स्वाती ने मुझसे अपनी माँ चुदवाई

हैल्लो दोस्तों, में काफ़ी समय से Sex stories पढ़ता आ रहा हूँ, लेकिन में आज पहली बार अपनी कहानी आपको बता रहा हूँ. मैंने पहले भी कई बार सोचा कि में अपने साथ हुई घटना आपको बताऊँ, लेकिन बता नहीं पाया. दोस्तों आप वाकई में दंग रह जायेंगे कि असली जिंदगी में भी ये सब होता है.
स्वाती मेरी 12वीं क्लास की गर्लफ्रेंड है, शायद उसे अपनी गर्लफ्रेंड कहना ठीक नहीं होगा, क्योंकि मेरे अलावा भी वो कई और लड़को से चुदवाती रही है, इसलिए में ये कहूँगा कि उसे में 12वीं क्लास से ही चोदता आ रहा हूँ. उसकी उम्र करीब 21 साल होगी, रंग गोरा, बहुत ही सेक्सी चेहरा और उससे भी ज़्यादा सेक्सी गांड और बड़ी-बड़ी चूची. में पिछले अनुभव से कह सकता हूँ कि वो वाकई में लंड की असली शौकीन लड़की है. बस किसी तरह उसे अपना लंड दिखा दीजिए, तो वो खुद आपका लंड चूसे बिना आपको नहीं जाने देगी.
वो अपनी माँ के साथ रहती है और उसकी माँ जिसका नाम गीता है. उसकी उम्र 47 साल है, लेकिन अभी भी वो जवान दिखती है और खूब मोटी और भारी गांड की मालकिन है. खैर अब में अपनी असली कहानी पर आता हूँ. वैसे तो में स्वाती को रोजाना ही चोदता था, लेकिन मेरा मन उसकी माँ गीता को चोदने का बहुत करता था.
एक बार जब में स्वाती को चोद रहा था तो मैंने मस्ती में उससे बोल दिया कि में तेरी माँ गीता को पेलना चाहता हूँ, तो वो बहुत गुस्सा हो गयी और ज़ोर-ज़ोर से गालियाँ बकने लगी की भडवे, साले हरामी, मुझसे पेट नहीं भरता जो मेरी माँ के पीछे लगा है, तो में डर गया और फिर मैंने इस बात का जिक्र करना छोड़ दिया और सही मौके का इंतजार करने लगा और फिर सही मौका आया.
आज से करीब 6 महीने पहले हुआ यह कि स्वाती को अचानक 10,000 रुपये की ज़रूरत पड़ गयी. फिर मुझे रात में करीब 11 बजे उसका फोन आया कि यार मुझे कल सुबह किसी भी हालत में 10,000 रुपये चाहिए.
फिर मैंने कहा कि मेरे पास तो नहीं है, तुम अपनी मम्मी से क्यों नहीं माँग लेती? तो इस पर वो बोली कि वो कुतिया मना कर रही है और कहीं से भी पैसे लाकर दो, वो काफ़ी घबराई हुई थी और अपनी माँ से काफ़ी नाराज़ भी लग रह थी.
अब में समझ गया की सही मौका आ गया है और फिर मैंने उससे कहा कि यार अभी रात में तो बड़ी मुश्किल होगी, मेरे पास नहीं है और मुझे भी किसी से माँगना होगा. फिर स्वाती बोली कि प्लीज में तुम्हारे पैर पड़ती हूँ, कैसे भी करके पैसे का इंतजाम कर दो? में जिंदंगी भर तुम्हारा एहसान मानूँगी.
फिर मैंने कहा कि अच्छा ठीक है में कोशिश करता हूँ, लेकिन एक शर्त पर. तो स्वाती बोली क्या? तो मैंने कहा कि मुझे गीता के साथ सोना है, तो स्वाती बोली कि हरामजादे अभी उस कुतिया का भूत तेरे ऊपर से नहीं उतरा क्या?
मैंने कहा कि तुम जो भी समझो, लेकिन पहले उसकी चूत दिलाओ और फिर पैसे ले लो और ये कहकर मैंने अपना मोबाईल काट दिया. फिर इसके बाद करीब एक घंटे तक उसका फोन नहीं आया तो में डरने लगा कि मेरा दाव खाली चला गया है, लेकिन फिर एक घंटे बाद उसका फोन आ ही गया और इस बार वो नशे में थी, शायद मुझसे बात करने के बाद वो दारू पीने लगी थी.
फिर स्वाती बोली कि पैसे का इंतजाम हुआ? तो मैंने कहा कि तेरी माँ चुदवाने को तैयार है? तो स्वाती बोली कि वो ऐसे तैयार नहीं होगी? उसका कुछ करना होगा, तो मैंने कहा कि गीता की चूत के लिए में कुछ भी कर सकता हूँ. फिर स्वाती बोली कि ठीक है सुबह करीब 4 बजे मेरे घर आ जाओ और अपना वीडियो कैमरा भी लेते आना. गीता को जाल में फंसाना होगा, ऐसे जाल में कि वो चाह के भी बाद में मेरा या तुम्हारा कुछ ना कर सके. फिर मैंने ओके कहा और फोन काट दिया और बेसब्री से 4 बजने का इंतजार करने लगा.
फिर में ठीक 4 बजे उसके घर के बाहर पहुँच गया और अब वो मेरा इंतजार कर रही थी. फिर उसने धीरे से दरवाजा खोला और मुझे अंदर घुसाया और फुसफुसाते हुए बोली कि आवाज़ मत करो, नहीं तो वो रंडी जाग जाएगी. फिर मैंने पूछा कि कब चोदना है?
स्वाती बोली कि मैंने एक प्लान बनाया है, लेकिन चल पहले मेरी चूत चाट और मुझे गर्म कर ताकि में अपने सामने अपनी माँ को चुदवा सकूँ. अब वो नशे में बहकी हुई थी, फिर वो सोफे पर बैठ गयी और में अपने घुटनों के बल ज़मीन पर बैठ गया और उसकी मैक्सी उठाकर उसकी चूत को चाटने लगा. अब उसकी चूत गीली हो गयी थी और वो धीरे-धीरे मस्त होने लगी थी. फिर करीब आधे घंटे तक उसने अपनी चूत चटवाई और अब वो नशे और मस्ती से पागल हो गयी थी.
फिर उसने कहा कि चलो अब धीरे से बाथरूम में जाकर अंदर से दरवाजा बंद कर लो, गीता के उठने का टाईम हो गया है, वो उठकर पानी पीती है और फिर फ्रेश होने जाती है और वो जब बाथरूम का दरवाजा खोलने की कोशिश करे तो तुम दरवाजा मत खोलना, फिर आगे देखो में क्या करती हूँ?
फिर इसके बाद मैंने धीरे से बाथरूम में घुसकर अंदर से दरवाजा बंद कर लिया और इंतजार करने लगा. अब मेरा 7 इंच का लंड मस्ती के मारे टाईट हो गया था और अब मेरा सपना सच होने जा रहा था और उधर स्वाती जाकर अपने कमरे में लेट गयी. फिर थोड़ी देर के बाद गीता उठी और पहले वो किचन में गयी और पानी पिया. अब वो ब्लाउज और पेटिकोट में थी और फिर उसे प्रेशर बन गया और वो बाथरूम के दरवाजे पर आकर खोलने लगी, लेकिन मैंने दरवाजा अंदर से लॉक किया हुआ था, इसलिए वो नहीं खुला.
फिर उसने 4-5 बार कसकर दरवाजा खोलने की कोशिश की और फिर उसने स्वाती को आवाज़ लगाई, तो स्वाती बोली कि हाँ मम्मी, तो गीता बोली कि देखो बाथरूम का दरवाजा नहीं खुल रहा है, तो स्वाती ने आकर 1-2 बार खोलने की कोशिश की और फिर बोली कि लगता है अंदर से लॉक हो गया है, मिस्त्री को बुलवाना पड़ेगा. फिर गीता बोली कि इतनी सुबह मिस्त्री कहाँ मिलेगा? तो स्वाती बोली कि हाँ 10 बजे के बाद ही मिलेगा.
फिर गीता बोली कि मुझे बहुत ज़ोर से प्रेशर बना है, तो स्वाती बोली कि पड़ोस वाले अंकल के यहाँ चली जाओ, तो गीता बोली कि इतनी सुबह कैसे जाऊं? तो स्वाती (फुसफुसाते हुए) बोली कि तो एक काम करो बेडरूम में चली जाओ, वहीं कर लेना और वैसे भी यहाँ मेरे अलावा कोई नहीं है और फिर जब बाथरूम का दरवाजा खुल जाए, तो यहाँ लाकर फ्लश कर देना.
फिर गीता बोली कि यही ठीक है, लेकिन किसमें करूँ? तो स्वाती बोली कि एक भगौना लेती जाओ, तो गीता तुरंत किचन में गयी और एक भगौना लेकर ऊपर बेडरूम में अपने चूतड़ मटकाते हुए चली गयी.
फिर इसके बाद स्वाती ने मुझे बाहर निकाला और बोली कि चल वो रंडी तेरा इंतजार कर रही है, तो मैंने कहा कि लेकिन वो तो टट्टी करने गयी है, तो स्वाती बोली कि उसका टट्टी करते समय ही कुछ किया जा सकता है. में वीडियो रिकॉर्ड कर लूँगी और इतना गंदा वीडियो देखकर वो डर के मारे कभी कुछ नहीं कर पाएगी, अब चल.
फिर इसके बाद हम लोग दबे पाव ऊपर बेडरूम की तरफ बढे, अब स्वाती नशे में लड़खड़ा रही थी. फिर बेडरूम के बाहर पहुँचकर स्वाती ने कैमरा ऑन किया और फिर कैमरा मुझे देते हुए कहा कि में अंदर जाती हूँ और तू दरवाजे के बाहर से ही रिकॉर्ड कर और फिर जब में बोलूंगी तो अंदर आ जाना.
फिर इसके बाद उसने धीरे से दरवाजा आधा खोला और अंदर घुस गयी. अब में दरवाजे से ही रिकॉर्ड कर रहा था, अब अंदर का सीन पागल कर देने वाला था. अब गीता दूसरी तरफ अपना मुँह करके अपना पेटिकोट कमर तक उठाकर भगौने पर अपनी गांड रखकर टट्टी कर रही थी. अब मुझे उसकी भारी गांड साफ-साफ़ दिख रही थी, अब उसका कुछ पेशाब भगौने से बाहर फर्श पर फैला हुआ था.
फिर गीता बोली कि यहाँ क्यो आ गयी? बाहर चलो, में आ रही हूँ. तो तब तक स्वाती उसके बगल में जाकर बैठ गयी और बोली कि में यह देखने आई हूँ कि तुम टट्टी करते समय कैसी दिखती हो? तो गीता बोली कि तुमने शराब पी है?
आज तुम्हारी जमकर पिटाई करूँगी और तुम्हें नशे में मालूम नहीं कि क्या बोल रही हो? तो स्वाती बोली कि में जानती हूँ कि में क्या बोल रही हूँ रंडी? और ये कहते हुए उसने गीता की चूत पर अपना हाथ रख दिया और उसकी चूत पर घनी झांटे थी और पेशाब भी लगा हुआ था. फिर स्वाती बोली कि साली तेरी चूत कितनी बड़ी है मादरचोद? ऐसा लगता है 1000 मर्द तुझे चोद चुके है. तो गीता (स्वाती को पीछे धकेलते हुए और लगभग चीखते हुए) बोली कि तुरंत कमरे से बाहर निकल जाओ, नहीं तो में तुम्हें जान से मार दूँगी.
फिर स्वाती बोली कि आज के बाद तू मेरा कुछ नहीं कर पाएगी मादरचोद, चुपचाप टट्टी कर और फिर इतने में उसने मुझे अंदर आने का इशारा किया और जैसे ही में अंदर आकर गीता के सामने खड़ा हुआ तो स्वाती उठी और गीता के पीछे बैठकर उसे कसकर पकड़ लिया. गीता तो बिल्कुल चकित रह गयी और कुछ सेकेंड के बाद लगभग काँपते हुए बोली कि ये कौन है? तो स्वाती बोली कि मेरा यार है तुझे चोदने आया है.
गीता बोली कि स्वाती तुरंत इसे लेकर चली जाओ, नहीं तो में आत्महत्या कर लूँगी. फिर स्वाती बोली कि जो मन में आए करना, लेकिन पहले इससे मरवा ले और फिर मुझसे बोली कि हरामी कैमरा इस रंडी की गांड की तरफ कर तो मैंने कैमरा उसकी गांड पर फोकस कर दिया और स्वाती बोली कि चल टट्टी कर कुतिया.
अब गीता का चेहरा सफेद पड़ चुका था और अब वो जान चुकी थी कि वो फँस गयी है और अपना सिर झुकाते हुए बोली कि हे भगवान में मर क्यों नहीं जाती? तो स्वाती (गीता की गांड सहलाते हुए) बोली कि रंडी भगवान ने इतनी बढ़िया गांड मरने के लिए नहीं मरवाने के लिए दी है और फिर इसके बाद उसने गीता का ब्लाउज ज़बरदस्ती उतार दिया और पीछे से उसकी बड़ी-बड़ी चूची पकड़कर सहलाने लगी और मुझसे बोली कि चल अपनी पेंट उतार और अपना लंड मेरी माँ को दिखा.
फिर मैंने झट से अपनी पेंट और अंडरवेयर एक बार में ही उतार दी और मेरा लंड फँनफनाया हुआ था. फिर स्वाती ने कहा कि चल कहाँ से शुरू करेगा? ऐसा कर कि पहले अपना लंड इसके मुँह में दे, तो में गीता के ठीक सामने मुँह के पास खड़ा हो गया और अपना लंड उसके मुँह में देने की कोशिश करने लगा, लेकिन वो अपना मुँह कसकर भींचे हुए थी और दूसरी तरफ मुँह कर ले रही थी.
फिर स्वाती बोली कि चुपचाप मुँह में ले ले, नहीं तो बहुत बुरा होगा, लेकिन गीता हार मानने को तैयार नहीं हुई, तो स्वाती बोली कि साली नखरे तो ऐसे कर रही है जैसे पहली बार लंड देखा हो, पक्की रांड है तू साली. फिर स्वाती ने गीता की पीठ पर कसकर मुक्का मारा और ज़ोर से उसके बाल खींचे, तो गीता का मुँह दर्द के मारे खुल गया और मेरा लंड सट से उसके मुँह के अंदर चला गया.
फिर स्वाती बोली कि गुड, अब चल इसे कसकर चूस. लेकिन अब गीता मेरा लंड अपने मुँह में लेकर अपना मुँह हिला रही थी, लेकिन चूस नहीं रही थी.
फिर ये देखकर स्वाती बोली कि देख रंडी में आखरी चेतावनी दे रही हूँ, चुपचाप चूसना शुरू कर, नहीं तो में कुछ ऐसा कर दूँगी कि तू पागल हो जाएगी. फिर इसके बाद स्वाती पीछे से अपना मुँह गीता के कान के पास ले जाकर बोली कि गीता डार्लिंग तुम्हारे पास दो रास्ते है, या तो इससे क़ायदे से चुदवा ले और या फिर इस भगौने में जो तेरा माल पड़ा हुआ है उसे में तेरे मुँह में डाल दूँगी, बोल डालूँ तेरे मुँह में, तो गीता घबरा गयी और वो तुरंत मेरा लंड चूसने लगी. अब में उसका सिर सहलाने लगा था और पीछे से स्वाती उसकी चूची दबाने लगी थी. अब में 5 मिनट में ही सातवें आसमान में चला गया था.
फिर मैंने स्वाती से कहा कि अब इसकी चूत दिलाओ, नहीं तो में झड़ जाऊंगा. फिर इस पर स्वाती ने गीता से कहा कि चलो मेरी जान अब उठो और बगल में पड़े पलंग पर चलकर लेट जाओ, तो गीता खड़ी हो गयी. अब उसने अपना पेटिकोट कमर तक उठाकर अपने हाथ से पकड़ा हुआ था. फिर गीता बोली कि मुझे अपनी गांड तो धो लेने दो.
फिर स्वाती बोली कि ये मेरा यार किस लिए है रानी, चल तू घोड़ी बनकर पलंग पर लेट तो इसके बाद गीता आकर पलंग पर घोड़ी बन गयी, क्या गजब का सीन था वो? अब मेरे सपनो की रानी गीता मेरे सामने घोड़ी बनी हुई थी और अब उसकी गांड मटके की तरह लग रही थी, उसकी चूची लटक रही थी.
अब गीता को घोड़ी बनती देखकर स्वाती भी गर्म हो गयी और उसने झट से अपनी मैक्सी उतार दी और पूरी नंगी हो गयी और बोली कि चल बहुत को चोदा आज अपनी रंडी माँ को भी चोद लूँ और ये कहकर वो पलंग पर आकर बैठ गयी और मुझसे कहा कि चल मेरी माँ की गांड चाटकर साफ कर और उसने अपने दोनों हाथों से गीता की गांड फैला दी. फिर में जाकर गीता की गांड का छेद चाटने लगा और 2 मिनट में ही मैंने उसकी गांड चाटकर साफ कर दी.
फिर इसके बाद स्वाती पलंग पर लेट गयी और गीता के साथ 69 के पोजिशन में आ गयी. अब स्वाती नीचे थी और गीता स्वाती की चूत की तरफ मुँह करके ऊपर लेटी थी. फिर स्वाती ने गीता की चूत में अपना मुँह घुसा दिया और गीता भी स्वाती की चूत चाटने लगी.
फिर मैंने अपना थोड़ा सा थूक गीता की गांड पर लगाया और मैंने अपना लंड गीता की गांड में घुसा दिया. अब मेरा लंड एक बार में ही पूरा अंदर तक घुस गया था, जिससे गीता की सिसकी निकल गयी थी.
फिर में अपने दोनों हाथों से गीता की कमर पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से गीता की गांड मारने लगा था. अब नीचे से स्वाती ने अपनी एक उंगली मेरी गांड में डाल दी और गंदी-गंदी बातें बोलने लगी कि मार साले मार, मेरी माँ की गांड मार, रंडी साली अपनी गांड पर बहुत इतराती थी, फाड़ डाल इसकी गांड, देख कितने मज़े से मरवा रही है छिनाल. अब इधर गीता भी सिसकीयाँ लेकर गांड मरवाने का मज़ा लेने लगी थी और उधर स्वाती उसके चूत के दाने को अपने होंठो से कसकर चूस रही थी. इस तरह से करीब 10 मिनट तक हमारी चुदाई होती रही.
फिर मेरी मस्ती झड़ने के करीब जाने लगी तो में स्वाती से बोला कि में झड़ने जा रहा हूँ. तो स्वाती बोली कि रूको, लंड बाहर निकालो और अपना पूरा वीर्य इस रंडी के मुँह में गिरा दो, तो मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और गीता और स्वाती भी एक दूसरे से अलग हो गयी.
फिर स्वाती ने गीता के बाल पकड़कर उसका मुँह मेरे लंड से सटा दिया और अपना मुँह भी मेरे लंड के पास ले आई. फिर में अपने लंड को हिलाने लगा और मेरे लंड से 4-5 झटको में वीर्य की बौछार निकली, जो कुछ गीता के मुँह के अंदर गिरी और कुछ बाहर गिरी और फिर में झड़ गया और हांफने लगा. फिर स्वाती गीता के मुँह को चाटने लगी और फिर उसने गीता के मुँह में अपनी जीभ डाल दी और उसे फ्रेंच किस करने लगी.
फिर स्वाती ने मुझसे गीता के मुँह में पेशाब करने को कहा और उसके बाद वो भी गीता के मुँह पर बैठकर ज़ोर-ज़ोर से पेशाब करने लगी और ज़बरदस्ती गीता को पूरा पेशाब पीने को कहा, तो गीता पूरा पेशाब पी गयी. फिर इसके बाद में जल्दी से अपनी पेंट पहनकर स्वाती को पैसे देकर उसके घर से बाहर आ गया. दोस्तों इसके बाद मैंने कई हफ़्तो तक डर के मारे अपना मोबाइल ऑफ कर दिया कि कहीं कुछ ना हो जाये, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
एक दिन बाज़ार में मुझसे गीता टकरा गयी तो मैंने उससे अपनी नज़र चुराने की बहुत कोशिश की, लेकिन उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझसे साफ साफ पूछा कि उस दिन मैंने स्वाती को कितने पैसे दिए थे? तो मेरे बताने पर वो ज़ोर से हँसी और बोली कि बेवकूफ़ तुम अगर सीधे मेरे पास आ जाते तो में आधे पैसे में ही उससे ज़्यादा मज़ा देती, चल अगली बार सीधे मेरे मोबाईल पर फोन करना.
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बहन को लंड से खेलना सिखाया

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम मीत है और में 21 साल का हूँ. में आज अपने और मेरी अंकल की लड़की के बारे में कुछ बताने जा रहा हूँ, या यूँ कहिए कि मेरी बहन गुड़िया के बारे में बताने जा रहा हूँ, वो मुझसे 3 साल छोटी है, लेकिन उसका फिगर कमाल का था और वो दिखने में बहुत सेक्सी थी. उसके बूब्स बहुत ही मस्त थे और बहुत ही सॉफ्ट थे.
में कई बार उसे अंजाने में छू लेता था, लेकिन वो तो इन सबके बारे में कुछ जानती ही नहीं थी, इसलिए मुझे कोई प्रोब्लम नहीं थी. में अक्सर उसे पकड़कर उठा लेता और इसी बहाने मुझे उसकी गांड और बूब्स दबाने का मौका मिलता था. में उसकी चूत को देखना चाहता था और उसे छूना चाहता था, लेकिन में समझ नहीं पा रहा था कि में इसके लिए क्या करूँ? फिर मैंने एक तरकीब सोची और हमारे बाथरूम के दरवाजे में एक छेद किया, ताकि जिससे में उसे नंगी देख सकूँ.
फिर एक दिन मुझे मौका मिल ही गया, जब शाम का वक्त था और में घर में अकेला था. फिर मेरी बहन आई और मैंने उससे मज़ाक शुरू की, तुम बिना नहाए जैसी क्यों लग रही हो? तो उसने बोला कि में तो सुबह ही नहा ली थी. फिर मैंने कहा कि तुम में से बदबू आ रही है और ऐसा बोलकर में स्माईल करने लगा, तुम अभी नहा लो.
उसने कहा कि अच्छा ठीक है और फिर वो थोड़ी देर के बाद नहाने चली गई. अब उसे शक ना हो, इसलिए में तेज आवाज़ में टी.वी. देखने लगा था. फिर जैसे ही वो बाथरूम में गई तो मैंने अपनी आँखे उस छेद पर चिपका दी, जो उस दरवाजे पर था. फिर मैंने अंदर देखा तो वो अपने कपड़े उतार रही थी, उसने सबसे पहले अपना फ्रोक निकाला और बाद में उसने अपनी ब्रा भी निकाली, क्या बूब्स थे उसके? उसके बूब्स एकदम छोटे और गोरे-गोरे थे.
अब मेरा तो लंड टाईट हो गया था. फिर बाद में उसने अपनी पेंटी भी निकाली. अब में तो अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था. उसकी चूत पर एकदम छोटे-छोटे बाल थे और उसकी चूत एकदम फूली हुई और मस्त थी. फिर वो शॉवर के नीचे खड़ी हो गई और फिर उसने शॉवर चालू किया. अब पानी उसके सिर से होकर उसके बूब्स पर जाकर नीचे उसकी मस्त गांड पर आ रहा था. अब वो अपने हाथों से अपने बूब्स को दबा रही थी. फिर बाद में उसने साबुन लिया और उसे अपने पूरे बदन पर मलना शुरू किया. अब वो धीरे-धीरे अपने पूरे बदन पर अपना हाथ फैर रही थी और में यह सब दरवाजे के छेद में से देख रहा था.
अब मेरी तो हालत खराब हो रही थी, अब वो मुझसे सिर्फ 2 फुट की दूरी पर थी, लेकिन में उसे छू भी नहीं सकता था. अब में कोई भी ऐसा वैसा कदम नहीं उठा सकता था, क्योंकि मेरे मम्मी और पापा को ये बात पता चली तो मेरी ख़ैर नहीं समझो.
फिर थोड़ी देर के बाद उसने फिर से शॉवर चालू किया और साबुन निकालने लगी. फिर बाद में जो हुआ उसे देखकर तो में दंग ही रह गया. अब वो शॉवर के नीचे खड़े-खड़े अपनी दो उँगलियों से अपनी चूत को मसल रही थी. अब में तो चौंक गया था और मुझे लगा कि यह एक सपना है, लेकिन नहीं यह सच था. अब वो हस्तमैथुन कर रही थी, यानी कि हस्तमैथुन कर रही थी.
फिर मैंने देखा कि उसे इसमें बहुत मज़ा आ रहा था और उसके चेहरे के एक्सप्रेशन को देखकर में तो दंग रह गया था. अब वो सिसकियां भर रही थी. फिर करीब 10 मिनट तक वो अपनी चूत को मसलती रही और बाद में वो एकदम से उत्तेजित हुई और शांत हो गई. अब में समझ गया था कि मेरी सीधी और भोली बहन गुड़िया अब छोटी नहीं रही थी, अब भी उसकी चूत में खुजली हो रही थी और अब में तो बहुत खुश था.
फिर उसके बाद में अपना काम करने लगा, लेकिन दोस्तों यह बात तो है कि लड़की के बूब्स जब बड़े हो जाते है, तो उन्हें हमेशा कोई ना कोई दबाने वाला चाहिए होता और जब घर में ही सुविधा हो तो कोई बाहर क्यों जाए? कोई फर्क नहीं पड़ता कि वो तुम्हारी बहन है कि या कोई और है, आख़िर वो भी तो एक लड़की है.
उसकी भी सब इच्छा होती है और अगर वो यह करने के लिए बाहर किसी को मौका देती है, तो इसमें अपनी ही इज्जत खराब होती है, तो यह तो अच्छी बात है कि दोनों सेक्स के लिए एक दूसरे की मदद करे. फिर में उसके ख्यालों में अपना लंड हिलाता-हिलाता सो गया. अब मेरे ख्यालों में कभी वो मेरे ऊपर होती थी, तो कभी में उसके ऊपर होता था. वो बार-बार बोल रही थी कि मीत भैया आपके साथ बहुत मज़ा आता है और इन्हीं ख्यालों में सुबह हो गई थी.
आज तो मैंने सोच लिया था कि कुछ ना कुछ ऐसा किया जाए कि जिससे में उसकी मदद कर सकूँ, वो जो बाथरूम में कर रही थी ना उस काम में. हमारे घर के दूसरे फ्लोर पर उसका रूम था और उसके पास में मेरा रूम था. फिर मैंने सोचा कि जो छोटी लड़की बाथरूम में यह सब करती है, वो अकेले में तो क्या करती होगी? फिर मैंने उसके रूम में देखने के लिए एक कुर्सी ली और उसके रूम के दरवाजे के पास की खिड़की के नीचे रखी, जिससे पूरा रूम दिखता था.
फिर में धीरे से ऊपर हुआ तो मैंने देखा कि वो सो रही है. फिर में वापस नीचे उतरने लगा, लेकिन उसी वक्त उसने अपना एक हाथ अपनी स्कर्ट में डाला. अब में समझ गया था कि कुछ सीन देखने को मिलने वाला है. फिर मैंने देखा कि वो हस्तमैथुन कर रही है. फिर उसी वक्त मैंने उसके दरवाजे की बेल बजाई तो उसने आवाज़ लगाई कौन है? तो मैंने ज़ोर से कहा कि दरवाजा खोलो, तो उसने दरवाजा खोला. फिर मैंने उससे गुस्से से पूछा कि तुम क्या कर रही थी? मैंने सब देखा है तो वो एकदम से डर गई.
फिर मैंने कहा कि में पापा को बोलने वाला हूँ कि तुम अपने रूम में यह सब करती हो. फिर वो चुपचाप खड़ी रही और फिर एकदम से बोली कि भैया प्लीज किसी को कुछ मत बताना. फिर मैंने कहा कि में उसकी कोई बात नहीं सुनने वाला हूँ. फिर वो रोने जैसी हो गई कि भैया प्लीज किसी को कुछ मत बताना. फिर मैंने कहा कि चलो मान लो कि में ना बताऊँ, लेकिन उसमें मुझे क्या मिलेगा? फिर गुड़िया बोली कि आप जो बोलोगे वो में करूँगी, बस में यही तो सुनना चाहता था. फिर मैंने उसे बेड पर बैठाया और उसे मेरे पास बैठने को बोला.
फिर मैंने उसे अपनी गोद में बैठाया और अब उसकी मुलायम गांड मेरे लंड को टच कर रही थी. फिर मैंने कहा कि मैंने सब देखा है, जो तुम कर रही थी, लेकिन क्या तुम मुझे नहीं बताओंगी कि तुम क्या कर रही थी? तो वो शर्माने लगी. फिर मैंने कहा कि तुम बताती हो कि में पापा को आवाज़ दूँ. फिर वो बोली कि में सब बताती हूँ, में है ना खुजा रही थी बस. फिर मैंने कहा कि अच्छा में भी तो देखूं कहाँ खुजा रही थी? फिर वो बोली कि यहाँ, वो अपनी चूत की तरफ इशारा करके बोली.
फिर मैंने कहा कि अभी तो मेरी एक ही शर्त है कि में पापा से यह बात ना कहूँ, तो वो बोली क्या? फिर मैंने कहा कि एक बार में भी वहाँ खुजाना चाहता हूँ. फिर वो बोली नहीं और फिर मैंने कहा कि तो फिर ठीक है, अब पापा को जवाब देना ओके, में जा रहा हूँ. फिर वो बोली कि अच्छा ठीक है, लेकिन ऊपर से तो मैंने कहा कि हाँ ओके.
फिर मैंने उसे अच्छी तरह से अपनी गोद में बैठाया और अपना एक हाथ उसकी चूत पर रखा और उसे मसलना शुरू किया. अब वो बहुत शर्मा रही थी और अब उसने अपना मुँह भी छुपा लिया था. फिर मैंने और ज़ोर से उसकी पेंटी के ऊपर से ही मसलना शुरू किया. फिर थोड़ी ही देर में वो बहुत उत्तेजित हो गई. अब वो सिसकियां लेने लगी थी तो मैंने अपना एक हाथ उसके बूब्स पर रखा तो वो मेरे सामने देखने लगी और बोली कि भैया आप ये क्या कर रहे हो? तो मैंने कहा कि कुछ नहीं तुम्हें मज़ा आ रहा है ना? तो वो बोली कि बहुत अच्छा लग रहा है.
अब में उसके सॉफ्ट बूब्स मसल रहा था और अपना लंड उसकी गांड पर रगड़ रहा था. फिर वो बोली कि भैया आपका बेल्ट मुझे लग रहा है. फिर मैंने कहा कि कहाँ है बेल्ट? तो उसने बैठे-बैठे ही नीचे अपना हाथ डाला और मेरा लंड बेल्ट समझकर पकड़ लिया और बोली कि ये क्या है? तो मैंने कहा कि यह मेरा लंड है. फिर वो बोली कि ये इतना हार्ड क्यों है? वैसे तो ये सॉफ्ट होता है.
फिर मैंने कहा कि ये जब उत्तेजित होता है ना, तब ये ऐसा हो जाता है. फिर बातों-बातों में मैंने उसकी पेंटी में अपना एक हाथ डाला और उसकी चूत को मसलने लगा और अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी और वो तड़प उठी और बोली कि भैया मुझे कुछ हो रहा है. फिर मैंने पूछा कि क्या? तो वो बोली पता नहीं.
फिर मैंने कहा कि तुमको मेरा लंड देखना है? तो वो कुछ नहीं बोली, लेकिन फिर भी मैंने मेरा लंड बाहर निकाल दिया. अब वो बिना पीछे मुड़े ही उसे अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ने लगी और मसलने लगी थी. फिर मैंने धीरे से उससे कहा कि क्या तुम्हें पता है कि शादी के बाद क्या होता है? तो वो बोली कि मतलब? तो मैंने कहा कि क्या तुम जानती हो सुहागरात के दिन क्या होता है? तो वो बोली कि मालूम नहीं.
फिर मैंने कहा कि उस दिन लंड इसमें जाता है, मेरा इशारा उसकी चूत की तरफ था. फिर मैंने पूछा कि जो काम तुम उंगली से करती हो, वही काम मेरा लंड करे तो. फिर वो कुछ नहीं बोली और अब में समझ गया था कि वो तैयार थी. फिर मैंने उसे बेड पर लेटा दिया और उसकी स्कर्ट को ऊपर उठाया और उसकी चूत को मसल दिया.
फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी पेंटी में डाला और उसकी चूत में अपनी एक उंगली डाल दी. अब उसका चेहरा एकदम लाल हो गया था, अब उसकी आँखे बंद हो रही थी, मानो कि जैसे उसे नशा चढ़ रहा हो. फिर मैंने उसका टॉप निकाल दिया, उसने अंदर वाईट ब्रा पहनी हुई थी, उसके बूब्स कमाल के लग रहे थे, मानो कि जैसे ब्रा में से बाहर आने के लिए तड़प रहे थे.
फिर मैंने उसके बूब्स को उसकी ब्रा के ऊपर से ही दबाया तो उसके बूब्स और ज्यादा टाईट हो गये. अब वो करहाने लगी थी और पागल की तरह मुझसे लिपट गई थी. फिर मैंने उसको अपनी बाहों में लिया और अपने दोनों हाथों को उसकी पीठ पर फैरने लगा.
फिर मैंने उसकी ब्रा का हुक निकाल दिया और उसे फिर से बेड पर लेटाया. फिर जब मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मुझे घूर रही थी. फिर मैंने पूछा कि क्या हुआ? तो उसने बोला कि उसे इन सब में बहुत मज़ा आ रहा है, इसे क्या कहते है?
मैंने कहा कि इसे सेक्स कहते है और इतना कहकर मैंने अपने होंठो को उसके होंठ पर रख दिया और उसे किस करने लगा. अब वो भी मेरे होंठों को चूसने लगी थी और अब कभी वो मेरे ऊपर के होंठ को चूसती तो कभी मेरे दोनों होंठो को एक साथ चूस रही थी. अब मेरा एक हाथ उसके बूब्स पर और दूसरा हाथ उसकी चूत में था. अब वो काफ़ी गर्म हो गई थी और उसकी चूत में से पानी निकल रहा था, तो मैंने बिल्कुल भी देर नहीं की.
फिर मैंने अपनी जेब में से एक कंडोम निकाला और अपने लंड पर चढ़ाया, क्योंकि में जानता हूँ कि इसमें कभी रिस्क नहीं लेना चाहिए. फिर वो बोली कि भैया ये क्या है? और इसे तुम अपने लंड पर क्यों चढ़ा रहे हो? तो मैंने कहा कि ये सुरक्षित रहने के लिए है.
फिर में ये कहते ही उसके ऊपर चढ़ गया और उसे वापस से किस करने लगा. फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया और उसे अपनी चूत पर मसलने को बोला. फिर उसने अपने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत पर मसलने लगी. अब में धीरे धीरे अपना दबाव बढ़ाने लगा था, इसमें जल्दबाजी करने से बात बिगड़ भी सकती है.
फिर मैंने मौका देखकर एक हल्का सा धक्का लगाया तो वो चिल्ला उठी, आआआआआआआअ मीत्त्त्तत्त भैया आआआआअ बहुतत्ततत्त दर्द्द्द्द्द्द्दद हो ऊऊऊऊ रहाआआआ है, प्लीज इसे बाहर निकाल दो. अब उसकी चूत की सील टूटने की वजह से खून बहने लगा था और वो दर्द से कराह रही थी. फिर मैंने उसे किस करना शुरू किया, इससे उसे थोड़ी राहत हुई.
फिर में थोड़ी देर तक बिल्कुल भी नहीं हिला और फिर बाद में मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाई. अब वो सिसकियां लेने लगी थी और नीचे से अपनी कमर को हिलाने लगी थी. अब मेरा लंड सिर्फ़ 2 इंच ही अंदर गया था, लेकिन अभी उसकी चूत मेरे पूरे लंड को लेने के लिए तैयार नहीं थी.
फिर मैंने भी थोड़ी और कोशिश की तो वो खुद ही मेरी गांड में अपना हाथ लगाकर उसे अपनी और खींचने लगी और धीरे-धीरे मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया. फिर मैंने 1 घंटे तक उसकी बराबर चुदाई की. फिर कभी में उसे अपने ऊपर चढ़ाता, तो कभी वो नीचे हो जाती. अब में उसके बूब्स और उसकी गांड को बराबर दबा रहा था.
अब वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी और अब उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था. अब वो चुदवाने के बाद मेरे ऊपर पूरी नंगी पड़ी हुई थी और बोल रही थी कि उंगली से इतना मज़ा कभी नहीं आया भैया, प्लीज आप रोज़ मेरे साथ ऐसा करना, मुझे आपका लंड बहुत अच्छा लगता है और ऐसा बोलकर वो मेरे लंड के साथ खेलने लगी, कभी उसे ऊपर उठाती तो कभी अपने दोनों हाथों से हिलाती. अब उसके छोटे हाथों में मेरा टाईट लंड बहुत बड़ा लग रहा था.
फिर मैंने भी उसकी चूत में अपनी एक उंगली डाली और बोला कि मीत भैया जानते है कि उसकी गुड़िया को कैसे खुश रखा जाए? और फिर में उसके बूब्स दबाने लगा और उसके होंठों पर किस करने लगा था.
फिर थोड़ी देर के बाद मैंने फिर से उसकी चूत में अपना लंड डाला और उसे स्वर्ग का सुख दिया, जो उसे बहुत सालों के बाद मिलने वाला था, लेकिन हाँ कभी भी अपनी बहन को चोदो तो प्लीज कंडोम ज़रूर पहनना, वरना तुम जानते हो कि क्या हो सकता है? मुझे 21 साल की उम्र में ही एक बहुत ही सेक्सी और वर्जिन गर्ल को चोदने का मौका मिला था.
अब में और गुड़िया इसी तरह हर रोज एक दूसरे की सेक्स की प्यास बुझाए करते है. फिर मैंने उससे बोला कि वो किसी को भी इसके बारे में ना कहे, क्योंकि अगर पापा को पता चल गया तो वो मेरी हालत खराब कर देंगे. फिर तो हम दोनों मम्मी, पापा के सामने तो कभी कुछ नहीं बोलते, लेकिन अकेले में हम दोनों बहुत ही उत्तेजित हो जाते थे.
अब गुड़िया को मेरा लंड भा गया था, तो वो ही हर रात को मुझे बुलाया करती थी. अब कभी जब हम दोनों साथ में टी.वी. देख रहे होते है, तो वो धीरे से मेरा लंड पकड़कर मसलने लगती है और मम्मी के आते ही छोड़ देती है. फिर में उसे ऊपर अपने रूम में जाने को बोलता और थोड़ी देर में भी चला जाता हूँ और उसे बहुत चोदता हूँ. अब थोड़े ही दिनों में उसके बूब्स एकदम सेक्सी होने लगे थे और अब मुझे भी अपनी सेक्स की प्यास बुझाने के लिए कही और नहीं जाना पड़ेगा, जब तक उसकी शादी नहीं हो जाती है.
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चार बच्चों की माँ के साथ मजा

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम समीर है. मेरी लम्बाई 6 फीट और में दिखने में अच्छा लगता हूँ और आप लोगों की तरह में भी पिछले कुछ सालों से सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ. आज में आप सभी को अपनी एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ जो मेरे साथ 5-6 साल पहले घटित हुई और में आज भी इस घटना को भुला ना सका. में उसको आप लोगों को सुनाने जा रहा हूँ जिसमें मैंने अपनी एक मस्त सेक्सी आंटी को चोदकर पूरी तरह से संतुष्ट किया.
वो मेरी चुदाई से बहुत खुश थी और में उम्मीद करता हूँ कि जिस तरफ से मुझे उन्हें चोदने में और उनको मेरे साथ सेक्स करने में जितना मज़ा आया ठीक वैसे ही यह कहानी आज आप लोगों को जरुर पसंद आएगी.
दोस्तों एक आंटी जो एक हाउसवाईफ है, वो मेरे दूर के रिश्ते में रिश्तेदार लगती थी और उनका नाम नीलम था. उनके चार बच्चे थे और सब छोटे 4 या 5 साल के होंगे, लेकिन नीलम आंटी चेहरे से ऐसी लगती नहीं थी कि वो चार बच्चों की माँ है उसकी उम्र करीब 28 के आसपास होगी. उन्होंने अपने शरीर को बहुत अच्छी तरफ सम्भालकर रखा हुआ था, वो बहुत ही गोरी दूध जैसी सफेद, उनके वो बड़े बड़े गोल बूब्स 36 के होंगे और उसकी गांड 40 के करीब होगी और वो बहुत बड़ी और बाहर निकली हुई थी.
दोस्तों वो अक्सर हमारे घर पर आया जाया करती थी और हम लोग भी उनके घर पर आते जाते रहते थे. मैंने कभी भी उसके बारे में कुछ ग़लत नहीं सोचा था और में उनकी बहुत इज्जत किया करता था. उनका प्यार से बात करने का तरीका मुझे हमेशा उनकी तरफ आकर्षित करता था, लेकिन उस दिन की घटना के बाद से मेरा उनको देखने का तरीका अब बिल्कुल ही बदल चुका था. उस घटना ने मुझे उन्हें उस नजर से देखने पर बहुत मजबूर किया.
एक दिन शाम को में किसी काम से उनके घर पर चला गया. तब में 11th क्लास में पढ़ता था और उस समय उनके बच्चे बाहर खेल रहे थे. फिर जब मैंने पूछा उनसे पूछा कि आपकी मम्मी कहाँ है? तो वो बोले कि अंदर रूम में है.
फिर में वहाँ पर चला गया और मैंने देखा तो वहां पर कोई नहीं था, लेकिन बाथरूम का दरवाज़ा खुला हुआ था और मेरी नज़र बाथरूम के अंदर पड़ी और मैंने जैसे ही देखा तो मेरी आँख खुली की खुली रह गई, क्योंकि जो सब मुझे उस समय नजर आ रहा था उसको देखकर में बहुत चकित था, उसकी बड़ी मोटी एकदम गोरी गांड मेरे सामने थी. मेरा लंड वो सब देखकर एकदम टाईट हो गया था और अब मेरी वो सब देखकर फट गयी, लेकिन मन ही मन मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था. में उस समय बहुत खुश था. अब मैंने देखा कि वो पेशाब करने के बाद उठ गई और उसने अभी तक मुझे नहीं देखा था, क्योंकि उसका मुँह दूसरी तरफ था.
में बाहर खड़ा पसीना पसीना हो रहा था और तभी उसने अपनी कमीज़ को उठाई और फिर सलवार का नाड़ा बाँधने लगी. मैंने एक तरफ से थोड़ा सा उसका पेट देखा वो बहुत गोरा गोरा और हल्का गुलाबी था. फिर वो मेरी तरफ घूमी और मुझे ठीक अपने सामने देखकर अचानक से बिल्कुल चकित हो गयी और अब वो मुझसे पूछने लगी कि तू यहाँ पर कब आया? तो मैंने ऐसा चेहरा बनाकर जवाब दिया कि जैसे मैंने कुछ नहीं देखा हो और मैंने उनसे कहा कि में अभी बस अंदर आया ही हूँ और आप बाहर निकले.
दोस्तों उसने मेरे मुहं से यह बात सुनकर चैन की सांस ली और वो मेरी बात सुनकर थोड़ी संतुष्ट हो गई, लेकिन मेरी हालत अब बहुत खराब हो गयी थी और मेरे मन में अब भी उसकी गोरी बड़ी आकार की गांड घूम रही थी और में अब बाहर हॉल में बैठा हुआ था और वो घर के काम करने में लगी हुई थी जिसकी वजह से मुझे उसके बूब्स की लाईन साफ साफ दिख रही थी.
अब मुझे गांड को देखने के बाद उसके झूलते लटकते हुए बूब्स को देखने का वो मौका मिल गया, जो उसने खुद मुझे दिया था में तो बस बैठा हुआ उसके मज़े लेता रहा क्योंकि उसके बूब्स बहुत बड़े थे और वो जब भी घर में अकेली होती थी तो पल्लू नहीं लेती थी और हमेशा ऐसे ही रहती थी.
फिर में कुछ देर उसके गोरे बड़े आकार के बूब्स को देखकर अपने घर पर चला गया. मेरी सोच अब उसके बारे में बिल्कुल बदल गई थी और में उसके सेक्सी बदन के बारे में ना जाने क्या क्या गंदी बातें सोचने लगा, लेकिन थोड़े डर की वजह से में उसके घर पर नहीं जा रहा था.
एक दिन शाम को वो हमारे घर पर आ गई और में उस समय कुर्सी पर बैठा हुआ था और मेरे दोनों पैर ऊपर बेड पर थे वो आकर ऐसे बैठी कि उसने अपनी पूरी गांड मेरे दोनों पैरों के बराबर रख दी जिसकी वजह से मुझे उसकी गांड की गरमी आकार महसूस हो रहा था.
दोस्तों उसने यह जानबूझ कर किया या अंजाने में, मुझे बिल्कुल भी इस बात का पता नहीं था और में फिर थोड़ा टेंशन में आ गया कि मेरा सामान एकदम टाईट हो गया. फिर मैंने अपने पैर थोड़े हिलाए, लेकिन वो तो ऐसे ही बैठी थी जैसे वो ज़मीन पर बैठी है.
फिर मैंने दस मिनट मज़े लेकर पैर हटा दिया उस रात मैंने उसके नाम की एक बार मुठ मारी और ना जाने कब में सो गया मुझे पता ही ना चला और उसके बाद में लगातार उसके घर पर जाने लगा और उसके बूब्स, गांड और सेक्सी बदन को देखने लगा था. दोस्तों में उससे बात भी करता तब भी में अपनी चोर नजर से उसके बूब्स को घूर घूरकर देखता. उसे भी अब सब कुछ पता था कि में क्या देख रहा हूँ? लेकिन वो फिर भी मुझसे कुछ नहीं बोलती और बस थोड़ा सा मुस्कुरा देती.
फिर उसकी इस हरकत से मुझे अब आगे बढ़ने का मौका और हिम्मत मिलने लगी थी और में उसके बारे में सोचकर बहुत खुश था. एक दिन उसने मुझे अपने घर पर बुला लिया और उसने मुझसे कहा कि समीर मुझे यह परदा लगवाना है, क्योंकि मेरा इतनी ऊंचाई पर हाथ नहीं जा रहा है, प्लीज तुम इसे लगा दो, तो मैंने उससे कहा कि ठीक है में इसको अभी लगा देता हूँ, लेकिन आप भी मेरे साथ में मेरी मदद करो और हम साथ में इसको लगाते है.
दोस्तों वो तुरंत मेरी बात मान गई और मैंने उस समय सही मौका देखकर जानबूझ कर उसके करीब 4 से 5 बार बूब्स छुए और बहुत मज़े लिए और जब मुझे लगने लगा कि वो भी अब मुझे कुछ नहीं बोल रही है, शायद उसको मेरा यह सब करना अच्छा लग रहा है तो मैंने जोश में आकर तुरंत पर्दे का काम वहीं पर छोड़कर उसके बूब्स को ज़ोर से दबा दिया, शायद उसको दर्द हुआ होगा और उसके चेहरे की बनावट बदल गई थी.
उसके मुहं से आईईईईई की आवाज बाहर आई जिसको सुनकर अब मेरी गांड फट गई थी और में चुपचाप परदा लगाने लगा और काम खत्म होने के बाद उसने मुझसे पूछा कि तुम अब बिल्कुल फ्री हो? तब उसने मुझसे कहा कि कल तुम दोपहर को एक बजे मेरे पास आ जाना, मुझे तुमसे कुछ काम है और फिर मैंने तुरंत उससे कहा कि हाँ ठीक है में आ जाऊंगा. दोस्तों में बहुत खुश था क्योंकि मैंने आज उनके साथ इतना सब किया, लेकिन उन्होंने मुझे कुछ भी ना कहते हुए मुझे दूसरे दिन अपने घर पर बुला लिया था और फिर में दूसरे दिन बहुत खुश होकर उसके बताए ठीक समय पर उसके घर पर पहुँच गया.
फिर मैंने घर पर पहुंचकर देखा तो वो उस समय घर पर बिल्कुल अकेली थी और घर में एकदम शांति थी, इसलिए मैंने उससे पूछा कि बच्चे कहाँ गये है? तो उसने कहा कि सभी बच्चे स्कूल गए है और उसके पति उस समय नौकरी पर गए हुए थे. फिर में उसके कहने पर तुरंत बैठ गया और उसने आज भी अपनी छाती पर पल्लू नहीं लिया था और में अब उसके लटके हुए गोरे बूब्स को देख रहा था उसके मज़े ले रहा था.
फिर तभी एकदम से उसने मुझे देख लिया इससे पहले कि वो मुझसे कुछ बोलती मैंने उससे पूछ लिया कि क्या काम था आपको मुझसे? तो वो मुझसे बोली कि तुम थोड़ा सा रूको में पहले नहा लेती हूँ उसके बाद बताती हूँ, तुम तब तक थोड़ा सा इंतजार करो और अब वो उठी और सीधी बाथरूम में चली गयी.
फिर में भी पीछे से जाकर दरवाजे के उस छोटे से छेद से उसको नहाते हुए देखने लगा. उसे शायद पहले से ही पता था कि में यह सब करूँगा. अब उसने नहाना शुरू किया और में उसे उसके सेक्सी नंगे बदन को देखने में इतना खो गया था कि मुझे पता ही ना चला उसने एकदम से बाथरूम का दरवाज़ा खोल दिया और फिर उसने ज़ोर से चिल्लाकर मुझसे कहा कि तुम यह क्या कर रहे हो? तो में अचानक से उसको अपने सामने देखकर बहुत ज़्यादा डर गया था और मेरे दिल की धड़कन उस समय बहुत तेज़ हो गयी थी.
मैंने उनसे माफ़ करने के लिए कहा और में अब काँपने लगा था और अब उसने बहुत गुस्से में आकर मुझसे बोला कि में तुम्हारे मम्मी पापा को यह सब बोल दूँगी.
फिर उनके मुहं से यह बात सुनकर में अब रोने लगा और उनसे कहने लगा कि प्लीज ऐसा मत कीजिए और मुझे रोता हुआ देखकर वो हंसने लगी और वो मुझसे बोली कि पागल मुझे तुझसे यही तो काम था तू इतने दिन से मुझे घूर रहा है और वो नंगी बाहर आ गयी.
तभी मेरी जान में जान आ गई उसने मेरे आँसू साफ किए और मुझे किस किया और अचानक से उसने मेरा लंड पकड़ लिया. अब में भी उसे किस करने लगा और बहुत ज़ोर ज़ोर से बूब्स को दबाने लगा. उसकी सिसकियों की आवाज़ बाहर निकलने लगी और उफ्फ्फफ्फ्फ़ आह्ह्हह्ह्ह्ह जिसकी वजह से में अब ज्यादा जोश में आने लगा. तभी उसने मुझे बताया कि कल परदे लगाते समय मैंने उसके बूब्स को कुछ ज्यादा ज़ोर से दबा दिया था, इसलिए उन्हें बहुत दर्द हुआ था और इसलिए उसने अपने चेहरे को ऐसा बना लिया था.
फिर में तो जैसे उसके बूब्स पर टूट पड़ा और में बहुत ज़ोर ज़ोर से दबाने, चूसने लगा, ऐसे कि जैसे उसमें से प्रोटीन आ रहा हो. मैंने दोनों बूब्स को इतना जमकर चूसा कि उन्हें एकदम लाल कर दिया और साथ ही साथ में उसकी प्यासी चूत पर भी हाथ लगा रहा था. उसकी आकार में बड़ी गांड को भी सहलाते सहलाते उंगली डाल देता और किस करते करते उसने मेरे कपड़े उतार दिए और वो अब बिना बोले ही नीचे बैठकर लंड को चूसने लगी.
उसने करीब पांच मिनट ही चूसा होगा कि मेरा वीर्य निकल गया और में उसके मुहं में झड़ गया और पूरा वीर्य उसके मुहं में डाल दिया, लेकिन उसने तुरंत उसको अपने मुहं से बाहर निकाल दिया और फिर चूसने लगी वो मेरा लंबा मोटा लंड बहुत अच्छे से चूस रही थी.
फिर कुछ देर बाद एक बार फिर से मेरा लंड तन गया और जैसे ही मेरा लंड खड़ा हुआ तो उसने मुझे इशारा किया कि में भी अब उसकी चूत को चाटकर उसे वो मज़े दूँ, लेकिन मैंने उससे साफ मना कर दिया, तो उसने कहा कि प्लीज अभी कुछ देर पहले मैंने भी तो तुम्हारा लंड चूसा है प्लीज एक बार ऐसा कर दो और फिर मैंने उसके बहुत बार कहने पर उससे कहा कि ठीक है.
अब वो मेरे सामने तुरंत घोड़ी बन गई और मुझसे बोली कि लो अब चाटो और में चाटने लगा. दोस्तों सच पूछो मुझे बहुत अजीब लग रहा था, क्योंकि उसकी बदबू भी बहुत अज़ीब थी, लेकिन पहली बार सेक्स करने का मौका भी मुझे आंटी ने ही दिया था, इसलिए मुझे वो सब करना पड़ा और मैंने जैसे ही उनकी गीली, गरम, प्यासी चूत को चाटना शुरू किया उनके मुहं से मोन करने की आवाजे बाहर निकलने लगी, वो बिल्कुल गरम हो चुकी थी उफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्हह् हाँ थोड़ा और अंदर डाल दे आईईईई में लगातार चूसता चाटता रहा और वो मेरा सर अपनी चूत पर दबाकर मेरी जीभ को पूरा अंदर तक घुसाने लगी थी और करीब दस मिनट बाद वो झड़ गई और में तुरंत पीछे हट गया और उन्होंने झट से वापस मेरा सर पकड़कर वहीं पर घुसा दिया और मुझे उसकी इन हरकतों से ऐसा लग रहा था कि उनको मुझसे चुदवाना नहीं है, खाली अपनी चूत को चटवाना है और मैंने ऐसा करीब बीस मिनट तक किया और वो दो बार झड़ गयी.
अब मेरा मुँह चूसते चाटते दर्द होने लगा था और मैंने कहा कि बस में इससे ज्यादा नहीं कर सकता और फिर वो मुझसे बोली कि चल अब डाल दे अपना लंड मेरी चूत में और मुझे अपने लंड की ताकत दिखा. अब में उसके मुहं से यह बात सुनकर बहुत खुश था और फिर मैंने जैसे ही लंड को चूत के मुहं पर रखकर एक ज़ोर का धक्का देकर अंदर डाल तो वो सिसकियाँ लेने लगी उसस्श उईईईइ आह्ह्हह्ह्ह्ह. फिर में उनको बहुत ज़ोर ज़ोर से धक्के मार रहा था, जिसकी वजह से फच फच की आवाजें आ रही थी और हम दोनों पूरे जोश में आकर चुदाई में लगे रहे करीब 12 या 15 मिनट में मेरा काम हो गया और मैंने अपना लंड चूत से बाहर निकालकर आंटी की गांड पर अपना पूरा वीर्य गिरा दिया और फिर लेट गया.
अब आंटी भी एकदम मेरे पास मेरे ऊपर अपने बड़े बड़े बूब्स लेकर लेट गयी और ज्यादा थकने की वजह से मेरी तो आँख ही लग गयी. मुझे पता ही नहीं चला और करीब आधे घंटे में मेरी आँख खुली तब मैंने देखा कि वो अब मेरे लंड से खेल रही है और मेरा लंड एकदम खड़ा हुआ उसके मुँह में जा रहा है. उसने जैसे ही मुझे देखा तो वो उठी और तुरंत बैठ गयी और उस पर उछलने कूदने लगी और मोन करने लगी.
फिर पांच मिनट के बाद मेरे दिमाग़ में ख्याल आया कि अब में उसकी चूत नहीं गांड मारूँगा और मैंने उसको रोका तो वो चकित हो गयी कि क्या हो गया? मैंने उससे कहा कि मुझे गांड मारनी है और वो मेरी बात सुनकर हंस पड़ी और उसने मुझसे कहा कि तुम्हे जो मारना है मार लो मेरी जान, में तुमसे बहुत प्यार करती हूँ और तुम सच में बहुत अच्छे हो, में आज के बाद तुमसे कभी भी किसी भी काम के लिए मना नहीं कर सकती.
फिर मैंने उसकी गांड के छेद पर बहुत सारा थूका और मैंने उससे अपने लंड पर तेल लगाने को कहा. उसने बहुत अच्छे से मेरे लंड पर तेल लगाया और मेरे लंड की मालिश की और फिर वो डॉगी स्टाइल में हो गयी और बोली कि ले मार ले.
दोस्तों मेरा तो यह पहला अनुभव था तो मैंने निशाना लगाया और एक ज़ोर का झटका मारा, लेकिन लंड फिसलता हुआ उसकी गांड के बदले उसकी चूत में चला गया, वो उस दर्द से तुरंत उछल गयी और बोली कि समीर मुझे पता नहीं था कि तुझमें इतना दम है, क्या आज मेरी गांड को तुम फाड़ ही डालोगे, में क्या कहीं भागी जा रही हूँ?
में मुस्कुरा दिया और बोला कि ठीक है और मैंने लंड को चूत से बाहर निकाला और अपने एक हाथ से पकड़ कर हल्का सा अंदर किया जिसकी वजह से उसकी साँसें तेज़ हो गयी और जैसे ही लंड हल्का सा उसकी गांड में अंदर हुआ तो उसको लगा कि में धीरे करूँगा, लेकिन मैंने एकदम ज़ोर से झटका मार दिया और मेरा पूरा लंड उसकी गांड के अंदर चला गया.
उसने बहुत ज़ोर से चीख मारी औच्च्च आईईईई माँ उफफ्फ्फ्फ़ मर गई, साले कुत्ते कमीने थोड़ा धीरे धीरे कर आईईईईइ और वो मेरी तरफ मुहं करके मुझे गुस्से से देखने लगी. में हंसने लगा और उससे बोला कि तुम अब इन सबकी आदत डाल लो और अब में लगातार जोरदार धक्के देकर उसकी चुदाई करने लगा. वो कुछ देर चीखती चिल्लाती रही, लेकिन बाद में जोश में आकर मेरे साथ मज़े लेने लगी.
फिर करीब 15 से 20 मिनट में मेरा वीर्य निकल गया और जब मैंने अपना लंड गांड से बाहर निकाला तो उसने मुझसे धन्यवाद बोला और कहा कि तुमने आज मुझे वो सुख संतुष्टि दी है जिसके लिए में बहुत समय से तरस रही थी तुम बहुत अच्छी चुदाई करते हो. में कब से ऐसी चुदाई अपने पति से चाहती थी, लेकिन मुझे मिल ना सकी और आज अभी इस समय से में तुम्हारी हूँ और तुम अब आज से मुझे जैसे चाहो चोद सकते हो. में तुमसे कभी भी मना नहीं करूंगी आज से में बस तुम्हारी हूँ. अब में और वो उठे साथ में बाथरूम में चले गए और नहाए.
फिर उससे मैंने कहा कि एक बार और तुम मेरा लंड चूस दो. फिर उसने तुरंत वैसा ही किया और बहुत अच्छे से किया. उसके बाद हम दोनों नहाकर बाथरूम से बाहर निकले और अपने अपने कपड़े पहने और फिर में अपने घर पर आ गया. तब तक चार बज गये थे. दोस्तों सच पूछो तो में मन ही मन बहुत खुश था, क्योंकि वो मेरा पहला सेक्स अनुभव था जिसमें मैंने आंटी को अपनी पहली चुदाई से बहुत खुश किया और वो मज़ा मुझे भी मिला.
उस दिन के बाद भी मैंने अपनी आंटी को बहुत बार चोदा और हम दोनों ने कई बार बहुत जमकर सेक्स के मज़े लिए, वो हर बार मेरी चुदाई से संतुष्ट हुई और मैंने उस बात का फायदा उठाकर उनकी चूत गांड मुहं के बहुत मज़े लिए.
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भाई की साली की चूत में लंड

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम वसीम है और मेरी उम्र 23 साल है. में हैदराबाद का रहने वाला हूँ और आज में आपको अपने पहले सेक्स के बारे में बताने जा रहा हूँ, जब में 12वीं क्लास में था और गर्मी की छुट्टियों में अपने मामा के यहाँ रहने के लिए गया हुआ था.
मेरे मामा के 3 लड़के है, जिनमें से बड़े दो लड़को की शादी हो चुकी है और तीसरा उन कुंवारा था और मेरे बीच वाले भाई की साली भी आई हुई थी, वो मुझसे 2 साल बड़ी थी और हाईट 5 फुट 3 इंच और मस्त मोटे बूब्स, मस्त फिगर, बड़ी-बड़ी आँखे और लंबे लंबे बाल. उस टाईम मुझे सेक्स के बारे में बातें करना ही आता था, लेकिन इसका मज़ा चखा नहीं था. वहां हम सब कई लोग हो गये थे और हम सब छत पर सोते थे. एक तरफ सारे बच्चे उसके बाद सीमा और फिर में और लास्ट में मेरा भाई. सीमा को देर तक सोने की आदत थी.
फिर एक दिन में करीब 7 बजे उठा और देखा तो सीमा सो रही थी और सब लोग नीचे चले गये थे. अब सीमा करवट लेकर सो रही थी और उसका सूट चूतड़ों से ऊपर उठा हुआ था, उसकी सलवार फटी हुई थी. फिर मैंने उसकी सलवार के फटे कपड़े को हटाकर ऊपर उठाया, तो वो अंदर अंडरवेयर नहीं पहनती थी.
फिर मैंने उसके चूतड़ को देखा और कपड़ा हटाकर चूतड़ पर किस किया और अपना हाथ लगाने लगा. फिर वो सोती रही और उसने कोई क्रिया नहीं की और फिर उसके बाद में नीचे आ गया. फिर अगली रात जब हम लोग रात को सोए तो मुझे नींद नहीं आई और में उसी के बारे में सोच रहा था. फिर करीब 1 घंटे के बाद में उठा और अपना हाथ उसके बूब्स पर रख दिया और धीरे-धीरे दबाने लगा, तो उसने कुछ नहीं कहा.
फिर थोड़ी देर के बाद उसने करवट बदलकर मुझसे मुँह फैर लिया तो मैंने उसका सूट उठाकर उसके चूतड़ों के बीच में अपना लंड निकालकर डाल दिया, तो उसने फिर भी कुछ नहीं कहा. फिर मैंने अपने लंड को लगाए-लगाए पीछे से उसके बूब्स को पकड़ा और दबाने लगा. फिर आधे घंटे तक मज़ा लेने के बाद में बाथरूम में गया और मुठ मारकर सो गया.
अगले दिन सोने के आधे घंटे के बाद वो मेरे पैर पर अपने पैर से खुजाने लगी तो में समझ गया कि वो फिर से पिछले दिन वाले काम के लिए तैयार है, तो में फिर से शुरू हो गया और हम रोजाना ऐसे ही करते रहे. फिर एक दिन उसने मेरा लंड पकड़कर पीछे से हटा दिया और मेरा हाथ भी अपने बूब्स से हटा दिया. तो में डर गया कि कहीं ये किसी को कुछ कह ना दे, लेकिन उसने किसी से कुछ नहीं कहा और सो गयी.
फिर मैंने अगले दिन उससे पूछा कि सीमा मुझसे नाराज़ हो क्या? तो उसने कहा कि क्यों? तो मैंने कहा कि रात को तुम मेरा हाथ क्यों हटा रही थी? तो उसने कहा कि तुम रोजाना ऐसे ही मेरे साथ सलवार के बाहर से ही लगाकर कर लेते हो और कभी सच में तो करते ही नहीं. फिर मैंने कहा कि में तुम्हारे साथ सच में कर तो दूँ, लेकिन रात को सोते हुए अगर कोई जाग गया तो प्रोब्लम हो जाएगी. फिर उसने कहा कि कहीं चुपके से कर लेते है और फिर हम दोनों रात को वैसे ही सेक्स करते रहे और अकेलेपन का मौका देखने लगे.
एक दिन सभी लोग और बच्चे भाई के लिए लड़की देखने के लिए गये हुए थे और सारे भाई ऑफिस गये हुए थे. अब में और सीमा घर पर अकेले थे और हमे मौका मिल गया था. फिर सब लोगों के जाते ही मैंने उसको अपनी गोद में उठा लिया और भाई के बेडरूम में ले जाकर बेड पर गिरा दिया और ऊपर से में भी उसके ऊपर लेट गया और उसको किस करने लगा.
अब किस करने के साथ-साथ मेरा एक हाथ उसकी कमर में था और अपने एक हाथ से उसके बूब्स को दबा रहा था. फिर उसके होंठ चूसने के बाद मैंने उसकी सलवार के अंदर अपना हाथ डाल दिया और उसकी चूत पर अपना हाथ रख दिया. फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उसकी सलवार का नाड़ा पकड़कर खींच दिया और उसकी सलवार को नीचे करने लगा.
फिर वो बोली कि रूको सारे कपड़े उतार देते है और फिर हम दोनों बिल्कुल नंगे हो गये. अब में उसकी जवानी देखकर हैरान रह गया और उसके बूब्स को चूसने लगा. अब उसने मेरा लंड पकड़ रखा था और में उसके बूब्स चूस रहा था. फिर मैंने उसकी चूत में अपना लंड घुसाना चाहा तो उसने अपने आप ही मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया और मेरे चूतड़ पकड़ लिए और बोली कि अंदर डालो.
फिर मैंने धीरे-धीरे करना स्टार्ट किया तो मेरे लंड का सिर्फ़ ऊपर का हिस्सा ही अंदर गया. तो वो कहने लगी कि थोड़ा और तेज धक्का मारो, तो मैंने एक तेज का धक्का मारा और मेरा आधा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया और वो आअहह आह करने लगी.
फिर मैंने उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और उसके होंठो को चूसता रहा और नीचे से अपना लंड उसकी चूत में घुसाता रहा. अब में लगातार उसकी चूत में चुदाई कर रहा था और वो आहहहहह मसस्स आहह कर रही थी. फिर थोड़ी देर के बाद मेरा वीर्य निकलने वाला था तो मैंने अपना लंड उसकी चूत में से बाहर निकाल लिया और उसके पेट पर सारा वीर्य छोड़ दिया और इसी तरह हमने उस दिन 3 बार सेक्स किया और खूब मजे लिए.
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प्रोफेसर की चुदक्कड़ बीवी

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राकेश है और में गुजरात के अहमदाबाद शहर में रहता हूँ. में शादीशुदा हूँ और मेरे दो बेटे भी है. दोस्तों आज में जो कहानी आप लोगों को सुनाने जा रहा हूँ, यह घटना मेरे साथ उस समय घटी जब में एक बहुत बड़े कॉलेज में अपनी दूसरे साल की पढ़ाई कर रहा था और मैंने तब तक सेक्स के बारे में सिर्फ़ सुना ही था और मैंने सेक्स करते हुए देखा था, लेकिन वो सब मैंने ब्लूफिल्म में देखा और कभी भी सच में किसी को सेक्स करते हुए नहीं देखा था और आज में आप सभी चाहने वालों को अपना एक सच्चा सेक्स अनुभव बताने यहाँ पर आया हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि उसको पढ़कर आप सभी को बहुत मज़ा आएगा.
दोस्तों मेरी लम्बाई 5.8 इंच है और मेरा बदन दिखने में एकदम ठीक-ठाक है और में पढ़ाई में भी बहुत अच्छा था, उस समय मेरे कॉलेज के एक प्रोफेसर मिस्टर पाटिल जो कि महाराष्ट्र के रहने वाले थे और मेरी उनसे शुरू से ही बहुत अच्छी पटती थी और वो हमेशा मेरी पढ़ाई के बारे में मदद किया करते थे और में उनके हर एक छोटे बड़े कामों को कर दिया करता था उनसे मेरी बहुत ज्यादा बातें और कभी कभी हंसी मजाक भी होता था और दोस्तों उनके परिवार में उनके अलावा सिर्फ़ उनकी पत्नी ही उनके साथ रहती थी, वो दोनों अपने उस जीवन में बड़े खुश थे.
दोस्तों यहाँ से शुरू होती है मेरी वो कहानी, उस दिन जब में अपने कॉलेज पहुँचा तो कॉरिडर में मुझे मिस्टर पाटिल सर मिल गए और उनको देखकर मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे वो किसी को ढूंढ रहे थे, मैंने नज़दीक जाकर उनसे गुड मॉर्निंग किया. तभी वो तुरंत मुझे देखकर खुश होकर मेरी तरफ देखने लगे और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि राकेश क्या तुम मेरा एक काम करोगे? तो मैंने तुरंत अपना सर हिलाकर उनसे कहा कि हाँ बताए सर मुझे क्या करना है? तभी वो मुझसे बोले कि यह जरूरी कुछ पेपर तुम मेरी पत्नी को मेरे घर पर जाकर दे देना, में यहाँ पर मीटिंग होने की वजह से नहीं जा सकता और यह उसको देना बहुत ज़रूरी है.
फिर मैंने उनकी पूरी बात सुनकर तुरंत हाँ कहा और फिर में सर के घर की तरफ चल दिया जो कि नज़दीक ही था और फिर मैंने उनके घर पर पहुंचकर दरवाजे पर लगी घंटी को बजाया और थोड़ी ही देर में दरवाजा खुला और तभी मेरा मुहं खुला का खुला रह गया क्योंकि वो नजारा देखकर मुझे ऐसा लगा था जैसे कोई अप्सरा मेरे सामने खड़ी हो और उनकी सुंदरता की तारीफ करने के लिए मेरे पास कोई भी शब्द नहीं थे और उनको देखकर मेरे मुहं से कोई आवाज़ नहीं निकल रही थी. में सिर्फ़ उनको अपनी चकित नजरों से देखता ही रह गया.
मुझे ऐसे देखने और कुछ भी ना बोलने से वो दरवाजा बंद करने लगी और तभी में अपने होश संभालते हुए बोला कि एक मिनट मेडम मुझे पाटिल सर ने भेजा है आपको यह कवर देने के लिए. तब उन्होंने हंसते हुए दरवाजा दोबारा खोल दिया और फिर उन्होंने मुझे अपने घर के अंदर बुलाया और वो मेरी तरफ देखने लगी. में शरम के मारे नीचे देखने लगा तो उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हारा नाम क्या है? मैंने अपना नाम उनको बताया तो मेडम ने मुझे बैठने के लिए बोला और में बैठ गया.
फिर उसके बाद वो मेरे लिए पानी लेने रसोईघर की तरफ चली गयी और में एक बार फिर से मेडम को पीछे से देखने लगा वाह क्या मस्त फिगर था उनका एकदम गोल सही आकार के आकर्षक बूब्स, उनकी वो मादक आँखें, उनके गोरे गाल, उनके रसीले होंठ, उनकी उभरी हुई टाइट गांड थी, वो साड़ी में बहुत सुंदर लग रही थी और उनको देखकर मेरा लंड कुछ ही देर बाद पेंट के अंदर टाइट होने लगा था और मेडम जब वापस आई तो मुझे बिल्कुल भी पता नहीं कि उनके दिमाग़ क्या चल रहा था? वो मेरे पास आकर मुझसे बोली राकेश आपके पास थोड़ा समय हो तो आप रुक जाए तो में यह फॉर्म आपको भरकर दे देती हूँ आप प्लीज सर को दे देना, तो मैंने कहा कि हाँ ठीक मेडम में जब तक आप कहें यहीं पर रुक जाता हूँ और फिर वो मेरे पास सोफे पर आकर बैठ गयी और उसके बाद वो नीचे झुककर वो फॉर्म भरने लगी.
उन्होंने उस समय गहरे गले का ब्लाउज पहन रखा था और उसकी वजह से और उनके इतना ज्यादा नीचे झुककर काम करने की वजह से उनके गोरे गोरे बूब्स के बीच की सुंदर दरार मुझे बहुत अच्छी तरह से दिख रही थी, जिसकी वजह से मेरा पूरा ध्यान उनके गोरे सेक्सी जिस्म पर था और में उनकी मादक खुशबु में जैसे खो सा गया था. मेरी नजर अब उनके बदन से हटने को तैयार ही नहीं थी और कुछ देर बाद यह बात मेडम ने भी देख ली और उन्होंने मुझे हल्का सा स्माइल देते हुए वो पेपर भरकर मेरे हाथ में दे दिए.
दोस्तों में एकदम सच कहता हूँ कि में किसी भी शब्दों में आप लोगों को बता नहीं सकता कि में तो उनके गोरे मुलायम हाथ का स्पर्श अपने हाथ पर पाते ही जैसे बिल्कुल पागल हो गया और में जब उठकर वहां से जाने लगा तो मेडम मुझसे बोली कि राकेश अगर तुम्हारे पास टाइम हो तो तुम मुझसे मिलने आ जाया करो, वैसे भी में पूरे दिन यहाँ पर अकेली बोर हो जाती हूँ.
दोस्तों मेरे लिए यह शब्द मानो एक तरह का खुला न्योता हो गया और मैंने तुरंत उनकी बात पर हाँ कह दिया और मैंने उनका फोन नंबर ले लिया और उसके बाद में वहां से चला आया, लेकिन में बस उनके ही सपने देखता रहा. मैंने उनके बारे में बहुत कुछ सोचा और फिर उसके दूसरे दिन मैंने बहुत हिम्मत करके उनको फोन किया तो मेडम ने मुझे तुरंत ही अपने घर पर बुला लिया और में भी उनके कहने पर तुरंत ही उनके घर पर चला गया. घर पर जाते ही मेडम ने हंसते हुए मुझे अंदर आने के लिए कहा और बैठने का इशारा किया तो में उनके कहने पर बैठ गया और उन्होंने मुझसे पूछा कि राकेश तुम क्या लेना पसंद करोगे ठंडा या गरम?
में उनकी बात का मतलब पूरी तरह से समझ गया और अब में उनसे बोला कि कुछ गरम मिल जाए तो मज़ा आ जाएगा. फिर मेरी बात को सुनकर मेडम ने मेरी तरफ हंसकर कहा कि थोड़ा सा इंतजार करो में अभी देती हूँ, उस समय मेरी नज़र मेडम के बूब्स पर थी क्योंकि उन्होंने आज एकदम टाइट टॉप और स्कर्ट पहन रखी थी उसमे वो और भी ज्यादा हॉट सेक्सी लग रही थी.
फिर वो मुझसे इधर उधर की बातें करने लगी, लेकिन में तो सिर्फ़ मेडम को ही देख रहा था और मेरा पूरा ध्यान उनके उस मादक जिस्म पर था जिसकी चुदाई के सपने में एक दिन पहले ही देख चुका था और अब मुझे कैसे भी करके उसको पाना था और उसकी जमकर चुदाई करनी थी.
फिर कुछ ही देर बाद मेरे शरीर के अंदर पता नहीं कुछ कुछ होने लगा था जिसकी वजह से मेरा लंड घड़ी घड़ी पेंट में हलचल कर रहा था वो अपने असली आकार में आकर तनकर खड़ा था और यह सब मेडम भी धीरे से अपनी चोर नजर से देख रही थी. अब में मन ही मन में सोच रहा था कि कैसे में मेडम की चुदाई करूं? उस काम को करने के लिए में उनसे क्या कहूँ? तभी मेडम ने मुझसे पूछ लिया क्यों राकेश क्या तेरी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं? तो मैंने हंसते हुए अपना जवाब उनको दिया कि मुझे अभी तक कोई आप जैसी मिली ही नहीं जिसको में अपनी गर्लफ्रेंड बना सकता.
फिर वो मेरी बात को सुनकर हंस पड़ी और तुरंत वो बोली कि हाँ ठीक है आज से में तेरी गर्लफ्रेंड बोल क्या तू तैयार है? दोस्तों में उनके मुहं से यह बात सुनकर एकदम से चोंक पड़ा और मुझे उनके कहे शब्द और मेरे कानों पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हुआ कि वो आगे होकर मुझसे यह सब क्या कह रही है और तभी वो मेरी तरफ देखकर हंसने लगी और मुझसे पूछने लगी क्यों क्या हुआ तुमने मुझे तुम्हारा कोई भी जवाब नहीं दिया, क्या तुम्हे में अच्छी नहीं लगी? फिर में उनसे बोला कि आपको कौन पागल ना कहेगा? लेकिन मेरी आपसे एक शर्त है.
फिर मेडम मुझसे पूछने लगी कि वो क्या? तब मैंने उनसे बहुत हिम्मत करके कह दिया कि मेडम आपको मेरे साथ वो सब करना पड़ेगा जो काम हमेशा एक बॉयफ्रेंड अपनी गर्लफ्रेंड के साथ करता है. फिर वो मुझसे बिल्कुल अंजान बनकर पूछने लगी और बोली कि राकेश में तुम्हारे कहने का मतलब नहीं समझी. अब मैंने उनसे पूछा कि क्या में आपको एक किस कर सकता हूँ? वो मुस्कुराकर बोली कि क्यों नहीं हाँ कर सकते हो उनके चेहरे से मुझे साफ साफ पता चल रहा था कि वो मुझसे अब क्या चाहती है उनके मन में क्या क्या चल रहा है?
दोस्तों उनके मुहं से यह बात सुनकर मेरी तो ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा और मैंने बिल्कुल भी समय ना गवाते हुएँ आगे बढ़कर मेडम को अपने और भी पास खींचकर उनके होंठो पर एक हल्का सा लीप किस ले लिया और में वापस उनसे दूर हो गया.
वो सब करना मेरे लिए तो स्वर्ग की सेर करने जैसा था, क्योंकि वो सब मेरा पहला अनुभव था और मेरा लंड अब मेरी पेंट में बिल्कुल पागल हो रहा था. में जाने क्या क्या सोचने लगी. तभी मेडम मुझसे बोली क्यों बस इतना ही? इसके आगे क्या तुम कुछ भी नहीं करोगे? लो कर लो बात फिर क्या था? और फिर वो खुद ही उठकर मेरी गोद में आकर बैठ गयी और अब वो मुझसे अपनी शरारती हंसी के साथ पूछने लगी कि बोलो और क्या करते है गर्लफ्रेंड के साथ मुझे बताओ?
फिर मैंने उनकी बात का कोई भी जवाब नहीं दिया और में मेडम को किस करने लगा. उनके मस्त और नाज़ुक स्तन मेरी छाती को स्पर्श करने लगे और में एकदम उत्तेजित हो गया और एक हाथ से में उनके स्तन को सहलाने लगा और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा, वो मेरी बाहों में अपने पूरे बदन को मेरे लिए ढीला छोड़ने लगी और उनकी कामुकता को देखकर में कुछ ज्यादा ही जोश में आकर अपने हाथ उनके बूब्स पर चलाने लगा और उनकी नरम गुलाबी होंठो को चूसने लगा और अपनी जीभ को उनके मुहं में अंदर तक डालकर घुमाने लगा और अब मेडम भी पूरे जोश में आ चुकी थी और उनके मुहं से अह्ह्ह्हह्ह उफ्फ्फफ्फ्फ़ की आवाज़ें निकलने लगी थी. फिर कुछ देर बाद मेरा दूसरा हाथ मेडम की गांड पर अपने आप फिरने लगा.
दोस्तों तब मैंने महसूस किया कि मेडम की गांड बड़ी मस्त एकदम सुडोल थी और फिर मैंने किस करते हुए अपना एक हाथ मेडम के कपड़ो के अंदर डाल दिया, लेकिन तभी अचानक से मुझे एक जोरदार झटका लगा और मैंने महसूस किया कि मेडम ने ब्रा नहीं पहनी थी उससे साफ पता चलता था कि उनको भी मेरे साथ यह सब करना था और वो अपनी चुदाई मेरे साथ करने के लिए पहले से ही तैयार थी और इसलिए ही उन्होंने मुझसे फोन पर उनके घर पर आ जाने के लिए कहा और यह सभी बातें मन ही मन सोचकर में बहुत खुश हुआ और मेरे अंदर अब बहुत हिम्मत आ चुकी थी.
फिर मैंने महसूस किया कि मेरे हाथ का स्पर्श अपने बूब्स पर पाते ही मेडम जैसे बिल्कुल पागल हो गई थी, वो कहने लगी ओह्ह्ह्हह आह्ह्हह्ह प्लीज इन्हें और ज़ोर से दबाओ. में कई दिनों से इस काम के लिए तड़प रही हूँ ओहह्ह्ह्हह प्लीज तुम मुझे अब और ना तड़पाओ, मुझे वो सुख वो मज़ा तुम आज मुझे दे दो जिसके लिए मैंने तुम्हे यहाँ पर बुलाया है, प्लीज मेरी यह इच्छा आज तुम पूरी कर दो और यह बात कहते हुए उन्होंने अपने कपड़े तुरंत उतार दिए और अब मेरे सामने मस्त गोरे गोरे दो स्तन जिन पर हल्की गुलाबी निप्पल तनकर खड़ी थी.
अब मैंने भी ज्यादा टाइम खराब किए बिना में उन पर टूट पड़ा और मैंने सीधे एक बूब्स को अपने मुहं में ले लिए और चूसने लगा और मेरे दोनों हाथ अब मेडम की गांड और जाँघ पर फिरने लगे. फिर कुछ देर बाद मैंने उसकी स्कर्ट को पूरा ऊपर उठा दिया और अब में अपना एक हाथ उसकी जाँघ पर रगड़ने लगा और सहलाने लगा और धीरे धीरे मेरे हाथ अब मेडम की नंगी चूत की तरफ बढ़ने लगे, क्योंकि मेडम ने कपड़ो के नीचे पेंटी भी नहीं पहनी थी और वो अपनी चुदाई के सपने लेकर मेरा इंतजार कर रही थी.
दोस्तों वाह क्या मस्त चूत थी उनकी, में उसको देखकर अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर सका में झट से नीचे झुक गया और उनकी प्यासी चूत को चाटने लगा मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आ रहा था और अब वो लगातार मोन कर रही थी अब वो अपनी चूत को अपने एक हाथ से फैला रही थी और दूसरे हाथ से मेरे सर को अपनी चूत पर दबा रही थी में उनके जोश को देखकर पागलों की तरह चूत को पूरा अंदर तक चाट और चूस रहा था और वो आहहहह ऊईईईईई हाँ प्लीज थोड़ा और चाटो मज़ा आ गया करने लगी थी और करीब पांच मिनट चूत को चूसने के बाद मेडम ने अपनी चूत का पानी मेरे मुहं पर छोड़ दिया और में वो पूरा पानी पी गया, वो अब बिल्कुल निढाल होकर पड़ी हुई थी.
कुछ देर बाद मैंने अपना लंड मेडम की चूत के मुहं पर रख दिया और धीरे से धक्का लगाया. चूत गीली होने की वजह से मेरा थोड़ा लंड फिसलकर पूरा अंदर चला गया और मेडम के मुहं से अहहह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़ माँ मर गई निकल गया. फिर मैंने कुछ देर रुकने के बाद एक और ज़ोर का धक्का लगा दिया, जिसकी वजह से उनकी एक जोरदार चीखने की आवाज के साथ मेरा पूरा लंड मेडम की चूत को चीरकर अंदर चला गया और मेडम ने मुझे ज़ोर से अपनी बाहों में जकड़ लिया और तब मैंने देखा कि उनकी आखों से आंसू बाहर आने लगे थे, वो उस दर्द से छटपटा रही.
फिर में कुछ देर रुक गया और जब वो शांत हुई तब में मेडम को करीब 15 मिनट तक लगातार ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदता रहा. अब मेडम का दर्द कम होने के बाद वो मुझसे बोल रही थी हाँ और चोदो मुझे आअहह उफ्फ्फ्फ़ वाह मज़ा आ गया. तुम बहुत अच्छी तरह से चोदते हो उईईईइ हाँ थोड़ा और अंदर करो. में ऐसी चुदाई इस सुख को पाने के लिए कितने दिनों से तड़प रही हूँ. आज राकेश तुम मेरी पूरी आग को बुझा दो, तुम मुझे जमकर चोदो.
फिर में ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा और मेडम ज़ोर ज़ोर से आअहह स्स्ईईईइ कर रही थी और अब करीब दस मिनट के बाद में झड़ने वाला था, इसलिए मैंने मेडम को पूछा कि में अपना वीर्य कहाँ डालूं? तो मेडम ने मुझसे कहा कि तुम अपना पूरा माल मेरी चूत में ही डाल दो. फिर में ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा और कुछ देर धक्के देने के बाद मैंने महसूस किया कि मेडम ने अपना पानी छोड़ दिया था और फिर मैंने अपने धक्को की स्पीड को भी बढ़ा दिया और करीब दस मिनट के बाद मैंने अपना भी पूरा वीर्य मेडम की चूत में ही निकाल दिया.
तब मैंने देखा कि मेडम अपनी इस चुदाई से बहुत खुश थी और उन्होंने मुझे किस किया और कहा कि जानू आज से तुम मुझे जब चाहो चोद सकते हो, में आज से बस तुम्हारी हूँ, तुमने मुझे आज वो मज़े दिए जिसके लिए में बहुत समय से तरस रही थी, तुम बहुत अच्छे हो तुमने मुझे वो मज़ा दिया जिसको में अपनी पति से चाहती थी, लेकिन वो इसके लिए तैयार बहुत कम तैयार होते है उनको चुदाई करने का ज्यादा शौक नहीं है.
फिर उसके बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहने में बहुत खुश होकर उनको कुछ देर चूमकर अपने घर पर आ गया, लेकिन यह उनके साथ मेरी पहली चुदाई होने के साथ मेरा उनके साथ हमेशा का काम हो गया. मैंने उनको बहुत बार चोदा और जब वो मुझे फोन करके बुलाती तो में ख़ुशी ख़ुशी चला जाता और बहुत मज़े करता.
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पापा के लंड से मेरी चूत का संगम

हैल्लो दोस्तों, में पायल मिश्रा में कानपुर से हूँ और आज में आप सभी के सामने अपनी एक सच्ची अनोखी चुदाई की कहानी लेकर आई हूँ और यह मेरा पहला सच्चा सेक्स अनुभव है, जिसमें मैंने पहली बार अपने पापा से अपनी चुदाई के मज़े लिए, वैसे में पिछले कुछ सालों से सेक्सी कहानियाँ पढ़ती आ रही हूँ और इसलिए ही मैंने बहुत मेहनत और हिम्मत करके अपनी भी यह कहानी आप लोगों तक पहुँचाने के बारे में बहुत बार विचार किया और आज उसको आप तक पहुंचा भी दिया है और में उम्मीद करती हूँ कि यह आप लोगों को जरुर पसंद आएगी. दोस्तों वैसे यह घटना करीब तीन महीने पुरानी है और में अपने घर पर अकेली रहती हूँ, क्योंकि मेरी मम्मी मेरे बड़े भाई के साथ अमेरिका में रहती है, इसलिए घर पर पापा और में ही रहती हूँ. पापा पूरा दिन उनके ऑफिस में रहते है और हर रात को वो बहुत देरी से आते है, इसलिए में ज्यादातर समय अपने घर पर अकेली रहती हूँ. मेरे भाई की शादी करीब एक साल पहले हो चुकी है वो वहां पर अपनी बीवी और मेरी माँ के साथ रहता है और मेरी भाभी एक हाउस वाईफ है.
दोस्तों यह उस रात की बात है जब कानपुर में 24 घंटे से लाइट नहीं आ रही थी और शायद वो अमावस्या की रात थी, वो बिल्कुल काली और बादलो से घिरी हुए जिसके बीच बीच में बादल भी गरज रहे थे. दोस्तों वैसे तो मेरे पापा हर दिन शाम के करीब 6 बजे तक घर पर आ जाते है, लेकिन ना जाने क्यों उस रात के दस बज रहे थे और मेरे पापा का कहीं भी कोई पता नहीं था, उनका मोबाइल भी बंद था और मेरी बहुत कोशिश के बाद भी उनका कुछ पता नहीं चल पा रहा था. मैंने उसने ऑफिस में भी फोन किया तो कोई वहां पर भी फोन उठा नहीं रहा था. में बहुत परेशान थी और बादलों की उन जोरदार घड़घड़ाहट की वजह से मेरा मन बार बार कांप उठता और बाहर बड़ी ग़ज़ब की बरसात हो रही थी और बार बार बदल ज़ोर ज़ोर से आवाज करके मुझे डरा रहे थे और अब दस बजने को थे कि तभी अचनाक दरवाजे पर दस्तक हुई. फिर मैंने खिड़की खोलकर देखा तो दरवाजे पर एक रिक्शे वाला खड़ा हुआ था और में उसको देखकर डर गयी और अब में मन में भगवान को याद करने लगी और सोचने लगी कि यह कौन है?
फिर टॉर्च की रोशनी में देखा तो बाहर मेरे पापा भी थे और एक रिक्शे वाला उन्हे अपने रिक्शे से उतारने की कोशिश कर रहा था. फिर मैंने आगे बढ़कर दरवाजा खोला और उस रिक्शे से अपने पापा को उतारा, वो बिल्कुल भीगे हुए थे और बहुत नशे में थे. में उनको इस हालत में देखकर बड़ी हैरान थी, क्योंकि मेरे पापा को इससे पहले मैंने कभी भी इस हालत में नहीं देखा था. फिर में पापा को अपने साथ लेकर अंदर आ गयी और मैंने उनको अपने कमरे में बैठा दिया. उसके बाद मैंने एक एक करके उनके गीले कपड़े उतारने शुरू किए शर्ट और बनियान को उतारकर मैंने उनके बदन को टावल से रगड़ रगड़कर सूखा दिया और अचानक उनकी पेंट के चेन भी खोल दी, लेकिन वो इतने ज्यादा नशे में थे कि उनको पता ही नहीं चल रहा था कि में क्या कर रही हूँ. उनकी चेन खोलने के बाद मैंने पेंट को नीचे उतार दिया तो मैंने देखा कि उनका अंडरवियर भी बिल्कुल भीगा हुआ था, इसलिए मैंने उसको भी उतार दिया, लेकिन उसके बाद अंदर से जो सब मैंने देखा उसको देखते ही मेरे बदन में 880 वॉल्ट के करंट का झटका लगा और मेरे पूरे बदन में अजीब सी सुरसुरी होने लगी. फिर जैसे ही में उनका बदन उसके बाद अब पैरों को साफ कर रही थी तो मेरा हाथ गलती से उनके लंड पर चला जाता और वो लंड महोदय अब खड़े होने की तरफ बढ़ने लगे और देखते ही देखते वो अपने पूरे शबाब पर आ गए और तनकर मेरे सामने खड़े हो गए. अब में कभी पापा को देखती जो अभी भी उसी मदहोशी में थे और कभी उनके लंड को देखती जो पूरी तरह से तैयार था और खंबे की तरह तनकर खड़ा था. दोस्तों मैंने पहले भी पापा की अलमारी को खोलकर कई सेक्स की किताबे पड़ी थी और अब मेरा मन ललचाने लगा और सभी रिश्तों को भुलाकर मेरा मन हो रहा था कि में उनके लंड को चूस लूँ, लेकिन वो मेरे बाप थे और में उनकी लड़की तो ऐसा कर पाना संभव नहीं था इसलिए में अपने मन की इच्छाओ को मारने की कोशिश करने लगी, लेकिन अंत में सेक्स जीत गया और में उनके लंड को अपने मुहं में लेकर उसको धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगी. उसके कुछ देर बाद धीरे धीरे मेरी स्पीड बढ़ गई में ज़ोर ज़ोर से उनके लंड को अपने मुहं में अंदर बाहर करने लगी और देखते ही देखती करीब दस मिनट के बाद मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरे मुहं में मेरे पापा का वीर्य था जो करीब 50 ग्राम तो होगा ही उसकी वजह से मेरा पूरा मुहं भर गया और में वीर्य को निगलने लगी. मुझे ऐसा करने में बहुत ही मज़ा आ रहा था, क्योंकि मैंने ज़िंदगी में पहली बार किसी के वीर्य को देखा और उसको महसूस करके अपने मुहं में लिया था. उसका भद्दा अजीब सा स्वाद था, ना वो बहुत मीठा ना बहुत तीखा बिल्कुल बेस्वाद सा, लेकिन उसको निगलना ही मुझे अच्छा लगा तो इसलिए मैंने उसको निगल लिया.
अब में पूरी तरह से सफाई करके पापा को कपड़े पहनाने लगी और इस पूरी प्रतिक्रिया में मेरा क्या हाल था? में आप लोगों को आगे बताती हूँ. दोस्तों मेरे शरीर का एक एक अंग हिला जा रहा था और मेरे निप्पल बिल्कुल तनकर खड़े थे और मेरी चूत का हाल भी बड़ा बुरा था, वो तप तपकर बह रही थी, लेकिन में क्या कर सकती थी पहले अपने बाप को ठीक कर लूँ उसके बाद में अपनी सुध लूँगी, क्योंकि अब तो पापा का लंड भी झड़कर पूरा ढीला पड़ गया था इसलिए मेरी चुदाई का तो सवाल ही नहीं था और मुझे अपनी चुदाई अधूरी रहने का डर भी मन ही मन सता रहा था. अब पापा को पजामा पहनाकर ऊपर शर्ट पहनाकर में किचन में चली गयी और जल्दी से कुछ खाकर पापा के पास आ गई और फिर में उनकी देखभाल के लिए उनके पास ही बैठ गई. फिर करीब दो घंटे हो गये होगे उसके बाद मेरी आँख लग गयी और में पापा पर ही बेहोश होकर पड़ गयी. फिर जब मुझे होश आया तो पापा को भी होश आ चुका था और वो कुछ होश में आ रहे थे, लेकिन दोस्तों अब इस हादसे के बाद मेरी हालत बहुत खराब थी, मैंने पापा को जगाया और उनसे पूछा कि आपके क्या हाल है? वो धीरे से बोले कि ठीक है इतना सुनते ही में पलटी और अपने रूम की तरफ जाने लगी. तो पापा ने मुझसे कहा कि आज तुम भी इधर ही सो जाओ.
अब में यह बात सुनते ही पापा के पास लेट गयी और मैंने पापा का एक हाथ अपने सर के नीचे रख लिया. फिर थोड़ी ही देर बाद मैंने देखा कि पापा का एक हाथ मेरे बूब्स को सहला रहा था और वो धीरे धीरे मसल रहे थे. में चुपचाप पड़ी आनंदित हो रही थी और चाह रही थी कि क्यों ना में पापा से आज चुद जाऊँ, क्योंकि पापा के मम्मी को चोदने के बाद शायद ही किसी औरत से सम्बंध रहे हो और उनके मसलने में मुझे भी अब बहुत आनंद आने लगा और में पापा की तरफ़ मुहं कर लेट गयी. फिर पापा ने मेरे मुहं पर एक जोरदार किस किया और मेरी मेक्सी के ऊपर के बटन खोल दिए और सहलाने लगे. में धीरे धीरे मोन कर रही थी और मेरे मुहं से आवाज़े आने लगी उहह्ह्ह्ह पापा अहहह्ह्ह पापा धीरे से करो ना और अब पापा ने धीरे धीरे मेरे पूरे बदन को किस करना शुरू किया. मेरी हालत और भी ज्यादा खराब होने लगी और में अब मन ही मन सोचने लगी कि इतनी प्यास लगाकर मेरे पापा बुझाएगें कैसे, क्योंकि में उनका लंड तो पहले ही खाली कर चुकी हूँ, लेकिन मेरे पापा बहुत चतुराई से मेरे बदन को चूम चाट रहे थे और वो धीरे धीरे मेरी चूत के पास पहुँचते जा आ रहे थे. अब उन्होंने मेरी चूत के पास जाकर चूमना शुरू किया तो मेरे आनंद की कोई सीमा ही नहीं थी. में मन में सोच रही थी कि पूरी ज़िंदगी ही इस तरह बीत जाए, पापा चूमते रहे और में उनसे अपना काम करवाती रहूं. फिर तभी मेरा हाथ अचानक पापा के लंड पर गया तो मैंने देखा कि धीरे धीरे अब वो एक बार फिर से तैयार हो रहा है और पापा ने मेरे ऊपर आते हुए मेरी पूरी मेक्सी को खोल दिया और उन्होंने मुझे बिल्कुल नंगा करके मेरी चूत को फैलाने लगे. उनका लंड मेरी बिना चुदी चूत में घुसने की कोशिश करने लगा और धीरे से एक एक इंच अंदर जाने लगा. दोस्तों में कोई 16 साल की तो थी नहीं जो मुझे लंड को अपनी चूत के अंदर लेने में बहुत तकलीफ़ होती और वैसे भी मैंने बरसो इस दिन का इंतज़ार किया था. अब मेरे दोनों पैर खुले हुए थे और मेरे पापा मेरी चूत के होंठो को खोलकर लंड को अंदर डालने की कोशिश में लगे थे और वो धीरे धीरे उसमे सफल भी हो रहे थे, क्योंकि पापा का लंड धीरे धीरे अंदर जा रहा था और में आनंद की प्रक्रिया में हिस्सा ले रही थी, वैसे मुझे थोड़ा सा दर्द जरुर हुआ, लेकिन उसको बर्दाश्त तो मुझे ही करना था और में वही कर रही थी और पापा मेरे बूब्स को मसल रहे थे और लंड को मेरी चूत के अंदर डालने की कोशिश में लगे थे.
अब में मन ही मन धन्यवाद पापा कह रही थी, लेकिन पापा ने जब पूरा लंड अंदर डालकर धक्के मारने शुरू किए तो मुझे हल्का सा दर्द का अहसास होने लगा और वो दर्द भी बढ़ने लगा उसकी वजह से में हल्के हल्के चीख रही थी ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उफ्फ्फफ्फ्फ़ पापा प्लीज़ धीरे धीरे करो ना, लेकिन पापा पर एक अलग ही जोश चड़ा था और वो धीरे धीरे अपने धक्कों की स्पीड को बढ़ाए जा रहे थे, जिसकी वजह से मेरा बड़ा बुरा हाल था, लेकिन एक अलग सा मज़ा भी आ रहा था जिसको किसी भी शब्दो में नहीं लिखा जा सकता. अब वो मेरी चूत के रास्ते मेरे शरीर के अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे और अब मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे हम दो शरीर एक जान है. फिर में इतने में झड़ चुकी थी, लेकिन वो लगातार धक्के देकर मुझे चोदे ही जा रहे थे. फिर आख़िर एक बार झड़ने के बाद मुझे एक बार फिर से आनंद आने लगा और में चाह रही थी यह अनुभूति सुबह तक होती रहे और उसके बाद में एक बार फिर से उतेज़ित हुई और कुछ देर बाद दोबारा से झड़ गई और इतने में पापा भी झड़ गये. मुझे ऐसा लगा कि जैसे किसी ने शीशा गरम करके मेरी चूत में डाल दिया हो और वो सबसे अच्छा अहसास था जिसको में किसी भी शब्दों में नहीं लिख सकती. फिर एक दूसरे के शरीर पर हम दोनों पड़े रहे और सो गये. फिर दूसरे दिन सुबह जब में सोकर उठी तो देखा करीब 8 बजे थे और काम वाली बाई भी अब आने वाली थी, इसलिए तुरंत उठकर मैंने चाय बनाई और पापा को जागने चली गयी, पापा जो मेरे ही रूम में सो रहे थे वो बिल्कुल नंगे पड़े हुए थे और उनका लंड खड़ा था और पेट में टेंट बना था. मुझे उसकी शरारत को देखकर हँसी आ गयी कि रात भर इसी ने उपद्रव मचाया था और अब भी यह सिपाही की तरह तनकर खड़ा है, वो सब देखकर मुझे अपनी चूत में एक बार फिर से सुरसुरी सी होने लगी, लेकिन वो मेरी काम वाली बाई शांतबाई के आने का टाइम था, इसलिए पापा को उठाकर और चाय पिलाकर में जैसे ही मुड़ी तो पापा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और वो अपने लंड की तरफ इशारा करके बोले इसे भी तो देखो, यह क्या कह रहा है? तो मैंने पापा को कहा कि काम वाली बाई आने ही वाली है, आप अपने कपड़े पहन लो, लेकिन पापा की ज़िद थी कि इसको एक बार तुम चुप जरुर करा जाओ. तभी मैंने तेज़ी से उनका लंड अपने मुहं में लिया और फिर में जल्दी जल्दी ऊपर नीचे करने लगी. अभी हम किसी मुकाम पर पहुंचे भी नहीं थे कि बाहर घंटी बजी और तुरंत मैंने अपने कपड़े ठीक किए और बाहर की तरफ भागी और बाहर जाकर मैंने देखा तो वो काम वाली बाई का लड़का खड़ा था, वो मुझसे कह रहा था कि आज मम्मी की तबीयत खराब है इसलिए वो आज काम करने नहीं आ पाएगी.
दोस्तों उसके मुहं से यह बात सुनकर में मन ही मन बहुत खुश हो गई और में भागकर दोबारा पापा के पास चली गई, लेकिन तब तक वो चिराग बुझ चुका था और पापा अपने कपड़े पहनकर बाथरूम में घुस चुके थे और बाथरूम के अंदर से आवाज़ आ रही थी कि पायल मेरा टावल देना तो प्लीज़, मैंने टावल लेकर बाथरूम के बाहर खड़े होकर आवाज़ लगाकर उनसे कहा कि आज काम वाली बाई नहीं आई है, इसलिए टावल बाहर पड़ा है और में किचन में खाना बनाने जा रही हूँ. तभी वो बोले कि नहीं तुम टावल को अंदर ही दे जाओ, मैंने उनसे कहा कि दरवाजा खोलो और तभी उन्होंने दरवाजा खोल दिया. मैंने देखा कि पापा अपने अंडरवियर में खड़े थे और मेरा अधूरा छोड़ा गया काम वो पूरा कर रहे थे, यानी कि वो मुठ मार रहे थे. फिर मैंने उनसे कहा पापा यह क्या कर रहे हो? तो वो बोले कि कोई काम अधूरा नहीं छोड़ा जाता इसलिए में इसे पूरा कर रहा हूँ.
अब मैंने तुरंत नीचे बैठकर लंड को उनके हाथ से छीनते हुए अपने मुहं में ले लिया और अंदर बाहर करने लगी और जैसे ही में यह काम स्पीड से कर रही थी तो मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे उनका लंड मोटा होता जा रहा है और अब वो मेरे मुहं में समा नहीं पा रहा, लेकिन फिर लंड मेरे मुहं में फिट हो गया और कुछ देर बाद एक ज़ोर से पिचकारी छोड़ते हुए उन्होंने अपना गरम गरम वीर्य मेरे मुहं में भर दिया और मैंने अपने मुहं में लेकर पापा की तरफ देखा तो वो मुस्कुराकर बोले तुम्हारा तो नाश्ता पूरा हो गया. फिर में उसे गटककर हंसकर बोली हाँ पापा अभी यह नाश्ता है और फिर दोपहर को लंड से अपनी चूत की चुदाई करवाकर दिन का खाना लूँगी और फिर देर रात को गांड मरवाकर रात का खाना. आज की सभी डिश तो एक से बढ़कर एक रहेगी, लेकिन समय अलग अलग रहेगा. दोस्तों पापा को ऑफिस जाना था, इसलिए में कुछ देर बाद पीछे हट गयी और पापा नहाकर तैयार होने लगे. फिर मैंने कहा कि पापा लंच पर आएँगे या मैंने भूखी रहूंगी? तो पापा ने मेरी तरफ देखा और वो हंसकर बोले अरे में ऑफिस कहाँ जा रहा हूँ, में तो बाहर सिर्फ़ हवा खाने जा रहा हूँ, हाज़री लगाकर में तुरंत लौट आऊंगा और फिर कुछ देर बाद पापा दफ़्तर चले गये. में सोचने लगी जो कुछ हुआ क्या ठीक हुआ? मेरा मन कहता नहीं और कभी कहता कि चलो सब ठीक है. फिर कुछ देर बाद पापा आ गये और वो मुझे लेकर बेडरूम में चले गये और उन्होंने मेरा गाउन खोल दिया और मेरे बूब्स को दबाने लगे. मुझे बड़ा आनंद आ रहा था और मेरी चूत में एक अजीब सी खलबली मची हुए थी, वो मेरे पूरे बदन को चूम रहे थे कि तभी अचानक से वो बोले क्यों पायल तुम्हारे बूब्स तो तुम्हारी माँ से बहुत बड़े है, क्या तुम कोई दवाई काम में लेती हो या फिर अपने हाथ से खींचती या किसी के हाथ से खिंचवाती हो? तो मैंने कहा कि नहीं पापा यह सब कुछ प्राक्रतिक है कोई दवाई नहीं, किसी तरह की कोई खिंचाई नहीं. फिर पापा ने मुझे बेड पर लेटा दिया और वो मेरी चूत की फांके खोलकर बहुत ध्यान से देखने लगे और हल्के हल्के चूत में अपनी ऊँगली को अंदर बड़ा रहे थे. मेरी हालत इतनी खराब थी कि मुझे कुछ देर बाद ही झड़ने का अहसास होने लगा और मेरी चूत से निकले रस की वजह से मेरे बाप के हाथ गीले हो गये, वो अपने हाथ चाटने लगे तो मैंने उनसे कहा कि पापा अगर चाटना ही है तो मेरी प्यारी चूत को चाटो. मेरे मुहं से यह बात सुनकर वो तुरंत नीचे झुककर मेरी चूत पर अपनी जीभ को फेरने लगे और चाटने लगे. फिर में उनका लंड अपने हाथ में लेकर चूमने लगी और हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए और कुछ देर बाद उनका भी वीर्य निकल गया, वो मेरे मुहं में जा रहा था और कुछ देर बाद पापा मेरे ऊपर सवारी कर रहे थे और उनका लंड देवता मेरी चूत रानी के अंदर प्रवेश कर गया और उसके बाद से शुरू हुई धक्कों की दास्तान, क्योंकि दोनों का पानी अंदर मिल रहा था और इसलिए मेरी चूत से फट फट और फ़च फ़च की आवाज़े आने लगी थी. मुझे भी अजीब सी ख़ुशी मिल रही थी इसलिए में हल्की आवाज से चीख रही थी और मोन भी कर रही थी उहह्ह्ह अहह्ह्ह्हह ऑचचछ्ह्ह्हह्ह माँ मर गई, लेकिन मुझे मज़ा बहुत आ रहा था. दोस्तों पापा खुद भी जोरदार धक्के देकर मुझे लगातार चोदे जा रहे थे उनका लंड बिल्कुल पिस्टन की तरह मेरी चूत में चल रहा था और अंदर बाहर हो रहा था और फिर देखते ही देखते वो झड़ गये और उन्होंने अपना वीर्य अंदर ही डाल दिया, जिसकी वजह से मेरी चूत में ऐसा लगा जैसे किसी ने गरमा गरम लोहा डाल दिया हो मेरी चूत में अब आनंद की कोई सीमा नहीं थी इसलिए में बहुत मस्त थी और अपने पापा से अपनी चुदाई करवा रही थी. तो उसके बाद हम दोनों बहुत ज्यादा थककर एक दूसरे से चिपककर लेटे रहे, लेकिन मेरी चुदाई का यह दौर ऐसे ही चलता रहा और मैंने अपने पापा के लंड से अपने हर एक छेद को उनके वीर्य से पूरा भर दिया बहुत मज़े किए.
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