एक समझौते का बदला

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राहुल है. आज में आप सभी को मेरा एक अनुभव बताने जा रहा हूँ, वैसे तो में नासिक का रहने वाला हूँ और में आपको अपने पहले मेरा मतलब है कि मैंने जिसे चोदा और चुदवाया उसकी स्टोरी बताने जा रहा हूँ.
मेरी इस स्टोरी में तीन लोग है, मेरा दोस्त गिरीश, उसकी बहन संजना और उसकी पत्नी सावित्री थे. अब में अपनी स्टोरी शुरू करता हूँ. यह उन दिनों की बात है जब में और गिरीश 10वीं क्लास में पढ़ रहे थे, वो मेरा फ्रेंड और मेरे मकान मालिक का लड़का था. उसकी छोटी बहन का नाम संजना था, जो कि 9वीं क्लास में पढ़ रही थी. हम सब रात को छत पर पढ़ाई करने के लिए जाते थे, उन दिनों में हम ब्लू फिल्म और किताबें आदि पढ़ते थे और मुठ मारते थे.
फिर एक दिन जब हमारे घर पर कोई नहीं था, तो तब गिरीश ने मुझसे कहा कि में तुम्हें चोदना चाहता हूँ. अब में भी ब्लू फिल्म देखकर बहुत गर्म हो चुका था, इसलिए मैंने उससे हाँ कह दिया. फिर उसने मुझे धीरे से किस किया और मेरे पूरे कपड़े उतार दिए.
फिर उसके बाद उसने अपनी अलमारी में से कंडोम का पैकेट निकाला और फिर उसने मेरे निपल्स को चाटना चालू किया और बाद में मेरी गांड पर तेल डाल दिया और फिर उसके बाद उसने कंडोम पहन लिया और मुझे बहुत बेरहमी से चोदा.
फिर उसके अगले दिन मैंने उससे कहा कि में उसे चोदूंगा, तो उसने इनकार कर दिया और वो कहने लगा कि में तुझसे बड़ा हूँ, में ही तुझे चोदूंगा. फिर उसके बाद हमारे बीच बहुत बहस हुई और उसने बोला कि अगर तू मुझे 1 लाख रुपए देता है तो हम एक एग्रीमेंट कर सकते है, उसे पता था कि में 1 लाख रुपए उसे नहीं दे सकता हूँ.
फिर भी मैंने उससे बोला कि बताओ एग्रीमेंट क्या है? तो उसने कहा कि में तुझे हर रविवार को चोदूंगा और तू मुझे हर मंगलवार और शुक्रवार और मेरी शादी के बाद मेरी बीवी को सोमवार और गुरुवार को चोद सकता है. फिर मैंने उसका एग्रीमेंट पक्का कर लिया और उसके बाद हमने एक देवी के सामने जाकर ये कसम खा ली.
फिर उसके बाद हम 10वीं क्लास में पास हो गये और अगली पढ़ाई के लिए मुंबई आ गये. अब गिरीश हर रविवार को मेरे हॉस्टल पर आकर मुझे चोदता था. अब उसकी वजह से मेरा चेस्ट बूब्स बन गया था और मेरी गांड भी मोटी हो गयी थी. अब में हर रात कसम ख़ाता कि गिरीश और उसकी पत्नी और बहन को ऐसे चोदूंगा कि मेरी और उनकी सारी हवस मिट जाए.
फिर 2 साल बीत गये और इन 2 सालों में मैंने दिन रात एक करके 1.50 लाख रुपए जमा किए और एक मंगलवार को गिरीश के रूम पर गया, तो वो पैसे देखकर चौंक गया, लेकिन अब तो उसे कसम निभानी ही थी तो उसने बोला कि 1.50 लाख किस लिए है?
फिर मैंने कहा कि तेरी बहन को मेरी रखेल बनाने के लिए है. अब उसके पास दूसरा और कोई चारा नहीं था. फिर उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए और अपनी गांड झुकाकर खड़ा हो गया, उसने अब तक मुझे 124 बार चोदा था. अब में उसका पूरा हिसाब निकालने वाला था तो मैंने उसे बड़ी बेरहमी से चोदा और उसकी पूरी गांड फाड़ डाली.
फिर उसके बाद एग्रीमेंट वाला सिलसिला चालू हो गया और फिर हम जब घर वापस आए, तो उसने अपनी बहन संजना को सब कुछ समझाकर मेरे पास भेज दिया. संजना तो एक हीरा थी और उसका तराशा हुआ बदन पाने के लिए ना जाने कितने लोगों ने अपनी चड्डी गीली कर दी थी, उसकी हाईट 5 फुट थी, लेकिन उसके बूब्स कमाल के थे. पूरे राउंड, में मेरे मन में उसे उर्मिला बुलाता था और उसकी कमर तो बहुत छोटी थी, लेकिन उसकी गांड बड़ी थी.
फिर जब वो मेरे रूम में आई तो उसने पिंक कलर का गाउन पहना था, वो उसमें बहुत सेक्सी लग रही थी. फिर मैंने सीधे मुद्दा उठाया, लेकिन उसने कहा कि वो मुझसे प्यार करती है, तो में देखता ही रह गया कि इतनी पटाखा लड़की मुझे आई लव यू कह रही थी. फिर मैंने बड़े प्यार से उसे एक चुंबन जड़ दिया, अब में उसके गुलाब की पंखुड़ियों की तरह के पतले होंठ अपने होंठो से चबाने लगा था.
फिर मैंने उसके पूरे कपड़े उतार दिए और उसकी गर्दन से होते हुए उसकी पीठ पर अपना हाथ फैरने लगा और अपने एक हाथ से उसके बूब्स दबाने लगा था, अब उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी. फिर मैंने उसके निप्पल को चूसना चालू किया, तो वो बहुत गर्म हो चुकी थी. फिर बाद में मैंने उसकी पेंटी निकाली और उसकी गुलाबी चूत का मज़ा लेने लगा. अब वो अपने पूरे होश खो बैठी थी, अब वो मुझसे ज़ोर-ज़ोर से लिपटने लगी थी.
फिर मैंने अपने पूरे कपड़े उतार दिए और मेरे 7 इंच लंबे लंड को उसकी चूत के मुँह पर रखा, तो वो सिहर उठी. फिर उसने कहा कि वो कुंवारी है, तो मैंने उसकी बात अनसुनी करके अपना लंड उसकी चूत पर फैरना शुरू कर दिया, अब उसे मज़ा आ रहा था.
फिर मैंने उसे चरम सीमा तक पहुँचाकर अपना पूरा लंड एक ही बार में उसकी चूत में पूरा घुसा दिया, तो वो बड़ी ज़ोर से चीख पड़ी और उसकी आँखों से पानी बहने लगा. फिर मैंने उसे ज़ोर-ज़ोर से चोदना चालू कर दिया, अब में अपनी लय में था. फिर थोड़ी देर में उसे भी मज़ा आने लगा और वो आआआआआहह, उूउउफफफफफ्फ़ ऐसी आवाज़े निकालने लगी थी.
फिर थोड़ी ही देर में हम दोनों झड़ गये और उसके बाद में उसे अपनी बाँहों में समेटकर लेट गया. फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उसे फिर से पोज़िशन लेने को कहा, अब मेरा लंड पूरी तरह से तैयार था, तो फिर उसने डॉगी वाली पोज़िशन ले ली और मैंने उसे डॉगी की तरह चोदना चालू किया. अब में उसे बड़ी ज़ोर-जोर से चोद रहा था, अब वो बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी. फिर जब हम झड़ गये, तो वो बिस्तर पर लेटकर अपनी सांसे नॉर्मल करते हुए मुझसे लिपट गयी और अपने प्यारे-प्यारे नाज़ुक हाथों से मुझे पीटते हुए जंगली कहीं के कहने लगी.
फिर मैंने उसके बूब्स को पकड़कर उसे अपनी और खींचा तो वो मुझसे लिपट गयी. फिर इस तरह से मैंने उसे पूरी रात में 4 बार और चोदा और उसकी सील तोड़ी. अब सुबह जब में खून से भरी बेडशीट धो रहा था, तो संजना गैलेरी में से मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी.
अब संजना ने मेरी रखेल बनने की ठान ली थी. फिर 3 साल के बाद गिरीश की शादी हुई और यह उसकी बदकिस्मती थी कि उसकी शादी सोमवार को हुई और हमारे एग्रीमेंट के मुताबिक उसकी बीवी को में सोमवार और गुरुवार को चोदूंगा, तो सुहागरात वाले दिन ही उसे अपनी बीवी को मेरे पास समझाकर भेजना पड़ा. गिरीश की बीवी सावित्री इतनी सुंदर तो नहीं थी, लेकिन उसकी फिगर देखकर कोई भी आदमी पागल हो सकता था, उसकी फिगर साईज 38-24-38 थी, उसका रंग दूध की तरह सफेद था और सबसे बड़ी बात जो मैंने अनुभव की, खैर में वो आपको बाद में बताता हूँ.
फिर जब वो मेरे रूम में आई तो वो गुस्से से पागल थी. फिर मैंने उसे ठीक तरीके से समझाया, तो उसे अपनी पति की करतूत की शर्म आने लगी. फिर लगभग 1 घंटा बातचीत करने के बाद वो मेरे साथ संभोग के लिए तैयार हो गयी. फिर मैंने धीरे-धीरे उसके सारे गहने उतार दिए और उसके कोमल होंठो पर एक चुंबन जड़ दिया.
फिर मैंने उसका सुहाग का जोड़ा उतारना चालू किया और पहले उसकी कुर्ती उतारी और बाद में उसकी साड़ी को उसके बदन से अलग किया और फिर उसका ब्लाउज और पेटीकोट भी निकाल दिया. अब उसकी संगमरमर की तरह खूबसूरत बदन पर सिर्फ़ उसकी ब्रा और पेंटी थी.
फिर मैंने उसे संभोग का पूरा मजा देने के लिए वो भी उतार दिए और फिर उसके मुलायम चिकने शरीर पर चुंबन जड़ना चालू कर दिया और उसके पूरे बदन पर चुंबन जड़ दिए और उसके शरीर पर 1 इंच का हिस्सा भी नहीं छोड़ा. अब वो इस बीच पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी.
फिर मैंने उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटना चालू किया, तो वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी ऊईईईईईईई माँआअ ऐसी सेक्सी आवाज़े उसके कोमल मुँह से आने लगी थी. फिर मैंने अपना 7 इंच लंबा लंड बाहर निकाला और उसे चूसने के लिए बोला. अब वो इतनी गर्म हो चुकी थी कि उसने मेरे लंड को बड़े प्यार से चाटना चालू किया और अब में इस बीच में 1 बार और वो 2 बार झड़ चुकी थी.
फिर मैंने उसे पलंग पर लेटाया और उसकी गोरी-गोरी टाँगे फैला दी, अब उसकी फूली हुई चूत ठीक मेरे सामने थी. फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा और ज़ोर से एक धक्का दिया तो एक ही धक्के में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया और हम दोनों दर्द के मारे चिल्ला उठे, क्योंकि उसकी चूत बहुत टाईट थी.
फिर मैंने आगे पीछे करना चालू किया और थोड़ी देर के बाद झड़ गया. अब उसकी हालत बहुत बुरी हो रही थी, लेकिन फिर भी मैंने उसे पूरे 5 बार और चोदा. फिर जब वो सुबह 5 बजे उठकर जाने लगी तो तब मैंने उसकी बड़ी-बड़ी, गोरी-गोरी गांड देखी और उसे फिर से अपने पास खींच लिया और उससे कहा कि अब में तुम्हारी गांड मारूँगा.
फिर उसने कहा कि बहुत दर्द हो रहा है और इसमें तो और ज़्यादा दर्द होगा. फिर मैंने उसके बूब्स दबाकर उसे गर्म करना चालू किया और उसके काले-काले निपल्स को चूसता गया, तो वो जल्दी से गर्म हो गयी और फिर मैंने कंडोम लगाकर उसकी गांड मारी.
फिर अगली सुबह जब में उठा तो मैंने देखा कि बिस्तर खून और चूत के रस से भरा था, इसका मतलब मैंने सावित्री की भी सील तोड़ दी थी. फिर अगले दिन गिरीश 1 साल के लिए अमेरिका चला गया और संजना और उसकी भाभी सावित्री की रातें मेरे कमरे में मेरे बेड पर (दोनों एक साथ) हसीन होने लगी. फिर गिरीश कभी वापस नहीं आया और मैंने उसकी बहन संजना को अपनी बीवी बना लिया और उसकी बीवी सावित्री को अपनी रखेल बना दिया और इस तरह से मैंने अपने ऊपर लगाए गये गिरीश के 124 शॉट्स का जवाब दिया और अपना बदला पूरा किया.
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सेक्सी कविता मेडम की चुदाई

हैल्लो दोस्तों, कभी कभी हमारे जीवन में ऐसा कुछ घटित हो जाता है जिसकी हम कभी कल्पना भी नहीं कर सकते और ठीक वैसा ही मेरे साथ भी हुआ और वो दिन मुझे आज भी बहुत अच्छी तरह से याद है जिस दिन मैंने अपनी एक मेडम को अपने स्कूल में चोदा और उनकी प्यासी चूत में अपना लंड डालकर अपने वीर्य से उसको भरकर पूरी तरह से संतुष्ट किया.
दोस्तों इस कहानी को आप लोगों के लिए लिखते हुए मुझे वो मज़ा तो नहीं आएगा, लेकिन हाँ दोबारा वो यादें आज दोबारा से ताजा हो जाएगी और में उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी आप लोगों को जरुर अच्छे लगेगी और इसको पढ़कर आप मुझे मैल करना भी ना भूले.
वैसे यह मेरी अपनी पहली कहानी है, लेकिन में बहुत लंबे समय से सेक्सी कहानियाँ पढ़कर उनके मज़े लेता आ रहा हूँ और दोस्तों यह मेरी कहानी मेरी और मेरी कविता मेडम की है. कविता मेडम मुझे स्कूल में गणित पड़ती है, जिसको मैंने उनके कहने पर चोदा और वो मज़े लिए.
दोस्तों यह घटना मेरे साथ तब घटी जब में 12वीं क्लास की पढ़ाई कर रहा था. मेरी वो मेडम बहुत ही सुंदर गोरी होने के साथ साथ वो बड़ी हॉट सेक्सी भी थी और उनके मोटे मोटे बूब्स मस्त मोटी गांड स्कूल में हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करती थी और उनका व्यहवार सभी के लिए एक जैसा मतलब कि वो बहुत अच्छी तरह से हंस हंसकर बातें किया करती थी, इसलिए वो मुझे बहुत पसंद थी और उनकी शादी हो चुकी थी, लेकिन फिर भी वो ना तो अपने चेहरे और ना ही अपने उस कातिल सेक्सी बदन से शादीशुदा लगती थी. उन्होंने अपने पूरे शरीर का बड़ा ध्यान रखा हुआ था उनके गोरे गोरे बूब्स के निप्पल हमेशा तनकर खड़े रहते थे इसलिए वो अब भी इतनी सुंदर आकर्षक लगती थी.
दोस्तों में शुरू से ही गणित में कमजोर था, लेकिन फिर मेरी कविता मेडम की वजह से मुझे अब बहुत कुछ आने लगा था. दोस्तों एक दिन कविता मेडम ने हमारी क्लास में कहा कि जो भी बच्चा कल गणित का होमवर्क नहीं करके आएगा तो वो कल उस बच्चे को सजा जरुर देगी. फिर मैंने किसी वजह से अपना गणित का काम नहीं किया था और अगले दिन में जब अपने स्कूल पहुंचा तो मेडम ने सभी बच्चो से उनका किया हुआ काम बताने के लिए कहा.
सभी बच्चों ने अपना अपना काम पूरा करके उनको दिखा दिया और उन्होंने अपना काम पूरा किया था, लेकिन उन सभी में एक में ही अकेला ऐसा बच्चा था जिसने अपना वो काम नहीं किया था. अब में अपनी कविता मेडम के सामने अपना सर झुकाकर खड़ा था, तब उन्होंने मुझसे पूछा कि मेरे इतना समझाने पर भी तुमने अपना काम क्यों नहीं किया, लेकिन मैंने उनको अपनी तरफ से कोई भी जवाब नहीं दिया और तब वो मुझसे कहने लगी कि आज तुम यहाँ स्कूल की छुट्टी हो जाने के बाद अपना काम करोगे और में खुद तुम्हे तुम्हारा वो काम करवाऊँगी.
मैंने उनसे कहा कि हाँ ठीक है मेडम और फिर क्लास खत्म हुई और उसके बाद वो चली गई और धीरे धीरे स्कूल की छुट्टी होने का समय भी आ गया. छुट्टी की घंटी बजी और सभी बच्चे अपने अपने घर जाने लगे, लेकिन मुझे तो वहीं पर रुककर अपना अधूरा काम पूरा करना था इसलिए में अब भी अपनी क्लास में ही बैठा रहा और अब तक वहां पर मेरे आसपास बैठे हुए सभी बच्चे भी अपने घर जा चुके थे, जिसके बाद अब में अपनी क्लास में बिल्कुल अकेले बैठा हुआ था.
तभी थोड़ी देर के बाद में कविता मेडम आ गई और में उस समय सबसे आगे वाली बेंच पर बैठा हुआ था, मेडम ने अंदर आते ही क्लास का दरवाजा बंद कर दिया और वो अब ब्लॅकबोर्ड पर मुझे सवाल समझाने लगी, लेकिन में तो सवाल को कम उनकी मोटी गांड को ज्यादा देख रहा था.
तभी अचानक से उनके हाथ से चोक नीचे गिर गई और मेडम उसको लेने के लिए नीचे झुकी तो मुझे उनके मोटे मोटे गोरे बूब्स की एक झलक दिखाई देने लगी और तभी उन्होंने मुझे उनके बूब्स की तरफ देखते हुए देख लिया था और वो सुंदर द्रश्य देखकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो चुका था.
फिर मेडम ने कुछ एक दो सवाल करवाने के बाद मुझसे कहा कि तुम अपने यह सवाल करो में बस एक मिनट में अभी आती हूँ. फिर मैंने उनसे कहा कि हाँ ठीक है मेडम और मेडम दरवाजा खोलकर क्लास से बाहर चली गयी, लेकिन अब उनको गये हुए बहुत देर हो चुकी थी और वो वापस नहीं आई थी. अब मैंने मन ही मन सोचा कि अब मुझे ही चलकर देख लेना चाहिए कि उनको इतनी देर कहाँ और कैसे लगी? और में अपनी क्लास से बाहर जाकर अपनी मेडम को इधर उधर देखने लगा.
में सभी क्लास में उनको देखता जा रहा था, लेकिन वो मुझे कहीं भी नजर नहीं आ रही थी और जब में उस हिस्से के लड़कियों के टॉयलेट के सामने से निकला तब मुझे अंदर से कुछ आवाज़ आ रही थी, इसलिए में वहीं पर रुक गया और में थोड़ी हिम्मत करके उस टॉयलेट के पास चला गया और मैंने ध्यान से अपना कान लगाकर सुना तो मुझे तब पता लगा कि यह तो मेरी कविता मेडम की ही आवाज़ थी. उसके बाद में दरवाजे के थोड़ा और पास चला गया.
फिर उसके बाद मैंने अंदर झांककर देखा कि अंदर दीवार पर लगे उस आईने के सामने मेरी मेडम नंगी खड़ी हुई थी और मेरी मेडम ने अपनी कमीज़ को उतार रखा था और उन्होंने अपनी ब्रा को भी नीचे किया हुआ था, मतलब मेडम के मोटे मोटे बूब्स उनकी ब्रा की उस केद से एकदम आज़ाद होकर बहुत खुश नजर आ रहे थे और यह सब देखकर मेरी चकित आखें वहां से हटने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थी, क्योंकि इस पूरी दुनिया का सबसे अच्छा रोचक द्रश्य आज मेरे सामने था और उस समय मेडम ने अपनी सलवार को भी नीचे कर रखा था और उनका एक हाथ पेंटी में था और दूसरा हाथ उनके बूब्स पर था, वो गरम होकर सिसकियाँ ले रही थी आहहह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ आज तो बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है और अब तो मुझे चुदाई करवानी ही पड़ेगी. मेरी चूत कब से प्यासी है में अब इसका क्या करूं?
में उनके मुहं से यह बातें ऐसे शब्द सुनकर बिल्कुल हैरान रह गया और मन ही मन सोचने लगा कि मेडम यह सब क्या कह रही है उस सभी की वजह से मेरा लंड अब तनकर खड़ा हो चुका था और अब मेरा मन अपनी सेक्सी कविता मेडम को उसी समय पकड़कर चुदाई करने का कर रहा था, इसलिए में अपनी पेंट के ऊपर से ही अपना लंड पकड़ा हुआ था उसको सहला रहा था. तभी अचानक से एक आवाज़ आई, हाँ अब तुम अंदर आ जाओ, प्लीज़ मुझे चोदो ना, में यहाँ पर तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी.
फिर में तुरंत अंदर चला गया और में मेडम को पकड़कर उनके होंठो पर स्मूच लेने लगा. कुछ देर बाद अपने होंठो को हटाकर मेडम अब अपने घुटनों के बल बैठ गयी और वो मेरी पेंट को खोलने लगी. पेंट को खोलने के बाद उन्होंने मेरा अंडरवियर भी उतार दिया.
दोस्तों मेरी अंडरवियर के नीचे उतरते ही मेरा खड़ा लंड अब बाहर आ गया था जो मेरी मेडम के ठीक सामने आकर उनकी चूत को सलामी दे रहा था और मेडम ने मेरा लंड अपने मुहं में ले लिया और वो उसको ऐसे चूसने लगी जैसे पहली बार उन्होंने कोई लंड देखा हो मेरा हाथ मेडम के बूब्स पर पहुंच गया था आअहह वाह उनके बूब्स कितने टाइट थे. मैंने उनको छूकर महसूस किया और अब मेरा मन मेडम के बूब्स को चूसने का कर रहा था, लेकिन मेडम तो मेरा लंड छोड़ ही नहीं रही थी.
फिर मैंने उनसे कहा कि मेडम मुझे आपके बूब्स को चूसना है. तभी मेडम खड़ी हुई और उन्होंने मेरा मुहं पकड़कर अपने बूब्स पर लगा दिया और मेरे सर पर हाथ फेरने लगी थी, में अब मेडम के मोटे मोटे बूब्स को दबा दबाकर चूस रहा था.
फिर मैंने बहुत देर तक उनके बूब्स को चूसने के बाद मेडम को हल्का सा धक्का देकर उनको दीवार के साथ लगा दिया और फिर मैंने खड़े खड़े अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया और में ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगा वो भी मेरा पूरा पूरा साथ देने लगी और हम दोनों बहुत जोश में थे और कई देर के बाद मेरा वीर्य मेडम की चूत में डाल दिया. फिर उसके बाद में और मेडम नंगे ही वापस अपनी क्लास में आ गए और फिर मैंने मेडम को एक टेबल पर लेटा दिया और में उनके पास खड़ा होकर अब में उनके बूब्स को चूसने लग था और उनके निप्पल को निचोड़ने लगा था, जिसकी वजह से वो बहुत जोश में आकर सिसकियाँ ले रही थी और मुझसे कह रही थी हाँ उफ्फ्फफ्फ्फ़ तुम आज इनको जमकर चूसो, इनका पूरा रस निचोड़ दो आह्ह्हह्ह वाह मज़ा आ गया, हाँ चूसते रहो.
थोड़ी देर बूब्स को चूसने के बाद मैंने सही मौका देखकर उसका फायदा उठाना ठीक समझा और मैंने एक बार फिर से अपना लंड मेडम की चूत में डाल दिया और फिर मैंने उन्हे बहुत जमकर चोदा इस बार मैंने उनकी थोड़ा लंबे समय तक लगातार धक्के देकर चूत को शांत किया और मैंने दोबारा झड़कर अपना पूरा वीर्य उनकी चूत के अंदर डाल दिया जो कुछ ही देर बाद लंड के अंदर बाहर होने की वजह से बाहर आकर उनकी जांघो पर फैल गया और उसके कुछ देर बाद मैंने उनको छोड़ दिया और वो उठकर खड़ी हो गई. फिर उन्होंने अपने सभी कपड़े ठीक किए और वो मेरी तरफ मुस्कुरा रही थी.
दोस्तों अब हम दोनों ऐसे ही कई बार कभी उनके घर पर तो कभी स्कूल में सेक्स कर चुके है, जिसकी वजह से हमने बहुत मज़े लिए और हमारे बीच अब कोई भी दूरी नहीं है, इसलिए उन्होंने अपनी पहली चुदाई के बाद अपने जीवन की बहुत सारी बातें मुझे बताई जिनको हमारे अवाला कोई नहीं जानता था. उन्होंने मेरी चुदाई और चोदने का तरीका बहुत देर तक जमे रहने की भी बड़ी तारीफ की है और अब हमे जब भी कोई अच्छा मौका मिलता है हम चुदाई का काम खत्म करते है, जिससे वो हमेशा बहुत संतुष्ट दिखाई देती है और में उनको देखकर खुश रहता हूँ, लेकिन यह सब कभी मेरे साथ होगा मैंने कभी किसी सपने में भी नहीं सोचा था और वो आज एक हकीकत बन गया है.
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टेलीफोन ऑपरेटर का प्रमोशनटेलीफोन ऑपरेटर का प्रमोशन

हैल्लो दोस्तों, में दीपक और में एक सरकारी दफ़्तर में ऑफिसर हूँ और एक बार मेरा तबादला कुछ महीनों के लिए उतरप्रदेश के एक शहर में हुआ था. अब वहाँ जाते ही में पहले तो 2-3 दिन होटल में रहा और फिर मेरे सहकर्मी ने बातचीत करके हमारी टेलिफोन ऑपरेटर के घर में रहने का इंतजाम कर दिया.
हमारी टेलिफोन ऑपरेटर का नाम सुनीता था, वो दिल्ली से ट्रान्सफर होकर आई थी. उसकी उम्र 28 साल, बदन एकदम स्लिम, रंग गोरा, बाल एकदम काले और आखें भूरी थी और वो काफ़ी सेक्सी महिला थी. मुझे हमेशा उसकी आँखे वासना से भरी हुई लगती थी और उसकी शादी 4 साल पहले ही हुई है, लेकिन उसके कोई औलाद नहीं थी, उसका पति बैंक में बाबू था.
सुनीता को प्रमोशन चाहिए था, इसलिए वो मुझे बहुत मस्का लगाती थी ताकि में उसकी सिफारिश करके उसका प्रमोशन करा दूँ और उसका पति भी जब हम घर पर होते थे तो मेरी खूब खातिरदारी करता था और मुझसे कहता था कि में सुनीता का प्रमोशन करवा दूँ, तो में कहता था कि में पूरी कोशिश करूँगा.
फिर मैंने उसके घर रहते हुए महसूस किया कि सुनीता की सेक्स लाईफ अच्छी नहीं है, इसलिए वो कई बार मुझे जानबूझ कर अपनी चूचियों का दीदार कराती थी और मेरे सामने मटक-मटककर सेक्सी अदा से इतरा इतरा कर चलती थी. उस दिन शुक्रवार था और उसका पति एक हफ्ते के लिए दिल्ली ट्रैनिंग के लिए गया था.
अब शाम को जब हम दोनों सुनीता और में ऑफिस से घर लौट रहे थे, तो तब मैंने सुनीता से कहा कि हम दोनों ही घर पर है तो खाना मत बनाना, में होटल से खाना मंगा लूँगा. फिर वो बोली कि ठीक है और फिर रास्ते में मैंने विस्की की बोतल खरीदी और घर आकर फ्रेश होकर में विस्की का पैग पीने लगा. फिर थोड़ी देर के बाद सुनीता भी फ्रेश होकर मेरे कमरे में आकर बैठ गयी और बातें करने लगी. फिर मैंने बातें करते वक़्त महसूस किया कि वो बहुत ही कामुक हो रही थी कि इतने में होटल से खाना भी आ गया और अब हम दोनों खाना खाते-खाते बातें कर रहे थे.
अब वो जब भी झुककर मुझे सब्जी या रोटी देती थी, तो मुझे उसकी चूचियों के दर्शन होते थे, क्योंकि उसने ढीली नाईटी पहनी थी. फिर मैंने अचानक से सुनीता से पूछा कि सुनीता में कई दिनों से देख रहा हूँ कि तुम दिन प्रति दिन सेक्सी लगती हो, तुम्हारी सेक्स लाईफ कैसी है? तो वो बोली कि क्या दीपक जी में बहुत ही सेक्सी हूँ? मेरे पति 10-15 दिनों में केवल एक बार ही शारीरिक संबंध बनाते है और बहुत ही जल्दी खल्लास हो जाते है, जिससे मेरी सेक्स की भूख नहीं मिट पाती और मेरी इच्छा बरकरार रहती है. ख़ैर फिर में खाना खाकर अपने कमरे में चला आया.
फिर थोड़ी देर के बाद वो मेरे कमरे में आई और बोली कि दीपक जी मुझे नींद नहीं आ रही है, इसलिए में आपके पास चली आई. फिर हम बातें करते हुए मज़ाक भी करने लगे. अब में मज़ाक के मूड में था तो मैंने कहा कि मुझे भी नींद नहीं आ रही है, चलो अच्छा है तुम्हारा साथ रहेगा और उठकर टेबल के पास गया, तो वहाँ पर केले रखे थे तो मैंने पूछा कि सुनीता जी केले चाहिए? बहुत ही लंबे और मोटे केले है.
फिर वो मुस्कुराते हुए बोली कि पहले अपने केले तो दिखाओ. फिर में उसके पास चला आया और उसको एक बहुत बड़ा केला दिखाते हुए कहा कि सुनीता जी आप ये केला ले लो, ये बहुत ही अच्छा है, आपको मज़ा आ जाएगा. फिर वो भी मुस्कुराते हुए सेक्सी अंदाज़ में बोली कि ये केला तो नर्म है और मुझे तो एकदम कड़क और बड़ा केला चाहिए. फिर मैंने उसे दूसरा केला दिखाते हुए कहा कि तो ये ले लो. फिर वो आँख मारते हुए बोली कि मुझे कोई अच्छा सा केला चाहिए.
में सुनीता के पास आकर सोफे पर बैठ गया और अब मेरा लंड मेरी अंडरवियर के अंदर उछल कूद मचा रहा था और सुनीता की नजरे उस पर जमी हुई थी. फिर उसने मेरे लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा कि तुमने तो वहाँ पर एक खास केला छुपाकर रखा है, उसे नहीं दिखाओगे? तो में बोला कि आप मज़ाक कर रही है. फिर वो बोली कि में मज़ाक नहीं कर रही हूँ. तब में बोला कि सुनीता जी यह आपके लायक नहीं है, ये बहुत ही बड़ा है. फिर वो बोली कि यह तो और भी अच्छी बात है, मुझे तो बड़ा केला ही चाहिए.
फिर मैंने शरमाते हुए अपना लंड अंडरवियर से बाहर निकाला और बोला कि देख लो. फिर वो अपना सर झुकाकर बोली कि मुझे तुम्हारा केला पसंद है, मुझे यही केला चाहिए. फिर में बोला कि इससे तुम्हें बहुत दर्द होगा. फिर वो बोली कि बाद में मज़ा भी तो आएगा. फिर में बोला कि हाँ मज़ा तो बहुत आएगा, लेकिन ये केला खाने से आपकी फट सकती है. तब वो मुस्कुराते हुए बोली कि में तो बहुत दिनों से ऐसा ही केला खोज रही थी.
मैंने बोला कि आप सोच लो में इस केले का मज़ा आपको देने के लिए तैयार हूँ, आगे आपकी मर्ज़ी. अब सुनीता के बदन में मेरे लंड को देखकर आग सी लग उठी थी. फिर अचानक से सुनीता ने मेरा लंड अपने हाथ में लेकर सहलाना शुरू कर दिया और फिर थोड़ी देर के बाद मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी.
फिर मैंने सुनीता से कहा कि अगर आप कहे तो में आपकी चूत को अपनी जीभ से चाट लूँ. फिर वो बोली कि तब तो और मज़ा आएगा, ऐसा करो में लेट जाती हूँ और तुम मेरे ऊपर आ जाओ. फिर वो लेट गयी और में उसके ऊपर 69 की पोज़िशन में हो गया, तो उसने मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और में उसकी चूत को चाटने लगा.
जैसे ही मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर लगाई, तो उसके बदन में सुरसुरी सी होने लगी और वो सिसकारियाँ भरते हुए मेरे लंड को तेज़ी के साथ चूसने लगी.
फिर कुछ ही मिनटों में उसकी चूत फड़फडाते हुए पानी छोड़ने लगी और अब वो बड़े ही प्यार से मेरे लंड को चूस रही थी. फिर मैंने बोला कि सुनीता जी आपकी चूत काफ़ी गीली हो चुकी है, अगर आप कहे तो अब में आपकी चुदाई करूँ. फिर वो बोली कि दीपक थोड़ी देर तक मेरी चूत को और चाटो, आज तक किसी ने मेरी चूत नहीं चाटी है, में शादी से पहले अपनी एक सहेली से अपनी चूत चटवा-चटवाकर खुजली मिटाती थी. अब में फिर से उसकी चूत को चाटने लगा तो 5 मिनट के बाद वो फिर से झड़ गयी.
फिर वो बोली कि दीपक अब तुम मेरी चुदाई शुरू करो. अब में उसकी टाँगों के बीच में आ गया और उसके चूतड़ के नीचे 2 तकिये रख दिए, जिससे उसकी चूत एकदम ऊपर उठ गयी.
फिर उसके बाद मैंने अपने लंड के सुपाड़े पर ढेर सारा अपना थूक लगाकर उसकी चूत की फांको को फैलाकर बीच में रख दिया और बोला कि देखो अब मेरा ये लंबा और मोटा लंड पूरा का पूरा आपकी चूत में आसानी से घुस जाएगा और फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत के अंदर दबाना शुरू कर दिया. अब मेरा लंड उसकी कसी हुई चूत को चीरता हुआ उसकी चूत में घुसने लगा. अब उसे हल्का-हल्का दर्द होने लगा था.
जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत में लगभग आधा घुसा तो सुनीता को बहुत ज़्यादा दर्द महसूस होने लगा और उसके मुँह चीख निकलने लगी. फिर में उसके चेहरे पर असहनीय दर्द को देखते हुए बोला कि बस थोड़ा सा सहन कर लो, अभी ये आपकी चूत में पूरा का पूरा बड़े आसानी से घुस जाएगा और मैंने अपना लंड दबाना जारी रखा.
अब दर्द के मारे उसका बुरा हाल था और इधर वो दर्द के मारे चिला रही थी, दीपक उूउउफफफफ्फ धीरे उूउउइईईईईईईई माँ में मर गयी और उधर मैंने एक जोरदार धक्का लगाकर मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ उसकी बच्चेदानी से जा टकराया. अब उसका पूरा बदन थर-थर काँपने लगा था और फिर उसने मुझसे रुक जाने को कहा, तो में रुक गया और उसके होंठो को चूसता हुआ उसकी चूचियों को मसलने लगा.
फिर थोड़ी देर के बाद जब उसका दर्द कुछ कम हो गया तो उसने कहा कि अब तुम बहुत ही धीरे-धीरे अपना लंड मेरी चूत में अंदर बाहर करो. अब में अपना लंड उसकी चूत में धीरे-धीरे अंदर बाहर करने लगा था कि कुछ ही मिनटो में मुझे उसकी चूत की सिकुड़न महसूस हुई. अब में समझ गया कि वो झड़ रही है और अब हम दोनों का पूरा बदन पसीने से नहा गया था.
फिर में 5 मिनट तक बहुत ही धीरे-धीरे अपना लंड उसकी चूत में अंदर बाहर करता रहा. अब उसकी चूत झड़ने के कारण काफ़ी गीली हो चुकी थी और अब मेरा लंड आसानी से अंदर बाहर हो रहा था. अब उसका दर्द भी कुछ कम हो चुका था और उसे भी मज़ा आने लगा था.
फिर वो सिसकारियाँ लेते हुए बोली कि चोदो दीपक और चोदो, कस-कसकर चोदो मुझे, उफफफ्फ़ कई दिनों के बाद मेरी इस चूत की प्यास बुझी है और इस तरह की बातें करते-करते वो फिर से एक बार और झड़ गयी. अब मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और ज़ोर-ज़ोर के धक्के लगाने लगा था. अब वो भी अपने चूतड़ उठा-उठाकर मेरा साथ देने लगी और बोली कि दीपक अब मुझे एकदम ज़न्नत का मज़ा मिल रहा है, जो कि मुझे आज तक कभी नहीं मिला था.
अब में जोश में आकर उसकी चूचियों को मसलते हुए उसकी चुदाई कर रहा था. फिर कुछ ही मिनटों में वो तीसरी बार झड़ी तो मेरे लंड राज ने भी उसकी चूत में अपना लंड रस डाल दिया. फिर मैंने बेड की चादर से उसकी चूत को साफ कर दिया और फिर अपने लंड को साफ करने लगा. उस रात मैंने उसकी 3-4 बार जमकर चुदाई की. अब वो बहुत खुश थी और में भी बहुत खुश था और उसके पति के आने से पहले मैंने सिफारिश करके उसका प्रमोशन करवा दिया था, इसलिए वो उसके पति के होते हुए भी रात को छुपकर मेरे कमरे में आकर चुदवाती थी.
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तीन लंड को एक साथ संभाला

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम पूजा है और में मुंबई की रहने वाली हूँ. मेरी उम्र 24 साल है और में एक सामान्य परिवार से हूँ. मेरा रंग बहुत साफ और मेरी लम्बाई 5.9 इंच है.
दोस्तों में आज आप सभी लोगों को अपनी एक सच्ची चुदाई की कहानी और मेरा सेक्स अनुभव बताने यहाँ पर आई हूँ जिसमे मैंने अपने भाई और उसके दो दोस्तों के साथ मिलकर मस्ती की और वैसे में पिछले दो सालों से अपने भाई के साथ भी बहुत कुछ कर चुकी हूँ और इसलिए में उम्मीद करती हूँ कि मेरे वो मज़े आप सभी को जरुर पसंद आएगें.
दोस्तों में बहुत गोरी और सेक्सी भी हूँ और मेरी माँ से मुझे मेरा यह हॉट सेक्सी रंग रूप मिला है और मेरे गदराए बदन का सही नाप 34-30-35 है. दोस्तों मेरे बूब्स आकार में बड़े है, लेकिन वो ज्यादा नीचे लटकते नहीं है क्योंकि में हर दिन योगा करती हूँ और उनको अपने अच्छे आकार में रखने के लिए में उनकी मसाज बहुत देखरेख करती हूँ और अब मेरी चूत की बारी वो गुलाबी रंग की फूली हुई और चिकनी भी है, क्योंकि में हर दिन उसके बालों को साफ करती हूँ.
दोस्तों यह घटना इस जनवरी महीने की है और मैंने जैसा कि अपना परिचय देते समय पहले ही बता दिया है कि एक अच्छी होटल में मैंने अपने चचेरे भाई और उसके दो दोस्तों के साथ अपने ज़िंदगी की सबसे हसीन और यादगार रात गुजारी.
दोस्तों वैसे आप सभी लोग यह बात जरुर सोच रहे होंगे कि उन तीन लोड़ो को मैंने कैसे संभाला होगा? तो में आप लोगों को बता दूँ कि में इस काम में बहुत माहिर हूँ और मुझे इसका बहुत ज्यादा अनुभव है, लेकिन तीन चूत के प्यासे लंड को एक साथ संभालना मेरे लिए भी वो पहला मौका था जिसको मैंने सफल कर दिखाया और मेरे भाई सूरज ने भी उस चुदाई के समय मन में एक पक्का निश्चय कर लिया कि वो भी मेरे इस काम को पूरा करने में अपना पूरा पूरा सहयोग देता रहेगा और उसने ठीक वैसा ही किया.
दोस्तों वैसे भी हम दोनों पिछले दो साल से हर कभी चुदाई करते आ रहे है और हम इस काम से कभी बोर ना हो इसलिए वो कभी अपने किसी दोस्त को भी बुला लेता है और हम सभी बहुत मज़े करते है. दोस्तों इसका मतलब यह था कि मैंने कई बार थ्रीसम तो किया था, लेकिन इस बार हम दोनों उसके भी बहुत आगे तक जाना चाहते थे.
फिर जनवरी की गुलाबी सर्दियों में सूरज में अपने दो दोस्त जिनका नाम अजय और ऋषि को किसी भी तरह से हमारे इस प्लान में शामिल होने के लिए मना लिया था और वैसे मनाने की ज्यादा ज़रूरत नहीं थी, क्योंकि किसी भी लंड को कोई भी चूत मिल जाए तो वो कहीं भी दौड़े भागे चले आते है. फिर हम सभी लोग महाबलेश्वर में शाम के समय पर पहुँचे और फिर करीब सात बजे हमने रात का खाना खाकर हम बाहर घूमकर आ गए.
करीब 8.30 के आसपास हम सभी लोग होटल में वापस आए तो मैंने बातों ही बातों में सूरज को पहले से ही बोल रखा था कि मुझे 4-5 इंच के लंड नहीं चाहिए क्योंकि इतने छोटे लंड कुछ काम के नहीं होते है इसलिए में आशा कर रही थी कि ऋषि और अजय के लंड करीब करीब 6 या 7 इंच के तो होंगे ही? अब हमारे उस बेडरूम में सूरज ने बड़ी धीमी सी आवाज में गाने लगा दिए थे और अपने लेपटोप पर उसने एक नंगा वीडियो लगा दिया था और में उसके बाद तुरंत बाथरूम में चली गई, लेकिन दोस्तों में सच कहूँ तो आज अपनी दमदार चुदाई के बारे में सोच सोचकर तो मेरी चूत पहले से ही बहुत गीली हो गई थी और फिर मैंने जब बाहर आकर देखा तो वो तीनों मेरे सामने पूरे नंगे खड़े थे और वो अपने अपने लंड को हाथ में लेकर हिला रहे थे.
तब मैंने ध्यान से देखा कि ऋषि और अजय के लंड तो आकार में कुछ ज़्यादा ही बड़े और मोटे भी थे, वो करीब 6-7 इंच के तो ज़रूर होंगे. अब अपने सामने खुले तनकर खड़े तीन तीन लंड को देखकर मुझसे भी अब रहा नहीं गया और मैंने भी तुरंत अपने सारे कपड़े उतार दिए और मेरी मोटी गांड, बड़े बूब्स और गुलाबी चूत को देखकर अजय और ऋषि के मुहं से अपने आप वाह मज़ा आ गया शब्द निकल पड़े. फिर में तुरंत उनके पास आकर उनके पैरों में अपने घुटनों के बल नीचे बैठ गयी और अब में ऋषि, अजय के लंड को पागलों की चूसने लगी, वो तो बहुत रसीले और गरम थे और मेरे ऐसा करने से उन दोनों की तो आहे निकल रही थी. दोस्तों मेरे उस भाई को चुदाई करते वक़्त गालियाँ देना बहुत पसंद है और वो उस रात को भी शुरू हो गया वो कहने लगा वाह छिनाल आज तुझे नये नये लंड मिल गये तो तू मेरा लंड भूल गयी क्या? ले मेरे लंड को भी चूस.
फिर मैंने उससे कहा कि में तेरा लंड पिछले दो साल से चूस रही हूँ और मैंने तेरा लंड चूस चूसकर इतना बड़ा कर दिया है फिर भी तुझे क्या चैन नहीं आया? चल अब आजा में तेरे भी लंड को थोड़ा सा मज़ा दे हूँ. अब अजय और ऋषि उस रंग में आने लगे थे जिसकी वजह से वो दोनों बड़े उतावले हो रहे थे. तभी ऋषि में मुझे अपनी गोद में उठा लिया और बेड पर लेटा दिया जिसके बाद ऋषि ने मुझ पर भूखे की तरह टूटकर मेरे बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाना और चूसना शुरू कर दिया और सूरज ने मेरे दोनों पैरों को फैला दिए और वो मेरी गुलाबी चूत को चूमने चाटने लगा और तभी अचानक अजय मेरे ऊपर आ गए और उसने अपना 6 इंच का लंड मेरे मुहं में डाल दिया.
उसका मोटा लंड तो मेरे मुहं में घुस ही नहीं रहा था इसलिए मैंने थोड़ी और कोशिश की तब जाकर उसका मोटा लंड मेरे मुहं में बहुत मुश्किल से अंदर चला गया, लेकिन में आप लोगों को क्या बताऊँ मुझे वाह क्या मज़ा आ रहा था? सूरज अपनी गरम लंबी जीभ से मेरी चूत को बहुत अंदर तक तेज़ी से चाटे जा रहा था और ऋषि एकदम पागलों की तरह मेरे दोनों बूब्स को दबा रहा था और चूस रहा था उसके साथ साथ चूस भी रहा था और अब मेरे मुहं में अजय का लंबा, मोटा और गरम लंड कहर बरसा रहा था. मुझे आज ऐसा लग रहा था कि यह रात कभी खत्म ही ना हो और हम सभी अपने अपने कामों में ऐसे ही पूरी जिंदगी लगे रहे ऐसे ही मज़े करते रहे.
तभी कुछ देर के बाद सबसे पहले हम सभी में से अजय बोला कि वो अब झड़ने वाला है और वो इतना कहकर अपना लंड मेरे मुहं से बाहर निकालने वाला था, लेकिन तभी मैंने उसके लंड को पकड़ लिया और अब वो अपने लंड को मेरे मुहं में धक्के देकर झाड़ने लगा. अरे दोस्तों में तो बताना ही भूल गई कि में हर लंड के रस की कितनी बड़ी दीवानी हूँ. मुझे लंड चूसना और उसका रस पीना बहुत अच्छा लगता है और इस काम की मुझे एक आदत सी हो गई है. में बड़े मज़े लेकर इस काम को मन लगाकर पूरा करती हूँ और में ऐसा बहुत बार कर चुकी हूँ.
फिर मैंने उसका लंड अपने मुहं में लेकर उसका पूरा का पूरा रस पी लिया और फिर में उसके लंड के आसपास लगे हुए बचे रस को भी मैंने अच्छे से चाटकर साफ कर दिया जिसकी वजह से अजय को बड़ा मज़ा आ रहा था. अब वो कहने लगा कि साले सूरज तूने इससे पहले कभी भी नहीं बताया कि तेरी यह बहन इतनी बड़ी चुदक्कड़ है, देख इसने तो मेरा सारा माल कितने मज़े से पी लिया और लंड को चाट चाटकर चमका भी दिया है, यह तो बहुत बड़ी छिनाल निकली.
फिर सूरज कुछ बोले उससे पहले में बोली कि चूतिए तीन लंड को संभाल रही हूँ तो चुदक्कड़ ही हुई ना, चल अब तू मेरी चूत का रस पी ले क्योंकि तेरा लंड दोबारा से खड़ा होने में तो अभी बहुत समय लगेगा और तब तक तू सूरज के साथ मिलकर मेरी चूत को चाट, आज तू मेरी चूत को खा जा और यह सब देखकर ऋषि तुरंत बीच में कूद पड़ा और वो बोला कि पूजा मेरी जान अब तू एक बार मेरे लंड का रस भी पी ले, इसको अभी तक किसी भी लड़की ने अपने मुहं में नहीं लिया है, ब्लूफिल्म को देख देखकर मेरी भी बड़ी इच्छा होती है कि मेरा माल भी कोई पी ले प्लीज.
फिर मैंने अचानक से उसका लंड पकड़कर अपने मुहं में डाल दिया और में उसको बड़े मज़े लेकर चूसने लगी थी. जिसकी वजह से ऋषि अब लंबी लंबी आहे भर रहा था और वो बहुत जल्दी झड़ने वाला था. इस बात का मुझे अंदाजा लग चुका था. फिर तभी मैंने उसके लंड को बाहर निकालकर उससे कहा कि आ जा ऋषि अपने लंड का सारा माल तू मेरे मुहं में डाल दे और अब वो अपने लंड को एक हाथ से पकड़कर ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगा. मुझे पता था कि अब कभी भी उसके रस की पिचकारी निकल सकती थी और इसलिए में अपना मुहं खोलकर उसका इंतज़ार कर रही थी.
तभी एकदम से ऋषि का माल पिचकारी की तरह बाहर निकला और वो मेरे मुहं में जा गिरा उसका थोड़ा सा माल मेरे नरम होंठो गाल और नाक पर भी जा गिरा और मैंने उस माल को अपनी जीभ से चाटकर वापस अपने मुहं में डाल लिया. दोस्तों में सच बताऊँ तो ऋषि का माल अजय के माल से बहुत ज़्यादा निकाला और वो बड़ा मस्त लग रहा था, वो एकदम गरम था. अब ऋषि यह सब देखकर तो बहुत ही मज़े में बोल पड़ा कि पूजा अगर तू मेरा माल हमेशा इस तरह पियेगी तो में पूरी जिंदगी भर तेरा सेवक भी बनने के लिए तैयार हूँ.
फिर मैंने मुस्कुराकर उसका सारा माल निगल लिया और उधर अजय और सूरज ने मेरी चूत को लगातार चाट चाटकर फुला दिया था. में इस काम में बहुत अनुभवी हूँ इसलिए मेरी चूत में भी बहुत ज़्यादा दम लंड लेने की ताकत और सभी को झेलने की हिम्मत है और इसलिए मेरी चूत इतनी जल्दी गीली नहीं होने वाली थी, लेकिन सूरज कुछ गोलियां हम सबके लिए लाया था और वो हम सबने ले ली.
फिर करीब पांच दस मिनट में ही उन गोलियों का असर हमे अब दिख रहा था, उसकी वजह से मेरी उत्तेजना अब और भी ज्यादा बढ़ गयी थी और उन तीनो के लंड भी अब और भी ज़्यादा तनकर खड़े थे.
दोस्तों तब मैंने मन ही मन सोच लिया कि अब मुझे इस साले के लंड से अपनी चुदाई करनी है इसलिए मैंने ऋषि को तुरंत नीचे लेटा दिया और फिर में उसके ऊपर आ गई. मैंने उसके लंड को पकड़कर उसको अपनी चूत में डाल दिया और में धीरे धीरे उस लंड के ऊपर बैठती चली गई जिसकी वजह से उसका सारा लंड अब मेरी चूत की गहराई में था. में उसके ऊपर बैठकर उसकी सवारी कर रही थी.
फिर मैंने सूरज से इशारा करके कहा कि सूरज अब तू भी आ जा और तू अपना लंड मेरी गांड में डाल दे, आज तू फाड़ दे मेरी गांड को और फिर मेरे मुहं से यह शब्द सुनते ही सूरज तुरंत मुझ पर लपक पड़ा और उसने अपना पूरा लंड अपना पूरा दम लगाकर मेरी गांड में डाल दिया. इन सभी कामों की बहुत समय से आदत होने की वजह से उसका सारा लंड मेरी गांड में बहुत आराम फिसलता हुआ बिना किसी रुकावट के अंदर चला गया.
दोस्तों में यह बात आप सभी औरतों और लड़कियों को बताना चाहती हूँ कि गांड मरवाने में एक अजीब सा मज़ा है इसलिए आप लोग भी इस काम को एक बार ज़रूर करके इसके मज़े लीजिए इसके बाद जैसे ही आपकी गांड में लंड जाएगा आपका सारा बदन उस मस्ती में आकर झूम उठेगा. अब मुझे एक सेक्सी वीडियो में देखा हुआ वो एक सीन याद आ गया और फिर मैंने अजय से बोला कि वो मेरे मुहं में अपना लंड डाल दे आअहह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ वाह मज़ा आ गया दोस्तों ऐसा मज़ा मैंने पहले कभी नहीं लिया था और उन तीनो लंड को भी यह सब करना बड़ा अच्छा लगा इसलिए वो तीनो अब बड़ी तेज़ी से मुझे हर एक जगह से चोदने लगे थे.
दोस्तों ऋषि मेरी कामुक चूत को अपने मोटे लंड से चोदकर उसका फालूदा बना रहा था और सूरज हमेशा की तरह मेरी गांड को अपने लंड से पूरा अंदर बाहर करके फाड़ रहा था और इधर अजय अपना लंड मेरे मुहं में डालकर पूरा अंदर और फिर बाहर कर रहा था. लंड के हलक में जाने की वजह से मेरी तो साँस ही रुक रही थी, लेकिन मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और हम सभी पूरे जोश में थे हमे एक अजीब सा नशा सा आ गया था और हम सभी एक अलग दुनिया में पहुँच चुके थे.
फिर बहुत देर बाद मुझे ऐसे लग रहा था जैसे सूरज ने अपना वीर्य मेरी गांड में डाल दिया है और ऋषि ने भी अपने लंड का रस मेरी चूत में उतार दिया था और बस कुछ देर के बाद में भी अब झड़ने वाली ही थी कि अजय ने अपना लंड मेरे मुहं से बाहर निकाला और उसने अपने रस की पिचकारी मेरे मुहं पर उड़ाई जिसकी वजह से मेरा पूरा मुहं उसके गरम चिपचिपे वीर्य से भर गया.
दोस्तों उसी वक़्त में भी झड़ गई जिसकी वजह से मेरी चूत का रस ऋषि के लंड से भी चिपक रहा था और मैंने अब उन सभी को अपने पास में बुलाया और मैंने उन सभी के लंड पर बचा हुआ वो माल मैंने दोबारा चाटना शुरू कर दिया. तब मैंने बहुत ध्यान से देखा कि वो तीनो लंड मुझे चोदकर लाल हो गए थे और फिर उसके बाद हम सभी लोग कुछ देर मस्ती करने के बाद वैसे ही पूरे नंगे ही सो गये.
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अपनी माँ को गले लगाया

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राजकुमार है और में बैंगलोर का रहने वाला हूँ और अभी बी.एस.सी IIIrd ईयर में हूँ. अब में मेरी इस स्टोरी में मेरी माँ के बारे में बताने जा रहा हूँ, मेरी माँ का नाम सुमित्रा है और मैंने मेरी माँ के बारे में कभी भी ग़लत नहीं सोचा था.
जब यह हादसा हुआ जब से वो मेरी माँ नहीं बल्कि मेरी पत्नी है, मेरी माँ 36 साल की है और में 20 साल का हुआ था और जब यह हादसा हुआ तब में 18 साल का था. मेरी माँ विधवा है, वो सिर्फ़ 4 महीने ही मेरे बाप के साथ रही थी, यानि मैंने अपने बाप का मुँह तक भी नहीं देखा था. फिर मेरी माँ को पापा के घरवालों ने बाहर कर दिया तो मेरी माँ को पापा की सारी जायदात मिली और हम इसी पैसे से सुखी है. मेरी माँ के बूब्स तो बहुत अच्छे है और वो रोज़ योगा करती है और वो इसी से अपने फिगर को मैनटेन करती है. में जब 10वीं क्लास में था तो जब यह हादसा हुआ था.
फिर एक दिन में मेरी बुक घर पर ही छोड़कर गया था और उसी दिन मुझे उस बुक को जमा करना था तो में एक घंटे बंक करके घर आया तो माँ दरवाजा लॉक किया था.
मैंने समझा कि माँ बाहर गयी होगी इसलिए मैंने अपनी चाबी से दरवाजे को खोला और मेरे रूम गया तो तब मुझे माँ के रूम से कुछ आवाज सुनाई दी तो मैंने दरवाजे में चाबी के छेद से अंदर देखा, तो मेरी माँ और मेरी माँ का भाई दोनों नंगे सोए थे. अब में यह सब देखकर शॉक हो गया था, मेरा मामा 10 साल के बाद एक हफ्ते के लिए बैंगलोर में आया हुआ था, उसकी पूरी फेमिली दुबई में है और उसकी बातों से साफ़ पता चल रहा था कि मामा मेरी माँ के साथ सोने के लिए आया था. फिर उसके बाद में सीधा स्कूल चला गया और माँ के बारे में सोचने लगा.
फिर एक हफ्ते के बाद मैंने माँ से सब पूछने का प्लान किया. अब में मेरे मन में माँ को चोदने के बारे में सोचने लगा था. फिर मैंने माँ से बोला कि आज में आपके साथ सोऊँगा, तो माँ ने ओके बोला, तो में खुशी से झूम उठा आज रात से मेरी माँ मेरी पत्नी बनेगी और फिर डिनर के बाद माँ और में सो गये. अब रात के 12 बजे थे, फिर मैंने मेरा एक हाथ धीरे से माँ के बूब्स पर रखा और धीरे दबाने लगा. फिर थोड़ी देर के बाद मैंने मेरी माँ की साड़ी को थोड़ा ऊपर किया और उनकी चूत पर अपना एक हाथ लगाया, तो तभी माँ बोली.
माँ :- क्या कर रहे हो तुम होश में तो हो ना?
में :- हाँ, में होश में हूँ में सब कुछ जानता हूँ.
माँ :- क्या जानते हो?
में :- तेरा और मामा का संबंध.
तो तब माँ रोने लगी और मैंने माँ के पास जाकर कहा
में :- क्यों ऐसा करती हो?
माँ :- मुझे माफ करना बेटा, मैंने तेरे बाप के साथ सिर्फ़ 2 महीने ही किया था और उसके बाद में केले को उपयोग करती थी. फिर एक दिन में जब केले से मज़ा ले रही थी, तो तब मेरा भाई आया और हम दोनों ने खूब अच्छी तरह से मज़ा लिया, वो भी कुछ दिन के लिए. फिर अब एक हफ्ते पहले ही हम दोनों मिले थे.
में :- आज से तुम ये सब छोड़ देना ना केला, ना मामा, सिर्फ़ में.
माँ :- क्या?
में :- आज से में तेरा पति हूँ.
फिर मैंने माँ को गले लगाया तो माँ ने मुझको एक किस दिया. फिर माँ एक चैन लाई और कहा कि आज से आप ही मेरे पति है, यही हमारा मंगलसूत्र है. फिर मेरी माँ ने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और अपने मुँह में लेकर आइसक्रीम की तरह चूसने लगी. फिर थोड़ी सी देर में मेरा पानी निकल गया, तो माँ बोली कि अरे तेरा तो बहुत जल्दी निकल गया और फिर वो मेरे लंड के पानी को पीने लगी, लेकिन फिर भी माँ ने मेरे लंड को अपने मुँह में लिया था.
फिर मैंने माँ के ब्लाउज को निकाला और उनकी ब्रा को भी निकाला, तो मुझे सुमित्रा (माँ) के गोरे-गोर बूब्स दिखाई दिए और फिर में सुमित्रा के बूब्स को पीने लगा. फिर थोड़ी देर के बाद माँ ने कहा कि अभी भी पूरी लाईफ है अभी सब ख़त्म नहीं करना है.
फिर मैंने सुमित्रा को पूरा नंगा किया और में लाईफ में पहली बार एक औरत को नंगा देख रहा था. फिर हम दोनों 69 की पोज़िशन में आ गये और अब सुमित्रा मेरे पूरे लंड को अच्छी तरह से चूसने लगी थी और ओ आहहहहह करने लगी थी. फिर थोड़ी के बाद सुमित्रा ने अपनी चूत के अंदर मेरे लंड को डाला और फिर मुझको नीचे ऊपर करने को कहा तो थोड़ी देर में मेरा पानी निकल गया. फिर उस दिन हमने रात को 4 बार सेक्स किया. अब सुमित्रा बहुत खुश थी और आज भी खुश है और कल भी खुशी से रहेगी.
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राखी पर बहन को ब्लेकमेल किया

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम सूरज है और में दिल्ली में जॉब करता हूँ और में अपने मम्मी पापा के पास हर 2 महीने में घूमकर आता हूँ. मेरे घर में मेरे मम्मी, पापा और मुझसे 2 साल छोटी बहन सुमन है, जो अभी 19 साल की है. में और सुमन हमेशा से एक दोस्त की तरह रहते थे और मेरे दिल में कभी भी सुमन के लिए कोई ग़लत इरादा नहीं था.
एक बार जब में घर गया तो मैंने सुमन को देखा तो मुझे भाई बहन के किस्से याद आ गये. उस वक़्त मुझे मेरे सामने मेरी बहन नहीं बल्कि एक बहुत ही खूबसूरत सी कच्ची कली दिख रही थी. फिर मेरी नज़र सुमन को घूरते हुए उसके बूब्स पर जा पहुँची.
उस वक़्त सुमन ने दुपट्टा नहीं डाल रखा था, उसके बूब्स बिल्कुल संतरे की तरह और कसे हुये थे. फिर तभी सुमन की नज़र मेरी तरफ गयी और बोली कि ऐसे क्या देख रहे हो? तो मैंने झट से अपनी नज़र हटा ली और बोला कि कुछ भी नहीं.
हमारा घर छोटा सा है, जिसमें 3 रूम और किचन और खुला सा आँगन है. मेरी मम्मी हमेशा घर में रहती है तो इसलिए में सोच रहा था कि सुमन को कैसे सेक्स के लिए राज़ी करूँ? फिर अगले दिन सुबह-सुबह में उठा और किचन में गया तो सुमन खाना बना रही थी.
फिर मैंने सुमन से पूछा कि सुमन मम्मी कहाँ है? तो सुमन बोली कि मम्मी मंदिर गयी हुई है, वो आधे एक घंटे में आ जाएगी. फिर मैंने कहा कि सुमन एक कप चाय बना दो, तो सुमन चाय बनाने लगी और में किचन से बाहर आ गया. फिर मैंने सोचा कि यह अच्छा मौका है, उस वक़्त घर पर कोई भी नहीं था और पापा भी खेत में गये हुए थे. फिर में वापस किचन में आया तो सुमन गैस के पास खड़ी थी और उसकी पीठ मेरी तरफ थी.
फिर में धीरे से गया और सुमन को पीछे से जाकर उसके दोनों बूब्स को दबोच लिया. फिर सुमन घबरा गयी और उसने चिल्लाना चाहा, लेकिन मैंने झट से उसका मुँह दबा दिया. फिर में सुमन को प्यार से समझाने लगा कि डर मत में हूँ ना.
फिर सुमन गुस्से में बोली कि ये क्या बतमीज़ी है? तो मैंने सुमन के बूब्स को फिर से पकड़कर उसके होंठो को चूम लिया और बोला कि सुमन आई लव यू, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो, प्लीज बुरा मत मानो. फिर सुमन मुझे धकेलते हुए बोली कि सूरज तुम्हारे दिमाग़ में मेरे बारे में कैसे-कैसे ख्याल है? चुपचाप यहाँ से जाओ नहीं तो में मम्मी को सब बता दूँगी.
फिर में उसे सॉरी बोलकर बाहर आ गया. फिर थोड़ी देर मे मम्मी मंदिर से आ गयी और मेरी बुआ भी उसी वक़्त आ गयी. फिर हम बुआ से बातें करने लगे, लेकिन सुमन मम्मी से इस बारे में कुछ भी नहीं बोली. मेरी बुआ थोड़ी शरारती है और अक्सर हमसे खुलकर बात करती है.
फिर शाम को जब में अकेला था तो बुआ मेरे पास आई और बोली कि अगर तुमसे बर्दाश्त नहीं होता तो तुम्हारी मम्मी से तुम्हारी शादी की बात चलाऊं, तो में चौंक गया और बोला कि बुआ आप भी मज़ाक करने लगी हो, में इतनी जल्दी शादी नहीं करने वाला. फिर बुआ बोली कि अरे बीवी आ जाएगी तो कम से कम बहन पर तो हाथ नहीं डालोगे और फिर बुआ ने अपनी एक आँख दबा दी. फिर में समझ गया कि सुमन ने बुआ को सब बता दिया है.
फिर बुआ बोली कि चल कोई बात नहीं, लेकिन अब आगे से ऐसा मत करना. फिर अगले दिन में वापस दिल्ली आ गया और अपने काम में व्यस्त हो गया. अब में घर ना तो फोन करता था और ना ही 2-3 महीने में घर जाता था, बस घर से मम्मी का फोन आता तो बात कर लेता था और अगर सुमन होती तो फोन काट दिया करता था.
फिर इस तरह मुझे पूरा 1 साल हो गया था. अब मम्मी जब भी घर आने के लिए कहती थी तो में झूठ बोल देता था कि मम्मी छुट्टी नहीं मिल रही है, बस पापा आकर मुझसे मिलकर चले जाते थे.
फिर एक दिन मुझे सुमन का फोन आया और वो रोती हुई बोली कि सूरज प्लीज फोन मत काटना, पहले मेरी बात तो सुन लो. फिर मैंने कहा कि बोल क्या बोलना है? फिर वो बोली कि क्या बात है तुम घर नहीं आ रहे हो? मुझसे क्या ग़लती हो गयी? तुम जो चाहते थे वो गलत था. फिर मैंने मना कर दिया बस इतनी सी बात.
फिर मैंने कहा कि तुमने ये बात बुआ को क्यों बताई? तो सुमन बोली कि मैंने तो बस इसलिए कहा था कि वो तुम्हें समझा देगी और बुआ ये बात किसी को नहीं बताएगी. फिर मैंने कहा कि ठीक है, अब में समझ गया हूँ और कुछ. फिर सुमन ने पूछा कि घर कब आओगे? तो मैंने उससे कह दिया कि अब कभी नहीं आऊंगा. फिर सुमन बोली कि क्यों?
मैंने साफ-साफ कह दिया कि में घर आऊंगा और अगर फिर वही हरकत कर दी, तो तुम फिर से बुआ को बोल दोगी तो में इसलिए घर नहीं आना चाहता हूँ. फिर सुमन रोने लगी और बोली कि सूरज प्लीज घर आ जाओ और फिर अगले हफ्ते रक्षाबन्धन भी है, मम्मी तुम्हें रोज याद करती रहती है प्लीज. फिर मैंने कहा कि में घर तभी आऊंगा जब तुम मुझे किस करने दोगी और अपने बदन को छूने दोगी, नहीं तो कभी नहीं आऊंगा.
फिर सुमन बोली कि सूरज तुम पागल तो नहीं हो गये हो, में तुम्हारी बहन हूँ और तुम मेरे साथ ऐसा करने की सोचते हो. फिर मैंने कहा कि तुम मेरी एक अच्छी दोस्त भी हो और तुम मेरी परेशानी को नहीं समझोगी तो कौन समझेगा? और में तुम्हें सिर्फ़ छूना ही चाहता हूँ और इसमें गलत क्या है? सोच लो और सोचकर कल तक बता देना. तभी में राखी तक आ सकूँगा नहीं तो नहीं आऊंगा.
अगले दिन मुझे सुमन का फोन आया और वो बोली कि ठीक है मुझे मंजूर है, लेकिन जल्दी आना. फिर में खुश हो गया कि मेरी तरकीब कामयाब हो गयी और में घर जाने की तैयारी करने लगा. फिर में राखी से 2 दिन पहले घर पहुँच गया. अब सुमन थोड़ी नर्वस सी थी, लेकिन खुश थी कि में घर आ गया हूँ.
अब मुझे 2 दिन से कोई मौका ही नहीं मिल पा रहा था कि में सुमन के साथ कुछ करूँ, क्योंकि सुमन हर वक़्त मम्मी के साथ होती थी, वो जानबूझ कर मम्मी से अलग नहीं होती थी और में भी मौके की तलाश में रहता था. फिर राखी के दिन से एक दिन पहले ही रात में मम्मी ने मुझसे कहा कि बेटा कल राखी है और बहुत दिन हो गये है, में तुम्हारे मामा से नहीं मिली हूँ तो में सोच रही हूँ कि कल चली जाऊं, वैसे भी घर को अकेला छोड़कर जाने का दिल नहीं करता है, अभी तू है तो कल में और तेरे पापा कल सुबह तेरी बुआ से मिलते हुए तेरे मामा के घर चले जाएगें.
फिर मैंने कहा कि ठीक है मम्मी, में अभी यहाँ हूँ तो तुम्हें चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है, आप आराम से जाओ. फिर अगले दिन मम्मी और पापा सुबह 5 बजे ही घर से निकल गये और में उन्हें बस स्टैंड तक छोड़कर आया और वापस आने के बाद में सीधा नहाने चला गया. अब सुमन राखी बांधने के लिए नहाकर तैयार बैठी थी.
फिर में तैयार होकर बेड पर बैठ गया. फिर सुमन हाथ में थाली लिए हुए जिसमें राखी मिठाई और दीया जल रहा था, वो लेकर मेरे पास आई और बोली कि सूरज अपना हाथ आगे करो. फिर मैंने कहा कि पहले तुम अपना वादा पूरा करो, तब में राखी बंधवाऊंगा. फिर सुमन ने कहा कि सूरज मज़ाक नहीं. फिर मैंने कहा कि में कोई मज़ाक नहीं कर रहा हूँ सिर्फ़ हाँ या ना. फिर सुमन ने कहा कि सूरज प्लीज आज तो कम से कम ऐसी बात मत करो.
मैंने कहा कि सुमन तुम जाओ, में कल ही वापस चला जाऊंगा, ओके बाय और में बेड से उठकर जाने लगा. फिर सुमन ने मेरा हाथ पकड़कर बेड पर बैठा दिया और बोली कि बताओ तुम क्या चाहते हो? तो मैंने कहा कि में एक बार तुम्हें सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में देखना चाहता हूँ.
सुमन बोली कि बस इतनी सी बात, वो तो तुम कभी भी देख लेना. फिर मैंने कहा नहीं अभी और इसी वक़्त, तो वो बोली कि अभी मुझे शर्म आ रही है. फिर मैंने कहा की कोई बात नहीं अगर तुम चाहो तो में भी अपने कपड़े उतार देता हूँ और फिर मैंने अपने कपड़े उतार दिए, अब में सिर्फ़ अंडरवियर में था.
फिर सुमन शर्माकर दूसरे कमरे में चली गयी और थोड़ी देर के बाद वो वापस आई तो सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी. अब उसे देखते ही मेरा लंड तन गया था, लेकिन मैंने अपने आप पर कंट्रोल किया और सुमन से बोला कि शरमाओ मत, अब आकर राखी बांधो.
सुमन ने मेरे पास आकर राखी बांधी और फिर मेरे मुँह में मिठाई खिलाई, तो मैंने अपने होंठो से आधी ही मिठाई को पकड़ा और खड़ा होकर सुमन के पास गया और अपने मुँह में दबी हुई मिठाई सुमन को खाने के लिए बोला.
सुमन ने मेरे होंठो में दबी हुई मिठाई को अपने होंठो से पकड़ा और फिर हम दोनों ही मिठाई खाते हुए एक दूसरे के होंठो तक पहुँच गये.
में सुमन के होंठो को अपने होंठो से चिपकाकर उसे चूसने लगा और सुमन को गर्म करने लगा और अब में उसे बेतहाशा चूमने लगा था. फिर थोड़ी देर में ही सुमन की साँसे तेज-तेज चलने लगी और वो बोली कि सूरज बहुत मज़ा आ रहा है.
फिर मैंने उसकी ब्रा और पेंटी भी उतार दी और उसे बेड पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ गया और उसकी चूत को सहलाने लगा और अपना लंड उसकी चूत में डालने लगा तो वो चौंक गयी और बोली कि नहीं सूरज दर्द होता है.
मैंने अपना लंड उसके मुँह में डाला और उसके मुँह को चोदने लगा और अपना सारा वीर्य उसके मुँह में ही निकाल दिया. फिर में सुमन की चूत में थोड़ा सा तेल डालकर उसे सहलाने लगा और सुमन मेरे लंड को सहला रही थी.
थोड़ी ही देर में मेरा लंड फिर से तन गया और में सुमन की चूत में अपना लंड धीरे-धीरे डालने लगा. फिर सुमन बोली कि सूरज धीरे-धीरे दर्द हो रहा है. में धीरे-धीरे सुमन की चूत में अपना लंड डालने लगा और जैसे ही मेरा लंड सुमन की चूत के अंदर गया तो वो चिल्ला पड़ी. फिर मैंने कहा कि कोई बात नहीं और फिर में उसे आराम-आराम से चोदने लगा. अब वो भी मज़े ले रही थी और अब हम दोनों एक दूसरे के मुँह में जीभ डालकर चूस रहे थे.
उसके बाद सुमन मुझसे ज़ोर से लिपट गयी और फिर धीरे-धीरे ठंडी हो गयी. अब में समझ गया था कि सुमन झड़ गयी है और फिर मैंने भी अपना वीर्य सुमन की चूत में ही छोड़ दिया, तो सुमन उछल पड़ी और बोली कि तुम्हारा रस कितना गर्म है? और फिर हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से लिपटकर सो गये.
फिर अगले दिन सुबह जब मेरी आँख खुली तो सुमन सो रही थी. मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और बाथरूम में ले गया और नल खोलकर सीधा पानी उसके ऊपर डाल दिया, तो वो उठ गयी और मुझ पर पानी डालने लगी.
हम दोनों नहाने लगे और अब सुमन मेरे बदन पर साबुन लगा रही थी और में सुमन के नंगे बदन पर साबुन लगा रहा था. मैंने सुमन को फर्श पर लेटाकर उसकी चूत में अपना लंड डाला और फिर से उसे चोदने लगा. फिर उसे चोदने के बाद हम दोनों नहाकर फ्रेश हुए.
मैंने पूछा कि सुमन राखी बँधाई का तोहफा कैसा लगा? तो सुमन बोली कि सूरज मुझे नहीं पता था कि इस खेल में इतना मज़ा है, तुम्हारा ये तोहफा मेरे और तुम्हारे दिए हुए सारे तोहफ़ो से भी कीमती है, में इस राखी को कभी भी नहीं भूल सकती हूँ और फिर वो मेरे करीब आकर मुझसे लिपट गयी.
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