पापा और भाई की रंडी बनकर चुद गई

हैल्लो दोस्तों, में प्रीति आज आप सभी सेक्सी कहानियाँ पढ़ने वालों के लिए अपनी एक अनोखी कहानी लेकर आई हूँ जिसमें मैंने अपने भाई और अपने पापा के लंड से अपनी चुदाई का खेल खेला और उनके साथ मज़े लिए और अपने मन को वो सुख दिया.
दोस्तों मेरे मम्मी पापा का बहुत साल पहले तलाक हो गया था, जिसकी वजह से हम हमारे घर में बस तीन लोग, में प्रीति, मेरा भाई जिसका नाम मोहन और मेरे पापा ही थे. में बहुत गोरी और मेरे बड़े आकार के सुडोल बूब्स, मटकती गांड जो मेरी इस चढ़ती मस्त जवानी को चार चाँद लगा रहे थे, क्योंकि मैंने अभी अभी अपनी जवानी की उस दहलीज पर अपना पहला कदम रखा था और में हमेशा बड़े गले के बिल्कुल टाईट कपड़े पहनती थी, जिसकी वजह से जो भी मुझे देखता बस देखता ही रह जाता था और ऐसा ही हाल कुछ मेरे भाई का था.
में उसको अपना गोरा सेक्सी बदन दिखाती और वो मेरे पीछे हमेशा लगा रहता और यही हाल मेरे कॉलेज के सभी लड़को का भी था, वो भी मेरे दीवाने थे. दोस्तों मेरे पापा सुबह अपने ऑफिस चले जाते और उसके बाद में दोपहर को जब भी अपने घर पर आती तो हम दोनों भाई बहन ही होते थे. फिर एक दिन हम दोनों घर पर अकेले बैठे हुए फिल्म देख रहे थे, क्योंकि हम दोनों को फिल्म देखने का बहुत शौक था और में अपने कॉलेज से आ चुकी थी.
अब हम दोनों का पूरा ध्यान उस फिल्म में था और हमे बड़े मज़े आ रहे थे. उसका मुझे पता नहीं, लेकिन में खुश थी और तभी अचानक से उसमे एक सेक्सी सीन आ गया जिसमें वो दोनों लड़का लड़की एक दूसरे से चिपककर चूमने चाटने लगे. कुछ देर चूमने के बाद उसने लड़की के कपड़े खोल दिए और वो अपने छोटे कपड़ो मतलब ब्रा पेंटी में आ गई. उसको मेरा भाई अपनी खा जाने वाली नजर से घूरकर देखने लगा.
अब वो मुझसे कहने लगा यह फिल्म बहुत अच्छी सेक्सी है, लेकिन इसमे पूरा सब साफ नहीं दिखा रहे है, तो मैंने तुरंत उसकी मन की बात को समझकर कि उसके मन में अब क्या चल रहा है? मैंने उससे पूछा कि तुम्हें इसमे और क्या क्या देखना है, वो इतना सब कुछ तो साफ दिखा रहे है? अब वो मुझसे बोला कि प्रीति वही कपड़ो के अंदर छुपे हुए अंग जिसके लिए में क्या यह पूरी दुनिया पागल है, वो तो नहीं दिखाए ना?
तब मैंने उससे पूछा कि कौन से अंग और तुम्हारा कहने का क्या मतलब है, मुझे तुम खुलकर समझाओ? और फिर उसने अपने लंड पर अपना एक हाथ रखकर कहा कि यह वाले अंग. दोस्तों में उसका वो इशारा तुरंत समझकर उसकी तरफ देखकर हंसने लगी, लेकिन तभी उसने अपनी अंडरवियर को उतार दिया और अब वो अपने लंड को मेरे ही सामने धीरे धीरे सहलाने लगा. फिर मैंने उससे पूछा कि तुम यह क्या कर रहे हो? उसने मुझसे कहा कि तुम्हें भी अगर ऐसा करना है तो कर सकती हो, मुझे उसमे किसी भी तरह की कोई भी आपत्ति नहीं होगी और अब मैंने उसकी उस बात को सुनकर अपनी पेंटी को उतार दिया और में भी शुरू हो गयी.
उस दिन हमने एक दूसरे के सामने ही मुठ मारी, लेकिन चुदाई जैसा कोई भी काम नहीं किया. अगले दिन से हम लोग एक दूसरे के सामने पूरी तरह से खुल गये थे और धीरे धीरे हम लोग चुदाई भी करने लगे थे. फिर ऐसे ही एक दिन हम लोग अपनी चुदाई के काम में व्यस्त थे. उस समय में उसके सामने अपने दोनों हाथों पैरों पर बैठकर कुतिया बनी हुई थी और वो मेरे पीछे से मेरी गांड में अपनी जोरदार स्पीड से अपना लंड डालकर अंदर बाहर करके मेरी गांड मार रहा था और में ज़ोर ज़ोर से उसको गलियाँ दे रही थी, वो मुझे बहुत जबरदस्त तरीके से रगड़कर वो मेरी गांड को ठोक रहा था और में उस दर्द की वजह से चिल्ला रही थी और उसको कुत्ते कमीने कह रही थी.
तभी पीछे से पापा की आवाज़ आ गई वो हमें देखकर पूछने लगे यह सब क्या हो रहा है? उनकी आवाज सुनकर हम दोनों उठकर तुरंत खड़े हो गये क्योंकि दरवाजे पर पापा खड़े हुए थे और अब तक उन्होंने हमें इस हालत में वो काम करते हुए देख लिया था, वो हमारी इस हरकत से बहुत ज्यादा गुस्सा हुए और उन्होंने गुस्से में हम दोनों को घर से बाहर निकल जाने को बोलकर वो अपने रूम में चले गये. अब मोहन ने मुझसे कहा कि अब हमारे पास सिर्फ़ एक ही रास्ता है, जिसकी वजह से हम दोनों बच सकते है, मैंने उससे पूछा कि वो क्या? तब उसने मुझसे कहा कि पापा का वो गुस्सा छोड़ दो और उस बात को भूल जाओ जो उन्होंने हमें अभी कुछ देर पहले गुस्से में कही थी.
फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है में तुम्हारे कहने पर वो सब भुला देती हूँ और अब वो मुझसे बोला कि तुम चलो मेरे साथ, तो में उसके साथ हो गई और फिर हम दोनों नंगे ही पापा के रूम में चले गये. मैंने देखा कि उस समय पापा दारू पी रहे थे और हम दोनों को अपने सामने इस तरह से पूरा नंगा खड़ा देखकर वो कहने लगे क्या तुम्हें बिल्कुल भी शर्म नहीं आती?
मैंने उनसे कहा कि आती तो है पापा, लेकिन इस गरम जोशीली जवानी के आगे किसी का ज़ोर नहीं चलता है और में भी क्या करती, मुझे भी तो जवानी चढ़ी हुई थी. में इसको अपने बस में कब तक रखती? तो पापा बोले कि तुम्हे क्या इतनी जवानी चढ़ी थी कि अब तुम अपने भाई से ही चुदाई करवाने लगी. उसको भी तुमने अपने साथ उस काम में लगा लिया, ऐसा क्या हो गया है तुम्हे, तुम अब बिल्कुल पागल हो चुकी हो.
अब में और मेरे पापा एक दूसरे से पूरी तरह से खुलकर बातें कर रहे थे, इसलिए मेरे मन से पूरा डर निकल चुका था. फिर मैंने उनसे कहा कि पापा अगर यह मेरा भाई ना होता तो क्या आप फिर भी मेरी इस चुदाई से इतना ही नाराज़ होते जितना अभी हो?
दोस्तों मेरी उस बात को सुनकर पापा बिल्कुल चुप हो गए और वो मन ही मन ना जाने क्या सोचने लगे थे? तभी मैंने उनसे कहा कि एक पल के लिए आप यह बात सोचिए कि में आपकी बेटी नहीं हूँ और आपके सामने सिर्फ़ एक नंगी जवान गरम लड़की अपनी कामुक चूत को लेकर खड़ी हुई है, क्या आप उसको नहीं देखेंगे? आप यह देखिए मेरे दूध इतने बड़े सेक्सी है, मेरी चूत इतनी चिकनी है और मेरी गांड इतनी मोटी है कि इन्हें कोई प्यार करने वाला भी तो होना चाहिए ना.
फिर पापा ने मेरी यह बात को सुनकर उन्होंने मेरे पूरे शरीर को बहुत ध्यान से देखा और वो लगातार घूर घूरकर देखते ही रहे और तब मैंने उनसे कहा कि देखिए अब आप खुद भी मेरे इस गोरे गरम सेक्सी बदन को देखकर धीरे धीरे गरम हो रहे है, क्यों में ठीक कह रही हूँ ना पापा, आप बहुत लंबे समय से बिल्कुल अकेले है और कितने ही दिनों से आपने भी किसी की चुदाई नहीं की है. आप अपनी इस अनमोल जिंदगी को ऐसे ही खत्म मत कीजिए, यह मेरी प्यासी चूत आपके लिए ही तो है और उनसे यह बात कहकर मैंने तुरंत अपने एक पैर को उठा दिया जिसकी वजह से मेरी चूत उनके सामने फैल गयी.
अब पापा अपने हाथ से उस गिलास को नीचे रखकर तुरंत खड़े हो गये थे और उनकी इस हरकत को देखकर में तुरंत समझ गई थी कि वो अब क्या करना चाहते है? इसलिए मैंने उनको अपनी बातों से और भी ज्यादा गरम करना शुरू कर दिया था.
फिर मैंने उनसे कहा कि पापा आज आप मुझे अपनी बेटी नहीं बल्कि अपनी बीवी समझो और अगर बीवी का यह रूप आपको पसंद ना आए तो आज आप मुझे अपनी रांड ही बना लो, प्लीज अब आओ ना मेरे पास और इतना कहने पर पापा मेरे पास आ गये. फिर हम दोनों ने एक दूसरे को चूमा और मैंने सही मौका देखकर उनको भी पूरा नंगा कर दिया था.
फिर मैंने देखा कि उनका लंड करीब 7 इंच का था और वो पूरा तनकर खड़ा हुआ था, जिसको देखकर में मन ही मन बहुत खुश थी, इसलिए मैंने उनको चूमते हुए कहा कि अभी तो आप मुझ पर बड़ा गुस्सा थे और अब आप मुझे चोदने के लिए तैयार हो, पापा आप पूरे बेटीचोद है. फिर पापा ने मुझसे पूछा कि तुमने यह गंदी गाली देना कहाँ से सीखा? मैंने उनसे कहा कि मोहन ने मुझे बहुत कुछ नया करना सिखाया है और अब पापा पूछने लगे कि वो बहनचोद तुम्हें कब से चोद रहा है और यह सब तुम दोनों के बीच में कब से चल रहा है? तो मैंने उनसे कहा कि बहुत समय हो गया है और हम एक दूसरे की प्यास को बुझा लेते है.
हम दोनों ऐसा बहुत बार ना जाने कितने दिनों से करते आ रहे है? तो पापा उस समय मेरी चूत को चाट रहे थे, वो बोले कि मेरी प्यास अब बुझेगी. फिर मैंने उनसे कहा कि हाँ चाटो मुझे, चूसो मेरी इस चूत को और चोदो मुझे. फिर वो जोश में आकर मेरी चूत को चूसते रहे और अपनी जीभ को मेरी चूत में अंदर तक डालकर हिलाते रहे और उसके कुछ देर बाद मैंने पापा से कहा कि पापा में अब आपका लंड अपने मुहं में लेकर उसको चूसना चाहती हूँ.
फिर पापा ने मुझसे कहा कि हाँ ले ले बेटी, यह इतना लंबा मोटा तेरे लिए ही है हाँ चूस ले इसको और फिर में उनका लंड अपने मुहं में लेकर लोलीपोप की तरह चूस रही थी, जिसकी वजह से मेरे साथ साथ उनको भी बहुत मज़ा आ रहा था और फिर कुछ देर लंड चूसने के बाद मैंने उनकी गांड में अपनी ऊँगली को डाल दिया और अब मैंने महसूस किया था कि वो अब मेरी चूत को अपने लंड से जोश भरे धक्के देकर उसकी चुदाई करने के लिए एकदम तैयार थे.
फिर मैंने आवाज़ दी कि मोहन अब तू भी अंदर आजा, क्योंकि मोहन अभी तक भी रूम के बाहर ही खड़ा हुआ था और अब वो भी मेरी आवाज को सुनकर तुरंत अंदर आ गया और वो पापा से पूछने लगा क्यों पापा आपको भी दीदी की जवानी ने गरम कर दिया ना?
पापा उससे बोले कि बहनचोद तू खुद तो इसको अपनी रांड बनाकर हर कभी इसको चोद देता है तो में भी क्यों ना इसकी चुदाई करूं? तो मैंने उनसे कहा कि वो सब तो ठीक है, लेकिन अब मेरी एक शर्त है, वो दोनों मुझसे पूछने लगे कि वो क्या है? तब मैंने उनसे कहा कि मुझे एक ही साथ एक लंड गांड में दो और एक मेरी चूत में डालकर मेरी जमकर चुदाई करो जिससे मुझे भी अपनी चुदाई में पूरा मज़ा आए और तुम दोनों भी खुश हो जाओ. दोस्तों सच कहूँ तो मेरी वो बात सुनकर वो दोनों बड़े खुश हो गये और उनके चेहरे ख़ुशी से खिल उठे और में उनके मन की बात को समझ गई.
फिर मोहन मेरे पास आया और वो मुझसे बोला कि ठीक है चल अब जल्दी से तू अपनी चूत को फैला ले और मैंने उसके कहने पर अपनी चूत की पंखुड़ियों को मेरे एक हाथ की उँगलियों की मदद से फैला लिया और उसने मेरी चूत पर थूक दिया और फिर उसके बाद उसने मेरी चूत को कुछ देर चाटा और उसके बाद वो बोला कि हाँ अब ठीक है यह पूरी गीली हो गई है और उसके बाद उसने मुझसे कहा कि दीदी अब गांड को फैला ले और मैंने ठीक वैसा ही किया, लेकिन इस बार मेरी गांड को मेरे पापा ने चाटा और फिर वो भी कुछ देर चाटने के बाद मुझसे बोले कि हाँ अब यह भी गीली हो गई है.
फिर मैंने उन दोनों से पूछा कि कौन मेरी चूत में अपना लंड डालेगा और कौन मेरी गांड मारेगा? तब पापा कहने लगे कि मोहन तू इसकी चूत ले ले और में इसकी गांड को अपने लंड का मज़ा देता हूँ. आज यह भी क्या याद रखेगी. अब मोहन ने कहा कि नहीं पापा आज आप इसकी चूत ले लो में इसकी गांड में अपना लंड डालूँगा प्लीज, पापा बोले कि हाँ ठीक है और फिर में पापा के ऊपर लेट गई.
पापा ने अपने एक हाथ से पकड़कर लंड को मेरी चूत में डाल दिया और उनका लंड 7 इंच का था और बहुत मोटा भी था इसलिए में उसके अंदर जाते ही दर्द की वजह से चिल्ला गई उफ्फ्फफ्फ्फ़ माँ मार दिया रे आईईईईई यह कौन सा हथियार है रे? उफ्फ्फफ्फ्फ़ में मर जाऊँगी मादरचोद कुत्ते की औलाद तेरी माँ ने क्या गधे से उसका लंड अपनी चूत में लिया था क्या? साले छिनाल की औलाद तभी तो तेरा इतना बड़ा, मोटा लंड है जिससे मेरी चूत फट गयी.
फिर पापा बोले कि रंडी कुतिया तेरी माँ की भी मैंने चूत ऐसे ही अपना लंड डालकर उसको फाड़ दिया था, अब देख आज में तेरी चूत को भी ठीक वैसे ही फाड़ दूँगा. गधे का लंड तो तेरी माँ ने लिया था और वो गधा में हूँ और आज में तुझे भी वैसे ही चोदूंगा, तेरी माँ की चूत साली रंडी ले और ले मज़े मेरे लंड के तुझे चुदाई का और लंड लेने का बहुत शौक है ना, कर मज़े मेरे साथ.
अब वो अपनी तरफ से जोश में आकर ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत को धक्के दिए जा रहे थे जिसकी वजह से उनका लंड अब मेरी चूत में पूरा अंदर चला गया था और अब पापा बोले कि मोहन तू क्या वहाँ पर खड़ा होकर अपनी इस रंडी बहन की चुदाई को देख रहा है? चल अब इधर आजा बहनचोद मार तू इसकी गांड और दे इसको वो भी मज़ा जिसके लिए इसने हमसे कहा था.
दोस्तों मेरा एक बूब्स पापा के मुँह में था और दूसरा उनके हाथ में, वो धक्के देने के साथ साथ उनको भी मसल निचोड़ रहे थे और तभी मोहन ने भी सही मौका देखकर मेरी गांड में अपना लंड डाल दिया और फिर पापा उससे पूछने लगे क्यों बे तेरी इस रंडी बहन की गांड ज्यादा टाइट है क्या?
मोहन बोला कि हाँ पापा यह छिनाल ऐसे ही हर रोज मुझसे अपनी गांड मरवाती है, लेकिन फिर भी इसकी गांड अभी भी इतनी टाइट है? अब हम तीनों एकदम फिट हो गये थे और मैंने उन दोनों से बोला कि अब अगर किसी भी कुत्ते हरामी की औलाद ने अपने मुहं से कोई भी आवाज़ की तो में उसका लंड काट दूँगी. अब तुम दोनों बिल्कुल चुप रहो और चोदो मुझे ज़ोर से और पूरे जोश के साथ मुझे वो मज़े दो.
फिर उन दोनों ने अपना अपना लंड सही जगह पर फिट किया और अब वो दोनों बारी बारी से मुझे धक्के लगाने लगे, जिसकी वजह से मुझे अब जन्नत का मजा मिल रहा था, लेकिन कुछ देर बाद हम लोग एकदम से जोश में आ गये और में उन दोनों को गालियाँ दे रही थी और वो दोनों मुझे अपने बीच में फँसाकर धक्के देकर मेरी चुदाई किए जा रहे थे और अब पापा का लंड चूत से अंदर बाहर निकलते समय फक फक की आवाज़ कर रहा था.
फिर मैंने उनसे पूछा कि पापा सच सच बताना मेरी माँ की चूत मस्त थी या मेरी मस्त है? तब पापा बोले कि तेरी माँ तो पक्की रांड थी, वो भी दिनभर में ना जाने कितनों से अपनी चुदाई करवाती थी, वो पूरी चुदेल थी, लेकिन तू तो मेरी रानी है, मेरी रंडी है, मेरी छिनाल है और में तुझे तो हर रोज सुबह शाम ऐसे ही चोदता रहूँगा.
फिर मोहन बोला कि मादरचोद में भी तो इसकी चुदाई करूंगा, तो में उससे बोली कि हाँ तुम दोनों ही मुझे चोद लेना, लेकिन अभी तुम दोनों इस स्पीड को और भी तेज करो, चलो जल्दी जल्दी आह्ह्ह्हहह म्‍म्म्मम उफफ्फ्फ्फ़ चोदो मुझे ज़ोर लगाकर, डाल दो पूरा, अंदर तक जाने दो. तभी कुछ देर धक्के देने के बाद पापा बोले कि में अब झड़ने वाला हूँ, मैंने कहा कि हाँ ठीक है अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लो और मेरे मुँह में डाल दो.
दोस्तों मोहन अभी भी मेरी गांड में धक्के दे रहा था और अब पापा ने अपना लंड बाहर निकाल लिया और वो मेरे मुँह में लंड को डालने की जगह वो मोहन की गांड के पास आ गये और वो मुझसे बोले कि बेटी इसे तू ज़ोर से पकड़ ले नहीं तो यह भाग जाएगा.
अब मोहन पापा की उस हरकत उनकी नियत को समझकर बोला कि नहीं पापा आप मेरी गांड मत मारना, मुझे बहुत दर्द होगा और मैंने कहा कि हाँ पापा मारो मारो इसकी गांड इस मादरचोद ने मुझे बहुत बार चोदा है, इसने कभी भी मुझ पर तरस नहीं खाया, आज आप भी जमकर चोदो इसको. दोस्तों मोहन का लंड अब भी मेरी गांड में था और मैंने उसे ज़ोर से पकड़ लिया और उसके बाद पापा ने पीछे से उसकी गांड में थूक दिया और थोड़ा सा तेल भी लगा दिया.
फिर उन्होंने सही निशाना लगाकर एक जोरदार धक्का देकर अपना पूरा लंड उसकी गांड में फँसा दिया और अब मोहन उस दर्द की वजह से रोने लगा, तो मैंने कहा कि मोहन रो मत मुझे भी दर्द होता है तू मुझे चोद लेना.
फिर मोहन ने कहा कि साली कुतिया तेरी वजह से आज मेरी गांड मर गयी. आज अब तू देख में क्या करता हूँ और गुस्से में मोहन ने मेरी गांड पर ज़ोर ज़ोर से अपना लंड डाला और उधर पापा ने पीछे से मोहन की गांड मार ली वो मुझसे पूछने लगे कि क्यों बेटी इस खेल में तुम्हे मज़ा आ रहा है ना? मैंने कहा कि हाँ पापा, लेकिन आज रात को मोहन आपकी गांड मारेगा. फिर पापा ने कहा कि ठीक है मुझे कोई भी आपत्ति नहीं है, अभी तो में इसकी गांड मार रहा हूँ और जल्दी ही पापा ने मोहन की गांड में अपना पूरा वीर्य निकाल दिया और वो झड़ गये और उसके बाद मोहन मेरी गांड में झड़ गया.
फिर उसने भी अपना गरम गरम माल मेरी गांड में डाल दिया और इसके बाद हम लोग अपने घर में सेक्स को लेकर बहुत खुले हो गये. मोहन और पापा एक दूसरे की गांड मार लेते और फिर मेरे पास आकर हम तीनों मिलकर मज़े करते. मैंने एक रबर का लंड खरीद लिया था, जिसको अपनी कमर पर पहनकर में उन दोनों की गांड मारती थी और हम बहुत मज़े करते थे. दोस्तों हम सभी लोग इस दुनिया के सबसे बड़े चुदक्कड़ लोग है, जिन्होंने अपने मज़े मस्ती के लिए वो सब किया जो कोई और नहीं कर सकता.
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चुदाई का पहला मजा

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रवि है और मेरे पड़ोस में एक 14-15 साल की लड़की रहती थी, जिसका नाम हेमा था. में तब 12वीं क्लास में पढ़ता था और हेमा हमारे घर अक्सर आया जाया करती थी. फिर एक दिन जब में पढ़ रहा था, तो वो अचानक से आकर मेरी गोदी में बैठ गयी, तो मुझे अजीब सा महसूस हुआ.
फिर मैंने एक चान्स लेना चाहा और उसके साथ मस्ती करते-करते अचानक से मैंने मेरा एक हाथ उसकी जांघो पर घुमाना शुरू किया, तो पता नहीं उसे शायद अच्छा लगा. फिर मैंने कुछ दिनों तक जब भी वो मेरे घर आती, तो में उसकी जांघों पर अपना हाथ फैरता रहता था, लेकिन वो भी उसे हमेशा अपनी गोदी में ही बैठाकर इससे मुझे मेरी इंद्रियों पर थोड़ी सी मालिश मिलती थी. फिर एक दिन मैंने धीरे से मेरा एक हाथ उसकी चड्डी के अंदर डाल दिया और उसे वहाँ भी गुदगुदी करने लगा. तो शायद उसे ये अच्छा भी लगा और नहीं भी, क्योंकि उसने मेरा हाथ झटके से हटा दिया, तो मैंने कोई भी जवाब नहीं दिया.
फिर एक दिन उसे कोई खिलोना जो कि हमारे घर के बक्से में रखा था, वो देखना था. फिर मैंने तुरंत उसे इस शर्त पर देने का वादा किया कि वो मुझे अपनी चड्डी में अपना हाथ लगाने देगी, तो फिर वो मान गयी. असल में मेरा वो पहला अनुभव था, जिसमें में इतने नज़दीक से उसको देख रहा था.
कई दिनों तक हमारा यह खेल चलता रहा और अब जब भी वो मेरे घर आती तो उस खिलोने से खेलने की ज़िद करती, लेकिन कुछ दिनों के बाद मुझे महसूस हुआ कि वो धीरे-धीरे मजे करने लगी थी, क्योंकि अब में जब भी उसकी चड्डी में अपना हाथ डालता और मुझे अगर ऐसा करते हुए कोई दिक्कत आती तो वो अपने आप उसकी चड्डी साईड से अपने एक हाथ से खोल देती और मुझे तो ये भी पता नहीं था कि आगे क्या होती है?
फिर उन दिनों मुठ मारते-मारते मेरे दिमाग़ में एक ख्याल आया और अब में पूरा नंगा होकर गाड़ी पर टिश्यू पेपर रखकर मेरी इंद्रियां उस पर एड्जस्ट करके मेरी कमर आगे पीछे करता, जैसा कि चोदने की स्टाइल में होता है, मुझे इसमें हाथ से मुठ मारने से भी ज़्यादा मज़ा आने लगा था. फिर मेरे दिमाग़ में एक ख्याल आया तो एक दिन मैंने हेमा को और एक अच्छा खिलोना दिखाया और उसे नया मज़ा करने के लिए मना लिया.
फिर मैंने उसकी चड्डी उसके घुटनों तक उतार दी और बाजू में जाकर अपना लंगोट भी निकाल दिया, लेकिन ऊपर की मेरी हाफ पेंट वैसे ही रखी और उसको मेरे सामने खड़ा किया और थोड़ा अपने घुटनों में झुककर मेरी इंद्रियों वाली जगह उसकी योनि के आसपास लगाई और धक्के लगाने शुरू किए, तो इससे मेरा वीर्य थोड़ी देर के बाद निकलने लगा.
फिर एक दिन मैंने ऐसा करते-करते धीरे से हेमा को पता चले बिना मेरी पैंट के बटन खोल दिए. उसे पहले तो कुछ मालूम नहीं पड़ा, लेकिन अचानक उसे उसकी जांघों पर गर्म चीज़ महसूस हुई तो तब उसने देखा कि ये कुछ अलग है.
थोड़ी देर के बाद में उसकी जाँघो पर झड़ गया और अब इतने दिनों से तो में अपनी पैंट के बटन खोले बिना अंदर झड़ जाता था, उसकी वजह से उसे मेरे झड़ने का पता नहीं चलता था, लेकिन इस बार मेरा पूरा वीर्य उसकी जांघों पर लग गया था, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा.
यही सिलसिला कुछ और दिन तक चलता रहा, लेकिन फिर एक दिन मैंने उसके साथ झगड़ा कर लिया, तो वो मुझे मनाने लगी. अब शायद उसे भी वो चीज़ अच्छी लग रही थी और फिर कुछ दिनों तक मैंने उसके साथ कुछ भी नहीं किया और फिर जब भी वो मेरे घर पर आती तो में उसके साथ ज़्यादा बात नहीं करता था.
फिर एक दिन वो बोल ही गयी कि रवि भैया तुम्हें वो सफेद-सफेद मेरी जांघों पर नहीं निकालना क्या? तो तब मैंने उस मौके का फ़ायदा उठना चाहा. अब थोड़ा-थोड़ा उसके समझने में आने लगा था, लेकिन हमारा ये सिलसिला काफ़ी दिनों तक चलने की वजह से वो काफ़ी खुल गयी थी. फिर एक दिन उसने मुझसे पूछा कि क्या में फिर से उसके साथ कभी वैसे नहीं करूँगा?
तब मैंने उसके साथ वो सब फिर से करने के लिए एक शर्त रख दी कि वो में जैसा कहूँगा वैसे ही करेगी. फिर में उसे हमारे घर में एक ऊपर वाला कमरा था वहाँ ले गया और कहा कि अब में पहले जैसा करता था वैसे ही करूँगा, लेकिन खड़े होकर नहीं बल्कि लेटकर, तो वो मान गयी.
फिर मैंने और एक शर्त रखी कि वो उसकी चड्डी घुटनों तक नहीं बल्कि पूरी निकाल देगी, तो वो तुरंत मान गयी और फिर उसने अपनी चड्डी निकाल दी. फिर में उसके ऊपर सो गया, तो वो मेरा वज़न नहीं सह सकी.
मैंने उसे उल्टा किया और उसे अपने ऊपर लेटा दिया और धीरे-धीरे उसके कूल्हों पर अपना हाथ फैरने लगा. अब मुझे धक्के मारने का मज़ा नहीं आ रहा था तो मैंने फिर से उसको अपने नीचे ले लिया और धक्के मारने लगा, लेकिन इतने दिनों से जब में उसे खड़े-खड़े धक्के मार रहा था, तो तब उसकी जांघों के बीच में मेरा लंड घर्षण की वजह से वीर्य छोड़ रहा था, लेकिन इस अवस्था में मेरे लंड का घर्षण ठीक से नहीं हो रहा था तो में मेरे लंड का टोपा उसकी योनि के साथ अपने हाथ से पकड़कर रगड़ने लगा, तो उसने अपने पैर चौड़े किए और मेरा लंड थोड़ा नीचे की तरफ खिसक गया, तो तब जाकर मैंने महसूस किया कि ये कुछ और चीज़ है.
में बैठकर उसकी योनि को ठीक से देखने लगा तो तब मैंने एक छोटा सा छेद जैसा देखा. फिर मैंने हल्के से मेरी एक उंगली उसमें डालने की कोशिश की तो हेमा ने कहा कि नहीं भैया, तो मैंने पूछा कि क्या हुआ? तो तब वो शर्म से लाल हो गयी.
फिर मेरे बार-बार पूछने के बाद उसने बताया कि उसकी सहेली अक्सर इस छेद में उसकी पेन्सिल अंदर डालती है. तो मैंने कहा कि पेन्सिल तो उसे लग जाएगी, लेकिन उंगली की नहीं लगती, तो तब वो मान गयी.
मैंने वैसा ही किया और कुछ देर तक मेरी उंगली अंदर बाहर करता रहा. अब हेमा को यह बहुत अच्छा लग रहा था. फिर कुछ दिनों तक हमारा ये ऐसे ही खेलने का सिलसिला जारी रहा. फिर एक दिन मैंने एक मेरे बड़े दोस्त से बात-बात में पूछा कि शादी के बाद कैसे करते है? मैंने डर के मारे उसे मेरे और हेमा के खेल के बारे में कुछ भी नहीं बताया था.
तब उसने मुझे समझाया कि लंड कैसे उस छेद के अंदर जाता है? फिर उस दिन में जब स्कूल से घर आया तो तुरंत हेमा के घर गया और उसको घर आने के लिए इशारा किया, तो वो तुरंत ही मेरे घर आ गयी. अब मुझे उस छेद में उंगली नहीं बल्कि मेरा लंड डालने की कोशिश करनी थी.
फिर मैंने हेमा को बताया, तो वो तुरंत मान गयी और ऊपर वाले कमरे में दौड़ते हुए पहुँच गयी और मेरे ऊपर जाते ही मैंने देखा कि हेमा अपनी चड्डी निकालकर मेरा इंतज़ार कर रही है. फिर मैंने उसके दोनों पैर पूरे खोल दिए और उसकी चूत के छेद की तरफ मेरा लंड एड्जस्ट किया और दबाने लगा. अब काफ़ी ज़ोर लगाने के बाद मेरा लंड थोड़ा सा अंदर जा रहा था.
मैंने हेमा को बताया कि मेरे ज़ोर लगाने से भी ये अंदर जा नहीं रहा है, तुम उसे अपने हाथ से पकड़कर अपने छेद पर एड्जस्ट करो और में अपने दोनों हाथ ज़मीन पर रखकर ज़ोर लगाता हूँ, तो उसने मान लिया और वैसे ही किया. फिर जब मैंने ऐसा करके ज़ोर लगाया, तो हेमा एकदम चिल्ला उठी और अब उसे कुछ खबर होने के पहले ही मेरा लंड उसकी योनि में था.
अब मेरे दोस्त ने मुझे सारी क्रिया समझा दी थी, अब में वैसे ही कर रहा था. अब थोड़ी देर के दर्द के बाद हेमा को भी थोड़ा मज़ा आ रहा था. में पहले भी उसकी चड्डी निकालकर उसकी जांघों पर मेरा लंड रगड़कर धक्का मारता था, अब मुझे भी इस टाईप के धक्को में काफ़ी मज़ा आ रहा था. फिर थोड़ी देर तक धक्के मारने के बाद मेरा वीर्य निकलने की प्रक्रिया चालू हो गयी, अब मुझे इस बार जांघों से भी ज़्यादा मज़ा आ गया था. दोस्तों ऐसे मेरा पहला संभोग शुरू हुआ था.
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मम्मी और आंटी के साथ मेरी चुदाई

हैल्लो दोस्तों, कैसे हो आप? आप लोगों ने मेरी पिछली कहानी को बहुत ज्यादा पसंद किया, क्योंकि मुझे उसके लिए आप लोगों के बहुत सारे मैल मिले. मुझे आपका इतना प्यार अच्छा लगा और मेरी कहानी को इतना पसंद करने के लिए आप सभी लोगों को दिल से बहुत बहुत धन्यवाद. दोस्तों अब में आप लोगों के सामने अपनी दूसरी कहानी को पेश करने जा रही हूँ और में उम्मीद करती हूँ कि यह भी आप लोगों को जरुर अच्छी लगेगी, ऐसी में आशा करती हूँ.
दोस्तों मुझे शकुंतला आंटी और मेरी मम्मी के साथ चुदाई करने में बहुत मज़ा आता है, जिस दिन चुदाई ना हो उस दिन मुझे बिल्कुल भी चैन नहीं आता में पागल सी हो जाती हूँ. दोस्तों एक दिन हम तीनों रात को करीब 9 बजे कमरे में गये और हम सभी तुरंत अपने अपने पूरे कपड़े उतारकर नंगी हो गयी और फिर हम तीनों एक दूसरे को किसी भूखे शेर की तरह चूमने चाटने लगी, में अपनी सेक्सी आंटी को चूम रही थी और मेरी मम्मी मेरी गांड और चूत को चाट रही थी.
तभी आंटी रसोईघर में चली गई मैंने देखा कि जब वो वापस आई तब उनके हाथ में मक्खन था. उन्होंने मेरी चूत पर वो मक्खन लगा दिया और उसके बाद वो मेरी चूत को ज़ोर से चाटने लगी और में आंटी की चूत और कभी गांड को चाटने लगी. फिर मेरी मम्मी यह सब देखकर अपनी ही चूत में रबर के लंड को डालकर अपनी चूत को चोदने लगी और उनके मुहं से बहुत अजीब सी आवाज़ निकल रही थी वो अब जोश में आकर उफफफ्फ़ माँ औूऊऊऊऊउ आह्ह्हह्ह करने लगी और वो बहुत ज़ोर से उस लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर कर रही थी आख़िर में वो कुछ देर बाद ज़ोर से झड़ गई और उसके बाद उन्होंने मुझसे कहा कि मेरी प्यारी बेटी तू मेरी चूत को चूस, आ जा जल्दी से इसको चाट ले, पी ले मेरा पूरा रस.
दोस्तों सच पूछो तो में भी यही करना चाहती थी, इसलिए में तुरंत उनके यह सब कहते ही मैंने अपनी मम्मी के पास जाकर उनके दोनों पैरों को फैला दिया और में उनकी चूत का रस चाटने लगी. मुझे उसकी चूत में से निकलता पानी चूसना बहुत अच्छा लग रहा था, क्योंकि में आज पहली बार उनका वो पानी पी रही थी.
तभी आंटी ने पीछे से आकर मेरी चूत में वो रबर का लंड डाल दिया और मेरे मुहं से आह्ह्ह उूउईईईई माँ की आवाज़ निकल गयी. फिर शकुंतला आंटी अब ज़ोर से उस लंड को मेरी चूत के अंदर डाल रही थी और में उस दर्द से करहा उठी मुझे बहुत दर्द हो रहा था, लेकिन शकुंतला आंटी मेरे दर्द की परवाह किए बिना उस लंड को और ज़ोर से मेरी चूत के अंदर बाहर कर रही थी और अब मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था और मेरे साथ साथ आंटी भी पूरे मज़े ले रही थी, वो जोश में आकर अपनी चूत में अपने ही हाथ की उंगलियां डालकर लगातार अंदर बाहर कर रही थी और कुछ देर बाद आंटी ने कहा आह्ह्ह्हह माँ उफफफफ्फ़ में अब झड़ने वाली हूँ.
मैंने उनसे कहा कि आंटी आप मेरे मुहं में झड़ना और आप आपका रस भी मुझे पिला देना. फिर उसके बाद में आंटी की चूत पर अपना मुहं लगाकर अपनी जीभ को अंदर डालने लगी और कुछ ही देर के बाद वो मेरे मुहं में ज़ोर से झड़ गयी. मैंने उनकी चूत का एक भी कतरा नीचे नहीं गिरने नहीं दिया और में आंटी की चूत को ज़ोर से चाटने लगी उन्होंने मुझे अपना पूरा रस उसके साथ मूत भी पिलाया और मैंने उसका कुछ मूत अपने मुहं में वैसा ही रखा और में उठकर खड़ी हो गयी और अब में आंटी को किस करने लगी तो मैंने वो मूत आंटी के मुहं में भी डाल दिया, क्योंकि वो भी बहुत प्यासी थी इसलिए वो उसको पी गयी. अब हमारे साथ मम्मी भी आ गई.
अब शकुंतला आंटी मेरी चूत को चाट रही थी और में मम्मी की चूत को चाट रही थी. आंटी कभी कभी मेरे बूब्स भी दबा देती तो मुझे और भी अच्छा लगता. अब मम्मी ज़ोर से बोल रही थी उफ्फ्फ्फ़ हाँ और ज़ोर से चूस अपनी माँ की चूत और ज़ोर से चूस जहाँ से तू बाहर आई थी खा जा आज तू उस जगह को, इसने मुझे बड़ा दुःख परेशान किया है. फिर में अपनी मम्मी की चूत को और ज़ोर से चूस रही थी मम्मी भी अपनी चूत को ज़ोर से ऊपर नीचे कर रही थी उसके साथ साथ आंटी भी मेरी चूत को ज़ोर से पूरे जोश में आकर चूस रही थी.
तभी अचानक से आंटी उठी और अब वो मेरे छोटे छोटे बूब्स को ज़ोर से मसलने लगी जिसकी वजह से में एकदम मचल उठी क्योंकि आज पहली बार कोई औरत मेरे बूब्स को दबा रही थी उनका रस निचोड़ रही थी और वो लगातार दबाती जा रही थी उस दर्द की वजह से में ज़ोर से चिल्ला रही थी उफ्फ्फ्फ़ हाँ और ज़ोर से दबाओ शकुंतला आंटी हाँ मुझे बहुत मज़ा आ रहा है आह्हह थोड़ा ज्यादा ज़ोर लगाओ.
दोस्तों वैसे मैंने भी आंटी के बड़े बड़े बूब्स को पहले भी कई बार दबाया था इसलिए अब उनको बताने के लिए दोबारा से उनके बूब्स को हाथ में लेकर मैंने दबाना शुरू किया. दोस्तों आंटी के बूब्स क्या मस्त थे? बड़े आकार के मुलायम और उनकी गहरे काले रंग की निप्पल बहुत अच्छी लगती थी.
फिर आंटी कभी मेरे निप्पल को अपने मुहं में लेकर चूसती तब वो मेरे निप्पल को अपने दांत से काटती भी थी और उस दर्द की वजह से में चिल्ला उठती. वैसे आंटी मेरे बूब्स को आज पहली बार दबा रही थी और किसी औरत से अपने बूब्स को दबवाना यह मेरा पहला अनुभव था और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, आंटी पूरी मस्ती जोश में आकर और ज़ोर से दबाती वो मुझे बहुत अच्छा लगता और में उफफफ्फ़ माँ मर गई कहने लगी. दोस्तों यह सब हमारे बीच बहुत देर तक चलता रहा जिसकी वजह से हम तीनों अब थक गयी थी.
फिर हम तीनों ने अपने कपड़े पहने और उसके बाद हमने खाना खाया और उसके बाद हम सभी बाहर घूमने चले गये और रात को वापस घर पर आकर हमने एक बार फिर से खाना खाया और उसके बाद थोड़ी देर तक हमने टीवी देखी और फिर आंटी मम्मी मेरे पास बैठकर मेरे बूब्स को दबाने लगी, जिसकी वजह से में एक बार फिर से मस्ती में आने लगी.
उस समय शकुंतला आंटी तो मुझे पूरे जोश में दिख रही थी और आंटी ने जल्दी से अपने खुद के पूरे कपड़े उतारे और उन्होंने मेरे भी पूरे कपड़े उतार दिए और उन्होंने मुझे पूरा नंगा कर दिया. अब आंटी और मम्मी दोनों ने अपनी अपनी चूत पर वो रबर के लंड बांध लिए और मम्मी ने एक जोरदार धक्का देकर मेरी चूत में उनका लंड डाल दिया उस दर्द की वजह से में करहा उठी मेरे मुहं से आह्ह्ह्हह उफफफ्फ़ उूईईईईइ निकल गई. फिर मम्मी ज़ोर से बोल रही थी ले पूरा अंदर ले, बहुत आग है ना तेरी चूत में. आज में तेरी पूरी आग को शांत कर दूंगी, तुझे बहुत लंड लेने का शौक है ना और आज में वो सब पूरा कर दूंगी.
अब शकुंतला आंटी ने मेरे मुहं में अपना लंड डाल दिया और वो अंदर बाहर कर रही थी. दोस्तों अब मेरे दोनों छेद में लंड थे और मुहं में लंड होने की वजह से मेरी आवाज भी बाहर नहीं आ रही थी और अब हम तीनों पूरी मस्ती जोश में थे और मम्मी भी मुझे पूरी स्पीड से धक्के देकर चोद रही थी और वो मुझसे अब बहुत गंदी गंदी गालियाँ भी बक रही थी. में भी उनको बेटी चोद बोल रही थी और मैंने उनसे मुझे ज्यादा ज़ोर से धक्के देकर चोदने के लिए कह रही थी.
अब आंटी भी मेरे मुहं में अपने लंड को बहुत ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे कर रही थी. में उस बीच कितनी बार झड़ी यह बात मुझे ठीक तरह से मालूम भी नहीं था, लेकिन मेरी चूत अंदर बाहर से पूरी गीली हो चुकी थी. फिर मम्मी ने अपने लंड को मेरी चूत से बाहर निकाला तो आंटी की जीभ ने मेरी चूत पर अपना कब्जा कर लिया और वो मेरी चूत का बाहर बहता हुआ पूरा पानी चाटने लगी चूसने लगी और में अपनी मम्मी की चूत का पानी पी रही थी मम्मी ने मेरे मुहं में अपना गरम मूत छोड़ दिया और उसको में बड़े प्यार से पी गयी.
अब आंटी ने मेरी गांड चाटना शुरू किया और वो मुझसे कह रही थी कि निशा तेरी गांड है या मक्खन? वो मेरी गांड के छेद में अपनी उंगली को डालकर उसे अंदर बाहर कर रही थी और अपनी जीभ से चाट भी रही थी, मुझे यह सब बहुत अच्छा लग रहा था. अब आंटी ने एकदम से मेरी गांड में अपना लंड डालने की कोशिश की तो में उस दर्द की वजह से ज़ोर से चिल्ला उठी नहीं आईईइ में मर गई कुतिया साली हरामी शकुंतला आंटी, मेरे साथ ऐसा मत करो.
फिर वो और भी ज्यादा कोशिश करने लगी वो अपना आधा लंड मेरी गांड में डालने में कामयाब हो गयी और फिर वो मेरी मम्मी को कहने लगी कि तुम इसकी चूत में अपना लंड डालो और इसको आज ज़ोर ज़ोर से चोदो इतना कहकर आंटी ने अपनी स्पीड को बढ़ा दिया था.
दोस्तों सच कहूँ तो अब वो मेरी गांड को फाड़ रही थी और थोड़ी देर बाद मेरा दर्द कुछ कम हुआ और मुझे उनके साथ सेक्स में मज़ा आ रहा था, मम्मी भी अब पूरी स्पीड से मेरी चूत को चोद रही थी और मेरे लिए यह बहुत अच्छा समय था कि में एक साथ आगे से और पीछे से चुद रही थी. मुझे दर्द तो हो रहा था, लेकिन सुख उससे ज़्यादा मिल रहा था में मस्ती में उऊफफफफफ आह्ह्ह्हह हाँ थोड़ा और ज़ोर से चिल्ला रही थी, वो दोनों तो मेरी जमकर चुदाई कर रही थी और में भी उस समय पूरी तरह मस्ती में थी.
अब आंटी रुक गयी थी और आंटी ने अपना लंड मेरी गांड से बाहर निकाल लिया और वो खुद उस लंड को अपने मुहं में लेकर बड़े प्यार से चूस रही थी उनको देखकर मेरी मम्मी ने भी ठीक वैसा ही किया वो दोनों अपने अपने लंड को अपने मुहं में लेकर चूस रही थी. दोस्तों सच पूछो में तो अब बहुत थक चुकी थी, लेकिन तभी आंटी की रसभरी गीली चूत को देखकर मेरी पूरी थकान दूर भाग गयी और में आंटी की चूत को चूसने लगी जिसकी वजह से वो कामवासना से सिहर उठी और वो मेरा सर अपनी चूत पर ज़ोर से दबाने लगी उूह्ह्ह्हह्ह आह्ह्ह्हह्ह हाँ ज़ोर से तेज़ी से चूसो निशा, तुम बिल्कुल भी मत रूको, आज तुम मेरा पूरा पानी बाहर निकाल दो आईईईईई निशा तुम बहुत अच्छी हो, तुम हर चूत को बहुत प्यार से चूसती हो, आज तक मेरी चूत को किसी ने भी इस तरह से नहीं चूसा तुम्हारी तरह मुझे ऐसा मज़ा नहीं दिया हाँ और जाने दो अंदर वाह मज़ा आ गया, तुम बहुत समझदार लड़की हो.
फिर में भी अपनी पूरी जीभ को उनकी चूत के अंदर तक गहराई में डालकर चूस रही थी. मुझे उससे पहले मालूम नहीं था कि में भी इतनी अच्छी तरह से किसी की चूत को चूस सकती हूँ जिसकी वजह से कोई मेरी इतनी तारीफ भी कर सकता है? और अब मम्मी मेरी गांड को चाट रही थी.
मम्मी ने मेरी गांड में मक्खन भी डाल दिया था और कुछ मक्खन उन्होंने आंटी को भी दे दिया था तो आंटी ने उसको अपनी चूत पर लगा दिया और मुझसे दोबारा अपनी चूत को चाटने चूसने के लिए कहा. में अब मस्ती में आकर सिहर उठी मैंने कहा कि शकुंतला आंटी तुम्हारी चूत भी क्या गजब की है? वाह मुझे तो मज़ा आ गया उहह्ह्ह्हह्ह और मैंने आंटी से कहा कि आंटी अब तुम दोनों ने मुझे जी भरकर चोद लिया, अब मुझे आप दोनों को चोदना है और इतना कहने के बाद मैंने उनके ही लंड से उन दोनों को बारी बारी से एक एक करके बड़े मज़े लेकर चोदा. उनकी चुदाई करने में मुझे बहुत मज़ा आया और में वो सब किसी भी शब्द में लिखकर नहीं बता सकती और उस दिन हम तीनों ने एक दूसरे की चुदाई करके बड़े मज़े लिए.
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शिवानी भाभी की चूत का हीरा

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राजन है और मेरी उम्र 56 साल है, लेकिन मेरा लंड मजबूत और फुर्तीला है. यह कहानी तब की है, जब में 18 साल का था. हम लोग एक बहुत ही बड़ी फेमिली से थे और कुछ दिनों के लिए दूर-दूर के रिश्तेदार गर्मियों की छुट्टियों में एक साथ हो जाते थे. में अपने कज़िन ब्रदर के साथ रहता था, मेरे कज़िन बहुत ही अच्छे मिज़ाज़ के थे इसलिए सारे रिश्तेदार उनके पास आना चाहते थे.
उनमें से एक मेरी दूर की भाभी थी यानि कि मेरे कज़िन की पत्नी और उनके घर में लोग उनको शिवानी कहते थे, लेकिन में सिर्फ़ भाभी कहता था, जब मेरी उम्र 18 साल थी और भाभी 37 साल की थी. उनके एक 16 साल की बेटी थी कीर्ति, जो मुझे बहुत अच्छी लगती थी, जब उसके बदन पर जवानी का असर शुरू हो रहा था.
में अक्सर मज़ाक में उसके शरीर के हिस्सों को छूकर मज़ा लेता था और कभी खेल-खेल में उसे गले लगाकर उसकी उभरती हुई चूचियों को कसकर जकड़ लेता था और फिर बाद में उसको सोचकर मुठ मारता था, वो भी मुझको चाहती थी. मैंने कई बार अकेले में अंधेरे में उसको चूमा और फ्रेंच किस किया था और उसकी चूत भी सहलाई थी, वो भी मेरे लंड को सहलाती थी, लेकिन मुझे उसे चोदने का कोई मौका ही नहीं मिला था.
एक बार गर्मियों की छुट्टियों में हम लोग मेरे कज़िन के घर (भोपाल) से शिवानी भाभी के घर (भिलाई) गये. भाभी के पति (मतलब मेरे कज़िन का साला) टूर पर कही बाहर दूसरे शहर में गया था और साथ में कीर्ति, उसका छोटा भाई राहुल और मेरी उम्र का उसक एक कज़िन विनय था. अब बस से जाते समय कीर्ति, विनय और रमेश एक साथ बैठे थे, में और भाभी एक सीट पर थे. अब रात को सोते-सोते भाभी का सर मेरे कंधों पर आ जाता था, जो मुझे बहुत अच्छा लगता था और मेरा लंड तन जाता था, लेकिन शिवानी भाभी गहरी नींद में थी.
फिर मैंने चुपके से उनका हाथ उठाकर अपने लंड के ऊपर अपनी पेंट पर रख दिया, तो उनको नींद में कुछ पता नहीं चला. फिर थोड़ी देर के बाद वो नींद में ही मेरा लंड दबाने लगी और जब उनको एकदम से महसूस हुआ कि वो क्या कर रही थी? तो वो सकपका कर ठीक से बैठ गयी. अब मुझे उनकी इस अदा पर बहुत प्यार आ रहा था. मैंने पहली बार देखा था कि मेरी 37 साल की भाभी कितनी सुंदर है, मुझे ऐसा लगा कि अभी ही चूम लूँ, लेकिन में मन मारकर रह गया.
फिर हम सुबह भिलाई पहुँचे तो मैंने भाभी को महसूस ही नहीं होने दिया कि रात की लंड वाली बात में जानता था. फिर घर पहुँचकर नहा धोकर खाना खाया और केरम बोर्ड गेम खेलते रहे.
फिर मैंने नोटीस किया कि जब हम अकेले होते तो भाभी मेरे शरीर से अपना शरीर एक्सिडेंट के बहाने रगड़ देती थी और एक बार तो भाभी ने उनकी चूत वाला हिस्सा जानबूझ कर मेरे हाथ से रगड़ दिया और मुस्कुरा उठी. अब में एकदम भ्रमित हो रहा था, लेकिन मुझे अच्छा लग रहा था. फिर रात को हम लोग घर के आँगन में जमीन पर बिस्तर लगाकर सोने लगे.
भाभी ने ऐसा किया कि पहले कीर्ति, फिर विनय, फिर में, फिर राहुल (9 साल) और फिर भाभी सोई और फिर हम सब बात करते- करते सो गये. फिर मैंने रात को आधी नींद में नोटीस किया कि भाभी उठकर मेरे और राहुल के बीच में आकर लेट गयी. अब मेरा लंड खड़ा होने लगा था, लेकिन में सोने का नाटक करके लेटा रहा. फिर थोड़ी देर के बाद भाभी ने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया और उसे धीरे-धीरे मसलने लगी, जिससे मेरा लंड और तन गया था.
फिर मैंने भी उनका हाथ मसला तो वो समझ गयी कि में जाग गया हूँ. अब बाकी सब लोग गहरी नींद में सो रहे थे. फिर भाभी ने मेरा हाथ अपनी चूची पर रख दिया. मैंने आज तक किसी औरत की चूचियाँ छुई नहीं थी. (कीर्ति की चूचियाँ तो थोड़ी सी उभरी थी, लेकिन भाभी जितनी अच्छी नहीं थी) फिर में उनकी चूचियों को ब्रा और ब्लाउज के ऊपर से ही सहलाने लगा और भाभी की तरफ करवट कर ली.
फिर भाभी भी मेरी तरफ करवट करके बोली कि ओह मेरे राजन और मेरे होंठ चूसने लगी. अब मेरे लंड का हाल तो आप लोग खुद ही सोच सकते हो. फिर में और ज़ोर-ज़ोर से उनकी चूचियाँ मसलने लगा, तो वो मुझसे लिपट गयी और हम दोनों की साँसे फूलने लगी. अब बाकी सब सो रहे थे, लेकिन फिर भी हम दोनों को डर लग रहा था, लेकिन फिर भी मैंने भाभी का ब्लाउज खोल दिया और उनकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से सहलाने लगा. अब में बहुत कोशिश करने के बाद भी उनकी ब्रा का हुक नहीं खोल पा रहा था.
अब भाभी अपने दाँत से मेरे दाँत रगड़ रही थी. तभी मैंने महसूस किया कि भाभी मेरे पजामे के नाड़े को खोलकर मेरे लंड को सहला रही थी. अब मुझे मज़ा भी आ रहा था और डर भी लग रहा था. फिर भाभी ने मेरे कान में कहा कि तुम आज मुझे नहीं चोद सकते हो, कल अच्छा प्लान बनाकर हम अकेले घर में रहेगें कहकर मेरा हाथ अपनी साड़ी के अंदर अपनी चूत पर ले गयी और मेरे लंड को हिलाने लगी.
अब में हैरान था कि औरतों की चूत पर बाल भी होते है. (उन दिनों यह सब बातें 18 साल की उम्र में पता नहीं होती थी, इंटरनेट तो था नहीं) फिर में भी उसकी चूत को सहलाता रहा और फिर वो मुझसे एकदम से चिपक गयी और में उसके हाथों में ही झड़ गया. फिर वो मेरे वीर्य को चाटते हुए अधनंगी अवस्था में बाथरूम में चली गयी और फिर वापस आकर अपनी जगह पर सो गयी और अब भाभी और मेरे बीच में राहुल सो रहा था.
फिर दूसरे दिन सुबह में सोच रहा था कि भाभी का क्या प्लान है? जो हम दोनों अकेले घर पर रहेगें. तभी भाभी ने कीर्ति से कहा कि तुम सब लोग शॉपिंग करने चले जाओ, विनय और राजन (मतलब में) को बुकस्टोर और राहुल (9 साल) को टॉय स्टोर ले जाओ. अब में हैरान हो गया था कि हम सब चले गये तो भाभी तो अकेली होगी. फिर थोड़ी देर में वो मुझसे बोली कि जब सब लोग जाने लगे तो तुम बहाना बना देना कि तुम्हारे सर में दर्द हो रहा है और मत जाना.
फिर मैंने कहा कि वाह मेरी प्यारी भाभी और उनके बूब्स धीरे से मसल दिए. तभी मैंने नोटीस किया कि भाभी ने अंदर ब्रा नहीं पहनी है और फिर मुझे रात की ब्रा ना खुल पाने की बात याद करके हँसी आ गयी. फिर मैंने नोटीस किया कि भाभी सब खिड़कियाँ बंद कर रही थी और कीर्ति से बोली कि कितनी मक्खियाँ अंदर आ रही है. अब में सब समझ गया था कि भाभी चुदने का प्लान बना रही है और अब मेरा लंड थोड़ा-थोड़ा खड़ा हो चला था.
फिर मैंने आखरी टाईम पर सर दर्द का बहाना बनाया तो कीर्ति, विनय और राहुल शॉपिंग के लिए चल पड़े. फिर भाभी ने जब देखा तो वो लोग काफ़ी दूर जा चुके थे, तो भाभी ने तुरंत दरवाजा भी बंद कर दिया. अब हम दोनों घर में अकेले थे और सारे दरवाजे और खिड़कियाँ बंद थी.
फिर में भाभी से जाकर चिपक गया. अब भाभी पहले से अपने ब्लाउज के बटन खोले हुई थी और मुझको चूम रही थी और बोली कि अब अपने पास बहुत टाईम है, अब यह लोग लगभग 2 घंटे तक नहीं आने वाले है और मेरे पजामे के ऊपर से मेरा लंड सहलाने लगी. फिर मैंने भी उनका पेटिकोट और साड़ी पूरी कमर से ऊपर कर दी और मैंने पहली बार नंगी चूत देखी, ओह यारो मेरी प्यारी भाभी की पतली लकीर वाली चूत का क्या नज़ारा था? मुझे आज भी याद आता है तो भाभी पर प्यार आ जाता है.
फिर में उनकी चूत के लिप्स खोलने लगा, तो भाभी बोली कि चलो बिस्तर पर आराम से करेगें और मुझे फ्रेंच किस देने लगी. फिर मैंने उनकी साड़ी निकाल दी और उनका ब्लाउज तो पहले से खुला था. फिर भाभी ने मेरा साथ देते हुए अपने पेटिकोट का नाड़ा ढीला कर दिया तो उनका पेटिकोट भी नीचे गिर गया. अब वो मेरे सामने सिर्फ़ आधे खुले ब्लाउज को पहने खड़ी थी और में कुर्ता पजामा पहने था, में अभी नंगा नहीं था.
फिर भाभी ने अपना ब्लाउज उतार फेंका और मुझसे नंगी ही लिपट गयी. फिर मैंने उनकी गांड को सहलाते हुए अपनी गोद में उठाया (उनकी हाईट सिर्फ 5 फुट थी और मेरी हाईट 5 फुट 10 इंच थी) फिर भाभी मेरे गले में अपना हाथ डालकर सिमट गयी और मुझे फ्रेंच किस देती रही. फिर में उन्हें अपनी गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया और उन्हें बिस्तर पर लेटा दिया.
फिर भाभी ने मुझसे कहा कि राजन तुम भी नंगे होकर आ जाओ, यह तो आपको ही करना होगा और फिर में कुर्ता पजामा पहने ही नंगी भाभी के बगल में लेट गया. अब सामने फुल साईज़ कांच में हमारा सेक्स का सीन दिख रहा था, ओह क्या समां था यारो? फिर भाभी ने जल्दी-जल्दी मेरा पजामा उतारा तो मैंने भी उनका साथ देते हुए अपना कुर्ता उतार दिया.
भाभी मुझसे 19 साल बड़ी थी, लेकिन क्या चीज़ दिख रही थी? फिर हम लोग थोड़ी देर तक एक दूसरे की बाहों में लिपटे हुए एक दूसरे के शरीर से खेलते रहे और इधर उधर किस करते रहे. फिर मैंने कहा कि भाभी आपकी चूत अच्छे से देखनी है. फिर भाभी बोली कि तो देखो ना, पूछते क्या हो? कहकर अपनी दोनों टागें फैला दी ओह यारो, क्या दृश्या था? उनकी चूत का हीरा चमक रहा था.
फिर मैंने भाभी की चूत फैलाकर जहाँ तक चूत के अंदर निगाह जा सकी अच्छे से दर्शन किया. फिर भाभी ने मेरा सर अपनी चूत की तरफ खींचकर कहा कि चूम लो इसे राजन. फिर में ऑश भाभी कहकर चूमने लगा और अपने आप ही उनकी चूत को चाटने लगा. अब भाभी भी अपनी गांड उठा-उठाकर अपनी चूत चटवा रही थी. फिर में चिल्लाया आआआहहहहहह भाभीईईईईई, तो भाभी बोली कि भाभी नहीं शिवानी कहो राजन.
अब में उनकी को चूत चाटते हुए उनके बूब्स भी रगड़ रहा था और बोला कि आहहहहह मेरी प्यारी शिवानी. फिर भाभी ने अपनी दोनों टागों से मेरा सर जकड़ लिया और अपनी गांड उचका-उचकाकर मेरे बाल सहलाने लगी. अब मेरा लंड प्यास से तड़प रहा था. फिर मैंने कहा कि शिवानी लंड का कुछ करो प्लीज. फिर भाभी बोली कि अपने लंड से मेरी चूत की प्यास बुझाओ और एकदम सीधी लेट गयी. फिर में भाभी के शरीर के ऊपर चढ़ गया और अपना लंड को उनकी चूत में फँसा दिया. फिर भाभी ने मेरी कमर अपनी टागों से जकड़ ली और मेरी जीभ चूसने लगी.
फिर मेरे लंड को उनकी चूत का छेद अपने आप मिल गया और मेरा लंड आसानी से भाभी की चिकनी चूत में घुस गया तो भाभी ज़ोर-ज़ोर से उचकने लगी और में भी उनकी रफ़्तार से अपनी कमर हिलाने लगा. फिर भाभी बोली कि ओह राजन पहली बार किसी को चोद रहे हो, लेकिन कितने एक्सपर्ट के समान चोद रहे हो. अब में उनकी चूचियाँ चूसे जा रहा था, ओह हम दोनों के रस की क्या सुगंध आ रही थी. फिर 25-30 धक्कों के बाद भाभी और में एक साथ ही झड़ गये और में भाभी की बड़ी-बड़ी चूचियों पर ही ढेर हो गया.
फिर हम करवट लेकर एक दूसरे की बाहों में आ गये और मेरा लंड उनकी चूत में डाले-डाले आधी नींद में सो गये. अब में आधी नींद में बोल रहा था ओह शिवानी, मेरी प्यारी भाभी और भाभी की बंद आँखों को चूम रहा था और भाभी भी मेरी निपल्स से खेल रही थी. फिर इसी तरह हम लोग एकदम आराम से 15-20 मिनट तक सोते रहे.
फिर भाभी ने एकदम से करवट ली और अपनी गांड मेरी तरफ करके आधी नींद में सो गयी. फिर मैंने उनकी गांड में अपना लंड फँसा दिया. फिर भाभी ने पूछा कि पहले कभी किसी की गांड मारी है? तो मैंने कहा कि हाँ मेरे एक दोस्त की मारी है, लेकिन आप में जो मज़ा है वो और किसी में नहीं है. फिर भाभी रुको कहकर उठी और क्रीम लेकर मेरे लंड पर लगाने लगी और फिर अपनी गांड मेरी तरफ करके लेट गयी. फिर मैंने थोड़ी क्रीम उनकी गांड में लगाकर धीरे-धीरे अपना लंड उनकी गांड में डाला.
भाभी अक्सर अपने पति से गांड मरवाती थी, इसलिए मेरा लंड आसानी से उनकी गांड में चला गया आह्ह्ह क्या गांड थी भाभी की? उस दिन यारो मेरे लंड को क्या मज़ा आया था? अब में उनकी गांड मारते-मारते पीछे से उनकी चूचियाँ और चूत भी सहला रहा था.
अब में भाभी की पीठ पर किस दे देकर उनकी गांड मार रहा था. अब भाभी भी आहहहह म्‍म्म्मममम आअहह की आवाजे करके मज़े ले रही थी. फिर गांड मारने के बाद मैंने भाभी से कहा कि भूख लग रही है तो शिवानी और में दोनों नंगे ही किचन में गये और एक दूसरे को कुछ खाना खिलाया. अब हम खाना खाते समय भी एक दूसरे के गुप्तांगों से खेल रहे थे. अब मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि वो मुझसे 19 साल बड़ी है. मेरी शिवानी भाभी एकदम जवान दिख रही थी और फिर पेशाब करने के बाद हम लोग फिर से बेडरूम में आ गये और अभी उन सबको आने में लगभग 1 घंटा बाकि था तो हमें कोई डर नहीं था.
फिर भाभी ने कहा कि बिस्तर के किनारे जाकर बैठ जाओ, तो मैंने वैसा ही किया. फिर भाभी नंगी ही मेरी गोद में बैठ गयी और मुझे किस देने लगी. फिर मैंने हम दोनों के प्यार की इस अवस्था को कांच में देखा तो मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और अब में भाभी की चूचियाँ मसलने लगा था.
फिर भाभी ने अपनी गांड सरका कर अपनी चूत के छेद को मेरे लंड के पास कर दिया, लेकिन छेद मिलने के बाद भी इस पोज़िशन में मेरा लंड उनकी चूत में ठीक से नहीं जा पा रहा था. फिर भाभी ने रुको कहकर और खड़े होकर अपने दोनों पैर फैलाकर मेरी गोद में आ गयी. अब मेरा लंड आसानी से उनकी चूत में जा रहा था, लेकिन बैठे-बैठे चोदने में परेशानी हो रही थी तो हम दोनों खड़े हो गये और भाभी उचक कर मेरी कमर से लिपट गयी और अपने कूल्हें हिला-हिलाकर चुदने लगी. अब हम दोनों कांच में अपनी इस पोजिशन को देख-देखकर और उत्तेजित हो रहे थे.
फिर मैंने भाभी की गांड को सहलाते-सहलाते अपनी एक उंगली उनकी गांड के छेद में अंदर डाल दी और फिर करीब 15-20 धक्कों के बाद हम फिर से झड़ गये और मेरा लंड उनकी चूत में डाले डाले ही बिस्तर पर ढेर हो गये और फिर थोड़ी देर तक सोते रहे.
फिर बाकी सबके आने से पहले अच्छे से कपड़े पहनकर लिविंग रूम में जाकर केरम बोर्ड खेलने लगे. फिर हम दोनों ने बाकि सबके आने तक केरम खेलते-खेलते खूब चूमा चाटी की और इस तरह मेरा पहला सेक्स अनुभव शिवानी भाभी के साथ हुआ. फिर इसके बाद अक्सर रात को जब भी मेरी नींद खुलती और भाभी मेरे बगल में होती तो में बेझिझक उनकी साड़ी उठाकर अपना लंड उनकी चूत या गांड में डाल देता था.
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