सीमा को चोदकर उसकी गोद भरी

हैल्लो दोस्तों, मैंने अब तक बहुत सारी सेक्सी कहानियाँ पढ़ी है और मज़े भी बहुत किए है. दोस्तों एक बार हुआ यूँ कि में अपने किसी मिलने वाले की एक शादी में गया हुआ था, वहाँ पर मुझे एक लड़की दिखी, जो दिखने बहुत सुंदर थी और उसने पीले कलर का पटियाला सलवार सूट पहना हुआ था और वो उन कपड़ो में बहुत हॉट, सेक्सी लग रही थी, मेरा लंड तो उसे देखते ही तुरंत खड़ा हो गया और पेंट के बाहर आने को बेताब हो गया, लेकिन वहाँ पर उस समय बहुत सारे लोग थे तो मुझे कुछ शर्म भी आ रही थी और मैंने जैसे तैसे अपने आप को कंट्रोल किया, लेकिन फिर भी मेरे दिमाग में बस उस लड़की को चोदने का भूत सवार था.
अब मन ही मन बहुत सोचने लगा कि ऐसा क्या किया जाए, जिससे मुझे इसकी चुदाई का मौका मिल जाए? फिर में उस लड़की पर ध्यान देने लगा और अपनी पूरी नज़र रखने लगा था.
तभी मैंने देखा कि वो शादीशुदा थी और उसका पति उससे कुछ बात कर रहा था और अब मैंने मन ही मन विचार करके उसके पति से दोस्ती करने की बात मन में ठान ली और अब में उस मौक़े की तलाश में लग गया. तभी कुछ देर बाद मैंने देखा कि उसका पति अब हमारे एक जानने वाले से बात करने लगा था.
फिर में भी सही मौका देखकर तुरंत वहाँ पर पहुंच गया और अब में भी उनके साथ गप शप करने लगा था और हम सभी के बीच बहुत हंसी मजाक हुआ और हम सभी बहुत हंस हंसकर बातें कर रहे थे और तब बातों ही बातों में उसने मुझे बताया कि उसकी शादी को दो साल हो गये है और अभी तक उनका कोई बच्चा नहीं है और उन्होंने उसके लिए बहुत बार कोशिश की है, लेकिन हमेशा नाकाम रहे, वो इस बात को लेकर बहुत दुखी थे, क्योंकि वो जब यह बात हमे बता रहे थे, तब उनका चेहरा थोड़ा उतरा हुआ सा था, वो मुझे बहुत दुखी उदास से नजर आने लगे थे.
दोस्तों फिर हमने उन्हें बहुत समझाया और कहा कि यह सब उस ऊपर वाले के हाथ है, हम तो बस मेहनत कर सकते है. दोस्तों मेरी अच्छी किस्मत से वो मेरे घर से क़रीब चार किलोमीटर दूर ही रहते थे और अब हमारे बीच बहुत ज्यादा बातचीत होने लगी थी.
फिर हमने एक दूसरे से एक दूसरे का मोबाईल नंबर ले लिया और हमारी बहुत पक्की दोस्ती हो गई. उसके बाद कुछ देर रुकने के बाद में अपने घर पर आ गया और फिर में आकर उस लड़की को सोच सोचकर उसके नाम की मुठ मारने लगा था, मेरे दिमाग से उसका चेहरा निकलने को तैयार ही नहीं था और सच पूछो तो मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आ रहा था, लेकिन अब भी मुझे पूरा सुकून नहीं मिल पा रहा था.
कुछ दिन बाद मैंने उसके पति राज को फ़ोन किया और उसने मुझे तुरंत पहचान लिया. उसके बाद हमारे बीच बहुत देर तक बातें होती रही और थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने के बाद मैंने उससे भाभी के बारे में भी पूछा तो उसने मुझे बताया कि उनकी तबियत खराब है और वो इस समय घर पर ही आराम कर रही है.
दोस्तों मैंने मन ही मन सोचा कि यह बहुत अच्छा मौक़ा है और इस वजह से मुझे उनके घर के अंदर जाने का मौका तो मिल ही जाएगा. अब मैंने उनसे पूछा कि आप आपका घर का पता मुझे बताए तो उन्होंने मुझसे कहा कि आपको तकलीफ़ करने में कोई ज़रूरत नहीं है? तो मैंने कहा कि मुझे आपसे नहीं मिलना, किसी बीमार को देखने जाना यही तो एक इंसानियत है. फिर उन्होंने मुझे अपने घर का पता दे दिया और में बहुत खुश था.
अब शाम होने का इंतज़ार करने लगा और चार बजे में तैयार होकर उनके घर के पास पहुंच गया और मैंने उन्हें फ़ोन किया तो राज मुझे लेने बाहर सड़क पर आ गये. फिर हम दोनों उनके घर पर चले गये. मैंने वहाँ पर पहुंचकर देखा तो वो बहुत ही सुंदर फ्लेट था, जिसमें वो रह रहे थे और मुझे ड्राइंगरूम में बैठाकर वो पानी लेने चले गये और उन्होंने मेरे लिए पानी लाकर दे दिया, लेकिन में अब बैठा हुआ इधर उधर भाभी को ही ढूंड रहा था.
तभी इतने में राज ने आवाज़ लगाई और बोला कि सीमा यहाँ आओ देखो सेम भाई आपकी तबियत के बारे में पूछने के लिए आए है. फिर कुछ देर बाद वो उठकर बाहर आई तो मैंने देखा कि उसने सिल्वर कलर का जालीदार गाउन पहना हुआ था, वो उसमें क्या मस्त बला हॉट सेक्सी लग रही थी? में आप सभी को अपने किसी भी शब्दों में बता नहीं सकता कि वो उस समय कैसी दिख रही थी.
फिर उन्हें देखकर मेरा लंड तुरंत तनकर खड़ा हो गया और जैसे तैसे मैंने उसे कंट्रोल किया. फिर मैंने उनसे उनकी तबियत के बारे में पूछा और तब उन्होंने मुझे बताया कि अब में थोड़ी ठीक हूँ. फिर वो मेरे लिए नाश्ता लेने चली गयी. फिर राज ने मुझे बताया कि वो चार महीने पहले ही यहाँ पर आया है, क्योंकि वो यहाँ पर किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है और अब उसका तबादला यहाँ पर हो गया है और वो यहाँ पर अकेला ही रहता है.
दोस्तों सच पूछो तो उसके मुहं से यह बात सुनकर मुझे मन ही मन बहुत खुशी हुई और में ना जाने क्या क्या सोचने लगा? अब उसके आगे राज ने मुझे बताया कि मेरी कंपनी गुड़गावं में है और में हर दिन सुबह अपनी कंपनी में जाता हूँ और रात को 8 बजे तक वापस आ पाता हूँ, इसलिए भाभी को घर पर अकेले रहने में बहुत समस्या होती है, उन्हें कुछ सामान वगेरा लाना है तो घर से बहुत दूर जाना पड़ता है और यहाँ पर उनका कोई रिश्तेदार भी नहीं है, जो मेरे चले जाने के बाद उनकी किसी भी छोटे बड़े कामों में उनका हाथ बंटा दे.
तभी मैंने उनकी बात खत्म होने से पहले ही जल्दी से कहा कि कोई बात नहीं वो काम मुझे बता दिया करो, में इनको वो सभी जरूरी सामान लेकर दे जाया करूँगा और वैसे भी मेरे पास अपनी खुद की बाईक तो है ही बस आप बता दिया करो, में पांच मिनट में पहुंचा दिया करूँगा. फिर उसने पहले तो मुझसे मना किया कहा कि नहीं यार मेरी वजह से तुम परेशान ना हो, लेकिन मेरे बार बार कहने पर वो राज़ी हो गये और एक बार फिर से मैंने उसकी तबियत के लिए पूछा तो उन्होंने बताया कि हाँ अब में ठीक हूँ. फिर राज ने मुझे खाने को कहा, लेकिन मैंने साफ मना कर दिया.
मैंने उससे कहा कि अभी में थोड़ा जल्दी में हूँ, मुझे और किसी काम से भी जाना है और में फिर कभी आ जाऊंगा और में इतना कहकर अपने घर पर वापस आ गया, लेकिन में अब बहुत खुश था कि मेरा सीमा के घर आना जाना शुरू हो गया था. अब मुझसे ज्यादा सब्र भी नहीं हो रहा था और में हमेशा रात दिन सुबह शाम बस उनके बारे में सोचने लगा और उनसे मिलने के सपने देखने लगा था और करीब 10-15 दिन ही गुज़रे होंगे कि एक दिन मेरे पास अंजान नंबर से फोन आया.
फिर मैंने बात करना शुरू किया और दूसरी तरफ से मुझे किसी औरत की बहुत मीठी आवाज़ सुनाई दी कौन सेम? तो मैंने कहा कि हाँ में बोल रहा हूँ, लेकिन आप कौन हो? तब उन्होंने मुझसे कहा कि में सीमा बोल रही हूँ. फिर में बस इतना सा शब्द सुनते ही तुरंत खिल उठा और में बहुत खुश था, मुझे जिसका इंतज़ार था वही हुआ.
फिर मैंने उनसे पूछा कि सब ठीक तो है ना भाभी जी, बताए आज आपने मुझे कैसे याद किया? तब उन्होंने कहा कि सब कुछ ठीक ठाक है, लेकिन अभी अचानक से एक छोटी सी समस्या आ गई है. फिर मैंने पूछा कि हाँ आप मुझे बेझिझक बता सकती है, मेरे पास आपकी हर एक समस्या का हल है और तब उसने मुझे बताया कि शायद उसके घर पर तार की थोड़ी दिक्कत है, इसलिए पूरे घर की लाईट चली गयी है और राज भी रात तक घर पर आएँगे और तब तक सभी लाईट वालोँ की दुकान भी बंद हो जाएगी, प्लीज आप आकर किसी लाईट वाले को बोल दो तो वो हमारे घर की लाईट सही कर देगा.
फिर मैंने कहाँ कि ठीक है, में अभी कुछ मिनट में आता हूँ और यह बात कहकर में जल्दी से तैयार हुआ और फिर उनके घर पर पहुंच गया. मैंने पहुंचकर देखा कि वो उस समय घर पर अकेली थी और मैंने उनसे कहा कि पहले में खुद देख लेता हूँ, अगर मुझसे नहीं हुआ तो में किसी लाईट वाले को बुलाकर ले आऊंगा. फिर मैंने बोर्ड में देखा तो उसमें सप्लाई नहीं थी और जब मैंने थोड़ा आगे बढ़कर दूसरे बोर्ड में देखा तो वहां पर भी वही समस्या थी. अब में मीटर के पास वाले बोर्ड पर पहुंच गया, जहाँ पर जाकर मैंने देखा कि किसी कारण से एम.सी.बी. नीचे हो गयी थी. मैंने तुरंत उसे ऊपर किया तो लाईट आ गयी और सीमा खुश हो गयी.
फिर उन्होंने मुझसे कहा कि चलो आपने मेरे पैसे बचा दिए और ये कहकर उन्होंने मुझे अब बैठने के लिए कहा और में तुरंत बैठ गया. इतनी देर में उसके पास राज का फ़ोन आ गया और उसने सीमा से पूछा कि क्या काम हो गया?
सीमा ने उसे बताया कि हाँ मैंने सेम को फोन करके बता दिया था तो उसने वो ठीक कर दिया है. अब राज ने सीमा से कहा कि तुम आज सेम को खाना खिलाकर ही उसके घर पर जाने देना, उसे ऐसे ही नहीं जाने देना और सीमा ने भी कहा कि हाँ ठीक है. फिर कुछ देर बाद उनकी बात खत्म हो गई और तब सीमा ने मुझसे कहा कि आज आप खाना खाकर ही जाना, उन्होंने मुझसे आपको खाना खिलाकर ही जाने के लिए कहा. फिर में भी उसकी वो बात तुरंत मान गया और अब वो जल्दी जल्दी खाना बनाने के लिए किचन में चली गई और में अकेला बैठकर टी.वी. देखने लगा. बहुत देर बाद मैंने आवाज़ देकर पूछा कि सीमा बाथरूम कहाँ है?
तब उन्होंने मुझे बताया कि अंदर बेडरूम के पास है और में उठकर चला गया. मैंने बाथरूम में पेशाब वगेरा किया और बाहर आने लगा, लेकिन तभी मेरी नज़र वहाँ पर लटके हुए सीमा के कपड़ो पर पड़ी, वहां पर उसके जालीदार सलवार क़मीज़ लटक रहे थे, जिनको देखकर में अब बिल्कुल पागल हो गया था. मैंने तुरंत उस सलवार को उठाकर अपनी नाक पर लगा लिया, वाह क्या खुशबू आ रही थी, में आप लोगों को अपने किसी भी शब्दों में नहीं बता सकता.
फिर मैंने देखा कि वहाँ पर सीमा की मुलायम सिल्की ब्रा भी लटकी हुई थी. मैंने उसे भी उठा लिया और सूंघने लगा. कुछ ही देर में मेरा लंड अब तनकर खड़ा हो चुका था और उस दर्द से फटा जा रहा था. फिर मैंने जल्दी से अपनी पेंट को उतारकर उसकी सलवार पर मुठ ही मारने लगा, जहाँ पर चूत की जगह होती है, में अब उस जगह को अपने लंड पर रखकर धीरे धीरे मसलने लगा और कुछ देर बाद मेरा वीर्य निकल गया. मुझे इस बात का बिल्कुल भी पता ही नहीं चला और में बिल्कुल मदहोश हो चुका था, मुझे कुछ भी पता नहीं था.
दोस्तों अब मुझे बहुत देर हो गई थी. इतने में सीमा ने मुझे बाहर से आवाज़ दी और में उसकी आवाज को सुनकर अचानक से बहुत घबरा गया और इससे पहले कि में कुछ भी समझ पाता, मैंने पीछे की तरफ पलटकर देखा तो बाथरूम का दरवाज़ा खुला हुआ था और सीमा वहाँ पर ठीक मेरे सामने खड़ी हुई वो मुझे घूर घूरकर देख रही थी.
दोस्तों में जल्दी में बाथरूम का दरवाज़ा बंद करना ही भूल गया था. अब तो मेरे जिस्म में जैसे जान ही नहीं थी और में बहुत घबरा गया था और में जल्दी से सलवार और ब्रा को अपनी जगह पर लटकाकर में तुरंत बाहर आ गया और फिर अपने घर पर जाने के लिए में उसके घर से बाहर निकल गया.
तभी पीछे से मुझे सीमा की आवाज़ आई कि सेम तुम कहाँ जा रहे हो? खाना तो खाकर जाओ. अब मैंने जब इतना सुना तो तब जाकर मेरी कुछ जान में जान आई, में कुछ सेकिंड रुककर सोचने लगा कि जाऊँ या नहीं? फिर सीमा ने मुझे एक बार फिर से आवाज़ दी और में लौटकर वापस अंदर चला गया. सीमा मेरे लिए खाना लेकर आ गई, लेकिन अब मुझे उससे बहुत डर लग रहा था, में मन ही मन सोचने लगा था कि अब क्या होगा? में बिल्कुल चुपचाप बैठा हुआ था. तभी सीमा ने मुझसे कहा कि खाना तो खा लो, तुम डरो नहीं और उसके कहने पर मैंने अपना सर नीचे करके चुपचाप खाना खाया और अब चुपचाप बैठ गया.
तभी सीमा ने मुझसे कहा कि तुम इतना घबराए हुए क्यों हो? अब मैंने झट से उसको सॉरी कहा तो सीमा मेरी वो बात सुनकर हंसी और वो मुझसे पूछने लगी कि तुम मुझसे माफ़ी किस बात की मांग रहे हो? तो उससे मैंने कहा कि अभी कुछ देर पहले तुमने मुझे उस हालत में देख लिया था.
तभी उसने मुझसे कहा कि कोई बात नहीं, तुम उस बात की बिल्कुल भी चिंता मत करो, यह बात यहीं पर रहेगी, लेकिन मेरी तुमसे एक शर्त है और में दोबारा घबरा गया. तब सीमा ने मुझसे पूछा कि तुम मुझे सच सच यह बात बताओ कि तुम मुझे चाहते हो या नहीं?
मैंने साफ मना कर दिया और फिर सीमा ने मुझसे कहा कि नहीं तो तुम मेरी सलवार को क्यों चाट रहे थे? दोस्तों में उसके मुहं से यह बात सुनकर शरमा गया और फिर मैंने कहा कि हाँ में तुम्हें चाहता हूँ और उस दिन से जब से मैंने तुम्हें शादी में पहली बार देखा था, जब तुम पीले रंग की उस ड्रेस में थी और तुम बहुत ही सुंदर लग रही थी, में उस दिन से तुम्हें चाहने लगा था और तुम्हें किसी भी तरह से में पाना चाहता था.
दोस्तों अब अचानक से मेरी पूरी बात को सुनकर सीमा ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी और फिर उसने मुझे भी अपने जीवन की वो पूरी कहानी सुनाई और उसने मुझसे कहा कि राज के साथ वो बहुत खुश है, लेकिन आज तक उसके एक भी औलाद नहीं हुई है और वो अब थोड़ा उदास सी हो गई. दोस्तों में तुरंत समझ गया कि सीमा मुझसे अब क्या कहना चाहती है?
मैंने उससे पूछा कि क्या तुमने किसी डॉक्टर को दिखाया? तब उसने कहा कि हाँ राज में कुछ कमी है, जिस वजह से मेरे औलाद नहीं हो रही है. फिर में बोला कि तो तुम उस बीमारी का इलाज करा लो. तब उसने कहा कि उसे जो बीमारी है उसका कोई इलाज नहीं है और फिर मैंने तुरंत उससे पूछ लिया कि अब आप क्या करोगी? तो सीमा ने कहा हाँ कुछ तो करना होगा वर्ना में बगैर औलाद के में भी क्या करूँगी? और में राज को भी कभी छोड़ नहीं सकती हूँ, क्योंकि में उनसे बहुत प्यार करती हूँ, इस काम में क्या तुम मेरी मदद करोगे?
दोस्तों में उसके मुहं से यह शब्द सुनकर बहुत खुश हो गया, क्योंकि आज मेरी माँगी मुराद पूरी होने जा रही थी. मैंने तुरंत हाँ कर दी और तभी वो मुझसे कहने लगी कि सेम यह बात हम दोनों के बीच में ही रहनी चाहिए, किसी को भी इसके बारे में पता चला तो मेरी ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी. अब मैंने सीमा को अपनी तरफ से पूरा पूरा भरोसा दिला दिया.
मैंने उससे कहा कि यह बात कभी भी किसी को पता नहीं चलेगी और फिर सीमा अपने बेडरूम में चली गयी और कुछ देर बाद उसने आवाज़ दी. फिर सेम ने कहा कि हाँ तो सीमा ने मुझे अपने बेडरूम में बुला लिया, में तभी उसे देखकर एकदम से चौंक गया था, क्योंकि सीमा पीले रंग की ड्रेस वही जो मैंने शादी में पहली बार उसे पहने हुए देखा था, वो सजीधजी मेकप करके बेड पर बैठी हुई थी और में उसको देखकर बिल्कुल पागल हुआ जा रहा था, में अंदर गया और बेड पर बैठ गया. उसने बहुत ही अच्छा पाउडर लगाया हुआ था. में अब पागल हुआ जा रहा था, उसके बूब्स बहुत बड़े बड़े थे और उस ड्रेस से साफ साफ नज़र आ रहे थे.
मैंने हिम्मत करके सीमा को अपने पास खींच लिया, वो मेरे ऊपर ही गिर गयी और उसके बालों की खुशबू में आपको क्या बताऊँ? मैंने सीमा को अब गले से लगा लिया और उसके माथे पर किस करने लगा और अब सीमा भी धीरे धीरे गरम हो रही तो उसने भी मेरे गाल पर किस करना शुरू किया.
मैंने उसके होंठो पर किस करना शुरू किया और अब में उसकी जीभ को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा. मेरा लंड तो मानो अब किसी भी समय फट ही जाएगा. मैंने जल्दी से अपने कपड़े उतार दिए और में अब तक उसके सामने बिल्कुल नंगा हो चुका था और फिर सीमा मेरे तनकर खड़े लंड को देखकर बहुत खुश हो गई. मेरा लंड ज़्यादा बड़ा तो नहीं, लेकिन टाईट बहुत था.
मैंने अब सीमा के बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाना निचोड़ना शुरू किया, वो बहुत गरम हो चुकी थी और बहुत ज़ोर से सिसकियाँ ले रही थी. मैंने जल्दी से सीमा की सलवार के ऊपर से ही लंड को अब रगड़ना शुरू कर दिया था और मैंने महसूस किया कि अब तक उसकी चूत बहुत गरम हो चुकी थी, वो बिल्कुल पागल हो रही थी और उसने मेरे सर को पकड़कर अपनी रूमाली पर ज़ोर से झटका दे दिया और अब लंड को चूत से लगा लिया.
फिर मुझसे अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था और मैंने जल्दी से सीमा के कपड़े उतार दिए. अब वो जालीदार ब्रा में मेरे सामने नंगी थी और मैंने ब्रा के ऊपर से ही बूब्स को चूसना शुरू कर दिया और उसकी सिसकियों की आवाज उस पूरे कमरे में गूँज रही थी.
फिर मैंने तुरंत अपना लंड सीमा के मुहं के सामने कर दिया और उसने जल्दी से लंड को पूरा अपने मुहं में ले लिया और उसने अब लंड को चूसना शुरू कर दिया, जैसे कोई लोलीपोप चूसते है, वो ऐसे मेरे लंड को चूस रही थी, जिसकी वजह से उसके साथ साथ अब मुझे भी बहुत अच्छा लगने लगा था. उसके कुछ देर चूसने के बाद मेरा पानी निकलने लगा था, जो मैंने उसके मुहं में ही भर दिया और सीमा ने उसे पी लिया. अब में बिल्कुल निढाल सा हो रहा था.
फिर मैंने सीमा से कहा कि अब तुम मुझे कुछ देर आराम करने दो तो सीमा तुरंत उठकर खड़ी हो गई और वो ऐसे ही पूरी नंगी ही मेरे लिए चाय बनाने किचन में चली गई, में उसकी मटकती हुई गांड को देखने लगा, वो पीछे से भी बहुत सेक्सी दिख रही थी और वो कुछ देर बाद वापस चाय लेकर आ गई. अब तक मेरा लंड एक बार फिर से तैयार होकर खड़ा हो चुका था.
मैंने चाय पी और फिर सीमा को नीचे लेटाकर मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ को डाल दिया और चूत को चाटने चूसने लगा था, जिसकी वजह से वो एक बार फिर से सिसकियाँ भरने लगी थी और अपने चूतड़ को उठाकर जीभ को पूरी अंदर तक लेने लगी थी, वो उस समय बहुत जोश में थी. तभी कुछ देर बाद अचानक से उसकी चूत से कुछ सफेद सफेद पानी निकलने लगा था, जिसकी वजह से चूत पूरी गीली हो चुकी थी.
फिर अच्छा मौका देखकर में जल्दी से उठा और मैंने अपना लंड सीमा की चूत के मुहं पर रखकर एक ज़ोर से धक्का देकर पूरा का पूरा लंड अंदर डाल दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड अब फिसलता हुआ उसकी चूत के अंदर था और अब उसे बहुत मज़ा आ रहा था और में सीमा को उठा उठाकर धक्के देकर चोद रहा था. फिर मैंने कुछ देर धक्के देने के बाद लंड को चूत से बाहर निकाल लिया और फिर मैंने सीमा को अपने ऊपर बैठने के लिए कहा. सीमा उठकर तुरंत मेरे ऊपर आकर बैठ गई.
मैंने अपना लंड चूत के मुहं पर पकड़े रखा और वो धीरे धीरे उस पर बैठती हुई लंड को अंदर लेने लगी. अब वो लंड पर ज़ोर ज़ोर से लगातार उछल उछलकर अपनी चुदाई वो खुद करने लगी थी. दोस्तों उसको लंड पर उछलते हुए देखकर मुझे ऐसा लगने लगा था, जैसे कि उसे इस काम में बहुत अनुभव है और शायद वो अपने पति के साथ हर एक तरीके से अपनी चुदाई करवा चुकी है.
फिर में भी नीचे से उसे धक्के देता रहा और लगातार कुछ देर धक्के देने के बाद ही मेरा वीर्य निकलने लगा था और मैंने अपना पूरा वीर्य उसकी चूत में निकाल दिया, वो अब भी मेरे ऊपर ही बैठी रही और अब हम दोनों बहुत थक चुके थे.
फिर मैंने टाईम देखा तो उस समय शाम के 6 बज चुके थे और में कुछ देर बाद उठकर बाथरूम में फ्रेश होने चला गया, मेरे पीछे से सीमा भी आ गई और अब हम दोनों मिलकर बहुत देर तक एक साथ नहाते रहे और इस बीच में मैंने सीमा को खड़े होकर भी एक बार चोदा. हम दोनों ने नहाते समय भी चुदाई के मज़े लिए और फिर कुछ देर बाद बाथरूम से बाहर आकर कपड़े पहनकर में सीमा से विदा हुआ और वो मेरा बहुत अच्छा अनुभव था. मैंने उसको अपनी चुदाई से एकदम संतुष्ट कर दिया, उसने मुझे उस चुदाई के लिए धन्यवाद कहा.
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दादी के साथ बहु और बेटी की चुदाई

हैल्लो दोस्तों, में दीनू आप लोगों के सामने अपनी एक सच्ची कहानी पेश कर रहा हूँ. एक बार मेरा ट्रान्सफर बिहार के एक छोटे से गाँव में हुआ था, जहाँ पर मेरे एक सह कर्मचारी की मदद से मुझे किराए पर एक मकान मिल गया था.
उस मकान में कुल 4 सदस्य थे, एक तो धर्मपाल जो कि दुबला पतला 32 वर्षीय मकान मालिक था और रिक्शा चलाकर घर का गुजारा करता था और वो अक्सर रात को देशी शराब पीकर नशे में धुत रहता था. उसकी बीवी 28 वर्षीय सुंदर और आकर्षक भरे बदन वाली महिला थी, उसका नाम धन्नो है और घर में धन्नो की सास जो कि करीब 45 वर्षीय महिला थी और वो भी काफ़ी आकर्षक, कामुकता से भरी महिला थी. में उसे दादी कहकर बुलाता था और धर्मपाल के एक बहन थी, जिसका नाम राधिका है, वो करीब 25 वर्षीय सुंदर और भारी कद-काटी की महिला थी, उसकी शादी नहीं हुई थी, वो एक स्कूल में टीचर का काम करती थी.
उस दिन उनके घर में धर्मपाल की चचेरी बहनें और बच्चे आए हुए थे और हम सब गर्मी के कारण आँगन में एक साथ सोते थे, वो जून के महीने की पहली तारीख थी और समय रात के करीब 12 बजे थे. फिर अचानक से मेरी नींद खुल गयी और में अपने चारो तरफ देखने लगा तो मुझे चाँद की रोशनी में सब कुछ साफ-साफ दिख रहा था. अब में अपने चारो तरफ अपनी आँखें घुमा-घुमाकर देख रहा था तो मैंने देखा कि कुछ जवान लडकियाँ (चचेरी बहनें) अपनी जाँघे और बदन खोले सो रही है, उन लड़कियों में से दो लड़कियों की चूचीयाँ काफ़ी बड़ी-बड़ी थी और उनकी चूचीयाँ उनकी सांसो के साथ-साथ ऊपर नीचे हो रही थी.
फिर मैंने अपने दूसरी तरफ देखा तो मैंने देखा कि दादी मेरे बगल में करवट लेकर सो रही थी और दादी की साड़ी और उनका पेटीकोट उनके चूतड़ तक सरके हुए थे और उनकी टाँगे पूरी तरफ से नंगी हो गयी थी और कुछ कपड़ा उनकी जांघो के बीच में पड़ा था. अब मेरे दिमाग में उनको नंगी देखने की इच्छा जाग उठी थी.
फिर में दादी के और करीब हो गया और थोड़ा नीचे की तरफ सरक गया, जिससे की मेरा हाथ उनकी जांघो के बीच में जा सके. फिर में उनकी तरफ पलटकर लेट गया और धीरे-धीरे अपना एक हाथ दादी की दोनों जांघो के बीच में बढ़ाया और उनकी साड़ी और पेटीकोट को पकड़कर धीरे-धीरे खींचने लगा था.
फिर मैंने अपना सिर उठाकर देखा तो दादी की जांघे पूरी तरफ से नंगी हो गयी थी, तो में उनके कपड़ो को और खींचने लगा और उनके कपड़ो को थोड़ा सा और खींचने के बाद मुझे उनकी चूत दिखाई दी. दादी की चूत पूरी तरफ से बालों से भरी हुई थी.
फिर में अपना सिर तकिए पर रखकर लेट गया और अपना एक हाथ दादी की एक जाँघ पर रखकर उनकी जाँघ पर ऊपर से नीचे तक फैरकर सहलाने लगा था. फिर मैंने अपना एक हाथ धीरे से उनकी चूत पर रख दिया और उनकी चूत को हल्के-हल्के हाथ से फैरते हुए सहलाने लगा, लेकिन मेरी इस हरकत से दादी नहीं जगी और ना ही हिली इसलिए मेरी हिम्मत और बढ़ गयी.
अब मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा था तो मैंने अपने दूसरे हाथ से अपनी लुंगी के अंदर से अपना लंड बाहर निकाल लिया. अब में उनकी चूत को और ज़ोर से मसलने लगा था और फिर मैंने अपना लंड दादी के हाथ पर रख दिया, पता नहीं में कितनी देर तक उनकी चूत को मसलता रहा? लेकिन जब मैंने उनकी तरफ देखा तो मेरी गांड फट गयी क्योंकि अब दादी की आँख खुली थी और वो जाग रही थी.
अब में उनको जागते हुए देखकर चौंक गया और झट से अपना हाथ उनकी चूत पर से हटा लिया, लेकिन तभी मुझे महसूस हुआ की दादी अपने एक हाथ से मेरे लंड को पकड़े हुए थी और अपनी हथेली से मसल रही थी.
फिर दादी मेरे पास आई और मेरे पास आकर बैठ गयी और मुझसे उनके साथ चलाने के लिए फुसफुसाकर बोली, तो में भी चुपचाप उठकर उनके पीछे-पीछे चल पड़ा. फिर दादी मुझको अपने कमरे में ले गयी और कमरे में ले जाकर कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और खुद ज़मीन पर बिछे बिस्तर लेट गयी और जमीन पर बिछे बिस्तर पर लेटते ही दादी ने अपनी साड़ी और पेटीकोट खींचकर अपनी कमर तक उठा दिया.
अब उनकी खुली चूत मुझको दावत दे रही थी. फिर दादी अपना ब्लाउज उतारने लगी और थोड़ी देर के बाद उनकी दो छोटी-छोटी ढीली-ढीली चूचीयाँ बाहर आ गयी. अब मुझे उस समय उनकी खुली चूचीयाँ और चूत मेरे लिए दुनिया की सबसे सुंदर चीज़ लग रही थी.
फिर दादी ने अपने दोनों हाथ उठाकर मुझको उनके पास बुलाया और खुद उठकर बैठ गयी और मुझको नंगा कर दिया. फिर उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया और सहलाने लगी और फिर मेरे लंड के सुपाड़े का घूँघट निकालकर अपनी मुट्ठी में भरकर मुठ मारने लगी और मेरे लंड को अपनी चूची से सटाकर रगड़ने लगी और अपने हाथों से मेरे अंडो को दबाने लगी थी.
अब उनकी इस हरकत से मेरा लंड खड़ा हो गया था. फिर दादी ने बिस्तर पर लेटाकर मुझको अपने ऊपर खींच लिया और अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत के छेद से रगड़ना शुरू किया.
फिर मैंने उनकी दोनों टांगो को फैलाकर अपने लंड का सुपाड़ा उनकी चूत के मुँह पर रखकर एक करारा झटका मारकर अपना आधे से ज्याद लंड उनकी ढीली चूत में उतार दिया और अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए फिर से एक ज़ोरदार शॉट मारा तो मेरा पूरा का पूरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ गहरी घाटी में समा गया, तो वो बोली कि दीनू वाकई में तुम्हारा लंड जानदार है, काफ़ी दिनों से इस चूत को लंड का मज़ा नहीं मिला, चोद मेरे राजा चोद, उफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ और में उनकी चूत की चुदाई करता रहा.
कुछ देर के बाद वो भी अपनी कमर उछाल-उछालकर मेरे लंड को अपनी चूत में लेने लगी और में भी जोश में आकर ज़ोर-जोर से उनकी चूत में अपने लंड से धक्का मारने लगा. अब मुझे उनकी चूत जन्नत का मज़ा दे रही थी.
फिर करीब 15 मिनट तक में अपनी दादी की चूत में अपना लंड पेलता रहा, तो इसी दरमियाँ उनकी चूत 2 बार सिकुड़न पैदा करते हुए झड़ चुकी थी और अब में भी अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुका था और फिर मैंने उनकी चूत के अंदर झड़ते हुए उनकी चूत को मेरे लंड रस से लबालब भर दिया.
फिर थोड़ी देर तक हम लोग शांत पड़े रहे और जब हम लोगों की सांसे ठीक हुई तो तब दादी ने मुझे बताया कि करीब 8 साल के बाद उनकी चूत ने आज मेरा लंड खाया है.
फिर थोड़ी देर के बाद दादी की चूत फिर से मेरा लंड खाने के लिए तैयार हो गयी और वो मुझसे बोली कि क्यों फिर से अपनी दादी को चोदेगा? तो यह सुनते ही में फिर से उनसे लिपट गया और उनके ऊपर चढ़कर फिर से उनकी चूत में अपना लंड डालकर उनको चोदने लगा. उस रत हम लोगों ने करीब 4 बार चुदाई का आनंद लिया.
फिर आख़री बार वो अपने हाथ और पैर के बल झुककर उल्टी लेट गयी और मुझसे उनको पीछे से चोदने के लिए बोली, तो मैंने भी उनके पीछे जाकर उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया और कभी उनकी चूची तो कभी उनके चूतड़ों को सहलाते हुए उनको चोदता रहा.
फिर यह चुदाई का सिलसिला 10 दिन तक ऐसे ही चलता रहा और में रोज़ रात को अपनी दादी को चोदता रहा और वो मुझसे चुदवाती रही. फिर वो हर रात को मुझसे 3-4 बार अपनी चूत में मेरा लंड डलवाती रही और में उनको पेलता रहा.
फिर दसवीं रात को जब में अपनी दादी को 4 बार चोद चुका था, तो में उनकी चूची से खेलते हुए उनसे बोला कि क्या आप अपनी बहू धन्नो को चुदवाओगी? तो वो मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर बोली कि में तेरी सब कुछ बातें धन्नो से कह चुकी हूँ और तेरी धन्नो ने मुझसे वादा किया है कि वो तेरा हर तरह से ध्यान रखेगी और तू जो चाहेगा, वो तू उनके साथ कर सकता है, अब तुझको धन्नो की चूत चोदने से मेरी चूत से ज़्यादा मज़ा मिलेगा.
उसका बदन भरा हुआ है और उसकी चूची और चूत भी अभी तक टाईट है, धन्नो की चूचीयाँ बड़ी-बड़ी है और उनको दबाने से तुझको बहुत मज़ा मिलेगा और जब तू उसकी चूचीयों को चूसेगा और उसकी चूत में अपना लंड पेलेगा, तो तुझको बहुत मज़ा मिलेगा, लेकिन तू मुझको भूल ना जाना, इस बुढ़िया की चूत को ज़रूर चोदना और चोद-चोदकर मेरी चूत की प्यास बुझाना.
फिर तारीख 11 जून को मेरी दादी अपने एक रिश्तेदार के यहाँ धर्मापाल की चचेरी बहनों को लेकर दूसरे गाँव चली गयी, तो में राधिका दीदी के साथ बात करने में समय बिताने लगा, लेकिन धन्नो जब भी मेरे बगल से गुजरती थी तो वो अपनी चूचीयाँ मेरे कंधों या मेरी पीठ को टच कर जाती थी, वो ऐसा 2-3 बार किया करती थी.
अब जब भी धन्नो अपनी चूचीयाँ मेरी पीठ या कंधों से छूती तो मुझे उनकी चूचीयों का आकर और बड़े होने का एहसास हो रहा था. उनकी चूचीयाँ वाकई में बहुत भारी और बड़ी- बड़ी थी और वो काफ़ी टाईट थी. फिर अगले दिन सुबह और रात को कुछ नहीं हुआ, अब मुझे और धन्नो को अकेले होने का मौका नहीं मिल पा रहा था. अब में काफ़ी परेशान हो रहा था और धन्नो भी मेरे अकेले होने के लिए परेशान हो रही थी.
तारीख 12 जून सुबह जब धर्मपाल बाथरूम में नहा रहे थे और राधिका रसोई में कुछ काम कर रही थी, तो तभी धन्नो मेरे कमरे में घुसी और अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया तो में सोने का नाटक करते हुए उनको चोर निगाहों से देख रहा था.
अब उनके ब्लाउज के ऊपर के 2-3 बटन खुले हुए थे और उनकी चूचीयों का आधा भाग साफ़-साफ़ दिख रहा था, यहाँ तक की मुझको उनकी निप्पल भी साफ़-साफ़ दिख रही थी.
फिर उन्होंने अपने कपड़े ठीक किए और किचन में चली गयी. आज में बहुत परेशान था, अब में रात को अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था कि अचानक से मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि मेरे एक तरफ धर्मपाल लेटा हुआ था और दूसरी तरफ राधिक लेटी हुई थी और राधिका के बगल में धन्नो लेटी हुई थी, जब राधिका सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज पहने हुए थी और राधिका का पेटीकोट उसके घुटनों के ऊपर तक चढ़ा हुआ था और उसकी एक टांग जाँघ तक नंगी थी.
फिर में हिम्मत करते हुए राधिका के करीब सरक गया और अपना एक हाथ आहिस्ता से उसकी चूचीयों पर रखा और धीरे-धीरे उसकी चूचीयों को दबाने लगा.
अब मेरी इस क्रिया से वो कुछ भी नहीं बोली, लेकिन मैंने महसूस किया कि वो जाग चुकी थी और सोने का नाटक कर रही थी. फिर में अपना एक हाथ राधिका दीदी की नंगी टांग पर रखकर उनकी नंगी जाँघ को सहलाने लगा.
फिर राधिका दीदी ने लेटे-लेटे ही अपने ब्लाउज का बटन खोलकर अपना ब्लाउज उतार दिया. राधिका दीदी ने अपने ब्लाउज के नीचे सफेद रंग की ब्रा पहनी हुई थी और जब उनको ब्लाउज उतारते देखकर में गर्म हो गया, लेकिन मैंने अपने आप पर काबू रखा. अब में राधिका दीदी के पीछे से मेरा हाथ दीदी की पीठ से होकर उनके चूतड़ तक पहुँचा चुका था. फिर मैंने अपने हाथों से दीदी का पेटीकोट उनके चूतड़ के ऊपर तक खींच दिया और इस समय मेरा हाथ उनकी जाँघ और उनके चूतड़ों को सहला रहा था.
तब राधिका दीदी ने अपने हाथ पीछे ले जाकर अपनी ब्रा के हुक खोल दिए और अपनी ब्रा उतार दी. फिर में राधिका दीदी की चूचीयों को दबाने लगा, उनकी चूचीयाँ बहुत कड़क-कड़क और खड़ी थी, इस समय जब वो मेरी तरफ करवट लेकर लेटी थी तो उनकी चूचीयाँ अपने वजन से नीचे की तरह लुढ़क गयी थी.
राधिका दीदी की चूचीयाँ तो बड़ी-बड़ी थी, लेकिन उनके निप्पल छोटे-छोटे थे. फिर मैंने उनके निप्पल को अपनी दोनों उँगलियों के बीच में लेकर ज़ोर से दबा दिया, तो वो धीरे से मेरे कान में फुसफुसा कर बोली कि आउच, दीनू दर्द करता है, धीरे-धीरे सहलाओ. फिर में उनकी बात मानकर उनकी निप्पल को धीरे-धीरे से सहलाने लगा और फिर उनकी पूरी चूची को अपने हाथ में लेकर धीरे-धीरे दबाने लगा.
फिर मैंने उनकी चूची को सहलाते हुए उनसे पूछा कि पहले किसी ने ऐसे चूची दबाई है? मज़ा आ रहा है ना? तो वो सिसकारी भरते हुए बोली कि बहुत मज़ा आ रहा है, पहले कुछ लड़को ने मेरे कपड़ो के ऊपर से मेरी चूची दबाई थी, लेकिन उसमें मुझे मज़ा नहीं आया था, आज बहुत अच्छा लग रहा है, दबाते रहो. फिर में अपने पेट के बल लेट गया और उनकी दोनों चूचीयों को अपने हाथों में लेकर धीरे- धीरे दबाने और सहलाने लगा.
फिर वो अपनी चूची दबवाते हुए मुझसे बोली कि उूउउफफफफफ्फ़ तुमने तो मुझे पागल ही कर दिया है, मेरे पूरे बदन में चीटियाँ चल रही है, अब मेरी गर्मी और बढ़ गई है, तो मैंने अपने दोनों हाथों को उनके कंधों के नीचे ले जाकर उनको अपने आपसे लिपटा लिया, तो उसने भी अपने बदन से मुझको लिपटा लिया. अब उनकी दोनों चूचीयाँ मेरी छाती से दब रही थी और मुझको उनकी गर्मी का एहसास हो रहा था.
फिर मैंने उनके होंठो को अपने होंठो से लगाकर खूब कसकर चूमा और अपने एक हाथ से उनकी एक चूची को पकड़कर सहलाते हुए अपने दूसरे हाथ को उनके शरीर पर फैरने लगा, उनका बदन बहुत चिकना था. फिर मैंने धीरे से उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और उनके पेटीकोट के नाड़े को खोलकर उसको उनकी जांघों के नीचे सरका दिया.
अब मेरा हाथ उनकी कोरी बिन चुदी गर्म चूत के ऊपर था. राधिका दीदी की चूत पर झांटे थी, लेकिन वो मेरे हाथों को रोक नहीं पा रही थी और मेरा हाथ उनकी चूत के होंठो को छूते हुए उनकी चूत के दरवाजे में घुस गया और फिर जैसे ही मेरी उंगली उनकी चूत के अंदर गयी तो उनकी जांघे अपने आप खुल गयी. अब मेरी उंगली ठीक तरीके से उनकी चूत में अंदर बाहर होने लगी थी.
अब उन्होंने मेरे मुँह को अपनी चूची पर कसकर दबा लिया और अपनी जांघों से मेरे हाथ को दबा लिया और छटपटा कर बोलने लगी कि उूउउफफफ्फ़ उसको मत छुओ, नहीं तो में संभाल नहीं पाऊँगी, मेरी जाँघो और चूतड़ों को सहलाओ, लेकिन अपना हाथ वहाँ से हटा लो, लेकिन फिर भी में अपना हाथ उनकी चूत पर फैरता रहा और वो मुझको अपने आपसे लिपटाकर मुझको ज़ोर-ज़ोर से चूमने लगी और अपना एक हाथ मेरी लुंगी में डालकर मेरे लंड को बाहर निकालकर सहलाने लगी, उसकी चूत हल्के भूरे रंग की झांटो से ढकी हुई थी. अब वो अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लगी थी और अब वो धीरे-धीरे मेरे लंड को अपनी चूत पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर की तरफ रगड़ रही थी.
अब पहले तो वो मेरे लंड को अपनी चूत पर धीरे-धीरे रगड़ रही थी और फिर अचानक से उनकी रगड़ने की स्पीड बढ़ गयी और उनके मुँह से सिसकारी निकलने लगी. फिर थोड़ी देर के बाद मुझे उनकी चूत की चिकनाई मेरे लंड के ऊपर होने का एहसास हुआ तो मैंने नीचे की तरफ देखा तो मैंने पाया कि मेरा लंड करीब आधे से ज़्यादा उनकी चूत में घुसा हुआ था.
फिर मैंने जोश में आकर अपनी कमर का दबाव थोड़ा और डाला तो मेरा पूरा का पूरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ उनकी बच्चेदानी से टकरा गया. अब उनके मुँह से सिसकारी निकल रही थी और वो बोल रही थी अहह ओह में मर गयी, अहह बहुत मजाआाआआ, अहह में गयी और फिर उनकी चूत सिकुड़न पैदा करते हुए झड़ गयी और में भी करीब 15-20 धक्को के बाद उनकी चूत में ही झड़ गया. फिर हम दोनों कुछ देर तक ऐसे ही शांत पड़े रहे.
फिर वो मुझको चूमते हुए बोली कि थैंक यू दीनू जी, मुझे ऐसा मज़ा कभी नहीं मिला, तुम बहुत मस्त हो और तुम्हारा लंड खाकर कोई भी लड़की या औरत मस्त हो जाएगी और फिर हमने अपने-अपने कपड़े ठीक किए और अपनी-अपनी जगह पर सो गये, लेकिन बेचारी राधिका को यह बात नहीं मालूम थी कि उसकी भाभी धन्नो मेरे लंड को अपनी चूत से खाने के लिए तड़प रही है. फिर तारीख 15 जून को दिनभर में कई बार धन्नो आते जाते मेरे शरीर से अपनी चूची रगड़कर निकली, लेकिन में उन चूचीयों को पकड़कर दबाने का मौका नहीं पा पाया, लेकिन उस दिन एक घटना घटी, अब पहले तो धन्नो मेरे दफ़्तर जाने के बाद नहाती थी, लेकिन आज शनिवार था और मेरी छुट्टी थी. अब धर्मपाल और राधिका अपने-अपने काम पर निकल चुके थे, तो तब धन्नो मेरे बाथरूम में जाने से ठीक पहले बाथरूम में घुस गयी.
अब में रोज़ की तरह तोलिया लपेटे था और वो सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज पहने हुई थी, तो बाथरूम में जाने से पहले उन्होंने पीछे मुड़कर मुझको इशारा किया कि में भी बाथरूम में घुस जाऊं. इस समय उनके शरीर पर सिर्फ़ पेटीकोट था, जिसको उन्होंने अपनी चूची के ऊपर से बाँध रखा था.
फिर में जल्दी से बाथरूम की तरफ गया और बाथरूम का दरवाजे को धक्का देकर खोल दिया, तो बाथरूम में धन्नो नंगी होकर अपने पैरों को फैलाए हुए खड़ी थी और उनकी चूत के ऊपर कोई भी बाल नहीं था. फिर उन्होंने जल्दी से मुझको अपने पास खींच लिया और मुझको अपने आपसे लिपटा लिया और मेरे कान में फुसफुसा कर बोली कि जल्दी से मौका निकालकर मुझे चोदो, मेरी चूत बहुत प्यासी है. फिर उन्होंने मेरे ऊपर से तौलिया खींचा और जल्दी से मेरा लंड अपने हाथों से पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी, तो तब उन्होंने अपनी एक टांग को ऊपर उठाकर एक बाल्टी के ऊपर रख लिया और मेरे खड़े लंड को पकड़कर अपनी चूत से सटा दिया.
फिर मैंने भी अपने लंड को धन्नो की चूत से सटा दिया और अपनी कमर हिलाकर एक ही झटके में अपना लंड उसकी चूत में पेल दिया और अपनी कमर हिला- हिलाकर उसको खड़े-खड़े चोदने लगा.
अब में उनकी चिकनी बगैर झांटो वाली गर्म चूत को चोद रहा था, तो वो मुझसे लिपटे हुए बोली कि ओह बहुत अच्छे, साले, मादरचोद चोदो, मेरी खुली चूत को चोद साले, तेरा लंड बहुत मस्त है, मारो धक्का ज़ोर से मारो, ऊऊ ऐसे ही मारते रहो, ऊओ आआआहह बसस्स्स्स्सस्स अब में झड़ने वाली हूँ, तू धक्का मार और ज़ोर-ज़ोर से मार.
फिर थोड़ी देर के बाद वो झड़कर चुपचाप हो गयी, लेकिन मेरा अभी तक पानी नहीं निकला था तो में उसकी चूत के अंदर मेरा लंड पेलता रहा और उनकी दोनों चूचीयों को पकड़कर उनकी चूत के अंदर अपना लंड दनादन पेल रहा था, वो इस समय मेरे साथ अपनी चूत चुदवाकर बहुत खुश थी और फिर मैंने भी कुछ पलों में ही उसकी चूत को अपने लंड रस से भर दिया, आज वो काफ़ी संतुष्ट थी. फिर में जब तक वहाँ रहा मैंने उन तीनों के खूब मजे लिए और उनकी खूब चुदाई की.
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सेक्सी पड़ोसन की सील तोड़ चुदाई

हैल्लो दोस्तों, में आज आप सभी चाहने वालों को अपना सेक्स अनुभव सुनाने जा रहा हूँ. दोस्तों में भी पिछले कुछ सालों से सेक्सी कहानियाँ पढ़कर उनके मज़े लेता आ रहा हूँ और में बहुत दिनों से अपनी भी वो कहानी आप सभी तक पहुँचाने के बारे में सोच रहा था, लेकिन ना जाने क्यों बार बार डरकर पीछे हट जाता और आज में बहुत कुछ सोचकर वो घटना आप लोगों तक पहुँचाने जा रहा हूँ.
में उम्मीद करता हूँ कि यह आप सभी को जरुर पसंद आएगी, क्योंकि यह कोई फेक कहानी नहीं मेरी सच्ची घटना है, जो कुछ समय पहले मेरे साथ घटी. अब में वो घटना सुनाने के सबसे पहले आप सभी को उस लड़की जो मेरी पड़ोसन है और जिसका नाम सोमी है उसके बारे में बात देता हूँ, जिसकी मैंने चुदाई करके उस अनुभव के मज़े लिए. दोस्तों सोमी एक गोरी और सेक्सी फिगर की लड़की है उसका साईज़ 36-26-36 बहुत कमाल का है.
दोस्तों वो मेरी पड़ोसन थी इसलिए हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे और हम एक दूसरे के साथ बहुत सारी बातें किया करते थे, वो मुझसे अपनी हर एक बात किया करती थी और मुझसे वो कभी कुछ भी नहीं छुपाती थी. एक दिन उसे मुझसे अपनी पढ़ाई के बारे में कुछ पूछना था, इसलिए वो अपनी किताब लेकर आ गई और में उस समय अपने रूम में बैठा हुआ कम्पूटर पर फिल्म देख रहा था. फिर वो मुझसे बोली कि भैया मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है, प्लीज आप मुझे समझा दो, में बहुत देर से इस सवाल को लेकर बहुत परेशान हूँ.
फिर मैंने उससे कहा कि ठीक है आ जा, में बता देता हूँ और फिर वो मेरे पास में आकर बैठ गई और मैंने उसे दो मिनट रुकने के लिए कहा और मैंने कम्पूटर को बंद करके उसे अपने सामने कुर्सी पर बैठा लिया, वो मुझसे उस सवाल का हल पूछने लगी, वो उस समय लाल कलर के टॉप में थी और बहुत ही अच्छी नजर आ रही थी. मैंने उसके सवाल का हल उसे बता दिया और फिर उससे कहा कि एक बार मेरे सामने हल करो, तो वो मुझसे ठीक है बोलकर उसे हल करने लगी और जैसे ही लिखने के लिए वो थोड़ा सा झुकी तो उसके बूब्स मुझे दिखने लगे मेरा लंड उसके बूब्स को देखकर तनकर खड़ा हो गया और वो जब तक सवाल करती रही में उसके बूब्स को देखता रहा.
फिर वो कुछ देर बाद अपना काम खत्म करके चली गई और उसके चले जाने के बाद मैंने उसको सोचकर मुठ मारी.
दोस्तों इससे पहले मेरे दिमाग़ में उसके लिए ऐसा कुछ नहीं था, लेकिन अब मेरी सोच उसके लिए एकदम बदल गई थी और अब धीरे धीरे मेरी नियत फिसलने लगी थी. में उसके साथ बहुत समय बिताने लगा था और हम साथ में क्लास जाते और वहां से आना भी हमारा साथ में ही होता था. फिर वो भी अब धीरे धीरे मेरे बहुत करीब आ गई थी, लेकिन उसके दिमाग़ में ऐसा कुछ नहीं था और उसकी हरकतो से मुझे साफ पता चलता था.
एक दिन हमारे घर के पास एक दीदी की शादी थी और मेरी मम्मी उसकी मम्मी और मेरा भाई और उसका भाई साथ में चले गए, इसलिए हम दोनों अपने घर पर एकदम अकेले थे. फिर वो उसके घरवालों के जाने के कुछ देर बाद मेरे पास आ गई और फिर वो मुझसे हंस हंसकर बातें करने लगी, लेकिन में उस समय उसको चोदने का विचार बना रहा था. अब हम बातें करने लगे और बहुत देर हंसी मजाक बातें करने के बाद वो मुझसे बोली कि आपने आज तक कोई गर्लफ्रेंड क्यों नहीं बनाई? तो मैंने उससे कहा कि मुझे आज तक कोई तेरे जैसी मिली ही नहीं और यह बात बोलकर में उसकी तरफ़ मुस्कुराने लगा और वो मुझसे ठीक है बोलकर बिल्कुल शांत हो गई.
अब मैंने उससे पूछा कि तूने आज तक कोई बॉयफ्रेंड क्यों नहीं बनाया? तभी वो मुझसे बोली कि आज तक आप जैसा मुझे भी कोई नहीं मिला और वो यह शब्द बोलकर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी. अब हम धीरे धीरे सेक्स सम्बन्ध के बारे में बातें करने लगे और तभी वो मुझसे कहने लगी कि मैंने अपनी कुछ दोस्तों से सुना है कि उन सभी कामों को करने में बहुत मज़ा आता है, क्या ऐसा सच में होता है?
दोस्तों उसके मुहं से यह बात सुनकर में पागल हो गया और अंदर ही अंदर बहुत खुश होने लगा था, क्योंकि मुझे उससे यह बातें सुनने की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी, लेकिन मेरे लिए उसकी यह बातें आगे जाकर फायदा देने वाली थी और में भी खुद उसे इस दिशा में ले जाना चाहता था, लेकिन अब वो खुद मुझसे वो सब बातें पूछने लगी थी और धीरे धीरे आगे बढ़ती रही. फिर तभी वो मुझसे बोली, लेकिन यह सब ग़लत है, ऐसा नहीं करना चाहिये और यह बात सुनकर मेरा खड़ा लंड उदास होकर गिर गया. मैंने उससे पूछा कि इसमें क्या ग़लत है? दुनिया में सभी लोग अपनी लाइफ अपने अपने तरीके से जीते है, वो सब उनके ऊपर होता है और वो यह बात सुनकर थोड़ी शांत हो गई.
अब मैंने उससे पूछा कि क्या कभी तूने उसके बारे में सोचा है? मेरे मुहं से यह बात सुनकर वो चकित हो गई और कहने लगी कि यह आप क्या बोल रहे हो? अब मैंने उससे कहा कि बस मैंने तुमसे पूछा है, तो वो मुझसे कहने लगी कि नहीं और उसने वही सवाल मुझसे पूछा.
फिर मैंने तुरंत हाँ बोल दिया और फिर उसने मुझसे पूछा कि किसके साथ? मैंने झट से बोला कि तेरे साथ और वो डर गई. फिर मैंने उससे कहा कि तू डर मत. फिर वो शांत हो गई. अब मैंने उससे कहा कि में तुमसे सही में बहुत प्यार करता हूँ, उसने मेरी तरफ स्माइल किया और फिर उसने अपनी तरफ से मुझे जवाब दे दिया कि हाँ लेकिन में कुछ और समझती हूँ.
यह बात सुनकर में थोड़ा गुस्सा होने का नाटक करने लगा और उसकी बातों का जवाब नहीं दे रहा था इसका मतलब वो तुरंत समझ गई और वो मुझसे बोली कि हाँ में भी आपसे बहुत प्यार करती हूँ, लेकिन डरती हूँ कि किसी को इस बात का पता ना चल जाए. फिर मैंने उससे कहा कि मेरे होते हुए तुझे किसी से डरने की ज़रूरत नहीं है. फिर उसने तुरंत मेरा हाथ पकड़ लिया और फिर वो मुझसे बोली कि प्लीज अब आप इतना गुस्सा मत करो. यह बात वो मुझसे बोलकर मेरे बहुत करीब आ गई और उसने मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया.
फिर दोस्तों मैंने सही मौका देखकर उसका फायदा उठाते हुए अपना एक हाथ उसकी कमर के पीछे से ले जाकर उसकी कमर को पकड़कर अपनी बाहों में जकड़ लिया, जिसकी वजह से वो अब मेरे बहुत करीब थी और अब मुझे उसके सेक्सी बदन की गरमी महसूस हो रही थी और उसकी गरम गरम सांसे तेजी से और धड़कते दिल की धड़कने महसूस हो रही थी, वो पूरी पसीने से भीग चुकी थी. तभी मैंने उसके माथे पर किस किया और उसने भी अपनी तरफ से जवाब देते हुए मुझे गाल पर किस किया और मुझे ज़ोर से हग कर लिया, जिसकी वजह से अब मेरी हिम्मत बढ़ गई थी. मैंने उससे अपनी आँखो में देखने के लिए कहा और उसके पास जाने लगा, तो उसने अपनी आखें बंद कर ली और मैंने धीरे से उसके होंठो पर किस किया.
उसने भी मुझे किस किया और अब हम दोनों एक दूसरे को स्मूच करने लगे और बहुत देर तक किस करने के बाद हम दोनों अब मेरे रूम में चले गए. वहां पर हमने फिर किस किया और इस बार मैंने उसके बूब्स पर हाथ रख दिया, लेकिन उसने मुझसे कुछ नहीं कहा, वाह दोस्तों क्या मस्त बूब्स थे एकदम मुलायम मुलायम, बड़े आकार के बिल्कुल टाईट. फिर मैंने धीरे से उसके टॉप में अपना एक हाथ नीचे से डाल दिया तो भी वो मुझसे कुछ नहीं बोली और अब में उसके बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा जिसकी वजह से वो सिसकियाँ लेने लगी थी आअम्म उम्ममम आह्ह्ह्ह. फिर मैंने तुरंत उसका टॉप उतार दिया वो बहुत शरमा गई और मुझसे चिपक गई मैंने उससे कहा कि शरमाओ मत में ही हूँ और में उसे किस करने लगा. उसने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया, जो एकदम कड़क था और वो उसे धीरे धीरे सहलाने लगी. उसने भी मेरी टी-शर्ट को उतार दिया और में अब उसके बूब्स को दबा रहा था. उसकी वो काली कलर की ब्रा उसके गोरे और बड़े आकार के बूब्स पर वाह क्या मस्त लग रही थी? में बता नहीं सकता.
अब मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया और उसके बूब्स को पकड़कर चूसने लगा, वो अब तक बहुत गरम हो गई थी और आवाज़ करने लगी ऊह्ह्ह्ह आह्ह्हह्ह प्लीज और करो ज़ोर से, हाँ खा जाओ इन्हे उम्म्म आईईइ में तुमसे बहुत प्यार करती हूँ मेरी जान, में अब तुम्हारी हूँ. अब मैंने उसकी जीन्स को भी उतार दिया और अपनी भी हम दोनों सिर्फ़ अपनी अपनी अंडरवियर में थे और फिर उसने मेरा अंडरवियर उतार दिया और मेरे 6 इंच लंबे और 2 इंच मोटे लंड को देखकर वो मुझसे बोली कि क्या इतना बड़ा? यह तो बहुत बड़ा है यह बात कहकर वो लंड को हिलाने लगी.
फिर मैंने उससे कहा कि तुम इसे एक बार मुहं में ले लो, लेकिन उसने मुझसे ऐसा करने के लिए साफ मना कर दिया और मेरे बहुत ज़ोर देने पर वो तैयार हो गई. मैंने उससे कहा कि पहले तुम इसके ऊपर किस करो और उसने किस किया और फिर मुहं में लाने लगी. वाह क्या अहसास था गरम गरम वो अपने मुहं में पूरा लंड धीरे धीरे अंदर बाहर करती रही, जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा आने लगा था, लेकिन कुछ देर के बाद ही में उसके मुहं में झड़ गया और मैंने उसे जबरदस्ती अपना पूरा गरम गरम वीर्य पिला दिया और वो पूरा का पूरा गटक गई.
मैंने उसे बेड पर सीधा लेटा दिया और उसकी काली कलर की पेंटी को उतार दिया. मैंने उसके अंदर देखा कि एक गोरी चूत जिस पर एकदम हल्के हल्के बाल थे, जैसे कि उसने कुछ दिन पहले ही साफ किए हो और उसकी एकदम गोरी और गुलाबी चूत थी, जिसको देखकर में पागल हुआ जा रहा था.
अब मैंने चूत पर अपना एक हाथ रख दिया और फिर उसको हल्के हल्के सहलाने लगा, वो हल्की सी कांप रही थी और मैंने झट से उसके दोनों पैरों को दूर किया और उसकी गोरी, नरम मुलायम जांघ को किस करते हुए धीरे धीरे में उसकी चूत तक पहुंच गया और अब मैंने उसकी चूत पर किस किया. फिर मैंने उसकी चूत की फांक को एक दूसरे से अलग किया और देखा कि उसका दाना बिल्कुल गुलाबी और चूत एकदम सील बंद थी और अब में उसकी चूत को चाटने लगा.
फिर वो सिसकियाँ लेने लगी उफ्फ्फ्फ़ आह्ह्हह्ह हाँ थोड़ा और अंदर घुसाओ वाह मज़ा आ गया उईईईईइ करने लगी और वो अब अपने हाथों से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी और कहने लगी कि हाँ खा जाओ इसे आह्ह्ह्ह आईईईईईई उम्म्म मुझे कुछ हो रहा है आह्ह्हह्ह मुझे आह्ह्ह्ह हाँ उफ्फ्फ्फ़ ज़ोर से चाटो और चाटो हाँ पूरा खा जाओ उफ्फ्फ्फ़ और फिर उसने मुझे गाली दी मादरचोद हाँ और ज़ोर से चाट इसे खा जा साले कुत्ते आह्ह्हह्ह्ह्.
दोस्तों मैंने पहली बार उसके मुहं से कोई गाली सुनी थी, जिसको सुनकर में बहुत चकित रह गया. दोस्तों उसका वो बिल्कुल बदला हुआ रूप और स्वभाव देखकर में बहुत आशचर्यचकित था, लेकिन उस समय हम दोनों ही बहुत जोश में थे इसलिए मैंने मन ही मन सोच लिया कि शायद वो ज्यादा जोश में आने की वजह से मेरे साथ यह सब कर रही, लेकिन मुझे उससे क्या लेना.
में तो लगातार उसकी गरम कामुक चूत को चूसता रहा, लेकिन अचानक से मैंने महसूस किया कि मेरे कुछ देर चाटने के बाद वो मेरे मुहं पर झड़ गई और मेरा पूरा मुहं उसके रस से गीला था और मैंने उसका सारा पानी पी लिया. फिर वो मुझसे बोली कि प्लीज अब मुझे और मत तड़पाओ, डाल दो प्लीज अंदर, जल्दी से डाल दो. अब मैंने अपने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया और वो हिलने लगी और बहुत सेक्सी आवाज़ निकाल रही थी, प्लीज अब तो डाल दो ना.
फिर मैंने अपना सुपड़ा अंदर डाला, जो बिना ज़ोर के थोड़ा अंदर चला गया और वो थोड़ा सा कांप रही थी. अब में उसके ऊपर लेटकर उसे किस करने लगा और किस करते करते मैंने सही मौका देखकर एक जोरदार झटका दे दिया और उसकी सारी आवाज़ मेरे मुहं से बाहर निकल गई, वो उस दर्द की वजह से तड़पने लगी और मुझसे कहने लगी कि प्लीज इसे बाहर निकालो आह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ मुझे बहुत दर्द हो रहा है प्लीज में मर जाउंगी आह्ह्ह्ह अब बाहर निकाल कुत्ते इसे निकाल दे उफ्फ्फ्फ़ क्या तू आज मेरी जान ही बाहर निकालकर मुझे छोड़ेगा, प्लीज आह्ह्हह्ह अब तो छोड़ दे मुझे आईईईईइ.
दोस्तों मैंने देखा कि उसकी आखों से पानी बाहर निकल रहा था और वो उस दर्द से मचल रही रही और कुछ देर बाद जब उसको आराम आने के बाद मैंने सही मौका देखकर एक और जोरदार झटका मार दिया और अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत की सील को तोड़ता हुआ पूरा अंदर चला गया, जिसकी वजह से उसकी ज़ोर से आवाज़ निकल गई आह्ह्ह मर गई, मार डाला कुत्ते, साले अब तो बाहर निकाल अपने लंड को आह्ह्ह्हह् उफ्फ्फफ्फ्फ़ उूईईईईईई माँ मर गई.
फिर मैंने देखा कि अब उसकी चूत से खून बाहर निकल रहा था और कुछ देर तक ऐसे ही रहने के बाद उसने अपनी गांड को उठाकर चुदवाना शुरू कर दिया. मैंने भी अपने धक्के मारने शुरू कर दिए और करीब 30 मिनट तक लगातार उसको चोदने के बाद में अब झड़ने लगा. उस बीच वो तीन बार झड़ चुकी थी. फिर ऐसे ही पूरी ताकत और स्पीड में धक्के मारने के बाद में उसकी चूत में ही झड़ गया और मैंने अपना पूरा वीर्य उसकी चूत की गहराईयों में डाल दिया और कुछ देर ऐसे ही बिना कपड़ो के हम एक दूसरे से चिपके रहे और एक दूसरे को किस करते रहे लेटे रहे.
फिर हमने अपने अपने कपड़े पहने और जब वो खड़ी हुई और थोड़ा चलने लगी तब मैंने देखा कि उससे अब ठीक तरह से चला भी नहीं जा रहा था, लेकिन वो फिर भी धीरे धीरे करके चली गई और कुछ देर बाद उसका मेरे पास फोन आ गया, वो मुझसे बोली कि वो अब एकदम ठीक है और अब वो सोने जा रही है, वो मुझसे बोली कि तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो और में आज तुम्हारे साथ पहला सेक्स अनुभव पाकर बहुत खुश हूँ, तुमने मुझे बहुत अच्छी तरह से मुझे बहुत मज़े देते हुए चोदा, जिसकी मुझे तुमसे उम्मीद थी.
में तुम्हारे चुदाई करने के तरीके से बहुत खुश हूँ और तुम्हारे साथ मुझे मज़ा आ गया, लेकिन तुम्हारा ऐसा जोश में हमेशा तुमसे चाहती हूँ, में चाहती हूँ कि तुम ऐसे ही चोदते रहो और में तुमसे अपनी संतुष्टि प्राप्त करती रहूँ और मुझसे यह सब बोलकर उसने तुरंत फोन कट कर दिया. दोस्तों वो अब उस दिन के बाद से मेरी गर्लफ्रेंड है और अब हमें जब भी मौका मिलता है तो हम सेक्स करते है और मैंने उसको बहुत बार चोदा है.
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सेक्सी भाभी के साथ चुदाई का सिलसिला

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम आदित्य है और में जयपुर का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 29 साल है, में मैकेनिकल इंजिनियरिंग ग्रेजुएट हूँ और एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करता हूँ. यह स्टोरी मेरी और मेरी भाभी के बीच की है, उनका नाम भावना है और उनकी उम्र 31 साल है, गोरा कलर, हाईट 5 फुट 3 इंच और फिगर साईज 36-25-36 है. अगर एक तरफ उनकी चूचियाँ क़यामत थी तो दूसरी तरफ उनकी गांड किसी को भी ललचाने पर मजबूर कर सकती थी. फिर भला में क्या चीज़ था? जो उनके जादू से बच पाता.
अब में बस किसी मौके की तलाश में था. फिर जैसे ही मुझे मौक़ा मिला तो मैंने ना सिर्फ़ भाभी को चोद दिया, बल्कि चुदाई का एक ना ख़त्म होने वाला सिलसिला शुरू कर दिया.
अब में भाभी को कई बार कपड़े बदलते हुए या नहाते हुए देख चुका था, मगर भाभी की तरफ से पहल ना करते हुए मेरी जान जाती थी. फिर मुझे भाभी को रिझाने के लिए एक तरकीब समझ में आई. भैया अक्सर घर पर नहीं होते थे, वो एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते है और अक्सर टूर पर बाहर जाते रहते है. अब जब भैया घर पर नहीं होते थे तो में अक्सर अपने कमरे में सेक्सी किताब टेबल पर रख देता और फिर जब भाभी मुझे जगाने के लिए आती तो उन्हें वो किताब नज़र आती थी.
फिर एक दिन जब मेरी आँख खुली तो मैंने भाभी को एक सेक्सी किताब देखते हुए देखा. फिर भाभी ने मुझे देखा तो कहा कि कुछ नहीं और मुस्कुराती हुई चली गयी.
उसके बाद भाभी मुझसे करीब से करीब होती चली गयी. अब जब भी वो मेरे रूम में आती तो अक्सर उनका दुप्पटा उनके सीने पर नहीं होता था तो कभी उनकी क़मीज़ का गला काफ़ी खुला होता था और वो मेरे सामने काफ़ी झुक जाती थी, जिससे मुझे उनके बूब्स साफ-साफ़ दिखाई देते थे, वो कभी-कभी कोशिश करती थी कि मेरे ज़्यादा करीब बैठे और अपना जिस्म मेरी बॉडी से टच करने की कोशिश करती थी तो कभी पीछे से मेरे इतना क़रीब आ जाती थी कि उनके बूब्स मेरी पीठ पर लगते थे. अब में भाभी की फिलिंग को समझ रहा था, लेकिन में चाहता था कि भाभी खुद कोई क़दम उठाए. फिर आख़िरकार वो दिन भी आ ही गया, जब भैया अपने टूर पर गये थे.
अब में सुबह उठकर नहाने की तैयारी कर रहा था. अब मैंने अपने कपड़े उतारकर एक टावल लपेट रखा था, जिससे मेरा लंड बाहर निकल रहा था. फिर भाभी किसी काम से मेरे रूम में आई तो पहले मेरे लंड ने उन्हें सलामी दी. फिर मैंने घबराकर अपने लंड को टावल में छुपाने की कोशिश की. तब ही भाभी ने किसी बहाने से अपने हाथ में पकड़े हुए कपड़े गिरा दिए और उन्हें उठाने के लिए झुकी, तो ना सिर्फ़ वो अपनी गांड मेरे लंड से रगड़ती हुई ले गयी, बल्कि अपनी गांड से मेरे लंड को थोड़ा सा दबा भी दिया.
अब मेरे तो तन बदन में एक करंट सा दौड़ गया था. फिर मैंने यह मौक़ा सही समझते हुए भाभी को पीछे से पकड़ लिया और किस करने लगा. फिर मैंने बोला कि हम तो कब से इसी इंतज़ार में थे कि मौक़ा मिले और भाभी की चुदाई करे.
फिर पहले तो भाभी ने कुछ नहीं कहा और फिर अपने आपको छुड़ाते हुए कहा कि क्यों इतने बेताब हो रहे हो? थोड़ा इंतज़ार करो, में अभी आती हूँ और फिर जो जी चाहे कर लेना और सेक्सी स्माईल देते हुए अपने रूम में चली गयी, लेकिन अब मुझसे कहाँ इंतज़ार होता? फिर में भी भाभी के उनके पीछे-पीछे रूम में आ गया और उनको पीछे से पकड़ लिया.
भाभी मुस्कुराते हुए बोली कि अब तो बड़ा जोश दिखा रहे हो, इससे पहले तो पागल बने हुए थे, आख़िर मुझे ही कुछ करना पड़ा. अब में भाभी के बूब्स को उनकी क़मीज़ के ऊपर से सहला रहा था. फिर जब मैंने उनकी कमीज उठानी चाही तो उन्होंने मुझे रोक दिया और कहा कि थोड़ा सब्र करो, अपने रूम में जाओ और नहा धोकर फ्रेश हो जाओ, में अभी एक घंटे में आती हूँ.
में अपने रूम में आ गया और सोचने लगा कि क्या आज वाक़ई में वो खुशक़िस्मत दिन है? जिसका में इंतज़ार कर रहा था. फिर 1 घंटे के बाद भाभी मेरे रूम में आई तो में उन्हें देखकर हैरान रह गया. उन्होंने कॉटन का सफ़ेद सूट पहना हुआ था और हल्का-हल्का मेकअप किया हुआ था और मदहोश कर देने वाली खुशबू से उनका जिस्म महक रहा था. अब भाभी बड़ी सेक्सी लग रही थी.
फिर वो मेरे क़रीब आई और मेरे गले में अपनी बाहें डालकर मुझे अपनी तरफ खींचा, तो अब में उनके बूब्स को अपनी छाती पर महसूस कर रहा था.
उन्होंने मेरे होंठो पर किस किया, तो मेरे पूरे जिस्म में एक करंट सा दौड़ गया. फिर मैंने अपना एक हाथ उनकी गांड पर फैरना शुरू किया और हमारी किसिंग क़रीब 10 मिनट तक जारी रही.
अब मेरा लंड मेरे बस में नहीं था. फिर मैंने भाभी की क़मीज़ उतारना चाही तो उन्होंने कहा कि इतनी भी क्या जल्दी है? सब्र करो. फिर तुम वो सब कुछ देख सकोगे, जिसकी चाहत में तुम कितनी ही बार हस्तमैथुन कर चुके हो, में सब जानती हूँ कि तुम मुझे देख देखकर हस्तमैथुन करते रहे हो.
उन्होंने अपनी क़मीज़ बड़े ही सेक्सी तरीके से उतारी. अब उनके रस भरे बूब्स ब्लेक ब्रा में कैद थे और अब में यह देखकर हैरान रह गया था कि उनकी सलवार में नाड़े की जगह इलास्टिक थी.
फिर उन्होंने अपनी सलवार पीछे से थोड़ी सी सरकाई और बेड पर लेट गयी और अपनी टागें ऊपर उठाकर सेक्सी स्टाईल में अपनी सलवार भी उतार दी और फिर उठकर थिरकते हुए अपनी ब्रा भी उतार दी. अब भाभी मेरे सामने बड़े सेक्सी पोज़ में बिल्कुल नंगी खड़ी थी, वो हमेशा से ज़्यादा सेक्सी और खूबसूरत लग रही थी, हालाँकि मैंने कई बार उन्हें नंगा देखा था.
उन्होंने मुझसे पूछा कि में कैसी लग रही हूँ? मेरे बूब्स कैसे है? मेरी गांड कैसी लग रही है? मैंने कई बार तुम्हें अपने बूब्स और गांड को घूरते हुए देखा है, में तो बहुत पहले ही समझ गयी थी कि तुम्हारी नियत मेरे बारे में ठीक नहीं है. अब जिस वक़्त वो यह बातें कर रही थी तो वो लगातार अपने बूब्स को भी सहला रही थी.
फिर भाभी मेरे क़रीब आई और मेरी टी-शर्ट उतार दी और मेरी जीन्स के ऊपर से ही मेरे लंड पर अपना हाथ फैरने लगी और फिर उन्होंने मेरी जीन्स भी उतार दी और अपने नर्म मुलायम हाथों में मेरा सख़्त लंड थाम लिया. फिर मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और उनके होंठो पर अपने होंठ रख दिए. फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उनके बूब्स को चूसना शुरू कर दिया.
अब में उनका एक बूब्स चूस रहा था तो दूसरे बूब्स को अपने हाथों से सहला रहा था. अब भाभी मेरे बालों में अपना हाथ फैर रही थी और अब उनके मूँह से ऊऊहह आआआआआआअहह उूउउऊऊऊहह उफफफफफफफफफ्फ़ जैसी सेक्सी आवाजे निकल रही थी. फिर मैंने भाभी के बूब्स को दबाते हुए कहा कि भाभी आपके बूब्स बड़े ही शानदार और रसीले है और आपकी निपल्स तो बड़ी ही सख़्त, मजेदार और मीठी है. फिर भाभी ने मुझे सेक्सी स्टाईल से देखा और अपनी आँखे बंद कर ली, भाभी उस वक़्त फुल हॉट और सेक्सी हो रही थी.
अब में अपनी जीभ भाभी के बूब्स पर से हटाकर उनके नर्म और मुलायम पेट पर फैरने लगा था और फिर धीरे-धीरे भाभी की जांघे भी मेरी गिरफ्त आ गयी थी. फिर मैंने उनकी दोनों टांगे फैलाकर उनकी चूत में उंगली डाल दी. अब उनकी चूत पहले से ही गीली हो रही थी. फिर उन्होंने मुझे अपनी चूत चाटने के लिए कहा कि आज तक किसी ने मेरी चूत नहीं चाटी है, तुम्हारे भैया अपना लंड तो चुसवा लेते है, लेकिन आज तक मेरी चूत नहीं चाटी है, प्लीज मेरी चूत को चाटो ना.
फिर मैंने कहा कि क्यों नहीं मेरी प्यारी भाभी, में आज आपकी ऐसी चूत चाटूंगा कि आप सारी ज़िंदगी याद रखेगी. फिर में उनकी गुलाबी चूत के होंठ खोलकर उन पर अपनी जीभ फैरने लगा. अब मेरी खुरदरी जीभ जब उनके चूत के दाने से टकराती तो उनके मूँह से सिसकारियाँ निकलने लगती. अब में उनकी चूत में अपनी जीभ अंदर बाहर करने लगा था और भाभी की चूत से रसदार नमकीन शहद टपकने लगा. फिर मैंने उनका सारा नमकीन शहद पी लिया और अपनी जीभ से भाभी को चोदता रहा.
अब भाभी मदहोशी में अपना सर तकिए पर इधर उधर पटक रही थी और प्लीज उूउउफफफफ्फ़ अहह ऊओह और करो तेज़ी से प्लीज़्ज़्ज़्ज़ यह तुमने कैसा जादू कर दिया है? मेरी चूत में आग सी लग गयी है, ऊऊऊहह आअहह हाययययी में मर गयी माँ, मेरी जान आहह जान प्लीज जल्दी तेज-तेज और फिर आख़री में भाभी बिल्कुल खल्लास हो गयी और उनकी चूत ने बहुत सारा नमकीन रस छोड़ दिया, जो मैंने सारा पी लिया था.
जब भाभी कुछ होश में आई तो वो उठी और मुझे गले लगाया और किस करके कहने लगी कि तुमने तो अपना काम कर दिया अब देखो में क्या करती हूँ? फिर भाभी ने मेरे लंड की टोपी पर अपनी जीभ फैरनी शुरू की और फिर धीरे-धीरे मेरा पूरा लंड अपने मुहं में ले लिया और लॉलीपोप की तरह चूसने लगी. अब भाभी मेरा लंड बहुत अच्छे से चूस रही थी.
फिर भाभी ने पहले आहिस्ता और फिर तेज़ी से मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया और फिर आख़री में जब में झड़ने पर आया तो मैंने अपना लंड उनके मुहं से निकालना चाहा. फिर उन्होंने इशारे से कहा कि मेरे मुहं में ही निकाल दो, तो मैंने अपना पूरा वीर्य उनके मुँह में ही डाल दिया और वो भी एक बूँद बेकार किए बगैर सारा पी गयी और उन्होंने फिर से मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया. फिर थोड़ी ही देर में मेरा लंड फिर से तनकर खड़ा हो गया.
भाभी ने कहा कि चलो असली मज़ा तो अब होगा. फिर वो बेड पर लेट गयी और अपनी दोनों टांगे ऊपर उठा दी, जिससे उनकी चूत ऊपर की तरफ उठ आई. फिर में उनके ऊपर लेट गया और भाभी ने मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत पर रखा तो मैंने एक धक्के के साथ अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया. अब उनकी चूत पहले से ही गीली हो रही थी, इसलिए मेरा पूरा लंड बड़ी आसानी से उनकी चूत में चला गया था. अब पहले तो में भाभी को आहिस्ता-आहिस्ता चोदता रहा और फिर मैंने अपनी स्पीड तेज़ कर दी और भाभी को सख्ती से चोदने लगा.
अब भाभी भी चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी और आआअहह ऊओह उउउफफफ्फ़ हहयययययए और तेज़ जल्दी प्लीज तेज़ उफफफ्फ़ ऊऊहह की आवाजे निकाल रही थी. अब उनके बूब्स हर झटके के साथ हिल रहे थे, जो एक हसीन और दिलकश नज़ारा था. फिर थोड़ी देर तक इसी पोज़िशन में चोदने के बाद मैंने भाभी को डॉगी बनाया, तो उनकी खूबसूरत और चौड़ी गांड ऊपर की तरफ उठ आई और उनके बूब्स किसी आम की तरह लटकने लगे.
मैंने भाभी की गांड पर अपना हाथ फैरते हुए अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया और उनके बूब्स पकड़कर जोर-जोर से झटके लगाने लगा. अब में भाभी को जी जान से चोद रहा था और भाभी भी चुदाई में मेरा भरपूर साथ दे रही थी. फिर काफी देर तक चुदने के बाद भाभी ठंडी पड़ गयी और अब में भी अपने आखरी सीमा पर थी. फिर मैंने भाभी से कहा कि में झड़ने वाला हूँ तो उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं तुम मेरे अंदर ही झड़ जाओ.
फिर मेरे लंड में से वीर्य का फव्वारा निकला और भाभी की चूत वीर्य से भर गयी और फिर में भी थककर भाभी के ऊपर ही लेट गया. फिर थोड़ी देर के बाद मैंने अपना लंड भाभी की चूत में से बाहर निकाला, जो कि अब वीर्य और भाभी के जूस से भरा हुआ था. फिर भाभी ने मेरे लंड को फिर से चाटना शुरू कर दिया और उसे चाट-चाटकर बिल्कुल साफ कर दिया.
फिर हम दोनों बाथरूम में गये और बाथ लिया. फिर मैंने बाथरूम में भी भाभी को चोदा और फिर हमने बाहर आकर अपने कपड़े पहन लिए. अब तो मेरा और भाभी की चुदाई का सिलसिला शुरू हो गया है और अब हमें जब भी कोई मौक़ा मिलता है तो हम चुदाई करते है. मैंने भाभी को उनके घर में हर जगह और हर पोज़िशन में चोदा है और हमने एक बार तो खुले आसमान के नीचे बारिश में भीगते हुए चुदाई की है. अब भाभी भी मेरी चुदाई से बहुत खुश है और कहती है कि तुम बड़ी अच्छी चुदाई करते हो, तुमने मुझे चुदाई का सही मजा दिया है.
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