रंडी बनकर तीन लोड़ो से चुदी

हैल्लो दोस्तों, में जो आज आप सभी को अपनी एक सच्ची घटना बताने जा रही हूँ यह बात करीब तीन साल पहले की है तब मेरी उम्र 19 साल थी और मेरे पहली चुदाई मेरे पास में रहने वाले एक अंकल ने की और उसके बाद वो अंकल हमेशा मुझे अपना लंड चूसने के लिए कहते थे. मैंने उनसे अपनी पहली चुदाई बहुत जमकर करवाई और मैंने उनके साथ बहुत मज़े लिए. फिर उसके बाद मेरा एक बॉयफ्रेंड बना और मैंने उससे भी अपनी चूत को बहुत बार चुदवाया. अब में अपनी आज की उस कहानी पर आती हूँ जिसको लिखने के लिए मैंने बहुत मेहनत की है. दोस्तों मेरी लम्बाई 5.7 है और में दिखने में बहुत सुंदर हूँ और मेरा शरीर भरा हुआ बहुत सेक्सी है मेरे बूब्स का आकार 36 है और मेरी गांड 40 और मेरा रंग गोरा है.
दोस्तों यह कहानी तब की है जब मैंने अपना नया लेपटॉप लिया और मैंने उस पर गंदी गंदी फिल्म देखनी शुरू की जैसे कि तीन लड़को की मिलकर एक लड़की की जबरदस्त चुदाई और मेरे दिल में भी अब वैसे ही चुदाई करवाने की इच्छा होने लगी. तब मैंने इंटरनेट पर ढूँढना शुरू किया तो मुझे बहुत आदमियों से अपनी चुदाई करवानी थी वहां पर मुझे एक डेटिंग साईट का पता चला और मैंने उस पर अपना अकाउंट डाल दिया.
उसके बाद मेरी एक लड़के से बात हुई उसके बाद हमारी मैल आईडी एक दूसरे के पास गई और हमने मैल पर भी बहुत सेक्स चेटिंग के मज़े लिए और गंदी गंदी गालियों के साथ हमने बहुत मज़े किए उसके बाद हमने सही में चुदाई करने का प्लान बनाया, लेकिन मैंने उसके सामने अपनी शर्त रखी कि मुझे उससे रंडी बनकर चुदना है, वो मेरी बात को मान गया और उसने अपने दो दोस्तों से इसके बारे में बात की और हमने रविवार के दिन चुदाई का प्लान बनाया.
में उनके कहने पर नॉएडा चली गई और वो एक लड़का जिससे मेरी बात हुआ करती थी, उसका नाम अमृत था और वो मुझे लेने आ गया और वो मुझे पहली बार देखकर अपनी चकित नजरों से घूर घूरकर देखता रह गया, वो बहुत खुश होकर मुस्कुराते हुए बोला कि आज ज़िंदगी का असली मज़ा आएगा और फिर हम ग्रेट नॉएडा उसके फ्लॅट पर पहुंचे. मैंने देखा कि वहां पर उसके दो दोस्त पहले से ही बैठे हुए थे, जिसमे से एक अफ्रिकन था उसका नाम जैक था और दूसरे का नाम आदिल था, वो दोनों उस समय दारू पी रहे थे और वो मुझे देखकर बहुत खुश हुए और मैंने भी उनसे बातें करनी शुरू की.
फिर अमृत मुझसे कहने लगा कि तुम भी हमारे साथ पियो, लेकिन मैंने उनके साथ नहीं पी क्योंकि में नशे में चुदना नहीं चाहती थी, मुझे तो अपने पूरे होश में रहकर उनकी असली रंडी बनकर अपनी चुदाई करवानी थी.
अब अमृत बोला कि सबसे पहले में तुम्हे चोदूंगा, तो मैंने उससे कहा कि मुझे तुम सभी के साथ एक साथ अपनी चुदाई करवानी है दोस्तों मेरी वो बात सुनकर वो तीनों हंसने लगे और फिर जैक मुझसे बोला कि तुम बहुत हिम्मत वाली और वैसे ही हॉट तुम्हारी चूत भी होगी और यह कहकर वो मेरे कपड़े उतारने लगा और तुरंत उसने मेरी जींस को उतार दिया और वो सीधा मेरी चूत में अपनी लंबी जीभ डाल दी और चाटने लगा. साथ साथ वो दारू भी पी रहा था और यह सब देखकर अमृत और आदिल अपना अपना लंड सहलाने लगे.
फिर अमृत ने मेरे पास आकर सबसे पहले मेरे मुहं पर थूक दिया और वो बोला कि में आज तुझे अपनी असली रंडी बनाता हूँ, चल तू अब जल्दी से घूम और मुझे अपनी गांड दिखा. फिर में उसके कहने पर उसके सामने कुतिया बन गई और अपनी गांड को हिलाने लगी और यह सब देखकर जैक से रुका नहीं गया तो उसने अपनी जीभ को मेरी गांड में घुसा दिया और यह सब आदिल अभी भी देख रहा था और अमृत ने मेरे होंठ चूसे और वो मेरे बूब्स को दबाने लगा. जैक कभी मेरी गांड चाट रहा था तो कभी चूत.
दोस्तों में अब मन ही मन अपने आपको एक असली रंडी की तरह महसूस कर रही थी और अब मेरी चूत से पानी किसी नदी की तरह बह रहा था, जिसको जैक अमृत समझकर पीता जा रहा था और अब अमृत ने अपने पूरे कपड़े उतार दिए और अब वो अपना 6 इंच लंबा मोटा लंड मेरे मुहं में डालकर गले में उतारने लगा, जिसकी वजह से मेरी सांसे रुकने लगी और मेरी आखों से आंसू बहने लगे और में उसके लंड को किसी ब्लूफिल्म की हिरोइन की तरह चूस रही थी और जैक, आदिल हंस रहे थे. तभी जैक और आदिल ने अपनी जींस को उतार दिया तो आदिल का लंड 5 इंच का और जैक का लंड जो बहुत काला करीब 7 इंच का था और जिसको देखकर पहले मुझे पसीने आने लगे.
फिर में मन ही मन बहुत खुश होकर अपनी डरी हुई आँखो से उन्हे इशारा देने लगी कि तुम अब मुझे चोद दो यह लंड मेरे गले में उतार दो और इधर अमृत मेरे बाल पकड़कर मेरे मुहं को बहुत बेरहमी से लगातार धक्के देकर चोद रहा था और चोदते चोदते अमृत सिसकियाँ लेने लगा और अब वो मुझसे कहने लगा कि हाँ ले मेरा लंड अपने मुहं में कुतिया. पी जा इसका पानी हाँ और ज़ोर से चूस मेरी रंडी. अब और भी ज्यादा गरम हो गई इतने में आदिल ने मेरी चूत में उँगलियाँ करनी शुरू कर दी और अमृत मेरे मुहं में अपना लंड घोड़े के लंड की तरह ज़ोर से धक्के मारकर पूरा अंदर तक पहुंचा रहा रहा था.
तभी अचानक से उसने कुछ देर बाद जैक ने आदिल को इशारा करके कहा कि फोटो ले और उन्होंने तुरंत मेरी लंड को मुहं में लेते हुए बहुत सारी फोटो ले ली और फिर अमृत ने मुझे एक थप्पड़ मार दिया और मेरे मुहं को अपने दोनों हाथों से चीरते हुए वो मेरे मुहं में झड़ गया और यह सब देखकर आदिल से नहीं रुका गया और आदिल ने अब मुझे दो चार थप्पड़ मारे.
फिर वो मुझसे बोला कि आ मेरी रांड, आ जा में आज तेरी चूत का भोसड़ा बनाता हूँ, तुझे बहुत लंड लेने की इच्छा है, बहुत आग है ना तेरी चूत में, आज में वो सब बुझाता हूँ और तेरी चूत की खुजली मिटाता हूँ.
दोस्तों में उसके मुहं से यह बात सुनकर मन ही मन बहुत खुश होने लगी और में सोचने लगी कि अब मेरी जमकर चुदाई होगी और तीनों मुझे आज अपनी रंडी की तरह चोदेगे, मुझे बहुत मज़ा आएगा और अब में उसका पैर चाटने लगी और उसने मुझे बेड पर सीधा लेटा दिया जो कि आकार में बहुत बड़ा बेड था और उसके चारो कोनो में उन्होंने मेरे हाथ पैर बांध दिए और अब में अपनी चूत और को गांड को फैलाकर मेरी चुदाई करने वाले लंड के सामने पूरी खुलकर पड़ी थी.
फिर आदिल ने अपने लंड का टोपा मेरी खुली चूत के मुहं पर रख दिया और उसने एक ही बार में ज़ोर से धक्का देकर अपना पांच इंच का लंड मेरी चूत में पूरा अंदर डाल दिया. उसका मोटा लंबा लंड मेरी चूत की चमड़ी को चीरता फैलाता हुआ अंदर जा पहुंचा, जिसकी वजह से मेरे मुहं से बहुत ज़ोर की चीख निकल पड़ी में दर्द से तड़पने लगी तो जैक मुझे थप्पड़ मारने लगा और अमृत शराब पीते हुए मुझे देख रहा था तभी आदिल बोला कि अमृत तू इसको कहाँ से लाया है? यह तो पक्की रंडी है हम तो आज मिलकर इसकी माँ को भी चोद देते अगर तू उसे भी ले आता और अब वो मुझे बहुत बेरहमी से धक्के देकर चोदने लगा और में चिल्लाने लगी कि हाँ ऐसे ही चोद आदिल मेरी चूत में अपना पूरा लंड अंदर तक डाल दे हाँ जाने दे पूरा अंदर तक आह्ह्हह्ह आज तू तेरे लंड का पानी डाल दे मेरी चूत में, बना दे आईईईईइ मुझे अपनी रंडी, फाड़ दे मेरी चूत को और बना दे आज तू उसका भोसड़ा.
फिर मेरे मुहं से यह बात सुनकर उसने मुझसे कहा कि रुक अभी तू हरामजादी, में आज तुझे चुदाई का मज़ा चखाता हूँ और फिर उसने मेरी चूत के पानी से अपना लंड पूरा गीला किया और अब उसने मेरी गांड के छेद पर अपने लंड को रख दिया और धक्का देते हुए अंदर डालने लगा.
फिर में वो सब देखकर एकदम घबरा गई थी क्योंकि मैंने इससे पहले कभी भी अपनी गांड को नहीं चुदवाया था. उसने अपना पूरा ज़ोर लगाकर आधा लंड मेरी गांड में डाल दिया और एक दो जोरदार झटके में उसने मेरी गांड को फाड़ दिया और अब में उस असहनीए दर्द की वजह से चीख रही थी और तड़पने लगी थी. वो बहुत अजीब सा दर्द था और कुछ देर बाद मुझे पीछे से आवाज़ आने लगी कि हाँ तू एक बहुत बड़ी रंडी है और आज तू खा जा इसका लंड को और अब में उसका पूरा पूरा साथ देने लगी थी अमृत आदिल दोनों एक साथ मुझे गलियां बक रहे थे और जैक अपने लंड को पकड़कर हिलाते हुए मेरी चुदाई का वीडियो बना रहा था.
करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद वो कभी मेरी चूत में तो कभी गांड में अपना लंड डालने लगा और फिर अमृत ने झड़कर मेरी गांड में अपना पूरा वीर्य डाल दिया. अब भी अमृत का लंड तन रहा था और उसने मेरे दोनों हाथ खोल दिए गये और जैक ने अपना लंड मेरे मुहं में डाल दिया तो आदिल एक बार फिर से मेरे बूब्स को सहलाने लगा और अमृत ने मेरी चूत में अपना लंड डाला तो मुझे बहुत आराम आया और मैंने फिर जोश में आकर जैक के 7 इंच लंबे लंड को में किसी अनुभवी रंडी की तरह उसके लंड को लोलीपोप की तरह चूस रही थी और अपनी चूत में उसका लंड लेकर अपनी चुदाई करवाती रही.
फिर कुछ देर बाद अमृत ने मेरी गांड भी चोदी और वो मुझे गंदी गंदी गालियाँ देने लगा और जैक ने लगातार मेरी चुदाई के वीडियो को अपने कैमरे में सेट करके कुछ देर बाद उसने टीवी पर लगा दिया. में उसमे एक नंबर की बाजारू औरत और एक बहुत बड़ी छिनाल जैसी लग रही थी और यह सब देखकर अमृत मुझसे बोला कि देख साली कुतिया तू कैसे एक अनुभवी रंडी की तरह चुद रही है? देख हराम की अलौद मादरचोद चुद और में तुझे चौराहे पर ले जाकर कुत्ते से तेरी चूत जरुर चुद्वाऊंगा और यह कहकर उसके धक्को की रफ़्तार अब बहुत ज्यादा बढ़ गई और अब वो मेरी चूत में झड़ गया.
अब जैक पहले से ही मेरी चुदाई करने के लिए बिल्कुल तैयार था जैक तुरंत मेरे पास आ गया और वो मेरी चूत पर अपना लंड रखकर मुझसे बोला कि मेरा लंड झेलने के लिए तुम तैयार रहना अब में अपना लंड तुम्हारी चूत में डालकर तुम्हारी बहुत मस्त चुदाई करने वाला हूँ. दोस्तों, लेकिन उसको क्या पता था कि मेरी चूत तो ना जाने कब से उसके काले लंबे लंड को अपने अंदर लेने के लिए बेताब थी? वो बहुत तरस रही थी.
फिर उसने ज्यादा समय खराब ना करते हुए एक ही झटके में अपने लंड को मेरी बच्चेदानी तक पहुंचा दिया जिसकी वजह से में उहहह्ह्ह्ह आहहह माँ मर गई प्लीज थोड़ा धीरे से डालो करने लगी और अब उसने धक्के देने के साथ साथ मेरी चूत को सहलाना शुरू कर दिया. जैक मुझे लगातार धक्के देकर चोद रहा था और मानो में किसी जन्नत में हूँ मुझे ऐसा महसूस हो रहा था क्योंकि इससे पहले मैंने कभी भी इतना बड़ा लंड ना कभी देखा था और ना अपनी चूत में लिया था, लेकिन वो लंबा मोटा लंड आज मेरी चूत की गहराईयों में था.
फिर कुछ देर बाद जैक ने अपना लंड चूत से बाहर निकालकर एक बार फिर से मेरी गांड में डालकर धक्के देने शुरू किए जिसकी वजह से मुझे अपनी गांड में एक अजीब सी जलन महसूस होने लगी, क्योंकि उसका लंड आकार में सबसे मोटा लंबा था और अब वो अमृत को बोला कि तुम इसकी चूत में अपना हाथ डाल दो. फिर उसने ठीक वैसा ही किया और जैक मेरी गांड का भोसड़ा बना रहा था तो अमृत ने अपना पूरा हाथ मेरी चूत में डाल दिया और अब आदिल से रुका नहीं गया तो उसने मेरी चूत से अमृत का हाथ बाहर निकाल दिया और अब में जैक के ऊपर बैठ गई और उसका लंड मेरी गांड में था और आदिल ने आगे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और अमृत ने अपना लंड मेरे मुहं में दे दिया. अब मेरे तीनों छेद उनके मोटे मोटे लंड से चुद रहे थे और में बहुत ख़ुसनसीब एक कुतिया बनकर उनके लंड को मज़े से खा रही थी.
करीब 25 मिनट तक लंड बदल बदलकर कभी गांड में आदिल तो जैक चूत को चोदता तो कभी अमृत गांड तो जैक मेरे मुहं को चोदता और आदिल चूत उन तीनों के बीच में करीब ऐसे ही चुदाई करवाती हुई 6 बार झड़ गई और फिर उन तीनों ने मुझे बेड पर बैठा दिया और फिर मेरा मुहं खोल दिया और उन्होंने अपना अपना लंड मेरे मुहं में झाड़ दिया और वो मुझे हर कभी थप्पड़ मारते और गंदी गंदी गालियाँ देते और में उनके लंड का वीर्य जल समझकर चुपचाप पी गई उन तीनों ने मेरी पूरी आग को बिल्कुल शांत कर दिया था. में उनकी चुदाई और चुदाई करने के तरीके से बहुत चकित और बहुत खुश थी. उनकी उस चुदाई से मेरे तन और मन दोनों को वो सुख शांति संतुष्टि मिली, जिसके लिए में बहुत सालों से तरस रही थी.
दोस्तों आज में करीब तीन चार लंड में एक साथ ले लेती हूँ और में कभी कभी सेक्स पार्टी भी करती हूँ, जिसमे 10-12 मर्द एक साथ मेरी चुदाई करते है. में अमृत को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहती हूँ कि जिसने मेरी हर एक चुदाई में बहुत बार मदद की है.
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नौकरी की मजबूरी का फायदा

हैल्लो दोस्तों, में दीनू एक सरकारी दफ़्तर में ऑडिट ऑफिसर हूँ और अक्सर मेरा तबादला ऑडिट के लिए दूसरे शहर के कार्यालय में होता रहता है, ऑडिट के कारण मुझे कई-कई महीनों तक दूसरे शहर में रहना होता है.
फिर एक बार ऑडिटिंग के लिए मेरा तबादला कुछ महीनों के लिए पूना के एक छोटे से गाँव में हुआ था, तो वहाँ मुझे मेरे दफ़्तर के एक कर्मचारी के सहयोग से एक मकान किराए पर मिल गया. मेरे दफ्तर में एक महिला कर्मचारी थी और वो मुझे ऑडिट में सहयोग दे रही थी, वो एक खूबसूरत 40 वर्षीय विधवा महिला थी, उसका नाम रोहिणी था, उसका एक लड़का नेवी में नया-नया जॉब पर लगा था.
एक दिन जब में ऑडिट कर रहा था तो मुझे काफ़ी घपला दिखाई दिया और जब रोहिणी को पता चला कि मेरी नज़र में घपला आ चुका है, तो उसने मुझसे कहा कि मुझे आपसे अकेले में कुछ बात करनी है तो मैंने उसकी बात मानकर उससे कहा कि आपके घर चलते है, वहाँ बातें करेंगे.
फिर हम दोनों उसके घर गये तो उसने कहा कि में जानती हूँ कि दफ़्तर में घपला हुआ है, लेकिन यह घपला मुझे पता नहीं किसने किया है? लेकिन तुम चाहो तो मेरी नौकरी बचा सकते हो, प्लीज़ आप मेरी मदद करो.
फिर मैंने कहा कि देखो इस मामले में में आपकी मदद तो नहीं कर सकता, तो वो बोली कि आप प्लीज़ जल्दबाज़ी में कोई फ़ैसला ना ले, देखिएं आप जो कहेगे में करने को तैयार हूँ, लेकिन प्लीज़ मुझे बचा लीजिए. फिर मैंने अपनी एक नज़र से उसको ऊपर से लेकर नीचे तक देखा तो मेरे मन में उसको चोदने की ख्वाइश जाग उठी.
फिर मैंने उसको कहा कि ठीक है, में आपकी मदद करूँगा, लेकिन मेरी एक शर्त है वो यह कि में आपके साथ एक रात सोना चाहता हूँ और एक बार आपको चोदना चाहता हूँ, अगर शर्त मंजूर है तो ठीक है, तो वो यह सुनकर दंग रह गयी और उसने कहा कि नहीं ऐसा नहीं हो सकता. फिर मैंने कहा कि ओके तो में चलता हूँ, लेकिन एक बात बता देता हूँ कि आपकी नौकरी पर दाग लग जाएगा और बदनामी भी होगी इसलिए बेहतर है कि आप मेरी शर्त मान जाओ तो कोई भी तक़लीफ़ नहीं होगी.
फिर उसने अपनी नज़रें नीचे करते हुए कहा कि ठीक है तो में तुरंत उसके होंठो को अपने होंठो में लेकर किसिंग करने लगा और उसकी बड़ी-बड़ी चूचीयों को दबाना शुरू कर दिया. वो क्या हसीन मंज़र था? यह में आपको शब्दों में बयान नहीं कर सकता हूँ.
फिर मैंने आहिस्ता-आहिस्ता उसके पूरे कपड़े उतार दिए. अब वो क्या खूबसूरत लग रही थी? फिर मैंने उससे कहा कि अब तुम मेरे भी कपड़े उतार दो, तो उसने मेरे कपड़े भी उतार दिए. अब हम दोनों बिल्कुल नंगे और एक दूसरे को बाहों में किसिंग कर रहे थे. फिर मैंने उसकी एक चूची को चूसना शुरू किया, तो अब वो मज़े में पागल होती जा रही थी.
फिर मैंने उससे कहा कि इससे से भी ज्यादा मज़ा लेना है तो वो बोली कि हाँ. फिर मैंने कहा कि लेकिन मेरी एक शर्त है, तो उसने पूछा कि क्या? तो मैंने अपना लंड उसके हाथ में थमा दिया, तो वो मेरा मोटा और लम्बा लंड देखकर थोड़ी सी घबराई और फिर बोली कि मैंने आज तक ऐसा मोटा और लंबा लंड कभी नहीं देखा है.
फिर मैंने उससे कहा कि मेरे लंड को अपने मुँह में ले लो, तो वो इनकार करने लगी, लेकिन मैंने ज़बरदस्ती उसके मुँह में अपना लंड डाल दिया, तो उसने 4-5 बार मेरे लंड को चूसा और फिर बोली कि दीनू बस और नहीं. फिर मैंने 69 की पोजिशन ली और उसकी चूत को चाटने लगा. अभी 1 मिनट भी नहीं हुआ था कि वो जोश से पागल होने लगी और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी थी. फिर क़रीबन 7 से 10 मिनट तक यही सिलसिला चला.
फिर वो मुझसे बोली कि दीनू अब जल्दी से डाल दो, अब बर्दाश्त नहीं होता है. फिर मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखकर एक जोरदार धक्का मारा तो मेरे लंड का सुपाड़ा फिसलकर उसकी चूत में समा गया और वो दर्द से करहाने लगी तो मैंने उसकी चूचीयों को दबाना शुरू कर दिया और फिर आहिस्ता-आहिस्ता उसकी चूत में अपना लंड डालने लगा. अब 5 मिनट की मेहनत के बाद मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में चला गया था.
फिर में उसके ऊपर ही लेट गया और उसके होंठ अपने होंठो में लेकर चूसने लगा और वो भी मेरे होंठो को चूसने लगी. फिर 5 मिनट के बाद मैंने उसकी चूत में आहिस्ता-आहिस्ता धक्के मारने शुरू कर दिए तो मैंने देखा कि अब उसको दर्द नहीं हो रहा था. फिर मैंने उसको तेजी से चोदना शुरू किया. अब में जैसे ही धक्का मारता तो उसकी की आँखें बाहर आ जाती और वो उछलकर मेरे साथ चिपक जाती.
अब में अपने एक हाथ से उसकी एक चूची को दबा रहा था और कस-कसकर धक्के मार रहा था. अब वो दर्द और मजे के साथ फुल सेक्स के नशे में डूबी हुई थी और उसके मुँह से सिसकारियां निकल रही थी उफफफफफफफफफ्फ़ फफफफफ्फ़ दीनू, आह आह आह मार डाला, हाहहहहहाहा और तेज अहहहह और अब पूरे कमरे में पच-पच की आवाज गूँज रही थी.
अब वो खुद भी उछल-उछलकर मेरे लंड को अपनी चूत में लेने लगी थी. अब 3-4 मिनट ही हुए थे कि उसकी चूत झड़ गयी, मगर में नहीं झड़ा था और ज़ोर-ज़ोर से उसको चोद रहा था. अब उसके झड़ने की वजह से मेरा लंड पच-पच की आवाज के साथ उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा था. फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और काफ़ी सारा टिश्यू पेपर लेकर उसकी चूत को साफ किया और दुबारा से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया. अब मेरा लंड थोड़ा हार्ड उसकी चूत के अंदर जा रहा था और अब उसकी आँखों से पानी बह रहा था.
फिर में उसको चोदते-चोदते थोड़ा झुका और उसके होंठो को अपने होंठों में लेकर किसिंग करने लगा और अपनी चुदाई जारी रखी. फिर करीब 15-20 मिनट के बाद मुझे लगा कि में झड़ने वाला हूँ तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और कुछ ही पलों में मैंने उसकी चूत में ढेर सारा अपना पानी निकाल दिया.
फिर में 10 मिनट तक उसके ऊपर ऐसे ही लेटा रहा और फिर हम उठे और अपने-अपने कपड़े पहने और में जब जाने लगा तो वो बोली कि कितने सालों के बाद आज बहुत मज़ा आया में पहली बार इतने मज़े से चुदी हूँ और 2 बार झड़ी हूँ. तो में वापस मुड़ा और उसको अपने सीने से लगाकर किसिंग करने लगा तो वो भी मेरी किसिंग का जवाब दे रही थी. इस तरह से मैंने उसकी नौकरी बचाई और फिर में जितने दिन वहाँ रहा, उसको चोदता रहा और उसके खूब मजे लिए.
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भाभी की चूत में लंड डालकर धूम मचाई

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राज है और में मुंबई का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 25 साल है और मस्त दिखता हूँ. मेरी हाईट 5.9 फिट और मेरा लंड 6 इंच का है. दोस्तों में आज आप सभी पढ़ने वालों को अपना पहला सेक्स अनुभव बताने जा रहा हूँ जिसमे मैंने अपने पड़ोस में रहने वाली हॉट भाभी के साथ सेक्स के मज़े लिए और उस चुदाई में उन्होंने भी मेरा पूरा साथ दिया. में उम्मीद करता हूँ कि यह मेरी चुदाई अपनी भाभी के साथ आप सभी को जरुर पसंद आएगी.
अब में अपनी कहानी पर आता हूँ. यह बात तब की है जब में 21 साल का था और में उस समय मुंबई में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा था और में उस समय में एक फ्लेट में किराए से रहता था. तो वहां पर मेरे ऊपर की मंजिल पर एक गुजराती परिवार रहता था जिसमें एक शादीशुदा जोड़ा और उनका एक छोटा सा लड़का रहता था उन भाभी नाम प्रिया था और उनकी उम्र करीब 29-30 साल होगी वो दिखने में किसी अप्सरा से कम नहीं थी उनके चेहरे पर बहुत ही मासूमियत थी. उनका वो गोरा बदन, मस्त बूब्स और सेक्सी गांड और जब वो मटकती हुई चलती थी तो उन्हें देखकर तुरंत मेरा लंड खड़ा हो जाता था और में उन पर हमेशा लाईन मारा करता था, लेकिन बहुत समय तक नाकाम रहा.
दोस्तों में हर रोज सुबह 9.00 बजे अपने कॉलेज के लिए निकलता था तो वो भाभी मुझे अक्सर लिफ्ट में मिलती थी, क्योंकि वो उस समय उनके लड़के को स्कूल के लिए नीचे बस स्टाप तक छोड़ने जाया करती थी.
दोस्तों मेरी उन भाभी से और उनके पति से बहुत अच्छी पहचान थी, क्योंकि हमे साथ में रहते हुए बहुत समय हो गया था और में उनके हर कोई छोटे बड़े काम कर दिया करता था. मैंने उन्हें कभी भी कोई काम के लिए मना नहीं किया. तो वो दोनों ही मुझसे बहुत खुश थे.
भाभी के साथ साथ भैया का व्यहवार भी मेरे लिए बहुत अच्छा था और इसलिए में उनसे बहुत ज्यादा बातें किया करता था हमारे बीच में हर कभी हाए, हैल्लो आप कैसे हो? होती रहती थी. वो मेरी हर बात का बहुत खुश होकर जवाब दिया करती थी वो मेरे साथ बहुत खुश रहती थी उनका स्वभाव भी बहुत अच्छा था. मेरा उनके साथ बहुत बार हंसी मजाक होता था और वो मुझे बहुत अच्छी लगती थी. में उनकी सुन्दरता को देखकर उनकी तरफ बहुत आकर्षित था और उसके आलावा भी में उनसे बहुत कुछ बातें किया करता था और उनसे बहुत कुछ पूछता था, वो मेरी हर एक बात का बहुत हंसकर जवाब दिया करती और हम दोनों एक दूसरे से बहुत खुश थे.
उन्होंने मेरी किसी भी बात का कभी भी बुरा नहीं माना. दोस्तों वो भाभी अक्सर साड़ी पहनती थी जिसमें वो बहुत ही मस्त सेक्सी सामान लगती थी और मेरा उन पर दिल आ गया था. उनसे बात किए उन्हें देखे देखे बिना मेरा कोई भी दिन नहीं जाता था. में हमेशा उनसे बातें करने और मिलने के मौके देखा करता और उनसे बहुत हंसी मजाक किया करता था.
फिर में हर रोज उनके नाम से मुठ मारा करता था और में मन ही मन सोचता था कि कैसे में भाभी को अपनी बातों में फंसाकर अपनी तरफ आकर्षित करके उन्हें चोद दूँ और उनकी चुदाई के मज़े लूँ? में अब कैसे भी करके उनकी चुदाई करना चाहता था और उसके लिए में हमेशा नये नये मौके ढूंढता था. मेरा मन अब उनके आलावा और कहीं लगता भी नहीं था.
हमारे बीच हंसी मजाक घंटो बैठकर बातें करना हर दिन का काम था, वो जब कभी घर के कामों में लगी रहती तो में अपनी चोर नजर से उनके झूलते लटकते हुए बूब्स को देखता और कभी मौका मिलने पर उनकी गांड को छू देता उनके मुलायम गोरे हाथों को छूकर उसका स्पर्श लेकर घंटो तक उसके बारे में सोचता रहता था. दोस्तों ऐसा मेरे साथ बहुत दिनों तक चला और में बस उन्हें सोचकर अपना लंड हिलाकर अपने मन को शांत कर लिया करता था और में ऐसे ही खुश था, लेकिन में उस मौके की भी तलाश में था जिसकी वजह से मुझे अंदर छुपी हुई चूत देखने को मिले, जिसके लिए में तरस रहा था.
दोस्तों एक दिन उस ऊपर वाले ने मेरे मन की बात को सुन लिया. उसने थोड़ी देर जरुर लगाई, लेकिन मुझे वो सबसे अच्छा मौका दे दिया में जिसकी तलाश में था. दोस्तों उस दिन मैंने अपनी बालकनी से बाहर झांककर देखा तो उनके पति अपना बेग पेक करके कहीं बाहर जा रहे थे और वो उस समय मुझे बहुत जल्दी में लगे और वो चले गए तो उसके अगले दिन जब भाभी मुझसे मिली तो मैंने उनसे पूछा कि भाभी क्या भैया कहीं बाहर गये है आज वो मुझे कहीं नहीं दिख रहे है?
फिर भाभी ने मुझसे कहा कि हाँ वो दस दिन के लिए अपनी कंपनी के किसी काम से इंडिया से बाहर गये है, उनको अचानक से बहुत जरूरी काम आ गया था इसलिए उन्हें जाना पड़ा. फिर में उनके मुहं से यह बात सुनकर बहुत खुश हुआ और अब मैंने अपने मन ही मन सोच लिया कि मुझे इन दस दिनों में भाभी को कैसे भी करके जरुर चोदना है, में अब उनकी चुदाई किए बिना उनको छोड़ने वाला नहीं था और में मौके तलाशने लगा. अब मैंने भाभी को एक प्यारी सी स्माइल दी और भाभी ने मुझे देखा और फिर कुछ समय के बाद उन्होंने भी मेरी तरफ मुस्कुरा दिया.
फिर में थोड़ा सा खुश हुआ तो मुझे लगा कि अब मेरा काम बन रहा है और मुझे उनकी चुदाई करने का मौका मिल सकता है.
दोस्तों अगले दिन शनिवार था और उस दिन मेरे कॉलेज की छुट्टी थी, इसलिए में उस दिन अपने रूम पर ही था और भाभी को किसी जरूरी काम से कुछ खरीदने के लिए मार्केट जाना था, इसलिए वो तुरंत नीचे आ गई और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि राज मुझे किसी जरूरी काम से मार्केट जाना है और इस समय तुम्हारे भैया भी घर पर नहीं है तो क्या तुम प्लीज मुझे अपनी बाईक से बाजार तक छोड़ दोगे? तो मैंने उनकी पूरी बात को सुनकर मन ही मन बहुत खुश होकर तुरंत उन्हें हाँ कह दिया और फिर मैंने उनसे सोसाइटी के बाहर जाने के लिए कहा ताकि हमें एक साथ जाते हुए कोई ग़लत मतलब ना निकाल ले और उन्होंने मेरी बात को तुरंत मान लिया.
फिर में जल्दी तैयार होकर नीचे आ गया और अपनी बाइक को लेकर में उनके पास चला गया और उन्हे अपने पीछे बैठा लिया और में उन्हें लेकर मार्केट की तरफ चल पड़ा. उस दिन भाभी ने सलवार सूट पहना हुआ था.
मैंने उनको दोनों तरफ पैर करके बैठने को कहा क्योंकि मेरे पास स्पोर्ट बाइक थी. फिर कुछ दूर चलने के बाद में बार बार जानबूझ कर ब्रेक लगा देता जिससे भाभी के बूब्स मेरी कमर पर छू रहे थे और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. उस स्पर्श से मेरा लंड मानो अब मेरी पेंट को फाड़कर बाहर आ रहा था, वो भी अब मेरे मन की बात को बहुत अच्छी तरह से समझ गई थी कि में बार बार ब्रेक लगाकर उनके साथ मज़े ले रहा हूँ, लेकिन वो मुझसे कुछ नहीं बोल रही थी और फिर मैंने हमने एक दूसरे से मोबाईल नंबर ले लिए और भाभी ने मुझसे धन्यवाद कहा.
फिर उन्होंने उसी शाम को अपने घर पर मुझे नाश्ते के लिए आने को कहा और उसके बाद में अपने घर पर वापस आ गया, लेकिन दोस्तों मेरे मन की बात कहूँ तो में आज बहुत ज्यादा खुश था में पूरे दिन उनके बारे में ही सोचता रहा और उनको अपने पास महसूस करने लगा उनके बड़े बड़े बूब्स को अपनी कमर पर छूने वाली घटना को सोच सोचकर में पागल सा हुआ जा रहा था.
शाम को मेरे पास उनका कॉल आया और उन्होंने मुझे ऊपर अपने घर पर बुला लिया. में जल्दी से तैयार होकर उनके घर पर चला गया और दरवाजे की घंटी को बस मेरे एक बार बजाते ही तुंरत दरवाजा खुल गया और में उनको देखता ही रह गया. उन्होंने मुझे मुस्कुराते हुए अंदर आने को कहा, वो उस समय बहुत सुंदर दिख रही थी. फिर भाभी मुझसे बोली कि ओओ राज बैठो और मुझे मार्केट तक छोड़ने के लिए तुम्हे धन्यवाद, में तुम्हारे लिए चाय नाश्ता लाती हूँ.
फिर मैंने कहा कि कोई बात नहीं भाभी रहने दो वो तो मेरा एक फर्ज था और वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर हंसने लगी और वो मुझसे हसंते हुए बोली कि फर्ज हाँ में समझ गई बेटे, तुम नाश्ता करके जाना. तभी मेरे कुछ देर बैठने के बाद मैंने देखा कि उनका लड़का एक्सट्रा ट्यूशन के लिए चला गया और अब में उन्हे अपनी बुरी नज़र से लगातार घूर रहा था और मेरी नज़र उनके बूब्स से हटने को तैयार ही नहीं हो रही थी. उनकी गोरी छाती को देखकर मेरे लंड ने अपना आकार बदलना शुरू कर दिया था.
फिर वो मुझसे बोली कि राज क्या हुआ तुम मुझे ऐसे क्या देख रहे हो अपना नाश्ता खत्म करो ना? तो मैंने कहा कि कुछ नहीं भाभी में कुछ सोच रहा था और जब में भाभी से बातें कर रहा था तब भाभी ने मुझसे पूछा कि राज तुम अभी जवान हो कॉलेज जाते हो और अच्छे भी दिखते हो तो तुम्हारे जाल में कई सारी लड़कियां फंसी होगी, क्यों तुम्हारी तो बहुत सारी गर्लफ्रेंड होगी? तो मैंने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है, मेरी अब तक कोई भी गर्लफ्रेंड नहीं है और में अभी तक बिल्कुल अकेला हूँ. मुझे कोई मिलती ही नहीं और अगर आपकी नज़र में कोई आपके जैसी सुंदर लड़की है तो आप ही मुझे बता दो.
फिर भाभी मुझसे कहने लगी कि अच्छा अब तुम मुझे सच सच बता दो कि तुम्हे कैसी लड़की पसंद है, तो मैंने तुरंत कह दिया कि भाभी मैंने अभी आपसे कहा ना कि मुझे बिल्कुल आप ही की तरह चाहिए, उसमे और आपमें कोई अंतर नहीं होना चाहिए और जहाँ तक मेरा मानना तो यह है कि आप भी चलोगे. फिर वो मेरे मुहं से यह शब्द सुनकर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी और फिर वो मुझसे कहने लगी कि तुम्हे पता है कि में तो पहले से ही शादीशुदा हूँ, तुम कोई और देखो.
फिर मैंने भी झट से कह दिया कि हाँ दुनिया में सभी का नसीब थोड़ी ना भैया की तरह होता है, उन्हे तो आप जैसी सुंदर लड़की मिलते ही जन्नत नसीब हुई है, उनकी किस्मत दुनिया में सबसे अच्छी है. दोस्तों उस समय भाभी मेरे पास में सोफे पर बैठी हुई थी और यह बात सुनकर अब अचानक से उनका चेहरा उतर गया और मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ आप इतने उदास क्यों हो गये और फिर वो रोने लगी.
तब उन्होंने मुझसे कहा कि राज में तुम्हे क्या बताऊँ उन्हें तो मेरे लिए टाइम ही नहीं है उनको तो बस पैसा ही चाहिए, मेरे प्यार के लिए तो उनके पास बिल्कुल भी वक्त ही नहीं. में अब बहुत तन्हा अकेली सी हो गई हूँ.
दोस्तों तभी मैंने कुछ सोचकर तुरंत उस अच्छे मौके का फ़ायदा उठा लिया और मैंने उनको झट से अपनी बाहों में भर लिया और फिर मैंने उनसे कहा कि भाभी आप रोते हुए बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती हो, प्लीज अब आप मत रोईये, में हूँ ना आपके पास और में अब उनके आंसू साफ करने लगा और में पीछे से उनकी पीठ पर अपना एक हाथ घुमाने लगा, वो भी मेरी बाहों में आकर मेरा साथ दे रही थी और मैंने अब सीधा उन्हे किस करना चालू किया तो उन्होंने मुझे रोका और फिर उन्होंने मेरी तरफ देखा, में थोड़ा सा डर गया था तभी थोड़ी देर बाद भाभी खुद मुझे किस करने लगी थी और में बहुत खुश हुआ.
फिर करीब 15 मिनट हम लगातार एक दूसरे को किस कर रहे थे, तो मैंने महसूस किया कि भाभी अब पूरी गरम हो गयी थी. फिर मैंने उनसे कहा कि भाभी में कब से इस दिन का इंतज़ार कर रहा था. में बहुत दिनों से आपको अपने मन की बात बताना चाहता था. तभी तुरंत वो मुझसे बोली कि तुम्हे अब तक रोका किसने था, में भी तो तुम्हारा साथ चाहती थी इसलिए ही मैंने तुम्हे बहुत बार इतने सारे अच्छे अच्छे मौके दिए, आओ आज तुम मुझे खुश कर दो, में आज से बस तुम्हारी हूँ. आज तुम अपने मन की बात के साथ साथ मेरी इच्छा को भी अब पूरा कर दो, लेकिन थोड़ा जल्दी करो, में अब ज्यादा नहीं सह सकती, प्लीज जल्दी से मुझे वो मज़े दो जिसके लिए में इतने दिनों से तरस रही हूँ. दोस्तों भाभी ने उस समय साड़ी पहनी हुई थी.
फिर मैंने एक झटका देकर तुरंत उनका पल्लू हटा दिया और फिर ब्लाउज को भी खोल दिया तब मैंने देखा कि भाभी ने जालीदार हल्के नीले रंग की ब्रा पहनी हुई थी. दोस्तों वो क्या मस्त नज़ारा था? मानो मुझे आज जन्नत नसीब हो गयी हो और में तो उन्हें देखकर बिल्कुल पागल हो रहा था. मेरी नजर उनकी छाती पर अटककर रह गई.
फिर भाभी मुझसे कहने लगी कि अब सिर्फ़ घूर घूरकर देखकर ही मन भरोगे या इसके आगे भी कुछ करोगे? अब में ब्रा के ऊपर से ही रुई के जैसे मुलायम बड़े आकार के एकदम गोल गोल बूब्स को दबाने निचोड़ने लगा था जिसकी वजह से वो अब धीरे धीरे मोन करने लगी थी उह्ह्हह्ह आह्ह्ह्ह हाँ थोड़ा और ज़ोर से दबाओ इन्हें बहुत दिनों से किसी ने छुआ तक भी नहीं है उफफ्फ्फ्फ़ हाँ थोड़ा और ज़ोर से करो और अब मैंने अपने एक हाथ से उनकी साड़ी को खोल दिया. अब भाभी आवाज़ करने लगी उमम्मम्मम आअहहहह राअज्ज और ज़ोर से करो, हाँ जोर से में कब से बहुत प्यासी हूँ. फिर मैंने फटाफट अपने सारे कपड़े उतार दिए और भाभी को भी मैंने पूरा नंगा कर दिया और मैंने भाभी को अपनी गोद में उठाया और उनके बेडरूम में ले गया.
में अब उनको चूमने लगा था. वाह दोस्तों क्या मज़ा आ रहा था? उनका पूरा गोरा गदराया हुआ बदन देखकर में ललचाने लगा था. फिर में नीचे आते हुए उनकी नाभि तक पहुंच गया और उसको चूमने लगा. फिर थोड़ा और नीचे आकर मैंने भाभी की गरम प्यासी चूत को चूम लिया और अब में चूत को ज़ोर ज़ोर से चाटने लगा था, जैसे में कई दिनों से प्यासा हूँ. फिर भाभी मुझे कहने लगी कि हाँ राज्ज्ज और ज़ोर से राज उफ्फ्फफ्फ्फ़ वाह बहुत मज़ा आ रहा है आहह उउँह्ह्ह्ह थोड़ा और अंदर तक चाटो, वो अब जोश में आकर अपने दोनों पैरों को पूरा फैलाकर मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी थी और में अपनी जीभ को पूरा अंदर तक डालकर लगातार चूत को चूसने चाटने लगा था, लेकिन फिर कुछ देर चाटने के बाद वो मेरे मुहं पर झड़ गयी और मैंने उनका पूरा पानी पी लिया और चाट चाटकर चूत को एकदम चमका दिया. मेरे चूसने की वजह से चूत अब और भी सुंदर कामुक लगने लगी थी.
फिर मैंने कुछ देर बाद भाभी को अपना लंड चूसने के लिए कहा पहले तो उन्होंने मुझसे साफ मना किया, लेकिन मेरे कुछ देर समझाने के बाद वो तुरंत मान गई और धीरे धीरे से उन्होंने मेरा मोटा लंबा लंड पूरा अपने मुहं में ले लिया और वो करीब दस मिनट तक लगातार बहुत मज़ा लेकर वो मेरा लंड चूसती रही और फिर वो लंड को मुहं से बाहर निकालकर मुझसे कहने लगी कि प्लीज राज अब मुझे इतना मत तड़पाओ, प्लीज अब चोद दो मुझे, मेरी प्यास को बुझा दो, बना लो मुझे अपना, दे दो मुझे वो सुख जिसके लिए में इतने दिनों से बैचेन हूँ.
अब मैंने अपने पास से एक कंडोम निकाला और मैंने कंडोम को अपने लंड पर चढ़ा लिया और भाभी को बिल्कुल सीधा लेटा दिया. फिर लंड को उनकी चूत के मुहं पर रखा और उनके दाने को हल्के हल्के घिसने लगा और कुछ देर बाद लंड को चूत के मुहं पर अपना पूरा ज़ोर लगाकर अंदर की तरफ दबाते हुए अंदर डालने लगा, जिसकी वजह से भाभी को बहुत दर्द होने लगा था.
अब वो मुझसे बोली कि उफ्फ्फफ्फ्फ़ माँ मर गई आईईईईई तुम्हारा यह तो मेरे पति से भी बहुत बड़ा और मोटा है प्लीज ज़रा आराम से डालो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, लेकिन दोस्तों में उस समय पूरे जोश में था, इसलिए मैंने उनकी किसी भी बात पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया और फिर मैंने एक ही ज़ोर से एक झटका दे दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा का पूरा लंड उनकी चूत को चीरता फाड़ता अंदर चला गया और उस दर्द की वजह से भाभी की आंख से आंसू बाहर आ गए और उन्होंने मुझे ज़ोर से एक थप्पड़ मार दिया.
फिर में कुछ देर वैसे ही रुक गया और कुछ देर बाद में अब धीरे धीरे अपने लंड को चूत में अंदर बाहर करने लगा था. भाभी भी अब मेरे साथ साथ अपनी चुदाई के मज़े लेने लगी और फिर वो सिसकियों के साथ साथ मुझसे कहने लगी उफ्फ्फ्फ़ राज चोदो मुझे आह्ह्ह्हह्ह आईईईईईई में तुम्हारी ही हूँ, चोदो मुझे, थोड़ा और ज़ोर से आअहह वाह मज़ा आ गया.
दोस्तों अब में अपनी फुल स्पीड से भाभी का जोरदार धक्के देकर चोदने लगा था, जिसकी वजह से उनकी चूत पूरी लाल हो गई थी और वो पूरी पसीने से भीग चुकी थी. अब कभी में ऊपर तो कभी वो, मैंने करीब करीब हर तरीके से उन्हें लेटाकर बैठाकर घोड़ी बनाकर, कभी हवा में चूतड़ को उठाकर धक्के लगाए और करीब 20-25 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद अब मेरा वीर्य निकलने वाला था.
मैंने जल्दी से अपना कंडोम लंड से बाहर निकाल दिया और फिर अपना लंड एक बार फिर से भाभी के मुहं में दे दिया, वो बहुत मज़े से लंड को चूसने लगी और में भी अब उनके सर को पकड़कर अपने लंड को मुहं में धकेलने लगा था, वो लोलीपोप की तरह लंड के मज़े लेने लगी. वैसे सच पूछो तो हम दोनों को ऐसा करने में बहुत मज़ा आ रहा था और कुछ देर धक्के देने के बाद मैंने अपना पूरा गरम गरम वीर्य उसके मुहं में डाल दिया और उनसे वीर्य को पीने के लिए कहा तो वो झट से मेरा कहना मान गयी और उन्होंने मेरा पूरा वीर्य गटक लिया और लंड को बहुत आराम से चाट चाटकर पूरा साफ किया.
फिर हम दोनों करीब 20 मिनट एक दूसरे को चूमते चाटते रहे और में अब उनकी चूत में अपनी एक उंगली को अंदर बाहर कर रहा था और चूत के दाने को सहला रहा था. तभी वो मुझसे कहने लगी कि राज जब भी तुम्हे ऐसे कोई ज़रूरत हो तब तुम बिना किसी टेंशन के आ जाना, में तुम्हे कभी भी मना नहीं करूंगी, क्योंकि मुझे तुम्हारा चुदाई करने का तरीका बहुत अच्छा लगा और तुमने मुझे आज पूरी तरह से संतुष्ट कर दिया है, ऐसी चुदाई के लिए में बहुत सालों से तरस रही थी, तुम्हे चुदाई करने का बहुत अच्छा अनुभव है वाह मज़ा आ गया.
फिर मैंने कहा कि ठीक है तुम मुझे ऐसे ही फोन करती रहना, में तुम्हारी प्यासी चूत को चोदकर ऐसे ही शांत करता रहूँगा और में भी अब तुम्हे शांत करने ऐसे ही आता रहूँगा और तुम्हारी प्यास को बुझाता रहूँगा. फिर भाभी ने जाने से पहले मुझे रोका और एक लम्बा किस दे दिया मानो जैसे में आज अभी से उनके लिए सब कुछ हूँ और उसके बाद में अपने कपड़े पहनकर चला गया. दोस्तों उसके बाद मैंने फिर से उन्हें बहुत बार चोदा, वो बहुत बार मेरे रूम पर भी मुझसे अपनी चुदाई करवाकर चली गई और मैंने उनके साथ अपनी जिन्दगी के पूरे मज़े लिए.
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मम्मी की सहेली की रसभरी चूत

हैल्लो दोस्तों, मेरी हाईट 5 फिट 9 इंच है, मेरा रंग गोरा है और मेरा शरीर बहुत अच्छा है. में दोस्ताना किस्म का हंसी मजाक करने वाला लड़का हूँ, में हर किसी को अपनी बातों से बहुत खुश कर देता हूँ. अब में सीधे अपनी आज की सच्ची घटना पर आता हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि यह भी आप लोगों के दिल को जरुर जीत लेगी और आप लोगों को बहुत अच्छी लगेगी.
दोस्तों हमारी कॉलोनी में एक महिला थी, उनकी उम्र करीब 47 साल थी, वो दिखने में मस्त थी, वो बहुत गोरी भी थी और उनका वो गदराया हुआ बदन हमेशा मेरी जान लेता था, वो दिखने में बहुत ही ज़्यादा सेक्सी थी और वो हमेशा साड़ी पहनती थी और सच में बिल्कुल कहता हूँ.
दोस्तों साड़ी में वो क्या मस्त दिखती थी. साड़ी में उनकी वो गोरी कमर और गहरी नाभि, ज़्यादातर दिख जाती थी और यह सब देखकर मेरी तो सांसे रुक सी जाती थी और में उन्हें देखने के बाद सच में पागल हो जाता था, वो दिखने में ज्यादा सुंदर नहीं थी, लेकिन उनका चेहरा एक सीधी-साधी ग्रहणी की तरह था और मुझे वो बहुत पसंद थी और में उनके सेक्सी हॉट जिस्म के बारे में तो में आप सभी को पहले ही बता चुका हूँ.
अब उस दिन हुआ यह कि क्योंकि हमारा घर आसपास ही था, इसलिए मेरी मम्मी के साथ उनकी अक्सर बातें हुआ करती थी और वो मेरी मम्मी के बहुत करीब थी, इसलिए मेरा भी उनसे हर कभी आमना सामना हो जाता था, वो हमेशा मुझे उनकी किसी ना किसी काम से बाज़ार भेजती और हर कभी घर का कुछ भी सामान लाने को मुझसे कहती थी और फिर में भी बहुत खुश होकर उनका सभी काम कर दिया करता था. दोस्तों मुझे उनकी मदद करने में कोई दिक्कत नहीं थी बल्कि में बहुत खुश था कि चलो में किसी की मदद तो कर पा रहा हूँ.
दोस्तों में भले ही मन ही मन उनके साथ बिस्तर पर जाने के लिए तड़प रहा था, लेकिन में मन से उनकी बहुत इज्जत भी किया करता था, क्योंकि वो मेरी मम्मी की उम्र की थी और में सच में उनकी बहुत इज्जत करता था.
फिर एक दिन में बाजार से उनके बताए हुए सामान को लेकर उनके घर पर पहुँचा और फिर उन्हें वो सामान में उनके दरवाज़े के पास से ही देकर वापस जाने लगा, लेकिन तभी उन्होंने मुझे रोका और फिर मुझसे कहा कि क्या तुम अंदर नहीं आओगे? तो मैंने उनसे कहा कि नहीं आंटी कोई दिक्कत नहीं, में अब चलता हूँ और तभी आंटी ने ज़ोर डाला और वो मुझे अपने घर के अंदर ले आई. फिर आंटी ने मुझे सोफे पर बैठा दिया और मुझे पीने का पानी लाकर दे दिया, आंटी ने उस दिन हरे रंग की साड़ी पहनी हुई थी. फिर वो मुझसे कहने लगी कि ज़रा तुम क्या मेरा एक काम कर दोगे? मुझे अपनी रसोई घर में थोड़ा सा काम है, मुझे वहां से कुछ सामान को हटाना है और वहां पर जगह बनानी है. फिर मैंने तुरंत कहा कि मुझे कोई समस्या नहीं है आंटी, में आपका वो काम कर दूंगा, चलो आप मुझे बताओ. फिर हम दोनों किचन में जाने लगे और तभी मेरी नज़र उनकी साड़ी में लिपटे उनके कूल्हों पर पड़ी, जिनको देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा और तब मैंने खुद को जैसे तैसे संभाला और में आंटी के पीछे पीछे किचन में चला गया.
अब आंटी मुझसे कहने लगी कि उन प्लास्टिक के बड़े बड़े डब्बों को वहां से हटाना है. फिर मैंने कहा कि हाँ ज़रूर में सब हटा दूंगा और अब में किचन की पट्टी पर चढ़ गया.
तभी आंटी मुझसे बोली कि अरे तू यह क्या कर रहा है? रुक में कुर्सी लेकर आती हूँ. फिर मैंने उनसे कहा कि कोई दिक्कत नहीं है आंटी, में कर लूंगा. तभी आंटी बोली कि कर लूंगा के बच्चे, अगर तू नीचे गिर गया और तुझे चोट लग गई तो गये काम से, चल अब उतर नीचे, लेकिन मैंने फिर भी ना सुनते हुए में उन प्लास्टिक के डब्बों को हटाता गया और मैंने 6 से 8 मिनट के अंदर ही अपना काम खत्म कर लिया था.
में नीचे उतरा और आंटी मुझसे बोली कि मानेगा नहीं ना? तू मेरे ना कहने के बावजूद भी नहीं रुका. फिर मैंने कहा कि आंटी अब आप जाने भी दीजिए ना और फिर आंटी मुस्कुराते हुए मुझसे बोली कि तू बहुत ज़िद्दी हो गया है. फिर में हंस पड़ा और आंटी भी हंस पड़ी और फिर आंटी मुझसे पूछने लगी कि क्या तू चाय पियेगा? मैंने कहा कि हाँ क्यों नहीं, अगर आप इतने प्यार से कहोगे तो में आपको मना कैसे कर सकता हूँ?
फिर आंटी चाय बनाने लगी और में उनके एकदम पास में था, लेकिन थोड़ा सा पीछे होकर खड़ा हुआ था, लेकिन वहां पर उस समय में अकेला नहीं खड़ा था. दोस्तों मेरा लंड भी मेरे साथ में खड़ा हुआ था. आंटी के इतने करीब और ऊपर से घर पर भी कोई नहीं था तो अब लंड को तो खड़ा होना ही था. फिर आंटी मुझसे हंस हंसकर बातें कर रही थी और मेरा पूरा ध्यान सिर्फ़ उनकी साड़ी में लिपटे उनके उस भरे हुए गरम जिस्म पर था. दोस्तों वो कहते है ना कि एक महिला अपने आप ही जान जाती है कि कौन उसे किस नजर से देख रहा है और कौन नहीं.
फिर ऐसे में भी उनकी नजर से कैसे बच जाता, उन्होंने मुझे देखते हुए पकड़ तो लिया था, लेकिन वो मुझसे कुछ नहीं बोली, में पूरी कोशिश कर रहा था कि उन्हें ना देखूं, लेकिन मेरा ध्यान बार बार उनके पल्लू में ढके पेट पर साड़ी से झांक रही गोरी कमर पर और उनके भरे हुए कूल्हों पर जा रहा था और में वो सब देखकर एकदम पागल हो रहा था.
फिर जो कसर बाकी रह गई थी, आंटी ने वो भी पूरी कर दी और आंटी ने अचानक मुझसे पूछा कि में आज इस साड़ी में कैसी लग रही हूँ? और मेरी उसी वक़्त बेंड बज गई, मुझे उनका यह सवाल सुनकर पसीने छूटने लगे थे.
फिर मैंने सोचा कि अब तो गये काम से, बुरे फंसे अब इस में इस समस्या से बाहर कैसे निकलूं? आंटी ने एक बार फिर से मुझसे पूछा कि क्यों तू किस सोच में डूब गया, तूने मेरी बात का जवाब नहीं दिया और तूने मुझे बताया नहीं कि में आज इस साड़ी में तुझे कैसी लग रही हूँ? फिर मैंने थोड़ी हिम्मत करके हिचकिचाते हुए सीधे सीधे उनको बोल दिया कि आंटी आप आज बहुत ही अच्छी लग रही हो. फिर आंटी ने कहा कि सिर्फ़ अच्छी क्यों तुम्हारी नजर में और कुछ नहीं, जो तुम मुझसे कहना चाहो?
फिर मैंने बहुत घबराकर कहा कि जी क्या? में आपके कहने का मतलब कुछ समझा नहीं? दोस्तों अब जो और भी थोड़ी सी बहुत कसर बाकी रह गई थी, वो आंटी ने ही पूरी कर दी. अब आंटी मुझसे कहने लगी कि बच्चू तू सब कुछ अच्छी तरह से समझ रहा है और में बहुत अच्छी तरह से समझती हूँ कि तू मुझे पागल बना रहा है, तू इतनी देर से घूर घूरकर मुझे ही देख रहा था ना? तो मैंने कहा कि जी नहीं आंटी आपने थोड़ा गलत अंदाजा लगा लिया, ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा आपने सोचा और तभी आंटी मुझसे कहने लगी कि में बताती हूँ कि तू आज तक क्या करता आ रहा है?
तू मुझे उस वक़्त से देखते आ रहा है, जब से में तेरी मम्मी की दोस्त बनी, मेरे बच्चे इस उम्र में यह सब होता है और में बहुत अच्छी तरह से समझती हूँ, लेकिन तू बिगड़ जाएगा, अगर तूने खुद को नहीं संभाला तो. अब मैंने उनसे कहा कि आंटी में आपको कभी बुरी नज़र से नहीं देखता, बस में आपकी तरफ अपने आप खींचा चला आता हूँ, में सच में आपकी बहुत इज्जत करता हूँ.
फिर आंटी बोली कि में जानती हूँ मेरे बच्चे, लेकिन अब तुझे खुद को संभालना होगा, जैसे में भी खुद को संभाल रही हूँ. तभी मैंने उनकी यह बात सुनकर एकदम से चौंककर पूछा कि क्या? आप खुद को संभाल रही है?
आंटी बोली कि तुझे क्या लगता है सिर्फ़ तुम जवान लड़के लड़की को ही यह सब चीज़ें तड़पाती है, मेरी उम्र की औरतों को भी यह सब कमी लगती है और में भी कभी कभी तेरी तरफ आकर्षित होती हूँ, में भी तेरे साथ सेक्स करना चाहती हूँ, लेकिन तू सच में मेरी दोस्त का बेटा है तो में ऐसे कैसे कर लेती? और ऊपर से में भी तेरी माँ की उम्र की हूँ, इसलिए में आज तक चुप रही. दोस्तों उनके मुहं से यह सब बातें सच्चाई सुनकर मुझे लगा कि में अब बेहोश हो जाउंगा. कुछ देर तक हम दोनों चुप रहे और फिर में आंटी के पास धीरे से चला गया और मैंने तुरंत उनके चेहरे को आपने हाथों में ले लिया और झुककर अपने होंठ आंटी के होंठो से मिला दिए. आंटी वैसे ही खड़ी रही और बिना मुझे रोके या पीछे धक्का दिए.
फिर में उनके होंठो को चूमने लगा. मुझे इतना अच्छा लगा कि में आपको शब्दों में नहीं बता सकता और में आंटी के होंठो को प्यार से चूमता गया और आंटी भी अब अपना मुहं खोलकर अपनी जीभ को मेरे मुहं के अंदर डालने लगी. में अब आंटी को अब पूरे दिल और दिमाग़ से चूम रहा था.
दोस्तों उनके होंठो का रस कमाल का था और आंटी भी मुझे ज़ोर से चूम रही थी. ऐसा लग रहा था कि जैसे कौन किसके होंठो को ज़्यादा अच्छी तरह से चूम सकता है, हमारे बीच ऐसी शर्त लगी हो.
फिर आंटी के नरम, मीठे, गुलाबी, स्वादिष्ट होंठो को चखने के बाद में अब आंटी की आखों में देखने लगा. आंटी ने मुझसे सिर्फ़ एक बात कही कि आज मुझे तू जी भर के प्यार कर और फिर में आंटी को वापस चूमने लगा. मुझे उनके होंठो का वो स्वाद बिल्कुल पागल कर रहा था और में उनके होंठो को लगातार चूमे जा रहा था.
फिर चूमते चूमते में उनकी साड़ी के पल्लू को नीचे सरकाने लगा था और अब मैंने उनके गले के इर्द गिर्द चूमना शुरू किया और चूमते चूमते में उनकी छाती से बूब्स तक पहुँच गया. दोस्तों उनके बूब्स ना तो ज्यादा बड़े थे और ना ही छोटे, लेकिन वो जैसे भी थे बहुत अच्छे थे और उस ब्लाउज से उनके बूब्स जिस तरह उभरकर बाहर निकले हुए थे, उसे देखकर मेरा जी कर रहा था कि बस पूरी ज़िंदगी भर में इन गरमा गरम बूब्स को बस चूसता ही रहूं.
फिर मैंने उनकी छाती पर अपना चेहरा मसल दिया और उनके बदन और छाती की खुशबू को सूंघने लगा. उन्होंने भी मेरे सर को अपनी छाती पर दबा रखा था. फिर में उठा और फिर से आंटी को किस करने लगा और उसके बाद में उनके गले और कंधे को चूमते चूमते में अब उनकी छाती पर आ गया और उनके ब्लाउज के ऊपर से ही उनके एक बूब्स को हल्के से अपने दातों से काट लिया, जिसकी वजह से वो चिल्ला उठी और उन्होंने मेरे सर को ज़ोर से अपनी छाती पर दबा दिया और फिर में ब्लाउज के ऊपर से ही बूब्स को थोड़ी देर तक चूसता रहा.
अब में सीधे खड़े होकर उनकी आखों में आखें डालकर उनके गरमा गरम बूब्स को सहलाने लगा था. मैंने देखा कि आंटी की आखें अब भारी हो रही थी और उनके होंठ ज़रा सा खुल गये थे.
तभी में आंटी के ब्लाउज को खोलने लगा था और पूरे चार हुक खोलने के बाद आंटी के ब्लाउज को मैंने उतारा नहीं बल्कि वैसे ही छोड़ दिया. अब मैंने उनके ब्लाउज को उनके बूब्स से नीचे की तरफ सरकाया तो उन्होंने एक लाल रंग की ब्रा पहनी हुई थी और मैंने तुरंत अब उनके बूब्स को धर दबोचा और फिर ब्रा के ऊपर से ही बूब्स को मसलने लगा था.
फिर मैंने महसूस किया कि वो उस समय हवस की आग में जल रही थी और लगातार धीरे धीरे से सिसकियाँ ले रही थी.
मैंने अब उनकी ब्रा के हुक को भी खोल दिया और ब्रा को पूरा नीचे उतार दिया, उनके ब्लाउज को भी अब झट से उतारने के बाद मैंने आंटी के गरमा गरम बूब्स को अपने मुहं में ले लिया और में दिल खोलकर उनके बूब्स को चूसता और दबाता रहा, उनका स्वाद में कभी नहीं भूलूंगा और उनके दोनों बूब्स को जी भरकर प्यार करने के बाद में अब उनके पेट को चूमने लगा था और धीरे धीरे चूमते हुए में उनकी कमर तक पहुँच गया. तब मैंने महसूस किया कि उनका पेट बहुत मुलायम था. दोस्तों में पेट को चूमता और बीच बीच में अपनी जीभ से चखता भी था.
फिर उनकी नाभि के आस पास दो तीन बार चूमने के बाद मैंने उनकी नाभि में अपनी जीभ को डाल दिया. तभी वो अचानक से चिल्ला उठी और फिर से मेरे सर को पकड़कर दबाने लगी. वो अब मेरे बालों को भी सहला रही थी और में आंटी की गहरी नाभि को मज़े से चाट रहा था. फिर मैंने आंटी की साड़ी के ऊपर से ही उनकी चूत पर अपना चेहरा मसल दिया, सच में आंटी बहुत मज़े ले रही थी और तरह तरह की आवाज़ें भी निकाल रही थी.
मैंने उनकी चूत को साड़ी के ऊपर से की सूंघने की कोशिश की और एक सुगंध जो कि पसीने और जिस्म की खुशबू जैसी हो, मेरी नाक में जा रही थी, लेकिन दोस्तों वो महक एक हवस की आग में तड़प रही और एक गरम औरत की थी, जिसको सूंघकर में अब बिल्कुल पागल हो रहा था.
फिर कुछ देर सूंघने के बाद में खड़ा हुआ और आंटी को एक बार चूमने के बाद उनको तुरंत अपनी गोद में उठाकर बेडरूम ले गया और वहां पर पहुंचकर आंटी को मैंने बिस्तर के सामने खड़ा कर दिया. मैंने एक बार उनकी आखों में देखा और फिर में अपने घुटनों पर बैठ गया और मैंने उनकी साड़ी को धीरे धीरे से उठाया और उनकी पेंटी को उंगलियों से पकड़कर धीरे से नीचे सरकाकर पूरा नीचे की तरफ उतार दिया.
अब आंटी ने अपना एक पैर अपनी पेंटी से बाहर निकाल लिया और फिर दूसरे पैर को भी पेंटी से बाहर किया. में उनकी पेंटी को हाथ में लेकर उठकर खड़ा हुआ और आंटी की आखों में देखते हुए ही में अब उनकी पेंटी को सूंघने लगा और फिर पेंटी को बिस्तर पर दूर फेंक दिया.
अब आंटी तुरंत मेरे पास आकर मुझे पागलों की तरह किस करने लगी और किस करते करते में आंटी को बिस्तर पर ले गया. आंटी और में दोनों ही मेरी टी-शर्ट और शॉर्ट्स को हड़बड़ी से उतारने लगे. फिर में आंटी के नीचे आ गया और में उनकी साड़ी को ऊपर सरकाने लगा.
मैंने उनकी साड़ी को कमर तक उठा दिया और बिना वक़्त खराब किए में आंटी की चूत को दिल खोलकर चूसने लगा. पहले मैंने एक से दो बार चूत को नीचे से ऊपर तक चाटा और फिर धीरे से में अपनी स्पीड को बढ़ाता गया.
फिर मैंने चखकर महसूस किया कि उनकी चूत का स्वाद बहुत ही अच्छा और मस्की था और उनके जिस्म के पसीने का स्वाद भी उनकी चूत के स्वाद के साथ मिलकर आ रहा था. फिर में उनकी चूत को बहुत अच्छी तरह से चूसता गया और आंटी अपनी कमर को पागलों की तरह ऊपर नीचे करके हिला रही थी. फिर मैंने तुरंत उनके बूब्स को पकड़ लिया और धीरे धीरे से दबाने लगा था और अब में उनकी चूत को लगातार ज़ोर से चूस भी रहा था.
अब मेरे कुछ देर चूसने, चाटने के बाद आंटी ने मेरे सर को बहुत ज़ोर से अपनी चूत पर दबाया और वो अचानक से झड़ गई और अब उनकी चूत का रस मेरे पूरे चेहरे पर था, में जितना हो सके उसे पी गया और बाकी मुझे मजबूरन मुहं से बाहर निकालना पड़ा, क्योंकि उनकी चूत से बहुत ज़्यादा रस बाहर निकल रहा था. फिर मुझसे और रहा नहीं गया और में आंटी के पैरों के बीच में गया और मैंने अपना लंड हाथ में ले लिया. अब में उसे आंटी की चूत के दाने पर रगड़ने लगा था.
फिर आंटी मुझसे कहने लगी कि प्लीज अब तो डाल दो इसे अंदर और रहा नहीं जा रहा, इसलिए मैंने जोश में आकर एक ही जोरदार झटके में उनकी चूत के अंदर अपना पूरा का पूरा लंड डाल दिया, क्योंकि अब हालात बहुत ही गरमा गये थे, इसलिए हम दोनों बिल्कुल पागल हो चुके थे और इसलिए में तुरंत ही आंटी को ज़ोर ज़ोर से लगातार धक्के देकर चोदने लगा.
में आंटी की तरफ झुका और ज़ोर से चोदते चोदते ही में आंटी के होंठो को चूमने लगा और हम दोनों हवस के इस एहसास में पूरी तरह से डूब चुके थे. में आंटी को बिल्कुल पागलों की तरह चोद रहा था और वो भी अपनी कमर को हिला हिलाकर मेरा पूरा साथ दे रही थी. दोस्तों वो एहसास बहुत ही कमाल का था, जो किसी भी शब्दों में बताया ही नहीं जा सकता.
फिर में कुछ देर के धक्कों के बाद अब झड़ने वाला था और मैंने आंटी को यह बताया और उनसे पूछा कि में अपना वीर्य कहाँ निकालूं? तो वो मुझसे तुरंत बोली कि तुम मेरे अंदर ही अपना गरम गरम लावा निकाल दो. फिर उनके मुहं से यह बात सुनकर मैंने अब उन्हें और भी ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया और फिर आंटी ने मुझसे कहा कि वो भी अब झड़ने वाली है.
फिर मैंने आंटी के बूब्स को चूसना शुरू किया और फिर में उनके निप्पल को हल्के से काटने लगा तो आंटी झड़ने लगी और वो बिल्कुल पागलों की तरह छटपटाने लगी. उसके बाद में और रोक नहीं पाया और में भी अब झड़ गया और दोस्तों में बहुत ज़ोर से झड़ा था और मुझे हल्का सा बेहोश होने जैसा लग रहा था. तभी अचानक से आंटी इतनी ज़ोर से चिल्लाई कि मुझे लगा कि पड़ोसी सुन लेंगे, क्या पता बाहर मेरी मम्मी भी सुन लेगी.
फिर हम दोनों हांफते हुए एक दूसरे को देखने लगे और हमारे होंठ एक बार फिर से एक दूसरे से टकराए. अब हम दोनों एक दूसरे के होंठो को चख रहे थे. फिर वो मुझसे बोली कि तुम्हारे अंकल ने मुझे कभी भी ऐसा महसूस नहीं करवाया, उन्होंने कभी भी मुझे ऐसा मज़ा नहीं दिया और यह मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा सेक्स अनुभव है, तुम्हारे साथ मुझे सेक्स करने में बहुत मज़ा आया और तुम्हें चुदाई करने का बहुत अच्छा अनुभव है और फिर हम दोनों वैसे ही थोड़ी देर सो गये.
फिर आंटी ने मुझे नींद से उठाया और बाथरूम में ले गई. फिर दोनों मिलकर नहाए और फिर हम अपने कपड़े पहनने लगे. आंटी की साड़ी पसीने और चूत के रस से पूरी भीग चुकी थी. आंटी ने दूसरी साड़ी पहनी और मैंने अपनी टी-शर्ट और शॉर्ट्स. फिर एक लंबे किस के बाद में अपने घर पर चला आया. दोस्तों फिर क्या था? बस मुझे अब मौका मिलने की देर होती थी और हम दोनों एक दूसरे की बाहों में. आंटी को मैंने इतनी ज़्यादा बार चोदा कि में गिनती ही भूल गया. सच में दोस्तों आंटी के साथ रहना मुझे बहुत अच्छा लगा. दोस्तों में अब उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को मेरी कहानी जरुर पसंद आई होगी.
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कामवाली ने दूध पिलाकर चोदना सिखाया

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम मिंटू है और यह उस वक़्त की बात है जब में हाई स्कूल में था. हम लोग लखनऊ में रहते थे और हमारे घर में एक नौकरानी थी, जिसका नाम स्वीटी था और उसकी उम्र 33 साल, फिगर साईज 38-36-40 था, वो दिखने में बहुत सेक्सी थी, लेकिन उसका रंग सांवला था और चूचियाँ तो ऐसी थी कि दोनों हाथों में एक भी ना आए और हमेशा ऐसा लगता था, जैसे कहती हो आओ मुझे चूसो प्यारे, उसकी दो शादी भी हो चुकी थी, लेकिन उसके कोई बच्चा नहीं था, में बहुत नासमझ और शर्मिला था.
फिर एक दिन में अपने दोस्तों के साथ स्कूल जा रहा था तो मेरे दोस्तों ने कहा कि एक पिक्चर लगी है देखोगे? तो मैंने कहा कि नहीं. फिर वो बोले कि चल यार किसी को कुछ पता नहीं चलेगा और फिर वो मुझे पिक्चर दिखाने ले गये, जो कि ब्लू फिल्म पर बनी थी. अब वो पिक्चर मुझे अच्छी लगी और मुझे कुछ-कुछ होने लगा था. अब में औरतों की तरफ आकर्षित होने लगा था. में हमेशा सावित्री की तरफ नज़र बचाकर देखता था, लेकिन एक दिन सावित्री ने मुझे पकड़ लिया और कहा कि क्या देख रहे हो मिंटू? तो में बोला कि कुछ नहीं. फिर वो हँसी और अपना काम करने लगी, अब में डर गया था तो में उसकी तरफ भी नहीं देखता था.
फिर एक बार वो घर में 2 दिन तक नहीं आई, तो मेरी माँ ने मुझे उसके घर पर पता करने के लिए भेजा. फिर में उसके घर पहुँचा और घंटी बजाई तो मैंने देखा कि सावित्री ने दरवाजा खोला और सामने खड़ा था. फिर जब मैंने देखा कि वो सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी, एक तो वो ग़रीब बाई थी और सेक्सी बहुत थी, उसका पेटीकोट सामने से फटा था, जिसमें से मुझे उसकी झांटे साफ-साफ़ दिख रही थी. फिर उसने तुरंत अपना पेटीकोट ऊपर खींचा और मुझे अंदर आने को कहा.
फिर में अंदर गया और पूछा कि तुम आ क्यों नहीं रही हो? तो वो बोली कि कुछ नहीं, उसका पति आया था और अब चला गया है तो कल से आऊँगी, तो तभी उसका पेटीकोट फिर से गिर गया और वो शर्मा गई. अब मेरी नज़र लगातार उसके बूब्स पर थी, क्योंकि वो काफ़ी बड़े थे और उसमें से उसकी निप्पल साफ़-साफ़ दिख रही थी, क्योंकि जब उसने ब्रा नहीं पहनी थी. फिर उसने मुझे बैठाया और अंदर चली गई और साड़ी पहनकर आई. अब में अभी भी उसकी चूची देख रहा था, तो तभी वो बोली कि कोई बात है क्या? तो तभी मेरे मुँह से निकल गया कि तुम्हारी टागों के बीच में इतने बाल क्यों है? तो वो हड़बड़ा गई और मुझे घूरने लगी.
अब में घबरा गया और बाहर निकल आया, अब में डर गया था कि कहीं वो मम्मी से ना कह दे. फिर में शाम को उसके घर पर गया और बेल बजाई, तो उसने दरवाज़ा खोला और मुझे देखकर अंदर बुलाया और बोली कि क्या है? तो मैंने बोला कि जो मैंने पूछा था, वो मम्मी से नहीं कहना.
फिर वो बोली कि कहूँगी, तो में डर गया और रोने लगा और वो हँसने लगी और बोली कि डरो मत, नहीं बोलूंगी. फिर उसने मुझे अपने पास बुलाया और बोली कि तुम मूवी देखने गये थे, तो क्या हुआ? तो में उसे देखता रहा. फिर उसने मेरे दोनों गालों को चूमा और बोली कि पिक्चर कैसी लगी थी? तो मैंने कुछ नहीं कहा. फिर वो मुस्कुराकर बोली कि कोई बात नहीं, बता तो दो और फिर उसने मेरे गाल को नोंचा. फिर मैंने कहा कि अच्छी थी, लेकिन कुछ समझ में नहीं आई, क्योंकि कुछ भी नहीं दिखा और मेरे दोस्त कह रहे थे कि वो ब्लू फिल्म है.
फिर उसने मेरे चूतड़ पर थपकी दी और कहा कि अभी भी नहीं जानते हो कि उस पिक्चर में क्या था? फिर मैंने उसकी तरफ देखा और बाहर आ गया और फिर अपने घर चला आया.
अगले दिन मम्मी सुबह तैयार होकर मौसी के यहाँ जाने लगी. फिर मुझसे बोली कि सावित्री जब आए तो बर्तन साफ करा लेना और खाना खा लेना, जब मेरी छोटी बहन स्कूल चली गई थी और भैया कानपुर गये थे. फिर मैंने स्कूल की किताब निकाली और पढ़ने लगा. हमारे घर के बाहर छोटा सा बगीचा था और मैंने उसमें फूलों के पौधे लगाए थे और बकरियाँ उसे खा जाती थी. तभी मुझे सावित्री की आवाज़ आई, मिंटू जल्दी आओ, मैंने बकरी पकड़ी है, दरवाजा बंद करो. फिर में तेज़ी से आया और दरवाजा बंद किया तो मैंने देखा कि बकरी के थन काफ़ी नीचे लटके थे और सावित्री बकरी को पकड़े थी.
फिर वो बकरी को पकड़कर अंदर ले आई और उसके मुँह पर कपड़ा बाँध दिया, ताकि वो चिल्लाए नहीं और मुझसे बोली कि मिंटू यहाँ आओ और मुझसे बोली कि ज़रा बर्तन साफ कर लूँ. फिर में उसके पास गया और पूछने लगा कि बकरी क्यों पकड़ी है? तो वो मेरी तरफ मुस्कुराकर बोली कि एक काम के लिए और फिर मेरी नज़र उसकी चूची पर पड़ी और ठहर सी गई. फिर उसने मेरी तरफ देखा और अपनी साड़ी खिसका दी, ताकि मुझे और साफ दिख सके. अब में खड़ा रहा, क्योंकि उसका ब्लाउज बगल से फटा था और उसमें से उसका बदन साफ़-साफ़ दिख रहा था.
फिर उसने जल्दी से अपना काम ख़त्म किया और मुझे देखकर बोली कि आओ और पकड़कर अंदर कमरे में ले आई. फिर वो नीचे बैठ गई और बकरी के थन सहलाने लगी और बोली कि लो दूध पिओगे? तो मैंने कहा कि बकरी का. फिर वो बोली कि नहीं तो क्या मेरा? फिर वो बकरी के थन चूसने लगी और बोली कि लो अब तुम पियो और मुझे अपनी गोद में बैठाकर दूध पिलाने लगी और मेरे गाल चूमने लगी. अब मुझको लगा था कि जैसे मेरा लंड टूट जाएगा, क्योंकि अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.
फिर उसने मुझसे पूछा कि मज़ा आया? तो मैंने कहा कि हाँ. फिर वो बोली कि आओ अंदर बेड पर चले, और फिर उसने वहाँ अपनी साड़ी उतार दी और ब्लाउज और पेटीकोट में आ गई. अब मेरा लंड तन गया था और में उसे दबाने लगा था.
फिर उसने कहा कि क्या है? लाओ में देखूं, तो उसने झट से मेरी पैंट उतार दी और मेरी अंडरवेयर में से मेरे लंड को बाहर निकालकर देखने लगी और धीरे-धीरे मेरे लंड को सहलाने लगी. अब मेरे तो होश उड़ गये थे. फिर उसने मेरे लंड को अपने मुँह में लिया और चूसने लगी.
अब में हैरान था और बोला कि क्या कर रही हो? तो वो बोली कि तुम्हें पिक्चर समझा रही हूँ और फिर उसने मेरे लंड को कसकर दबाया और बोली कि मेरे राजा तुम लैडीस को बहुत घूरते हो, आज में तुम्हारी हर इच्छा पूरी कर दूँगी और फिर उसने मेरा हाथ अपनी बहुत बड़ी-बड़ी चूचियों पर रख दिया, तो मेरा लंड झटका खा गया, क्योंकि मैंने पहली बार किसी चूची को छुआ था.
फिर मैंने कसकर उसकी चूची पकड़ ली और दबाता चला गया तो वो चिल्ला पड़ी, बस करो नहीं तो टूट जाएगी. फिर मैंने उसकी चूची को उसके ब्लाउज के ऊपर से चूसना शुरू किया. फिर वो बोली कि ब्लाउज तो उतार दो. फिर मैंने एक-एक करके उसके ब्लाउज के बटन खोले और जैसे ही मेरे सामने उसके दोनों बूब्स आजाद हो गये तो में उनसे चिपक गया. अब मेरा लंड उसके फटे हुए पेटीकोट के अंदर था और उसकी चूत को टच कर रहा था.
फिर उसने मेरा हाथ अपनी दोनों चूचियों पर रखा और बोली कि लो मेरा दूध पी लो, तो में चालू हो गया और एक-एक करके उसकी दोनों चूचियों को छूने लगा. फिर आधे घंटे तक चूसने चाटने के बाद वो बोली कि बस करो, क्या खा ही जाओगे? तो में रूक गया. फिर उसने अपना पेटीकोट उतारा और मुझे अपनी चूत दिखाई और बोली कि कभी देखी है? तो मैंने कहा कि नहीं. फिर वो बोली कि लो इसको चाटो तो मैंने तुरंत उस पर अपनी जुबान रख दी और चाटने लगा.
अब उसकी झांटे मेरे मुँह में जाने लगी थी तो मैंने कहा कि इसे साफ तो करो. फिर उसने मेरे पापा के रेज़र से अपनी चूत के सारे बाल साफ कर दिए और बोली कि लो अब ठीक है. तब तक में उसकी चूची ही चूसता रहा और अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मैंने पहली बार ऐसा किया था और फिर में बहुत देर तक उसकी चूत को चाटता रहा.
फिर उसने मुझे 69 पोज़िशन में लिया और मेरा लंड चूसने लगी. अब 15 मिनट में मेरा जूस निकलने लगा था. फिर मैंने कहा कि सावित्री मुझे कुछ हो रहा है. फिर वो बोली कि मेरे मुँह में ही होने दे, तू अपना काम करता जा. फिर तभी मैंने कहा कि मुझे बूब्स पीना है तो उसने फिर से बकरी का थन मेरे मुँह में लगा दिया. फिर मैंने कहा कि इसका नहीं तुम्हारा. फिर वो बोली कि आज से जब मन चाहे तब मेरा दूध पी लेना, में तुम्हें नहीं रोकूंगी.
फिर मैंने उसके बूब्स पर अपने दाँत गड़ा दिए तो वो चिल्ला पड़ी, मत करो दर्द होता है और फिर बोली कि क्या तुम मुझे चोदना चाहते हो? तो मैंने कहा कि यह कैसे होता है? फिर वो बोली कि जब इतना सिखा दिया है तो और भी सिखा दूँगी मेरे राजा.
फिर उसने मुझसे कहा कि जब में कहूँ तो तुम अपना लंड मेरी चूत में डाल देना और दनादन धक्के लगाना. बस फिर क्या था? यह तो कोई मुश्किल नहीं थी और फिर मैंने उसके होंठो को चूसना शुरू किया और 15 मिनट तक हम एक दूसरे को प्यार करते रहे. फिर उसने मुझे खींचा और मेरे लंड को अपनी चूत पर रखा और इशारा किया तो मैंने जैसे ही धक्का मारा तो वो चिल्ला पड़ी.
फिर मैंने उसके होंठो को अपने कब्जे में लिया और धक्के पर धक्का मारता रहा. अब सावित्री भी अपने चूतड़ उछाल- उछालकर मेरा साथ दे रही थी और गूऊऊऊऊ, गाआआआआआअ, आआआहह मेरे राजा, मेरे यार, मेरे प्यारे और चोदो मुझे, मेरी चूत फाड़ डालो, मुझे अपने बच्चे की माँ बना दो, मुझे मसल डालो और ना ज़ाने क्या-क्या चिल्लाती रही? फिर 15 मिनट के बाद मेरा लंड झड़ गया और मैंने उसकी चूत में ही मेरा सारा पानी निकाल दिया.
फिर वो थक गयी और बोली कि मज़ा आ गया राजा. में इस चुदाई को हमेशा याद रखूंगी, तुमने तो मेरी जवानी खिला दी, तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है. फिर मैंने कहा कि सावित्री क्या यही चुदाई है? तो वो बोली कि हाँ मेरे राजा तुमने अपनी सावित्री को चोद दिया है, अब तुम जहाँ बोलो, जब बोलो में तुमसे चुदूंगी और फिर एक बार मैंने उसकी चूची को चूसा.
अब मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था और में फिर से सावित्री पर चढ़ गया और उसे पेलने लगा. अब वो मना कर रही थी, लेकिन में नहीं माना और फिर जब में वापस से झड़ा तो वो बोली कि राजा तुम तो बड़े वो हो, मेरे मना करने पर भी मुझे चोद दिया, में तो तुम्हें बच्चा समझ रही थी, लेकिन तुम तो बड़े निकले और फिर वो मेरे लंड को चाटने लगी.
फिर मैंने कहा कि मुझे पेशाब आ रही है. फिर वो बोली कि चलो में करा दूँ और वहाँ उसने मेरा सारा पेशाब अपने मुँह में लेकर पी लिया और बोली कि चलो आज ही तुम्हें चोदना सिखा दिया, अब तुम मेरी गांड मार लो. फिर मैंने कहा कि यह क्या है? तो उसने अपना चूतड़ मुझे दिया और बोली कि यह छोटा सा छेद है और इसे गांड कहते है, मगर इसे मारने में दर्द होगा.
फिर मैंने उसकी गांड पर अपना हाथ मारा, लो मार दी. फिर वो हँसने लगी और मेरे होंठो को चूसते हुए बोली कि राजा जी इसमें अपना लंड तो डालिए, जैसे मेरी चूत में डाला था. फिर मैंने झट से अपना लंड उसकी गांड पर रखा और एक धक्का मारा, तो वो चिल्लाई राजा पहले तेल तो लगाओ, नहीं तो बहुत दर्द होगा और लंड अंदर भी नहीं जाएगा.
फिर वो उठी और नंगी ही तेल लेने गई, अब उसके मोटे-मोटे चूतड़ ऐसे हिल रहे थे कि मेरा दिमाग़ ख़राब हो गया और मैंने दौड़कर उसे पीछे से पकड़ लिया और उसे आँगन में ही कुत्तियाँ बनाकर अपने लंड पर तेल लगाया और उसकी गांड पर रख दिया. फिर वो बोली कि अंदर चलो, लेकिन में नहीं माना और एक धक्का मार दिया.
अब मेरा थोड़ा सा लंड उसकी गांड में अंदर चला गया था कि वो रोने लगी, बहुत दर्द हो रहा है. फिर मैंने पूछा कि क्या तुम्हारा पहली बार है? तो वो बोली कि हाँ दीदी मरवाती है, तो मैंने सोचा कि में भी मरवा लेती हूँ, लेकिन मेरी मेरे पति से कहने की हिम्मत नहीं होती थी, इसलिए तुमसे कहा, लेकिन बहुत दर्द हो रहा है, मत करो.
फिर मैंने कहा कि हो सकता है शुरू-शुरू में दर्द हो और फिर बाद में नहीं हो. फिर वो बोली कि ठीक है जो चाहे करो, मारो मेरी गांड राजा जी, आपकी ही चीज़ है, जैसे चाहे इस्तमाल करो. फिर मैंने दूसरा धक्का लगाया तो वो फिर से चिल्लाई. फिर मैंने मेरा लंड वापस बाहर खींचा और फिर से पूरा का पूरा 7 इंच लंड झटके के साथ अंदर डाल दिया और फिर धक्के पर धक्का मारता रहा और वो चिल्लाती रही, बस करो, फट गई मादरचोद, बहनचोद, लेकिन में नहीं माना.
फिर 15 मिनट के बाद वो भी मज़ा लेने लगी और कुत्तिया जैसे उछलने लगी, गाना गाने लगी और जब ही में फिर से झड़ गया. फिर वो बोली कि राजा जी आज तो में जवान हो गई, मज़ा आ गया है, दिलखुश हो गया. फिर मैंने भी कहा कि मुझे भी बहुत मजा आया और उसकी चूची चूसने लगा, जो अब मेरे हाथों में नहीं आ रही थी. अब में लगातार उसके निप्पल चबा रहा था और वो मेरे बालों को सहला रही थी और ऐसे मैंने 18 साल की उम्र में पहली चुदाई की और फिर मैंने मेरी सेक्सी सावित्री को 2 साल तक चोदा.
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