवार में खूब घुल-मिल गया था. में दोस्त की माँ को चाची कहकर बुलाता था और विमला, बीना को भाभी कहकर बुलाता था, वो लोग भी मुझे इस घर का ही सदस्य समझते थे. उस दिन शनिवार था और मेरी छुट्टी थी तो में घर पर ही था तो इतने में चाची आई और बोली कि दीनू बेटा शाम को तुम और विमला बहु शहर जाकर कुछ सामान ले आओ और सामान की लिस्ट विमला के पास है.
फिर मैंने कहा कि ठीक है और करीब 4 बजे हम घर से निकले और शहर गाँव से करीब 50 किलोमीटर दूर था, यानि कि करीब 1 घंटा बस में सफ़र करना था. अब जाते वक्त हमें बस में खाली सीट मिल गयी थी. अब विमला भाभी खिड़की के पास बैठी थी और में उनके बगल में बैठा था. अब हवा के कारण विमला भाभी को नींद आने लगी और वो मेरे कंधे पर अपना सर रखकर सो गयी.
फिर जब शहर आया तो मैंने उन्हें जगाया और हम करीब 5 बजे शहर के मार्केट पहुँचकर सामानों की खरीदारी करने लगे. फिर मैंने भी 1 विस्की की बोतल खरीदी और करीब 7 बजे हमने बस पकड़ी. अब बस में इतनी भीड़ थी कि हमें खड़े-खड़े सफ़र करना पड़ा. अब में विमला भाभी के पीछे खड़ा था और अब बस के धक्को से उनके चूतड़ के बीच की दरार बार-बार मेरे लंड पर रगड़ मार रही थी, जिस कारण मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया था.
जब मैंने कुर्ता पजामा पहना था, इसलिए मेरा तनकर खड़ा हुआ लंड उनके चूतड़ की दरार में खड़ापन दिखा रहा था. अब मेरे लंड के खड़ेपन को अपने चूतड़ की दरार में महसूस करते ही विमला भाभी ने एक बार पीछे मुड़कर मेरी तरफ देखा, लेकिन वो कुछ नहीं बोली. अब थोड़ी देर के बाद वो खुद अपने चूतड़ से मेरे लंड पर दबाव डाल रही थी. अब में समझ नहीं पा रहा था कि बस के धक्को के कारण ऐसा हो रहा है या वो जानबूझ कर ऐसा कर रही है.
खैर फिर हम करीब रात 8 बजे घर पहुँचे. अब विमला और बीना रसोई घर में थी और में छत पर आकर विस्की पीने लगा और 2-3 पेग पीने के बाद में नीचे उतरा. फिर थोड़ी देर के बाद हम सबने खाना खाया और कुछ देर आँगन में बैठकर बातें करने लगे. फिर करीब 11 बजे चाची और बीना भाभी को नींद आने लगी तो वो लोग अपने अपने कमरे में जाकर सो गयी. अब में और विमला भाभी ही आँगन में बैठकर बातें कर रहे थे. अब में केवल लूंगी और बनियान पहनकर कुर्सी पर बैठा था और विमला भाभी जमीन पर बैठी थी.
फिर मैंने उनके पति के बारे में पूछा और कहा कि वो कब से दुबई गये है? तो वो बोली कि 2 साल हो गये है. फिर मैंने बातों को आगे बढ़ाते हुए पूछा कि विमला भाभी जी क्या आप लोग परिवार नियोजन करते है, जो इतने सालों से आपको कोई भी औलाद नहीं हुई? तो विमला भाभी बोली कि नहीं रे दीनू, हमने काफी मन्नते माँगी, काफ़ी मंदिरों में माथा टेका, लेकिन अभी तक हमें संतान नहीं हुई, बस यही गम मुझे खाए जा रहा है. फिर मैंने पूछा कि क्या आपने और भाई साहब ने चैकअप कराया?
फिर भाभी बोली कि हाँ दीनू, लेकिन लेडी डॉक्टर ने तो मुझमें कोई भी खराबी नहीं बताई, 1 मिनिट रूको में अभी आती हूँ कहकर वो उठकर अपने कमरे में गयी और कुछ देर के बाद अपने हाथ में एक पर्चा लाकर कहा कि तुम तो पढ़े लिखे हो, ज़रा यह रिपोर्ट तो पढ़कर बताओ इसमें क्या लिखा है? तो में रिपोर्ट अपने हाथ में लेकर पढ़ने लगा और वो मेरे सामने अपने दोनों पैर के घुटने ऊपर करके जमीन पर बैठ गयी और लगातार मुझे देखते हुए बोली कि यह उनके टेस्ट की रिपोर्ट है, इसमें क्या लिखा है? में जब भी उनसे पूछती हूँ तो वो कहते है कि कोई खराबी नहीं है.
फिर मैंने कहा कि भाभी जी मुझे बताते हुए थोड़ी शर्म आ रही है, लेकिन वैसे कोई खास बात नहीं है. फिर भाभी बोली कि दीनू शरमाओ मत निसंकोच मुझे सही-सही बताओं, तुम्हें मेरी कसम है. फिर मैंने कहा कि भाभी जी इसमें लिखा है कि भाई साहब का वीर्य बहुत पतला है और अगर नियमित रूप से इलाज कराए तो वीर्य ठीक हो जाएगा. फिर ये सुनकर भाभी जी अपना सर झुकाते हुए बोली कि मुझे पहले से ही शक था, क्योंकि मैंने कई बार महसूस किया है कि उनका वीर्य पानी जैसा पतला है और वो जल्दी ही खल्लास हो जाते थे.
फिर हम इस विषय पर बातें करने लगे और अब में उन्हें समझाता जा रहा था. अब जब में उन्हें समझाता था तो तब भाभी बीच-बीच में कभी अपने चूतड़ या कभी अपनी चूत को साड़ी के ऊपर से खुजलाती रहती थी.
फिर मैंने महसूस किया कि हमारी बातचीत से वो अंदर ही अंदर गर्म हो रही है, क्योंकि उनके होंठ सूख रहे थे और उनकी आँखो में भी वासना की भूख साफ़-साफ़ दिख रही थी. अब वो इस तरह बैठी थी कि उनके घुटने ऊपर उठे हुए थे और साड़ी घुटनों से थोड़ी ही नीचे थी. फिर उन्होंने अचानक से अपने पैरों के घुटने फैलाकर साड़ी के अंदर अपना हाथ डाला और अपनी चूत खुजाने लगी.
फिर मैंने पूछा कि क्या हुआ विमला भाभी जी? तो वो बोली कि पता नहीं शहर से आते वक्त कोई कीड़ा मेरे बदन पर चिपका था, जिस कारण काफ़ी खुजली हो रही है और यह कहते हुए उसने अपना हाथ साड़ी से बाहर निकालकर अपनी गांड साड़ी के ऊपर से ही खुजाने लगी.
अब में उसकी बातों से और इस हरकत से समझ गया था कि वो अपनी चूत में मेरा लंड लेना चाहती है. फिर मैंने हिम्मत करके कहा कि विमला भाभी जी मेरे पास स्पेशल मलहम है, अगर आप खुजली मिटाना चाहती हो तो में लगा देता हूँ? फिर वो बोली कि हाँ दीनू बहुत खुजली हो रही है, तुम मुझे मलहम ला दो तो में लगा लूँगी?
फिर में बोला कि भाभी जी इस मलहम को लगाने का तरीका अलग तरह से है, इसे मुझे ही लगाना पड़ेगा, क्योंकि लगाने का तरीका आप नहीं जानती है. फिर वो बोली कि अच्छा बाबा तुम ही लगा देना. फिर में बोला कि ठीक है आप अपने कमरे में जाकर सो जाओ, में मलहम लेकर आता हूँ और यह कहकर में अपने कमरे में गया और वो अपने कमरे में चली गयी. फिर में अपने कमरे से वैसलिन की डिब्बी लेकर उसके कमरे में गया तो वो पलंग पर अपने पेट के बल अपनी आँखे बंद करके लेटी थी.
फिर मैंने कहा कि भाभी जी बताइए कहाँ पर खुजली हो रही है? फिर वो बोली कि तुमने तो देखा था कि में कहाँ-कहाँ खुजा रही थी? तो में बोला कि वो तो ठीक है, लेकिन ज़्यादा खुजली कहाँ पर हो रही है आगे या पीछे? तो वो बोली कि दोनों तरफ.
फिर में बोला कि विमला भाभी जी फिर तो तुम्हें साड़ी ऊपर करके वो जगह दिखानी होगी, जहाँ पर खुजली हो रही है. फिर वो बोली कि मुझे शर्म आ रही है पहले तुम लाईट बंद कर दो. फिर मैंने ट्यूब लाईट बंद की और नाईट लेंप जलाकर जब वापस आया तो मैंने देखा कि अब भाभी अपनी आँखे बंद करके अपनी पीठ के बल लेटी थी. फिर मैंने कहा कि विमला भाभी साड़ी ऊपर करके जहाँ खुजली हो रही है, वो जगह दिखाओ.
फिर भाभी ने अपनी साड़ी के ऊपर से ही अपनी चूत पर हाथ रखते हुए कहा कि यहाँ पर ज़्यादा खुजली हो रही है और तुम ही साड़ी ऊपर करके मलहम लगा दो. फिर जब में उनकी साड़ी और पेटिकोट को उनकी कमर के ऊपर ले जाने लगा तो विमला भाभी ने अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठा दी, जिस कारण उनकी साड़ी और पेटीकोट आराम से कमर के ऊपर तक हो गये, उन्होंने अंदर पेंटी नहीं पहनी थी.
फिर जब मैंने उनके दोनों पैरों को फैलाकर उनकी चूत को देखा तो देखता ही रह गया, उनकी चूत शेव की हुई थी, उनके चूत का दाना थोड़ा बड़ा था. फिर मैंने अपनी बीच की उंगली पर थोड़ा थूक लगाया और उनकी चूत की फांको पर अपनी उंगली फैरने लगा. अब उनके मुँह से आहहा सी सी सी की आवाज़े निकलने लगी थी.
अब उनका हाथ मेरी लूंगी के ऊपर से ही मेरे लंड को टटोल रहा था. अब में धीरे- धीरे उनकी चूत के दाने को भी मसलने लगा था, जिससे वो और भी गर्म हो गयी थी. फिर में पलंग से उतरा और अपनी लूंगी और अंडरवियर निकालकर नंगा ही उनके पास गया और उनके हाथ में मेरा लंड पकड़ा दिया.
फिर जब उसने मेरे लंड को देखा तो उसकी आँखों फटी की फटी रह गयी और बोली कि बाप रे दीनू तुम्हारा लंड तो बहुत ही बड़ा और मोटा है और यह कहकर मेरे लंड को अपनी हथेली में पकड़कर मेरे लंड की चमड़ी को नीचे की तरफ करके सुपाड़े पर से घूँघट निकाल दिया और सुपाड़े को देखकर बोली कि दीनू तुम्हारा सुपाड़ा तो काफ़ी मोटा है और फिर वो मेरे लंड को ऊपर नीचे सहलाने लगी. अब में भी उसके ब्लाउज और ब्रा को खोलकर उनके एक बूब्स की निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था और अपने दूसरे हाथ से उनके दूसरे बूब्स को दबाने लगा था.
फिर थोड़ी देर के बाद में खड़ा होकर मेरा लंड उसके मुँह के पास ले गया, तो वो तुरंत अपना मुँह खोलकर पागलों की तरह मेरा लंड चाटने लगी और लॉलीपोप की तरह अपने मुँह से चूस रही थी. अब उसकी इस अदा से में तो जैसे स्वर्ग में था. अब में उसके सर को पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगा था. फिर लगभग 10 मिनट के बाद हम लोग 69 की पोज़िशन में आ गये. फिर मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया, तो वो तड़प उठी और बोली कि नहीं दीनू नहीं आह में मर जाऊंगी और वो मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
अब मुझे उसकी चूत से बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी. फिर मैंने उसकी गांड में भी अपनी एक उंगली डाल दी तो वो दर्द से चीख पड़ी और बोली कि ऐसा मत करो प्लीज बहुत दर्द होता है. फिर में अपनी उंगली उसकी गांड से बाहर निकालकर सिर्फ़ उसकी गांड के छेद को सहलाने लगा. अब उसे बहुत मज़ा और नशा हो रहा था. अब हम लोग लगभग 15 मिनट एक दूसरे को इसी तरह छेड़ते रहे. फिर इतने में उसकी चूत थोड़ी सिकुड़ने लगी. अब में समझ गया था कि वो झड़ने वाली है तो में अपनी जीभ उसकी चूत में तेज़ी से अंदर बाहर करने लगा.
फिर वो अपने दाहिने हाथ से मेरे लंड को पकड़कर चूसते हुए अपना बायाँ हाथ मेरे सर पर रखकर मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी और कुछ ही पल में उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया, उसका पानी बहुत टेस्टी था. फिर मैंने उसे सीधा करके लेटाया और उसके लिप्स और बूब्स को किस करने लगा तो उसके बूब्स लाल हो गये थे.
फिर वो बोली कि दीनू अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है, प्लीज कुछ करो, में मर जाऊंगी.
फिर मैंने उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगाया तो उसकी चूत एकदम ऊपर उठ गयी. फिर मैंने प्यार से उस पर अपना हाथ फैरा तो वो आहें भरने लगी, आआआआहहहहहह, उउउफ्फ चोदो मुझे, जल्दी चोदो आआआ आअहहहह. अब में भी पूरा गर्म हो चुका था और अब मेरे बदन का रोया-रोया खड़ा हो गया था.
फिर मैंने अपने लंड के सुपाड़े को उसकी चूत पर रखा, तो उसने अपनी टाँगो को और फैला दिया. उसकी चूत मेरे लंड के मुकाबले थोड़ी टाईट लग रही थी, लेकिन उसकी चूत गीली होने से कारण जब मैंने एक ज़ोर का झटका लगाया तो मेरा सुपाड़ा और थोड़ा सुपाड़े के नीचे का हिस्सा उसकी चूत में घुस गया और जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत के अंदर घुसा तो मुझे उसकी चूत की दीवारे टाईट महसूस हुई.
फिर इतने वो थोड़ा दर्द के मारे कहने लगी, आआहह में मर गयी रे, थोड़ा धीरे-धीरे चोदो, क्योंकि आज तक मेरी चूत ने इतना लंबा और मोटा लंड नहीं खाया है, इसलिए थोड़ा धीरे-धीरे चोदो. फिर में उसकी चूत में थोड़ी देर तक अपना लंड डाले पड़ा रहा और उसके बूब्स को मसलना शुरू कर दिया और उसके लिप्स को अपने मुँह में ले लिया.
फिर जब वो थोड़ी देर में शांत हो गयी तो मैंने एक और झटका मारा तो मेरा लंड आधे से ज्यादा उसकी चूत में जा चुका था. फिर वो दर्द के मारे मचल उठी, आआहह छोड़ दो मुझे, बाहर निकालो इसे आआआआआआहहहहह. अब में जोश में था और फिर मैंने अपनी कमर को उठाया तो मेरा लंड थोड़ा बाहर आ गया.
फिर मैंने चोदना शुरू कर दिया और मेरा लंड उसकी चूत में अंदर बाहर जाने से उसे थोड़ी राहत मिलनी शुरू हुई और वो भी मज़ा लेने के साथ-साथ कहराने लगी, आआहहह आहहहह सस्स्स्स्स्स्सस्स और ज़ोर से करो जान, आआआआ सस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स अयाया मार डालो मुझे, आआआआआहहा हहह. फिर मैंने एक जोरदार झटका मारा तो मेरा पूरा लंड उसकी कसी-कसी चूत में फिट हो गया और अब मुझे उसकी चूत की जकड़न और सिकुड़न महसूस हो रही थी.
फिर मैंने भाभी को तेजी से चोदना चालू किया. अब मेरे हर धक्के पर वो नीचे से अपनी गांड उछाल- उछालकर मेरा साथ देने लगी थी.
फिर करीब 10-12 धक्को के बाद उसकी चूत फूली और सिकुड़ी और वो झड़ने लगी. अब उसकी चूत के रस से मेरा लंड तरबतर हो गया और जब में अपना लंड उसकी चूत में अंदर बाहर कर रहा था तो पूरे कमरे में पूच-पूच की आवाज़े आने लगी थी. अब में फटाफट- फटाफट अपना लंड उसकी चूत की गहराई तक डाल रहा था.
अब चुदाई की आवाज़ से और उस माहौल से वो फिर से गर्म हो गयी और मेरा साथ देने लगी थी और 10-12 धक्को के बाद वो फिर से झड़ गयी. अब में भी मस्ती में आ चुका था तो मैंने अपनी स्पीड और तेज़ कर दी.
अब वो भी कराह रही थी, आआआ सस्स्स्स्साआआआ, ऊऊहह दीनू वाकई में आज तक मेरी चूत इस तरह से कभी नहीं चुदी, क्या शानदार चुदाई करते हो दीनू? उफफफ्फ़ आआआआहह सस्शहहहा करते रहो मेरे दीनू और ये कहकर उसने अपने दोनों पैरों से मेरी कमर को पूरी तरह से जकड़ लिया और मेरे होंठो पर अपने होंठ रखकर किस करने लगी.
अब में भी अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुका था और में ज़ोर-ज़ोर से उनकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा. फिर कुछ देर के बाद में झड़ने लगा और मेरा सारा वीर्य उसकी चूत में आखरी बूँद तक डालकर ऐसे ही कुछ देर तक उसके ऊपर लेटा रहा. फिर जब मैंने अपना आधा सिकुड़ा हुआ लंड उसकी चूत से बाहर निकाला तो मैंने देखा कि उसकी चूत मेरे और उसके वीर्य से लबालब भरी हुई थी और थोड़ा-थोड़ा करके उसकी चूत से वीर्य उसकी गांड की तरफ बहने लगा था.
फिर में उसके बगल में आकर लेट गया और वो मेरे कंधे पर अपना सर रखकर लेट गयी, उसका नंगा मुलायम शरीर सच में बहुत खूबसूरत लग रहा था.
अब हम दोनों की नींद तो गायब हो चुकी थी. फिर मैंने पूछा कि विमला भाभी क्या अब भी चूत में खुजली हो रही है? तो वो मुस्कुराते हुए बोली कि दीनू यहाँ की तो खुजली मिट गयी है, लेकिन बस में यह तुम्हारा (मेरे लंड को अपने हाथ मे पकड़कर बोली) कीड़ा जहाँ पर लगा था, वहाँ पर अब भी खुजली मची है और यह कहकर वो मेरे लंड को सहलाने लगी और में भी उसके बूब्स को चूसते हुए उसकी गांड पर अपना हाथ फैरने लगा.
फिर करीब 10 मिनट तक हम लोग इसी तरह करते रहे और फिर जब मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया तो में पलंग से उतरकर वैसलिन लाया और उससे कहा कि चलो या तो घोड़ी बन जाओ या फिर पेट के बल लेटकर अपनी गांड फैला लो. फिर उसने पेट के बल लेटकर अपने दोनों हाथों से अपने चूतड़ो को पकड़कर फैला दिया, जिससे विमला भाभी की गांड का छेद और फैल गया.
फिर मैंने बहुत सारा वैसलिन अपने लंड पर लगाया और विमला भाभी की गांड के छेद में भी लगा दिया. फिर मैंने धीरे से अपनी एक उंगली जो कि वैसलीन से भरी थी उनकी गांड में डाल दी, लेकिन उन्होंने उफ तक नहीं की. अब में समझ गया था कि विमला भाभी पहले भी गांड मरवा चुकी है.
फिर मैंने जोश में आकर उनकी गांड के छेद पर अपने लंड का सुपाड़ा रखकर थोड़ा सा दबाया तो चिकनाहट की वजह से मेरे लंड का सुपाड़ा उनकी गांड में घुस गया और जैसे ही मेरा सुपाड़ा उनकी गांड में घुसा तो उन्होंने उूउउइईईईईईईई माँ कहते हुए अपनी गांड सिकुड़ ली, जिससे मेरा सुपाड़ा फिसलकर उनकी गांड के बाहर आ गया.
फिर मैंने पूछा कि भाभी क्या बहुत दर्द हो रहा है? तो वो बोली कि हाँ दीनू मैंने कई सालों से गांड नहीं मरवाई है और उनका लंड भी तुम्हारे लंड के मुकाबले बहुत पतला और छोटा था. फिर थोड़ी देर तक में उनकी गांड को सहलाता रहा और उसके बाद उसकी कमर को उठाकर उसे घोड़ी की पोज़िशन में किया और एक बार फिर से अपने सुपाड़े को उसकी गांड के छेद पर रखकर थोड़ा दबाव दिया, तो मेरा सुपाड़ा आसानी से उसकी गांड के अंदर घुस गया, लेकिन इस बार उन्होंने अपनी गांड नहीं सिकुड़ी.
फिर मैंने उनकी कमर को पकड़कर एक झटका मारा तो मेरा आधा लंड अंदर घुस गया और अंदर घुसते ही वो कहने लगी कि दीनू प्लीज़ निकालो इसे बहुत दर्द हो रहा है. फिर मैंने थोड़ी देर तक बिना हिले ऐसे ही मेरा लंड उसकी गांड में डाले रखा.
फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उनकी कमर पकड़कर ज़ोर का एक झटका मारा तो मेरा लंड उनकी गांड में जड़ तक घुस गया. अब उनकी आँखों में पानी आ गया था और वो रोने जैसी आवाज़ में बोली हाईईईईईई माँ मारररर डालाआआआआआआ रे, हाईईईई फाड़ दी रे मेरी गांड. फिर जब वो थोड़ी शांत हुई तो में धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा.
अब उसे दर्द नहीं हो रहा था बल्कि मज़ा आ रहा था और वो मज़े में कहने लगी कि मार दीनू मार मेरी गांड, फाड़ दे रे आज इस गांड को, वाह क्या मारते हो? मज़ा आ रहा है. अब मुझे भी उसकी कसी-कसी गर्म-गर्म गांड में अपना लंड अंदर बाहर करने में बहुत मज़ा आ रहा था. अब करीब 15 मिनट के बाद उसकी गांड मेरे वीर्य से लबालब भर गयी थी. फिर जब मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो मेरा लंड फच की आवाज़ करता हुआ बाहर निकल गया और उसकी गांड से वीर्य की धारा चूत की तरफ बढ़ने लगी.
फिर मैंने कपड़े से उसकी गांड और चूत को साफ किया और उसने कपड़े से मेरे लंड को साफ किया और बोली कि दीनू अब तुम अपने कमरे में जाकर सो जाओ नहीं तो सासू माँ और देवरानी को शक हो जाएगा, तो में अपने कमरे में आकर सो गया. अब सुबह जब हम सब नाश्ता कर रहे थे तो विमला भाभी हमेशा से ज़्यादा खुश नज़र आ रही थी.
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भैया ने ट्रेन में ताकत लगाई

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम गुड्डू है और में 20 साल की लड़की हूँ और यह मेरी बिल्कुल वास्तविक कहानी है. अब में आपको अपने बारे में शुरू से बताती हूँ. दोस्तों में अपने घर में अपने भाई बहनों में तीसरे नंबर की हूँ. मेरे सबसे बड़े भैया है, जो आर्मी में है और अभी उनकी शादी नहीं हुई है, मुझसे छोटा एक भाई है और में होस्टल में रहकर पढाई करती हूँ.
एक दिन मेरे भैया मुझसे मिलने होस्टल आए तो में उन्हें देखकर बहुत खुश हुई, वो सीधे आर्मी से मेरे पास ही आए थे और अब घर जा रहे थे. फिर मैंने भी उनके साथ घर जाने का मन बना लिया और कॉलेज से 8 दिन की छुट्टी लेकर में और भैया घर के लिए रवाना हो गये. अब जिस ट्रेन से हम घर जा रहे थे, उस ट्रेन में मेरा रिजर्वेशन नहीं था सिर्फ़ भैया का था, इसलिए हम लोगों को सिंगल बर्थ ही मिली. अब ट्रेन में बहुत भीड़ थी और रात के 11 बजे थे और हम इस ट्रेन से सुबह में घर पहुँचने वाले थे.
फिर में और भैया अकेले उस बर्थ पर बैठ गये, जब सर्दियों के दिन थे और आधी रात के बाद ठंड बहुत हो जाती थी. फिर भैया ने अपने बैग से कम्बल निकालकर आधा मुझे ढक दिया और आधा खुद ने ओढ़ लिया और में मुस्कुराती हुई उनसे चिपककर बैठ गई. अब सारी सवारियां सोने लगी थी और अब ट्रेन अपनी रफ़्तार से भागी जा रही थी. अब मुझे भी नींद आने लगी थी और भैया को भी नींद आने लगी थी. फिर भैया ने मुझे अपनी गोदी में सर रखकर सो जाने के लिए कहा तो भैया का इशारा मिलते ही मैंने उनकी गोदी में अपना सर रखकर अपने पैरों को फैला लिया.
अब में उनकी गोदी में आराम के लिए अच्छी तरह से ऊपर हो गई तो भैया ने भी अपने पैर समेटकर अच्छी तरह कम्बल में मुझे और खुद को ढक लिया और मेरे ऊपर अपना एक हाथ रखकर बैठ गये. अब तक मैंने कभी किसी पुरुष को इतने करीब से टच नहीं किया था.
अब भैया की मोटी-मोटी जांघो में मुझे बहुत आराम पहुँचाया था और अब मेरा एक गाल उनकी दोनों जाँघो के बीच में रखा हुआ था और एक हाथ से मैंने उनके पैरों को पकड़ रखा था. तभी मेरे सोते हुए दिमाग ने एक झटका सा खाया और मेरी आखों से नींद गायब हो गई और वो वजह थी भैया की जांघो के बीच का स्थान फूलता जा रहा था और जब वो मेरे गाल पर टच करने लगा तो में समझ गई कि वो क्या चीज़ है? अब मेरी जवानी अंगड़ाई लेने लगी थी. अब में समझ गई थी कि भैया का लंड मेरे बदन का स्पर्श पाकर उठ रहा है, अब ये ख्याल मेरे मन में आते ही मेरे दिल की गति बढ़ गई थी.
फिर मैंने अपने गाल को दबाकर उनके लंड का जायज़ा लिया, जो ज़िप वाले स्थान पड़ गया था. अब भैया भी थोड़े कसमसाए थे, शायद वो भी मेरे बदन से गर्म हो गये थे. तभी तो वो बार-बार मुझे अच्छी तरह से अपनी टांगो में समेटने की कोशिश कर रहे थे. अब उनकी क्या कहूँ? में खुद भी बहुत गर्म होने लगी थी. फिर मैंने उनके लंड को अच्छी तरह से महसूस करने की चाहत में अपनी करवट बदली. अब मेरा मुँह भैया के पेट के सामने था.
फिर मैंने करवट लेने के बहाने ही अपना एक हाथ उनकी गोदी में रख दिया और सरकते हुए उनकी पेंट के उभरे हुई जगह पर आकर रुकी. फिर मैंने अपने हाथ को वहाँ से नहीं हटाया, बल्कि दबाव देकर उनके लंड को देखा. अब उधर भैया ने भी मेरी कमर में हाथ डालकर मुझे अपने से चिपका लिया था. फिर मैंने कुछ भी सोचे बिना उनके लंड को अपनी उंगलियों से टटोलना शुरू कर दिया और उस वक़्त भैया भी शायद मेरी हरकतों को जान गये थे. तभी तो वो मेरी पीठ को सहलाने लगे थे.
अब हिचकोले लेती ट्रेन जितनी तूफ़ानी रफ़्तार पकड़ रही थी, उतना ही मेरे अंदर तूफान उभरता जा रहा था. अब भैया की तरफ से कोई प्रतिक्रिया ना होते देखकर मेरी हिम्मत बढ़ी और अब मैंने उनकी जांघों पर से अपना सर थोड़ा सा पीछे खींचकर उनकी ज़िप को धीरे-धीरे खोल दिया. फिर भैया इस पर भी कुछ कहने की बजाए मेरी कमर को कस-कसकर दबा रहे थे और भैया ने अपनी पेंट के नीचे अंडरवियर पहन रखा था. अब मेरी सारी झिझक ना जाने कहाँ चली गई थी?
फिर मैंने उनकी ज़िप के खुले हिस्से से अपना हाथ अंदर डाला और उनके अंडरवियर के अंदर अपना हाथ डालकर उनके भारी लंड को बाहर खींच लाई, लेकिन अंधेरे के कारण में उसे देख तो ना सकी मगर हाथ से पकड़कर ही ऊपर नीचे करके उसकी लंबाई मोटाई को नापा, उनका लंड लगभग 7-8 इंच लंबा और 3-4 इंच मोटा था. अब मेरे दिल के सारे तार झनझना गये थे. अब इधर मेरे हाथ में लंड था तो उधर मेरी पेंटी में कसी मेरी चूत बुरी तरह से फड़फड़ा उठी थी.
इस वक़्त मेरे बदन पर टाईट जींस और टी-शर्ट थी. अब मेरे इतना करने पर भैया भी अपने हाथों को बेझिझक होकर हरकतें देने लगे थे. अब वो मेरी शर्ट को जींस से खींचने के बाद उसे मेरे बदन से हटाना चाह रहे थे तो में उनके दिल की बात को समझते हुए थोड़ा ऊपर उठ गई तो भैया ने मेरी नंगी पीठ पर अपना हाथ फैरना शुरू किया तो मेरे बदन में करंट दौड़ने लगा था.
फिर उन्होंने अपने हाथों को मेरी चूचियों पर पहुँचाया तो मैंने सिसकी लेकर झटके खाते हुए लंड को अपने गाल के साथ चिपकाकर ज़ोर से दबा दिया. अब भैया मेरी चूचियों को सहलाते-सहलाते धीरे-धीरे दबाने भी लगे थे. फिर मैंने उनके लंड को अपने गाल से सहलाया तो भैया ने एक बार फिर से बहुत ज़ोर से मेरी चूचियों को दबाया और मेरे मुँह से सिसकारी निकल गई. अब हम दोनों में इस समय भले ही बातचीत नहीं हो रही थी, मगर हम एक दूसरे के दिल की बातें अच्छी तरह समझ रहे थे.
अब भैया अपने एक हाथ को सरकाकर पीछे की और से मेरी पेंट की बेल्ट में अपना हाथ घुसा रहे थे, लेकिन मेरी पेंट टाईट होने की वजह से उनकी थोड़ी-थोड़ी उंगलियाँ ही अंदर जा सकी. फिर मैंने उनके हाथ को सुविधा अनुसार मन चाही जगह पर पहुँचने देने के लिए में अपने हाथ को नीचे लाई और अपनी पेंट की बेल्ट को खोल दिया. फिर उनका हाथ अंदर पहुँचा और मेरे भारी-भारी चूतड़ो को दबोचने लगा और फिर उन्होंने मेरी गांड को भी अपनी उँगलियों से सहलाया.
फिर उनका हाथ जब और नीचे यानी मेरी जांघो पर पेंट टाईट होने के कारण नहीं पहुँच सका तो वो अपने हाथ को पीछे से खींचकर सामने की और लाए. फिर इस बार उन्होंने मेरी पेंट की ज़िप खुद खोली और मेरी चूत पर अपना हाथ फैरा. अब मेरी चूत पर उनका हाथ लगते ही में बैचेन हो गई थी. अब वो मेरी फूली हुई चूत को अपनी मुठ्ठी में लेकर भींच रहे थे. फिर मैंने बेबसी से अपना सर थोड़ा सा ऊपर उठाकर भैया का सुपाड़ा चूमा और उसे मुँह में लेने की कोशिश की, लेकिन उसकी मोटाई के कारण मैंने उसे मुँह में लेना उचित नहीं समझा और उसे अपनी जीभ निकालकर चाटने लगी.
अब मेरी गर्म और खुरदरी जीभ के स्पर्श से भैया बुरी तरह गर्म हो गये थे. फिर उन्होंने मुझे अपने आवेश में भरकर मेरी गीली चूत को टटोलते हुए एक झटके से मेरी चूत में अपनी उंगली घुसा दी, तो में सिसकी भरकर उनके लंड सहित उनकी कमर से लिपट गई. अब मेरा दिल कर रहा था कि भैया फ़ौरन अपनी उंगली को निकालकर मेरी चूत में अपना लंड डाल दें और मेरी ये इच्छा भी जल्द ही पूरी हो गई. अब भैया मेरी टांगो में अपना हाथ डालकर अपनी तरफ खींचने लगे थे.
फिर मैंने उनकी इच्छा को समझकर अपना सर उनकी जांघो से उतारा और कम्बल के अंदर ही अंदर घूम गई. अब मेरी टागें भैया की तरफ थी और मेरा सर बर्थ के दूसरी तरफ था. फिर भैया ने अपनी टांगो को मेरे बराबर में फैलाया और फिर मेरे कूल्हों को उठाकर अपनी टांगो पर चढ़ा लिया और धीरे-धीरे करके पहले मेरी पेंट खींचकर उतार दी और उसके बाद मेरी पेंटी को भी खींचकर उतार दिया. अब में कम्बल में पूरी तरह नीचे से नंगी थी.
अब शायद मेरी बारी थी. फिर मैंने भी भैया की पेंट और अंडरवियर को बहुत प्यार से उतार दिया. फिर भैया ने थोड़ा आगे सरककर मेरी टांगो को खींचकर अपनी कमर के इर्द-गिर्द करके पीछे की और लिपटवा दिया. इस समय में पूरी की पूरी उनकी टांगो पर बोझ बनी हुई थी. अब मेरा सर उनके पंजो पर रखा हुआ था. फिर मैंने ज़रा सा कम्बल हटाकर आसपास की सवारियों पर नज़र डाली तो सभी नींद में मस्त थे, किसी का भी ध्यान हमारी तरफ नहीं था.
फिर मेरी नज़र भैया की तरफ पड़ी तो उनका चेहरा आवेश के कारण लाल हो रहा था और वो मेरी तरफ ही देख रहे थे. फिर ना जाने क्यों उनकी नज़रो से मुझे बहुत शर्म आई? और मैंने वापस कम्बल के अंदर अपना मुँह छुपा लिया. फिर भैया ने वापस से मेरी चूत को टटोला तो मेरी चूत इस समय पूरी तरह रस से भरी हुई थी.
फिर भी भैया ने अपना ढेर सारा थूक उस पर लगाया और अपने लंड को मेरी चूत पर रखा तो उनके गर्म सुपाड़े ने मेरे अंदर आग लगा दी. फिर उन्होंने टटोलकर मेरी चूत के मुहाने को देखा और अच्छी तरह से अपना सुपाड़ा मेरी चूत के मुँह पर रखने के बाद मेरी जांघें पकड़कर हल्का सा एक धक्का दिया, मगर उनका लंड अंदर नहीं गया, बल्कि ऊपर की और हो गया.
फिर भैया ने इसी तरह एक दो बार और ट्राई किया और अब वो आसपास की सवारियों की वजह से बहुत सावधानी से कर रहे थे. इस तरह जब वो अपना लंड नहीं डाल सके तो वो बाहर खींचकर अपने लंड को मेरी चूत के आस पास मसलने लगे. फिर मैंने अपनी शर्म त्यागकर अपना मुँह खोला और उन्हें सवालियां निगाहों से देखा.
फिर वो बड़ी बेबस निगाहों से मुझे देख रहे थे. फिर मैंने अपने सर और आँखों के इशारे से पूछा कि क्या हुआ? तो वो थोड़े से नीचे झुककर धीरे से फुसफुसाए कि आस पास सवारियाँ मौजूद है गुड्डू, इसलिए में आराम से काम करना चाहता था, मगर इस तरह होगा ही नहीं, थोड़ी ताक़त लगानी पड़ेगी. फिर में उखड़े स्वर में बोली तो लगाओ ना ताक़त भैया, तो भैया बोले कि ताक़त तो में लगा दूँगा, लेकिन तुम्हें दर्द होगा, क्या तुम बर्दाश्त कर लोगी?
फिर मैंने कहा कि आप फ़िक्र ना करें, कितना ही दर्द क्यों ना हो? में एक ऊफ तक नहीं करूँगी, आप अपना लंड डालने में चाहे पूरी शक्ति ही क्यों ना लगा दें? फिर उन्होंने कहा कि ठीक है, में अभी अंदर करता हूँ.
अब भैया को विश्वास हो गया और इस बार उन्होंने दूसरी ही तरकीब से काम लिया. फिर उन्होंने उसी तरह बैठे हुए मुझे अपनी टांगो पर उठाकर बैठाया और हम दोनों को अच्छी तरह से कम्बल से लपेटने के बाद मुझे अपने पेट से चिपकाकर थोड़ा सा ऊपर किया और इस बार बिल्कुल चूत की दिशा में अपने लंड को रखकर और मेरी चूत को टटोलकर उसे अपने सुपाड़े पर मेरी चूत पर टिका दिया तो में उनके लंड पर बैठ गई. अभी मैंने अपना वजन नीचे नहीं गिराया था और मैंने सुविधा के लिए भैया के कंघो पर अपने हाथ रख लिए थे.
फिर भैया ने मेरे कूल्हों को कसकर पकड़ा और मुझसे बोले कि अब एकदम से नीचे बैठ जाओ.
फिर में मुस्कुराई और एक तेज़ झटका अपने बदन को देकर उनके लंड पर छपक से बैठ गई. फिर उधर भैया ने भी मेरे बदन को नीचे की और दबाया तो अचानक से मुझे ऐसा लगा जैसे कोई तेज़ धार खंजर मेरी चूत में घुस गया हो और में तकलीफ़ से बिलबिला गई, क्योंकि मेरी और भैया की मिली जुली ताक़त के कारण उनका विशाल लंड मेरी चूत के छोटे से दरवाज़े को तोड़ता हुआ अंदर समा गया था और में सरकती हुई भैया की गोदी में जाकर रुकी.
फिर मैंने तड़पकर उठना चाहा, लेकिन भैया की गिरफ़्त से में आज़ाद ना हो सकी. अगर ट्रेन में बैठी सवारियों का ख्याल ना होता तो में बुरी तरह चीख पड़ती. फिर में मचलते हुए वापस से भैया के पैरों पर पड़ी तो मेरी चूत में लंड तनने के कारण मुझे और दर्द का सामना करना पड़ा. अब में उनके पैरों पर बारी-बारी बिन पानी मछली की तरह तड़पने लगी थी.
अब भैया मुझे अपने हाथों से दिलासा देते हुए मेरी चूचियों को सहला रहे थे. फिर करीब 10 मिनट के बाद मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो भैया अपने कूल्हों को हल्के-हल्के हिलाकर अंदर बाहर करने लगे. फिर मेरा दर्द कम होते-होते बिल्कुल ही समाप्त हो गया और में असीमित सुख के सागर में गोते लगाने लगी. अब भैया धीरे से अपना लंड बाहर खींचकर अंदर डाल देते थे और उनके लंड के अंदर बाहर करने से मेरी चूत से पचक-पचक की अजीब-अजीब सी आवाज़ें पैदा हो रही थी.
अब मैंने अपनी कोहनियों को बर्थ पर टेककर मेरे बदन को ऊपर उठा रखा था और खुद थोड़ा सा आगे सरककर अपनी चूत को वापस से उनके लंड पर धकेल देती थी. इस तरह से आधे घंटे तक धीरे-धीरे से चोदा चोदी का खेल चलता रहा और अंत में मैंने जो सुख पाया उसे में बयान नहीं कर सकती.
फिर भैया ने टावल निकालकर पहले मेरी चूत को पोछा जो खून और हम दोनों के रस से सनी हुई थी. फिर उसके बाद मैंने उनके लंड को पोछा और फिर बारी-बारी से बाथरूम में जाकर फ्रेश हुए और अपने कपड़े पहने. अब मेरे पूरे बदन में मीठा-मीठा सा दर्द हो रहा था और यही से हम दोनों भाई बहन ना होकर प्रेमी प्रेमिका बन गये. अब जब भी भैया घर आते है तो वो मुझे बिना चोदे नहीं मानते है. अब मुझे भी उनका इंतज़ार रहता है, मगर मैंने अभी तक किसी और को अपना बदन नहीं सौंपा है और ना कोई इरादा है और फिर आगे राम जाने.
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दीपावली पर आंटी ने गुजिया खिलाई

हैल्लो दोस्तों, चुड़क्कड़ लड़कों और मेरी चुदासी बहनों आप सभी कैसे है? हाँ तो मेरी चुदासी बहनों और प्यारे लंड धारी भाइयों इस बार दीवाली में मैंने किसकी गुजिया चखी, उसके बारे में आज में आप सभी को बताने जा रहा हूँ. दोस्तों अब आप लोग मेरी उस सच्ची घटना को जरा ध्यान लगाकर सुनिए और मज़े ले.
दोस्तों दीवाली के दूसरे दिन में अपनी मामी के घर दीवाली पर मिलने गया, जहाँ पर मेरे मामा और मामी के अलावा उनकी एक लड़की जिसकी उम्र 15 साल है वो भी रहती है. मेरी मामी भी अभी बहुत सुंदर है और उनका गोरा बदन बड़े बड़े बूब्स और भरी भरी गांड और उसके ऊपर से उनका बड़े गले का ब्लाउज पहनना, जिसके अंदर से उनके बड़े आकार के पपीते की तरह के बूब्स हमेशा आधे बाहर ही झांकते रहते थे और में उनको देखा करता था.
दोस्तों में अपनी एक चाची और यहाँ तक की अपनी मौसी को भी कई बार चोद चुका हूँ, वो सभी बहुत धार्मिक विचारों की थी, लेकिन मुझे मेरी मामी जी उन सभी में सबसे ज्यादा कड़क स्वभाव की लगती थी, हालाँकि की ऊपर से तो उनका रवैया बिल्कुल अच्छा और अपनापन लिए हुए होता था, लेकिन वो बहुत अकड़ेल स्वभाव की थी, उनको गुस्सा भी बहुत ज्यादा आता था और में हमेशा से ही उनको अपने पैरों के नीचे लेना चाहता था, लेकिन मेरा बस नहीं चल पा रहा था और मुझे ऐसे ही किसी अच्छे मौके की तलाश थी, जिसका फायदा उठाकर में उनकी चुदाई के मज़े लूँ और उनकी चूत को अपने लंड का गुलाम बना लूँ.
फिर जब दीवाली के अवसर पर में उनके घर पर गया तो मेरे मन में बस यही सब विचार पहले से ही आ रहे थे, वहाँ पर मेरे मामा जी और नेहा मेरे मामा की लड़की घर पर नहीं थी, लेकिन एक और औरत जिनकी उम्र करीब 44 साल रही होगी और वो भी मेरी मामी की तरह ही भरे हुए शरीर की थी, उनका रंग गोरा, उनके बूब्स ऐसे जैसे कि बस अभी वो ब्लाउज को फाड़कर बाहर निकल पड़ेंगे, वैसे उनका ब्लाउज तो और भी ज्यादा क़यामत वाला था, गले के साथ साथ उनकी कमर भी बहुत ज्यादा खुली हुई थी, जिसकी वजह से मुझे उनकी गोरी गोरी पीठ साफ नज़र आ रही थी और उनकी पीठ को देखकर तो में तुरंत उस पर हाथ फेरने को तड़प गया.
फिर मुझे देखकर मामी बहुत खुश हो गई और नाश्ता वगेरा करने के बाद मैंने अपनी मामी से मेरे मामा के बारे में पूछा कि वो कहाँ है? तो उन्होंने मुझे बताया कि वो नेहा को भी अपने साथ लेकर अपने एक दोस्त के घर गये हुए है और वो तीन दिन के बाद आएँगे और यह मेरी सहेली है, इसका नाम नीतू है और यह मुझसे मिलने मेरे पास आई थी, लेकिन मैंने इसको मेरे घर पर बिल्कुल अकेले होने की वजह से अपने पास ही रोक लिया. फिर मैंने बड़े ध्यान से देखा कि नीतू आंटी मुझे कुछ चालू किस्म की लगी और वो मुझे बहुत गौर से देख रही थी और में तो उनकी ऐसी नज़रों को देखकर तुरंत ही समझ जाता था, क्योंकि मुझे इन कामों में समझ ज्यादा थी, इसलिए में भी जब भी वो ऐसी कोई हरकत करती तो में भी उनकी तरफ देखकर मुस्कुरा देता था. फिर थोड़ी देर के बाद मामी उठकर अपने कमरे में चली गई और वापस आकर वो मुझसे बोली कि राज तू यहीं पर बैठकर नीतू से बातें कर ले, में तब तक ज़रा बाजार से सब्जी कुछ जरूरी सामान ले आती हूँ और इतना कहने के बाद मामी जी बाजार चली गयी.
फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है आप आराम से आपका पूरा काम खत्म करके आना, में भी तब तक अपना कुछ जरूरी काम खत्म कर लेता हूँ, यह बात सुनकर मामी चली गई और उनके जाते ही नीतू आंटी तुरंत उठकर मेरे ज्यादा करीब आते ही वो अब मुझसे मुस्कुराकर बोली हाँ तो बेटा बताओ तुम्हारी इस बार की दीवाली कैसी रही? क्या तुमने कोई गुजिया वगेरा खाई या तुम अब तक भूखे ही हो? दोस्तों उनका मुझसे यह सब बातें पूछने का अंदाज़ बहुत ही अलग था और उनकी उस बात के दो मतलब थे, जिसको में बहुत अच्छी तरह से समझ चुका था और मैंने उनको अपना जवाब भी उसी अंदाज़ में दे दिया कि आंटी गुजिया तो मैंने अब तक बहुत खाई, लेकिन अभी तक मुझे कोई मतलब की गुजिया नहीं मिली, जिसका रस जायकेदार हो और जिसको खाते ही मन अंदर से कहे कि वाह मज़ा आ गया.
अब वो शरारती हंसी हंसते हुए कहने लगी कि क्यों में अगर तुम्हें अपनी गुजिया खिलाऊं तो तुम्हें कोई ऐतराज़ तो नहीं होगा? दोस्तों उनके मुहं से यह बात सुनकर बहुत खुश होकर मैंने कहा कि नहीं आंटी मुझे कैसा ऐतराज़, लेकिन उसको खाने के लिए मुझे आपके साथ आपके घर पर जाना पड़ेगा?
फिर वो कहने लगी कि नहीं में अभी यहीं पर तुझे अपनी रसीली गुजिया खिला देती हूँ जा तू भी क्या याद रखेगा? और यह शब्द कहकर आंटी तुरंत अपनी साड़ी को ऊपर उठाने लगी और में अपनी चकित नजरों से वो नजारा देखता रहा और धीरे धीरे करके उन्होंने अपनी साड़ी को जांघों के ऊपर तक उठा दिया, जिसकी वजह से उनकी साड़ी के नीचे उनकी लाल कलर की पेंटी मुझे अब साफ साफ नज़र आने लगी थी और अब मैंने मन ही मन कुछ बातें सोचकर उनके सामने पूरी तरह से खुलना बेवकूफी समझा और मैंने नाटक करते हुए उनसे कहा कि आंटी यह आप क्या कर रही है? क्या भला यहाँ पर भी कोई गुजिया होती है?
तो मेरे मुहं से बात सुनकर वो बोल पड़ी, अरे भोसड़ी के यहीं तो असली गुजिया होती है आजा अब जल्दी से अपना मुहं लगाकर इसको चाट और ले ले सारा मज़ा जवानी का, में तो तुझे पहली बार देखकर ही समझ गयी थी कि तू तो बहुत बड़ा वाला चुड़क्कड़ है, हरामी तू जब से यहाँ पर आया है, तब से तू मेरे बूब्स को ऐसे घूर रहा है जैसे खा ही जाएगा और तो और तू अपनी मामी को भी तू ऐसे देख रहा था, जैसे उसको तू अभी यहीं पर पटककर उसकी चूत में अपना लंड घुसा देगा.
दोस्तों आंटी के मुहं से मेरे लिए इस तरह की सच्ची बातें सुनकर में पहले तो बहुत आश्चर्यचकित था, लेकिन में उसके बाद अंदर ही अंदर बहुत खुश हुआ और अब मुझे मेरा उनके साथ पूरी तरह से खुल जाना ही बेहतर लगा, क्योंकि मुझे उसकी बातों से लग रहा था कि वो साली कोई बहुत बड़ी छिनाल है, उसने अब तक ना जाने कितनों के लंड को ठंडा किया था, लेकिन वो सब मुझे देखने और लंड को अंदर डालने के बाद पता चलने वाला था और में उसी के इंतजार में था.
फिर मैंने उस रंडी से कहा की आंटी आप तो बहुत ही परखी नज़र रखती है, मुझे आपका यह अंदाज बहुत पसंद आया और यह बात बिल्कुल सही है कि जब से में यहाँ पर आया और मैंने आपको देखा है, तब से में मन ही मन बस यही बात सोच रहा था कि किस तरह से आपको अपने लंड के नीचे लिया जाए और आपकी चूत को चोदकर वो असली मज़ा लिया जाए? और रही बात मामी की तो उसके चक्कर में तो में पता नहीं कब से हूँ, वो साली बहुत सेक्सी इधर उधर मडराती रहती है, लेकिन वो मुझे कभी भी भाव ही नहीं देती.
तभी वो मेरी बात को बीच में काटकर तुरंत बोली कि अरे तेरी वो साली मामी तू नहीं जानता, उसको वो बहुत सयानी है रंडी कुतिया, वो मेरे लड़के से मेरे ही सामने कई बार अपनी चूत को चुदवा चुकी है, जो तेरी ही उम्र का है और अब वो उसके एक दोस्त जिसका नाम जमाल है, वो उस पर अपनी नजर गड़ाए हुई है, आज सबसे पहले तू मेरी गुजिया खा उसके बाद में तुझको उसकी भी गुजिया खिलवा देती हूँ.
दोस्तों में उस रंडी के मुहं से अपनी पतिव्रता सीधीसादी दिखने वाली अपनी छिनाल मामी के बारे में इतना सुनकर बहुत चकित था, लेकिन में मन ही मन खुश भी बहुत था कि अब मुझे एक साथ दो दो चूत के मज़े मिलेंगे और मामी की चुदाई भी में बहुत जल्दी कर सकता हूँ और यह सभी बातें सोचकर में आंटी की पेंटी के ऊपर से उनकी चूत पर अपना एक हाथ रखकर सहलाने लगा और में अपने होंठ उनके होंठो की तरफ जैसे ही ले गया, वो मेरे होठों को अपना मुहं खोलकर चूसने लगी. मैंने अपना एक हाथ उनके ब्लाउज के ऊपर से ही उनके बूब्स के ऊपर रख दिया.
तब मैंने छूकर दबाकर महसूस किया कि उनके बूब्स बहुत टाईट हो चुके थे, इसलिए मैंने उनको मसलना शुरू किया तो दर्द की वजह से उनके मुहं से सिसकियाँ निकलने लगी और वो कहने लगी उफ्फ्फ्फ्फ्फ़ हाँ थोड़ा और ज़ोर से दबाव आईईई आज तुम इसका पूरा रस निचोड़कर पी जाओ, हाँ दबाओ ज़ोर से वाह मज़ा आ गया.
अब मैंने उनसे पूछा क्यों आंटी आपके बूब्स तो इस उम्र में भी बहुत ज्यादा टाईट है ऐसा क्यों? तब वो बोली कि में अपने पूरे बदन की हर दिन मसाज करवाती हूँ. फिर मैंने उससे पूछा कि उसको क्या इतना टाईम मिल जाता है? तब वो बोली कि मुझे कुछ थोड़ी ना यह सब करना पड़ता है, आख़िर घर में जवान लड़का किस लिए होता है और यह सभी काम वही करता है?
अब में तुरंत समझ गया कि साली यह भी मेरी मम्मी की तरह अपने लड़के से अपनी चुदाई करवाती है. उसके बाद मैंने उनके ब्लाउज को उतार दिया और अब वो मेरे सामने ब्रा और साड़ी में खड़ी हुई थी, साड़ी को अभी भी उन्होंने अपने हाथों से समेटकर ऊपर कर रखा था. फिर मैंने देखकर उनसे कहा कि आंटी आप अब इस साड़ी को उतार ही क्यों नहीं देती?
अब आंटी ने साड़ी को उतार दिया और उनके पेटीकोट को मैंने खींचकर उतार दिया था, जिसकी वजह से अब आंटी सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में रह गयी थी और उनका पेट और नाभि बहुत सुंदर आकर्षक लग रहे थे, तभी वो मेरी पेंट के ऊपर से मेरे लंड पर अपना एक हाथ रखते हुए बोली कि राजा तुम अब इसे भी तो बाहर करो.
फिर मैंने कहा कि इतनी भी जल्दी क्या है? तो वो बोली कि साले भड़वे जल्दी कर नहीं तो तेरी मामी आ जाएगी और यह सब धरा का धरा रह जाएगा, क्योंकि में सोच रही हूँ कि तेरी मामी के आने से पहले एक बार चुदाई के मज़े तो हो ही जाए. फिर मैंने उनके मुहं से यह बात सुनकर फटाफट अपने सारे कपड़े उतार दिए और अब में सिर्फ़ अंडरवियर में था और अंडरवियर के अंदर मेरा लंड फड़क रहा था, जिसको आंटी अपने एक हाथ से सहलाने लगी, तब वो और भी ज्यादा मचलने लगा.
अब में उनके बड़े बड़े बूब्स को उनकी ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा और वो अंडरवियर के ऊपर से ही मेरा लंड सहला रही थी, जिसकी वजह से मेरे लंड का टोपा अब पूरी तरह से तन गया था, जिसको आंटी ने मेरी अंडरवियर के ऊपर से ही अपने मुहं में भर लिया और वो अब अंदर बाहर करने लगी. मैंने उसके सर के बाल ज़ोर से पकड़ रखे थे और वो पूरी तरह से मदहोश होकर मेरे लंड को चूस रही थी. फिर कुछ देर बाद मैंने उनसे कहा कि आंटी क्या अब मुहं में ही झड़ने का इरादा है? और क्या पूरा वीर्य पीना चाहती हो?
वो बोली कि साले, कुत्ते, मादरचोद मुझे अपना लंड चुसवा रहा है और फिर भी मुझसे आंटी आंटी कर रहा है, बहन के लंड तू मुझसे रंडी बोल, डार्लिंग बोल, रानी बोल या छिनाल बोल, लेकिन कम से कम आंटी तो ना बोल. अब मैंने कहा हाँ बहन की भोसड़ी साली छिनाल क्या तू मेरा पूरा लंड तेरे मुहं में ही निचोड़ लेगी? वो कहने लगी हाँ भोसड़ी के सबसे पहले में तेरा पानी अपने मुहं में ही डलवाउंगी और अब आंटी जल्दी जल्दी अपने मुहं को आगे पीछे करने लगी और अब आंटी ने मेरे अंडरवियर को खींचकर नीचे उतार दिया और अब में पूरी तरह से नंगा हो गया, जिसकी वजह से मेरा लंड अब फाय फाय करने लगा और आंटी उसको अपने मुहं में डालने लगी, लेकिन वो बहुत बुरी तरह से लहरा रहा था, फुंकार मार रहा था.
फिर मैंने उससे कहा कि बहन की लौड़ी इसको अपने हाथ से पकड़कर रख वरना यह मुहं में ऐसे ही इधर उधर होता रहेगा और अब आंटी ने अपने हाथ से लंड को पकड़कर अपने मुहं में भर लिया और चूसने लगी, वो बहुत ही अलग तरीके से चूस रही थी कभी कभी अपनी जीभ की नोक से मेरे लंड के छेद को कुरेदने लगती थी, जिससे मेरे बदन में एक अजीब सी गुदगुदी होने लगी.
फिर मैंने ज्यादा देर ना करते हुए तुरंत उनको अपने लंड से दूर करते हुए उनको खड़ा करके उनकी साड़ी को पूरा खोल दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में थी. उनका फिगर अब और भी सेक्सी लग रहा था और अब में उनको अपनी गोद में उठाकर मामी के बेडरूम में ले गया और मैंने उनको बेड पर लेटाकर जल्दी से उनका पूरा ब्लाउज उतार दिया और उसको खोलते ही मैंने देखा कि उनके बूब्स झूलते हुए उस काली कलर की ब्रा से बाहर आने के लिए तड़प रहे थे.
फिर मैंने उनकी ब्रा को भी खोल दिया और में अब उनके गोरे, एकदम गोल, बड़े आकार के बूब्स को देखकर बिल्कुल पागल हो गया और अब में उनके दोनों बूब्स पर टूट पड़ा और में उन्हें ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा. में अब हल्के भूरे रंग के निप्पल को काटने लगा, जिसकी वजह से वो उस दर्द से चीखने लगी.
दोस्तों वो और भी जोश में आकर मेरे साथ साथ मज़े ले रही थी. फिर में उनके बूब्स को दबा रहा था और उनके पूरे गोरे बदन को चाट रहा था. मुझे उनका बदन चाटने में और भी मज़ा आ रहा था और वो भी अपने एक हाथ को नीचे ले जाकर मेरे लंड को अब भी सहला रही थी. फिर मैंने उनका पेटीकोट भी उतार दिया और उनकी लाल रंग की पेंटी को भी निकाल दिया.
दोस्तों अब वो मेरे सामने पूरी नंगी थी, जिसकी वजह से वो तो बड़ी सेक्सी लग रही थी और उनकी गांड तो इतनी मस्त थी कि में सीधा उनकी गांड को चाटने लगा और उनकी चूत को अपनी एक उंगली से घिसने, सहलाने लगा था. फिर उसके बाद हम दोनों 69 की पोज़िशन में आकर एक दूसरे को चाटने चूसने लगे. दोस्तों मैंने तब महसूस किया कि उनकी चूत का स्वाद भी उनकी तरह हॉट था और जब में उनकी चूत को चाट रहा था तो वो लगातार ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ ले रही और करीब दस मिनट चाटने के बाद उन्होंने मुझसे कहा कि अब मुझसे नहीं रहा जाता, उफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्हह्ह प्लीज आईईईइ.
फिर मैंने उनको सीधा लेटाकर उनकी चूत पर अपना लंड रख दिया और फिर मैंने एक ज़ोर से झटका मारा तो वो बहुत ज़ोर से चीख पड़ी और उनकी वो चीख पूरी रूम में गूंजने लगी. फिर मैंने थोड़ी देर बाद धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किए, जिसकी वजह से अब मेरा पूरा लंड उनकी चूत में चला गया था और वो ज़ोर ज़ोर से आह्ह्ह्हहह आईईईईईइ सईईईईईइ करके सिसकियाँ के साथ अपनी चुदाई के मज़े ले रही थी.
फिर कुछ देर धक्के देने के बाद उन्होंने मुझे नीचे लेटा दिया और वो खुद मेरे ऊपर आकर मेरे लंड को अपनी चूत में डालकर उछल उछलकर चुदने लगी और फिर कुछ देर और धक्के देने के बाद अब में झड़ने वाला था, इसलिए मैंने उनसे पूछा कि में अपना वीर्य कहाँ निकालूं? तो उन्होंने मुझसे कहा कि तुम उसको मेरी चूत के अंदर ही डाल दो पूरा अंदर, बुझा दो मेरी प्यासी चूत की प्यास को, कर दो मेरी चूत को संतुष्ट.
फिर मैंने अपना सारा वीर्य उनकी चूत में डाल दिया और में अब कुछ देर उनके ऊपर ही लेटा रहा. फिर थोड़ी देर बाद वो खड़ी हुई और मेरे लंड को अपने मुहं में लेकर उन्होंने पूरा साफ कर दिया और वो चूसने लगी और में उनके साथ साथ मज़े लेता रहा. दोस्तों उस दिन मैंने उनको बहुत जमकर चोदा था, जिसकी वजह से वो बहुत अच्छी तरह से संतुष्ट थी. फिर उन्होंने मुझसे कहा कि में कब से ऐसी चुदाई के लिए बैचेन थी, मेरी प्यासी चूत को आज तुमने अपना समझकर चोदा, मुझे वो सुख दिया जिसके लिए में बहुत दिनों से तड़प रही हूँ, तुमने आज मुझे सेक्स के असली मज़े दिए है और तुम्हारे साथ यह सेक्स अनुभव में पूरी जिंदगी नहीं भुला सकती और तुम्हारे साथ यह सब करके वाह मज़ा आ गया. फिर में उठकर सीधा बाथरूम में चला गया और में अपने कपड़े पहनकर बाहर आ गया.
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